Monday, April 13, 2026

ताजपुर: पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ भाकपा माले का हल्लाबोल, 24 जनवरी को बनेगी विशाल मानव श्रृंखला

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समस्तीपुर। ताजपुर के भेरोखरा निवासी मनीष पोद्दार और उनके परिवार पर हुई पुलिसिया बर्बरता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मनीष पोद्दार को ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’ देने और उनके परिजनों की पिटाई के आरोपी थानाध्यक्ष एवं आईओ (अनुसंधान अधिकारी) के निलंबन को भाकपा माले ने नाकाफी बताया है। माले ने अब दोषियों की बर्खास्तगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

स्मार पत्र के साथ भाकपा माले के ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह

दोषियों को सस्पेंड नहीं, बर्खास्त करे सरकार: माले

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार सिंह द्वारा की गई निलंबन की कार्रवाई को ‘आधा-अधूरा’ कदम बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिसिया जुल्म जिस स्तर का था, उसमें महज निलंबन न्याय नहीं है।

माले नेता ने आरोप लगाया कि भेरोखरा निवासी संजय पोद्दार के पुत्र मनीष पोद्दार के साथ अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। पुलिस ने न केवल मनीष के निजी अंगों में पेट्रोल डाला और बर्बरता की, बल्कि उसकी पत्नी को भी चार दिनों तक अवैध रूप से हाजत में बंद रखा। इस दौरान मनीष के पिता और पत्नी के साथ भी मारपीट की गई।

DM और SDM को सौंपा स्मार पत्र

बृहस्पतिवार को भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा और अनुमंडलाधिकारी दीलीप कुमार से मुलाकात कर एक स्मार पत्र सौंपा। इसमें पुलिसिया दमन के साथ-साथ प्रखंड में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।

माले की प्रमुख मांगें:

  • दोषी पुलिस अधिकारियों और थानाध्यक्ष को तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए।
  • सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘घूस लेते अंचल कर्मचारी’ के वीडियो की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • सभी भूमिहीनों को वास भूमि और सरकारी जमीन पर बसे लोगों को बंदोबस्ती का पर्चा दिया जाए।
  • आवास योजना में जारी खुलेआम घूसखोरी पर तत्काल रोक लगे।
  • वंचित गांव-टोलों में संपर्क पथ (सड़क) का निर्माण सुनिश्चित हो।

24 जनवरी को न्याय आंदोलनका आह्वान

प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने घोषणा की कि इन मांगों के समर्थन में और पुलिसिया गुंडागर्दी के खिलाफ 24 जनवरी को ताजपुर के राजधानी चौक पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक विशाल मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। उन्होंने ताजपुर की जनता से अपील की है कि वे इस ‘न्याय आंदोलन’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें ताकि शासन-प्रशासन को जगाया जा सके।

गया जी जैसा ही वैभव, पर गुमनाम है झारखंड का यह ‘विष्णुपद मंदिर’; शिव-विष्णु के मिलन की है अद्भुत गाथा

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देवघर (झारखंड) | विशेष रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’

भारत की सनातन परंपरा में भगवान विष्णु के पद चिह्नों का स्थान अत्यंत पावन माना गया है। जब भी विष्णुपद की चर्चा होती है, तो विश्व पटल पर बिहार के गया जी का नाम सबसे पहले आता है। गया जी के विष्णुपद मंदिर को ‘मोक्षदायी’ माना जाता है, जहाँ पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है। किंतु, बहुत कम लोग जानते हैं कि गया जी की ही तरह वैभवशाली और महिमामंडन से युक्त एक और विष्णुपद मंदिर झारखंड के देवघर जिले में स्थित है। इसे हरला जोरी विष्णुपद मंदिर कहा जाता है। जहाँ गया जी मोक्ष प्रदान करते हैं, वहीं हरला जोरी को ‘कामनादायी’ (मनोकामना पूर्ण करने वाला) माना जाता है।

देवघर स्थित हरला जोरी विष्णुपद मंदिर

आज यह मंदिर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। शास्त्रों में उल्लेखित होने के बावजूद यह स्थान आज उपेक्षा और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है।


तीन विष्णुपद मंदिरों का रहस्य और तीसरे का लोप

धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार दुनिया में तीन प्रमुख विष्णुपद मंदिरों की चर्चा मिलती है।

  1. प्रथम: बिहार का गया जी शहर, जहाँ विष्णुपद मंदिर की ख्याति वैश्विक है।
  2. द्वितीय: झारखंड के देवघर जिला स्थित हरला जोरी विष्णुपद मंदिर, जिसकी पौराणिक महत्ता अद्वितीय है।
  3. तृतीय: माना जाता है कि तीसरा विष्णुपद मंदिर बिहार के मधुबनी जिले में बलिराजगढ़ के आसपास था। यह स्थान राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा से गहराई से जुड़ा है। हालांकि, समय के थपेड़ों और संरक्षण के अभाव में इस तीसरे मंदिर का भौतिक अस्तित्व अब लगभग समाप्त हो चुका है।

यद्यपि वर्तमान में कंबोडिया के अंकोरवाट और महाराष्ट्र के पंढरपुर को भी विष्णु के पद चिह्नों वाले मंदिर के रूप में प्रचारित किया जाता है, परंतु शास्त्रों और ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल में हरला जोरी का स्थान सर्वोपरि आता है।


पौराणिक गाथा: रावण, महादेव और विष्णु की लीला

हरला जोरी विष्णुपद मंदिर का इतिहास सीधे तौर पर रामायण काल और भगवान शिव की अमर कथा से जुड़ा है। इसकी चर्चा शिव पुराण और पद्म पुराण के साथ-साथ लोक कथाओं में प्रमुखता से मिलती है।

कथा प्रसंग: लंकाधिपति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे वरदान मांगा कि वे शिवलिंग के रूप में उसके साथ लंका चलें। महादेव तैयार हुए, लेकिन एक शर्त रखी—रास्ते में यह लिंग जहाँ भी भूमि को स्पर्श करेगा, वहीं स्थापित हो जाएगा। रावण शिवलिंग लेकर कैलाश से लंका की ओर चला।

यात्रा के दौरान जब वह ‘हरतकी वन’ (वर्तमान हरला जोरी) पहुँचा, तो उसे तीव्र लघुशंका का बोध हुआ। इसी समय भगवान विष्णु ने देवताओं के कल्याण के लिए एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण किया और रावण के सामने प्रकट हुए। रावण ने उस ब्राह्मण (छद्म वेशी विष्णु) को शिवलिंग पकड़ा दिया और स्वयं निवृत्त होने चला गया। भगवान विष्णु ने उसी स्थान पर पृथ्वी पर कदम रखे और शिवलिंग को भूमि पर रख दिया। यही वह स्थान है जहाँ हरि (विष्णु) और हर (महादेव) का मिलन हुआ। आगे चलकर इसी शिवलिंग को देवघर के हृद्या पीठ (बैद्यनाथ धाम) में स्थापित किया गया।


शब्दों का रहस्य: क्या है हरिलाजोरीका अर्थ?

‘हरिलाजोरी’ शब्द का विग्रह इसके आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करता है। यह शब्द हरि + ईला + जोरी के संगम से बना है:

  • हरि: भगवान विष्णु
  • ईला: पृथ्वी (धरती)
  • जोरी: मिलन (युग्म)

अर्थात, वह स्थान जहाँ भगवान विष्णु का पृथ्वी से मिलन हुआ, वह ‘हरिला जोड़ी’ कहलाया। प्राचीन शास्त्रों में इसे हरतकी वन भी कहा गया है, क्योंकि यहाँ औषधीय गुणों वाले ‘हर्रे’ के वृक्षों की अत्यधिक बहुलता थी। हरि के द्वारा रावण से शिवलिंग प्राप्त करने की इस मायावी लीला के कारण इस क्षेत्र को हरिकेली और हरिद्रा पीठ के नाम से भी अभिहित किया गया है। गुप्त काल में यह क्षेत्र क्रिमला प्रदेश के अंतर्गत आता था।


पद्म पुराण में वर्णित महिमा

पद्म पुराण के पातालखण्ड में इस स्थान की भौगोलिकता और प्राचीनता का जीवंत वर्णन मिलता है। संस्कृत के श्लोक इसकी महत्ता की पुष्टि करते हैं:

इदं तु कामद लिंगम् सर्वलिंगम् फलप्रदम् हार्द्राख्‍यपीठ मध्‍ये तु रावणेश्‍वर मुक्‍तमम् बैद्यनाथ जगन्‍नाथं सर्वकामार्थ सिद्धये पूर्वसागर गामिन्‍यां गंगायां दक्षिणतटे हरीतकीवने दिव्‍ये: दु:संचारे भयावहे

भावार्थ: यह कामना लिंग सभी लिंगों में श्रेष्ठ और फलदायी है। हरिद्रा पीठ (देवघर क्षेत्र) के मध्य रावणेश्वर (बैद्यनाथ) विराजमान हैं। गंगा के दक्षिणी तट पर स्थित दिव्य हरतकी वन में, जहाँ संचरण करना अत्यंत कठिन और डरावना था, वहाँ आज भी चंडी और महेश्वर (बैद्यनाथ) मौजूद हैं, जो चिन्तामणि रत्न की तरह भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करते हैं।


तस्‍वीर में देवघर स्थित हरला जोरी विष्णुपद मंदिर में पद चिह्न

वर्तमान संकट: घिसते पद चिह्न और संरक्षण का अभाव

हरला जोरी भारत का वह दुर्लभ मंदिर है जहाँ शिला पर उत्कीर्ण भगवान विष्णु के चरण चिह्नों की पूजा की जाती है। परंतु, आज यह विरासत खतरे में है।

  • भौतिक क्षरण: सदियों से लाखों श्रद्धालुओं द्वारा पूजा और स्पर्श किए जाने के कारण शिला पर अंकित पद चिह्न काफी घिस चुके हैं। यदि इनका वैज्ञानिक संरक्षण नहीं किया गया, तो ये ऐतिहासिक निशान सदा के लिए मिट सकते हैं।
  • भू-विवाद की छाया: सबसे दुखद और चिंताजनक विषय मंदिर परिसर की जमीन का विवाद है। स्थानीय विद्वान पंडित काशीनाथ झा और अन्य जानकारों का आरोप है कि बंदोबस्ती के दौरान मंदिर की पैतृक जमीन को गलत तरीके से कुछ निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया है।
  • साजिश का अंदेशा: सनातन की इस पावन देव भूमि को किसी गहरी साजिश के तहत हथियाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वामित्व निजी और अक्षम हाथों में होने के कारण मंदिर का विकास पूरी तरह से बाधित है।

सरकार से न्याय की गुहार

तस्‍वीर में देवघर स्थित विष्णुपद मंदिर के आगे हरला जोरी शिव मंदिर का मुख्‍य द्वार

हरला जोरी के चारों ओर आज भी बड़े-बड़े झाड़ीनुमा वृक्ष मौजूद हैं, जो प्राचीन ‘हरतकी वन’ की उपस्थिति का एहसास कराते हैं। हालांकि आम लोगों को यहाँ दर्शन और पूजन में कोई कठिनाई नहीं होती, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का शून्य होना पर्यटकों और श्रद्धालुओं को खलता है।

स्थानीय निवासियों और धार्मिक संगठनों की मांग है कि झारखंड सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। मंदिर परिसर की जमाबंदी की जांच होनी चाहिए और इस ‘कामनादायी’ तीर्थ को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराकर इसे एक भव्य धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहिए।


गया जी के बाद भारत का यह दूसरा विष्णुपद मंदिर हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल मोती है। ‘हरि-हर’ के मिलन का साक्षी यह हरला जोरी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है। इसकी रक्षा करना और इसे पुनर्जीवित करना न केवल प्रशासन का, बल्कि हर सनातन धर्मवलंबी का कर्तव्य है।

एम डी डी एम कॉलेज में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर सेमिनार: वक्ताओं ने कहा— राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं में एकाग्रता और धैर्य जरूरी

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मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के उपलक्ष्य में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चर्चा करते हुए राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की भागीदारी को रेखांकित किया।

मंच पर मुख्य अतिथि  डॉ. निखिल रंजन प्रकाश के साथ महाविद्याल की प्रावार्या एवं अन्‍य

युवा ही प्रगति के आधार: प्रो. अलका जायसवाल

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसके युवाओं की ऊर्जा और सोच पर निर्भर करती है। उन्होंने युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

लक्ष्य प्राप्ति के लिए सक्रियता अनिवार्य

मुख्य अतिथि प्रो. निखिल रंजन प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा, “आज के युवाओं को राष्ट्र और राष्ट्रीयता की अवधारणा को गहराई से समझने की आवश्यकता है। एक सशक्त राष्ट्र तभी निर्मित होगा जब युवा सक्रिय, एकाग्रचित्त और निरंतर प्रयत्नशील रहेंगे।”

वहीं, डॉ. राकेश रंजन ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का मूल मंत्र एकाग्रता है। उन्होंने कहा कि मार्ग कोई भी हो, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, अडिग रहना चाहिए। उन्होंने सर्वधर्म समभाव पर जोर देते हुए सभी धर्मों को सम्माननीय बताया।

स्वामी विवेकानंद के संदेशों पर चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. किरण झा ने अतिथियों का स्वागत शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। विषय प्रवेश कराते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद द्वारा युवाओं को दिए गए कालजयी संदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सेमिनार के उपरान्‍त ग्रुप तस्‍वीर में शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के साथ उपस्‍थिति दर्ज कराती छात्रए

गरिमामय उपस्थिति

मंच का सफल संचालन डॉ. नेहा रानी ने किया। उन्होंने युवाओं को जीवन में धैर्य और परिश्रम के महत्व को समझाया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. सुरबाला वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस सेमिनार में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं की सक्रिय सहभागिता रही, जिनमें मुख्य रूप से प्रो. सरोज, डॉ. आशा, डॉ. श्वेता यादव, डॉ. मैरी मरांडी, डॉ. सदफ, डॉ. शगुफ्ता नाज़, डॉ. प्रियम फ्रांसिस, डॉ. मधुसूदन, डॉ. सजीव और डॉ. रामदुलार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

ताजपुर: भाकपा माले ने फूंका आंदोलन का बिगुल, सदस्यता अभियान में जुटे युवा

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समस्तीपुर (ताजपुर): 13 जनवरी, 2026 भाकपा माले को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रखंड के शाहपुर बघौनी में सदस्यता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत पार्टी की नीतियों और संघर्षों से प्रभावित होकर 7 स्थानीय युवाओं ने माले की सदस्यता ग्रहण की।

पार्टी में शामिल होने वाले युवाओं में मुख्य रूप से मो० आले, बस्साम तौहीदी, राशिद हुसैन, मो० मोखलिस, शाहबाज तौहीदी, मीनाजुलहक और शाद तौहीदी शामिल हैं।

भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ होगा संघर्ष

शाहपुर बघौनी में माले की सदस्यता ग्रहण के दौरान शपथ लेते युवा

सदस्यता अभियान के उपरांत आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि माले केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि आंदोलन की कोख से जन्मी पार्टी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शोषण, दमन, उत्पीड़न और लूट-भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय दिलाना ही पार्टी का मुख्य संकल्प है।

सचिव ने आगामी प्रखंड एवं जिला सम्मेलन की तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी को व्यापक जनाधार देने के लिए युवाओं को जोड़ा जा रहा है।

आवास योजना में घूसखोरी और प्रशासनिक लापरवाही पर निशाना

बैठक के दौरान प्रखंड सचिव ने स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

  • आवास योजना में धांधली: नगर परिषद और प्रखंड क्षेत्र में आवास योजना के नाम पर (स्थल निरीक्षण और फोटो खिंचवाने हेतु) बड़े पैमाने पर अवैध वसूली हो रही है।
  • दोषियों पर कार्रवाई की मांग: थर्ड डिग्री टॉर्चर के शिकार मनीष पोद्दार को न्याय दिलाने और घूसखोरी के आरोपी अंचल कर्मचारी रॉबिन ज्योति पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
  • पारदर्शिता की मांग: आवास योजनाओं में बिचौलियों को खत्म कर शिविर के माध्यम से लाभुकों को सीधे राशि हस्तांतरित करने की मांग उठाई गई।

24 जनवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन की तैयारी

भाकपा माले ने ऐलान किया कि इन ज्वलंत समस्याओं को लेकर आगामी 24 जनवरी को मुख्यमंत्री के कर्पूरीग्राम आगमन के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी ने ताजपुर वासियों से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

इस अवसर पर प्रखंड कमेटी सदस्य आसिफ होदा, मो० एजाज और नौशाद तौहीदी सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सेवा की मिसाल: विजन वैली हॉल में स्वास्थ्य शिविर और ग्रामीण चिकित्‍सको का सम्मेलन, मुफ्त जांच के साथ मरीजों को बांटी गई दवाएं

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सकरा (मुजफ्फरपुर)। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले ग्रामीण चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर इलाज पहुँचाने के उद्देश्य से मुजफ्फरपुर के सकरा में एक विशाल आयोजन संपन्न हुआ। सकरा वाजिद पंचायत के ‘विजन वैली हॉल’ में आयोजित इस ‘प्रखंड स्तरीय ग्रामीण चिकित्सक सम्मेलन’ ने न केवल चिकित्सा जगत की चुनौतियों पर विमर्श किया, बल्कि सेवा की एक अनूठी मिसाल भी पेश की।

‘प्रखंड स्तरीय ग्रामीण चिकित्सक सम्मेलन में शिरकत करते ग्रामीण चिकित्सक

कार्यक्रम का आगाज़ रॉयल हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर,कच्‍ची पक्‍की, मुजफ्फरपुर द्वारा आयोजित वृहद चिकित्सा जांच शिविर से हुआ। इस शिविर की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल की एम्बुलेंस ने गांव-गांव जाकर उन निःशक्त, वृद्ध और लाचार मरीजों को उनके घर से हॉल तक पहुँचाया, जो चलने-फिरने में असमर्थ थे।

शिविर में करीब 300 से अधिक मरीजों का पंजीकरण हुआ। रॉयल हॉस्पिटल के वरीय चिकित्सक डॉ. विवेक कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने मरीजों का बीपी, ब्लड शुगर, थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों की आधुनिक मशीनों से जांच की। जांच के उपरांत सभी मरीजों को संस्थान की ओर से निःशुल्क दवाएं भी वितरित की गईं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली।

रॉयल हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर के नर्सिंग स्‍टाफ के द्वारा जांच की तस्‍वीर

विशेषज्ञों का मंत्र: सीखने की कोई सीमा नहीं, सजगता ही समाधान

दोपहर के सत्र में ‘ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन’ के बैनर तले सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस सत्र की मेजबानी संयुक्त रूप से सकरा एक्यूप्रेशर सेंटर एवं रॉयल हॉस्पिटल ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विवेक कुमार ने ग्रामीण चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और आपातकालीन स्थिति में मरीज को दिए जाने वाले ‘फर्स्ट रिस्पांस’ के बारे में जानकारी दी।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के प्रखंड अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार ने एक अत्यंत प्रेरणादायी संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “एक चिकित्सक के लिए सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती। चिकित्सा क्षेत्र में हर दिन नए शोध हो रहे हैं, ऐसे में हमें खुद को अपडेट रखना होगा।” उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण चिकित्सकों को पूरी सावधानी और सजगता के साथ मरीज के लक्षणों (Symptoms) का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि सही पहचान ही सही इलाज की पहली सीढ़ी है।

रॉयल हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर के द्वारा दवा वितरण की तस्‍वीर

टीम वर्क और सामूहिक सहभागिता

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में रॉयल हॉस्पिटल के डॉ. राजेश किरण और आशीष कुमार की अहम भूमिका रही। डॉ. राजेश किरण ने सत्र का कुशल संचालन करते हुए चिकित्सकों के सवालों का समाधान किया। अस्पताल की नर्सिंग और पैरामेडिकल टीम ने अपनी तत्परता से यह सुनिश्चित किया कि किसी भी मरीज को जांच के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

प्रखंड स्तरीय ग्रामीण चिकित्सक सम्मेलन’ को संबोधित करते वक्‍ता

उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर क्षेत्र के दिग्गज ग्रामीण चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य रूप से नीरज कुमार, चंद्र किशोर, नितेश कुमार, रंजन कुमार, रत्नेश कुमार, मुनचुन कुमार, हृतिक कुमार, सिकंदर पंडित, शिव कुमार, सुमित पासवान, पप्पू चौधरी, रूबी कुमारी, सुमन प्रसाद, अमरनाथ कुमार सहित दर्जनों चिकित्सक शामिल थे।

सकरा में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम मात्र नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रॉयल हॉस्पिटल और सकरा एक्यूप्रेशर सेंटर की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।

बिहार के युवा बनेंगे ‘आपदा रक्षक’: पटना में मुजफ्फरपुर के 105 स्वयंसेवकों का सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू

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बिहार के युवा बनेंगे आपदा रक्षक‘: पटना में मुजफ्फरपुर के 105 स्वयंसेवकों का सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू

पटना | मुख्य संवाददाता  बिहार में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने और आपदा के समय जान-माल की रक्षा के लिए ‘युवा शक्ति’ को तैयार किया जा रहा है। राजधानी पटना के ईगल व्यू प्रशिक्षण केंद्र में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) और माय भारत के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय आवासीय युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष शिविर में मुजफ्फरपुर जिले के 105 चयनित युवा स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं।

‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करतें SDRF के प्रशिक्षक रूपेश कुमार

SDRF की टीम दे रही है कमांडोस्तर की ट्रेनिंग : राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा इन युवाओं को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर व्यवहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाली इस प्रशिक्षण शृंखला में स्वयंसेवकों को विशेष रूप से बिहार की भौगोलिक चुनौतियों, जैसेबाढ़, भूकंप, वज्रपात (ठनका), लू और शीतलहर जैसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।

SDRF के प्रशिक्षक हवलदार के.एन. सिंह, सचिंद्र दुबे, रूपेश कुमार और पूजा कुमारी ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आपदा के समय ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में सक्षम बनाना है, ताकि प्रशासन के पहुंचने से पहले स्थानीय स्तर पर राहत कार्य शुरू किया जा सके।

‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्‍साह से लवरेज प्रतिभागी

CPR और मॉकड्रिल: जीवन बचाने का व्यावहारिक अभ्यास प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन)का विशेष अभ्यास कराया गया। इसमें सिखाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति की सांसें रुक जाएं या दिल की धड़कन बंद हो जाए, तो त्वरित चिकित्सा सहायता कैसे प्रदान की जाए। इसके अलावा, स्वयंसेवकों ने सफलतापूर्वकभूकंप और अग्नि सुरक्षा (Fire Fighting) पर आधारित मॉकड्रिल में भाग लिया, जहाँ उन्होंने आग बुझाने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीकों का प्रदर्शन किया।

नेतृत्व और समन्वय: इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में मुजफ्फरपुर के मास्टर ट्रेनर सुधांशु कुमार अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, कार्यक्रम समन्वयक अंकित कुमार द्वारा स्वयंसेवकों की आवश्यकताओं और प्रशिक्षण के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा रहा है।

105 सदस्यों की इस टीम का नेतृत्व चंदन कुमार कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मुख्य स्वयंसेवकों में कृष्णा कुमार, प्रिंस कुमार, सरजीत कुमार, राहुल कुमार, आशीष रंजन के साथ-साथ सांविका, शुभम रानी, अंशु और अनुप्रिया शामिल हैं।

युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी

प्रशासन की बढ़ेगी ताकत :  जानकारों का मानना है कि इन युवा आपदा मित्रोंके तैयार होने से जिला प्रशासन को जमीनी स्तर पर बड़ी सहायता मिलेगी। ये स्वयंसेवक न केवल आपदा के समय बचाव कार्य करेंगे, बल्कि आम जनता के बीच आपदा-पूर्व तैयारियों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी करेंगे।

पिलखी गजपति में कांग्रेस की ‘मनरेगा चौपाल’: प्रियंका गांधी का जन्मदिन मनाया और मजदूरों को सिखाए उनके अधिकार

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मुजफ्फरपुर (मुरौल): प्रखंड के पिलखी गजपति में आज कांग्रेस पार्टी द्वारा मनरेगा चौपाल कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि पार्टी की एकजुटता भी प्रदर्शित की गई।

‘मनरेगा चौपाल’ कार्यक्रम को सम्‍बोधित करते प्रखंड अध्यक्ष अलख निरंजन शर्मा

मनरेगा अधिकारों पर दी गई विस्तृत जानकारी

चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को मनरेगा योजना के तहत उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया:

  • रोजगार की गारंटी: काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार पाने का अधिकार।
  • मजदूरी भुगतान: मजदूरी के समय पर भुगतान और उसमें देरी होने पर मुआवजे की जानकारी।
  • दस्तावेज: जॉब कार्ड बनवाने और उसे अपडेट रखने की प्रक्रिया।

प्रियंका गांधी का जन्मदिन: सेवा और संकल्प का दिन

इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी का जन्मदिन कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मिलकर बेहद उत्साह के साथ मनाया। प्रियंका गांधी की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए केक काटा गया। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया।

पिलखी गजपति में केक काटकर प्रियंका गांधी का जन्मदिन मनाते कांग्रेसी कार्यकर्ता

मजदूर हितों के लिए संघर्ष का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एकजुट होकर यह प्रण लिया कि वे गरीब और मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेंगे। सभी ने एक स्वर में मनरेगा को धरातल पर और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही।

प्रमुख उपस्थिति

कार्यक्रम का कुशल संचालन स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:

  • अलख निरंजन शर्मा (प्रखंड अध्यक्ष, मुरौल)
  • रीमा भारती (सरपंच), अंजनी मिश्रा, हरि यादव
  • डॉक्टर मनीष यादव, डीके सर, इंद्र मोहन झा, राजीव कुमार
  • सुमत कुमार झा, मनीष कुमार मिश्रा, रागिनी कुमारी, गीता देवी, विना देवी, सलीमा खाटून, मोहम्मद फखरुद्दीन, मो. साबिर एवं अन्य गणमान्य सदस्य।

कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा का समापन हुआ।

ताजपुर: भाकपा माले का शाहपुर बघौनी पंचायत शाखा सम्मेलन संपन्न, नौशाद तौहीदी चुने गए सचिव

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ताजपुर/समस्तीपुर (12 जनवरी 2026): ताजपुर प्रखंड के वार्ड संख्या 11 में सोमवार को भाकपा माले का ‘शाहपुर बघौनी पंचायत शाखा सम्मेलन’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रखंड कमिटी सदस्य मो० एजाज  की अध्यक्षता और जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा के पर्यवेक्षण में आयोजित इस सम्मेलन में संगठन की मजबूती और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

भाकपा माले का ‘शाहपुर बघौनी पंचायत के शाखा सम्मेलन में शामिल कार्य कर्त्‍तागण

नई कमिटी का गठन

सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति से सांगठनिक चुनाव प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें नौशाद तौहीदी  को नया शाखा सचिव चुना गया। इस अवसर पर शाद तौहीदी, वलाम तौहीदी, मुखलिश तौहीदी, मिन्हाजुलहक, मो० राशि हुसैन, मो० आले, अकदस तौहीदी, फैयाज तौहीदी और शहवाज तौहीदी सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आंदोलन की पार्टी है भाकपा माले: सुरेंद्र प्रसाद सिंह

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भाकपा माले हमेशा से पीड़ितों को न्याय दिलाने और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत रही है। उन्होंने जोर दिया कि ताजपुर में लूट, भ्रष्टाचार और जुल्म के खिलाफ पार्टी ने हजारों लोगों को न्याय दिलाया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि संगठन को और मजबूत बनाकर न्याय की इस लड़ाई को तेज किया जाए।

24 जनवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष होगा प्रदर्शन

सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:

  1. प्रशासनिक भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के खिलाफ मोर्चा: थर्ड डिग्री टॉर्चर के दोषी पुलिस अधिकारियों और घूसखोर अंचल राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति पर कार्रवाई की मांग को लेकर रणनीति बनाई गई। निर्णय लिया गया कि 24 जनवरी को मुख्यमंत्री के कर्पूरीग्राम आगमन पर आंदोलन के माध्यम से इन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उनके समक्ष उठाया जाएगा।
  2. अपराध पर रोक की मांग: जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा ने मधेपुरा में हुए हिना प्रवीन बलात्कार-हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और राज्य में बढ़ते अपराध एवं बलात्कार की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

एम डी डी एम कॉलेज में राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन: ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’ के उद्घोष से गूँजा परिसर

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मुजफ्फरपुर। शहर के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के शिक्षाशास्त्र विभाग (B.Ed.) में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वामी जी के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

स्वामी विवेकानंद की जयंती कार्यक्रम में शामिल शिक्षक एवं छात्रा

कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

समारोह की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अलका जयसवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। छात्राओं ने सुमधुर ‘दीप मंत्र गान’ प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विभागाध्यक्ष सहित सभी शिक्षकों और छात्राओं ने स्वामी जी को पुष्पांजलि अर्पित की। छात्रा सुरुचि कुमारी ने स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया, जबकि सोनाक्षी कुमारी और मानसी रितु ने अपने कुशल मंच संचालन से कार्यक्रम में समां बांध दिया।

सकारात्मक सोच से ही होगा युवाओं का उत्थान: प्राचार्या

छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ. अलका जयसवाल ने कहा, “युवाओं को हमेशा सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए और नकारात्मकता का पूर्णतः त्याग करना चाहिए। यही स्वामी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. हरि शंकर कुमार ने विवेकानंद के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को खुद को ईमानदार और समर्थ बनाना चाहिए। उन्होंने समाज सेवा के माध्यम से जीवन को धन्य करने की प्रेरणा दी।

शिक्षकों ने साझा किए विचार

कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। डॉ. संजीव कुमार, डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. रवि शेखर ठाकुर और डॉ. स्मिता गौतम सहित अन्य प्राध्यापकों ने स्वामी जी के राष्ट्र के प्रति योगदान की चर्चा की। वक्ताओं ने स्वामी जी की प्रसिद्ध उक्ति— उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”— को दोहराते हुए छात्राओं में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति का संचार किया।

छात्राओं की जीवंत प्रस्तुतियाँ

कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न भाषणों, गीतों और स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों (दृष्टांतों) के माध्यम से छात्राओं ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता का विकास करना था।

समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण तरीके से हुआ।

उपस्थित गणमान्य: डॉ. रवि कुमार, डॉ. सुमन्त कुमार, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. राजमणि कुमार, डॉ. मणिकान्त कुमार, डॉ. श्रीनिवास सुधांषु, प्रो. ममता कुमारी एवं प्रो. साधना कुमारी सहित समस्त कर्मचारी व छात्राएं।

फिर 26 जनवरी को होगी परेड और सकरा में ‘शहीद’ का अपमान—क्या इसी लोकतंत्र के लिए अमीर सिंह ने दी थी कुर्बानी?

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एस.एस. कुमार ‘पंकज’

मुजफ्फरपुर, बिहार। आगामी 26 जनवरी को जब पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस के गौरव में डूबा होगा, जब राजपथ पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा और आसमान तिरंगे के रंगों से सराबोर होगा, ठीक उसी समय मुजफ्फरपुर के सकरा में ‘राष्ट्रीय शर्म’ की एक और कड़वी तस्वीर बेपर्दा होने की पूरी आशंका है। यह दास्तां है अगस्त क्रांति के उस जांबाज शहीद अमीर सिंह की, जिन्होंने 1942 में अपनी छाती पर ब्रिटिश हुकूमत की गोली सिर्फ इसलिए खाई थी ताकि आने वाली पीढ़ियां एक आजाद और सम्मानजनक गणतंत्र में सांस ले सकें। लेकिन अफसोस, आज उसी गणतंत्र के नुमाइंदे—  स्‍थानीय प्रखंड अधिकारी, थानेदार, चिकित्‍सा पदाधिकारी, बैंक मैनेजर, और न जाने कितने सफेदपोश नेता—अपनी कृतघ्नता से इस शहादत को हर दिन कुचल रहे हैं।

शहीद अमीर सिेह का स्‍टैच्‍यू

तमाशा गणतंत्र का: 50 मीटर की दूरी, फिर भी श्रद्धा सुमन को वक्तनहीं

विडंबना की पराकाष्ठा देखिए, 26 जनवरी को सकरा प्रखंड मुख्यालय और सकरा थाने में धूमधाम से झंडोत्तोलन होगा। सरकारी अधिकारी ‘अमर शहीदों के सपनों’ को पूरा करने की कसमें खाएंगे, देशभक्ति के तराने गूंजेंगे और मिठाइयां बांटी जाएंगी। लेकिन इस उत्सव के भव्य पांडाल से महज 100 से 200 मीटर के दायरे में शहीद अमीर सिंह की प्रतिमा एक मूक दर्शक की तरह सिस्टम की बेरुखी और कृतघ्नता को देख रही होगी।

हैरानी की बात यह है कि पिछले कई सालों का रिकॉर्ड गवाह है कि यहाँ के ‘साहबों’ (बीडीओ, सीओ, थानेदार) के सरकारी शेड्यूल में शहीद की प्रतिमा पर दो पुष्प अर्पित करना शामिल ही नहीं होता।

  • सकरा निबंधन कार्यालय: दूरी मात्र 50 मीटर।
  • सकरा थाना: दूरी मात्र 100 मीटर।
  • सकरा प्रखंड कार्यालय: दूरी मात्र 200 मीटर।

क्या इन साहबों का प्रोटोकॉल इतना बड़ा हो गया है कि जिस मिट्टी के शहीद ने इन्हें ये कुर्सियां और रसूख दिया, वहां जाने में इन्हें परहेज है? जिन दफ्तरों में बैठकर ये अधिकारी आज लोकतांत्रिक व्यवस्था का आनंद ले रहे हैं, उसकी नींव में अमीर सिंह जैसे वीरों का ही खून है। क्या सरकारी साहबों को लगता है कि शहीद की प्रतिमा पर जाना उनकी शान के खिलाफ है? या फिर ‘गणतंत्र’ अब सिर्फ फाइलों, भाषणों और सरकारी दफ्तरों की चारदीवारी तक सिमट कर रह गया है?

गंदगी से पटा हुआ  सकरा रजिस्ट्री ऑफिस स्थित शहीद अमीर सिंह  स्मारक स्थल  

शहीद स्थल या कचरा स्थल? नगर पंचायत सकरा की संवेदनहीनता पर सवाल

सकरा निबंधन कार्यालय परिसर स्थित शहीद अमीर सिंह का शहादत स्थल आज बदहाली के आंसू रो रहा है। सकरा नगर पंचायत के अधिकारी और इसके नुमांइदे को यह ज्ञान नहीं है कि शहीद अमीर सिंह , सकरा के लिए प्रेरणा पुंज है, गौरव हैं ।  शहादत स्थल पर जहाँ श्रद्धा की सुगंध और पवित्रता होनी चाहिए, वहां साल भर गंदगी का अंबार लगा रहता है। शहीद की प्रतिमा धूल फांक रही है और आलम यह है कि यह स्थान शहीद स्मारक न होकर ‘कचरा स्थल’ में तब्दील हो चुका है।

सकरा रजिस्ट्री ऑफिस स्थित शहीद अमीर सिंह  स्मारक स्थल पर गंदगी का अंबार

सवाल सकरा नगर पंचायत के अधिकारियों से है: आपका आलीशान कार्यालय यहाँ से महज 200 मीटर दूर है, फिर भी आपके सफाईकर्मियों को यहाँ झांकने तक की फुर्सत नहीं मिलती? जब एक राष्ट्रीय नायक के स्मारक का यह हाल है, तो सकरा नगर पंचायत के अन्य इलाकों में सफाई की स्थिति कितनी नारकीय होगी, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है। क्या नगर पंचायत के अधिकारी केवल कागजों पर ‘स्वच्छ भारत’ का ढिंढोरा पीटते हैं?

विरासत की अनभिज्ञता: कांग्रेस का सूनाआश्रम और भाजपा की सियासत

शहादत स्थल से महज 200 मीटर की दूरी पर वह ऐतिहासिक कांग्रेस आश्रम स्थित है, जिसने आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों के भीतर ज्वाला फूंकी थी। दुखद पहलू यह है कि आज की पीढ़ी के स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को शायद अपनी ही विरासत और इतिहास का ज्ञान नहीं है। जिस तिरंगे के सम्मान के लिए अमीर सिंह ने सीने पर गोली खाई, उसी पार्टी के कार्यकर्ता आज अपने शहीद की सुध लेना भूल गए हैं।

राजनीति के इसी शून्य का लाभ विपक्षी दल उठाते हैं। जहाँ कांग्रेस अपनी विरासत सहेजने में विफल रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता इन अवसरों को भुनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं। लेकिन सवाल राजनीति से ऊपर नैतिकता का है—क्या शहीद अमीर सिंह किसी एक दल के थे? क्या वे पूरे राष्ट्र की सामूहिक थाती नहीं हैं? आखिर क्यों राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले दल शहीद की प्रतिमा की सफाई और गरिमा के लिए आगे नहीं आते?

नुनफराका स्कूल और गुमनाम होती शहादत

शहीद अमीर सिंह के पैतृक गांव नुनफरा की स्थिति और भी पीड़ादायक है। ग्रामीणों ने शहीद के सम्मान में स्थानीय प्राथमिक विद्यालय का नाम ‘अमीर सिंह’ के नाम पर रख दिया था। विद्यालय की मुख्य दीवार पर नाम अंकित भी किया गया, लेकिन गांव की ओछी राजनीति और सरकारी तंत्र की ढिलाई ने उस नाम को सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं होने दिया। आज दीवार पर लिखा वह नाम भी मिट चुका है। एक तरफ सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करती है, वहीं दूसरी तरफ एक शहीद को उसके अपने ही गांव में उसकी पहचान से वंचित रखा जा रहा है।

विधायक कोमल सिंह की पहल ने जगाई उम्मीद

बंदरा प्रखंड के नुनफरा गाँव का ‘शहीद द्वार’ वर्षों तक खंडहर बना रहा। 1994 में तत्कालीन राजस्व मंत्री रमई राम ने इसका निर्माण कराया था, लेकिन बाद के जनप्रतिनिधियों ने इसे मरने के लिए छोड़ दिया। इस उपेक्षा के दौर में गायघाट की वर्त्‍तमान विधायक कोमल सिंह धन्यवाद की पात्र हैं, जिन्होंने शहीद की सुध ली और इस द्वार का जीर्णोद्धार कराया। यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो बजट का रोना नहीं रोया जाता। लेकिन क्या केवल एक द्वार का बन जाना काफी है? शहीद के जन्मस्थल पर आज भी एक प्रतिमा लगाने की मांग वर्षों से लंबित है।

वर्षों तक खंडहर बना रहा ‘शहीद द्वार’ (बायें) एवं गायघाट की विधायक कोमल सिंह के द्वारा जीर्णोद्धार के बाद चमकता ‘शहीद द्वार'(दायें से)

जयमाला देवी का मूक बलिदानऔर गुलाम मानसिकता का प्रतीक डैनवी आवास

अमीर सिंह की शहादत अधूरी है यदि उनकी पत्नी जयमाला देवी का जिक्र न हो। शादी के मात्र सात माह बाद विधवा हुई उस वीरांगना ने अन्न-जल त्याग दिया और शहादत की घटना के दो माह के भीतर प्राणों की आहुति दे दी। क्या आजाद भारत के किसी सरकारी दस्तावेज में इस बलिदान को जगह मिली?

एक तरफ वह अंग्रेज अफसर ई.सी. डैनवी है, जिसके आदेश पर गोलियां चलीं, उसका आवास (तिरहुत कृषि महाविद्यालय ढोली का गेस्ट हाउस) आज भी राजकीय अतिथि की तरह चमक रहा है। दूसरी तरफ हमारे देश के रक्षक का जन्मस्थान मिट्टी में मिल रहा है। यह गणतंत्र का जश्न है या हमारी आज भी कायम गुलाम मानसिकता का प्रदर्शन?

26 जनवरी को सकरा, मुरौल और बंदरा के अधिकारियों से सीधे सवाल:

आगामी गणतंत्र दिवस पर जनता की अदालत में ये प्रश्न खड़े होंगे:

  1. क्या इस बार बीडीओ साहब, थानेदार और नगर पंचायत अधिकारी अपनी वातानुकूलित गाड़ियों से उतरकर शहीद की प्रतिमा पर फूल चढ़ाने की हिम्मत करेंगे?
  2. क्या ढोली रेलवे स्टेशन का नाम शहीद अमीर सिंह रेलवे स्टेशनकरने की रुकी हुई फाइल पर चढ़ी धूल साफ होगी?
  3. क्या नुनफरा के स्कूल को सरकारी तौर पर शहीद का नाम मिलेगा, या इस बार भी केवल आश्वासनकी मिठाई बांटी जाएगी?
  4. सकरा, मुरौल और बंदरा प्रखंडों के सरकारी शिलापट्टों पर शहीद अमीर सिंह का नाम कब दर्ज होगा?

शहीद अमीर सिंह का लहू इस मिट्टी की गहराई में मिला है। अगर इस 26 जनवरी को भी उन्हें गंदगी और उपेक्षा के बीच छोड़ दिया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि हम एक राष्ट्र के रूप में केवल पाखंड कर रहे हैं। कृतघ्न समाज और संवेदनहीन प्रशासन कभी महान लोकतंत्र का निर्माण नहीं कर सकते।

क्या इस 26 जनवरी टूटेगी उपेक्षा की यह परंपरा?

शहीद अमीर सिंह की उपेक्षा का एक बड़ा कारण सिस्टम की वह जड़ता है, जिसमें ‘शहादत’ को सरकारी ड्यूटी चार्ट का हिस्सा ही नहीं माना गया। सकरा में पोस्टिंग पर आने वाले अधिकांश अधिकारी बाहरी क्षेत्रों के होते हैं, जिन्हें स्थानीय इतिहास और यहाँ की माटी के नायकों के बलिदान की जानकारी तक नहीं दी जाती। यह प्रशासन की विफलता है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अनभिज्ञता की आड़ में शहीद अमीर सिंह को उनके ही शहादत स्थल पर बेगाना बना दिया जा रहा है।

क्या इस बार स्थानीय प्रशासन के द्वारा गणतंत्र दिवस के समारोह पर सरकारी शेड्यूल में शहीद अमीर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण को आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा? यदि इस बार भी अधिकारी महज 100 मीटर की दूरी तय नहीं कर पाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि तंत्र के लिए ‘शहादत’ की कोई कीमत नहीं है और हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक कृतघ्न समाज सौंप रहे हैं।


11 जनवरी 2026 को शहादत स्‍थल पर गंदगी को दिखाती जिओ टेगिंग तस्‍वीर

अगर आज हम चुप रहे, तो कल कोई अमीर सिंह देश के लिए गोली खाने से पहले हजार बार सोचेगा। सकरा के इस महान शहीद की प्रतिमा आज गंदगी और उपेक्षा के बीच आंसू बहा रही है। इस पोस्ट को इतना शेयर करें कि सोए हुए अधिकारियों की नींद टूट जाए!”

अगस्त क्रांति के विस्मृत नायक शहीद अमीर सिंह: सीने पर गोली खाई ताकि हम आजाद रहें, पर आजाद भारत में उनके शहादत को उचित सम्मान नहीं–

पढे पूरी खब‍र …. https://newsbharattv.in/अगस्त-क्रान्ति-के-शहीद-अ-2/