मधुबनी: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए खाकी को दागदार करने वाले एक बड़े अधिकारी को दबोचा है. मधुबनी जिले के यातायात पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सुजीत कुमार को तीस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी से बचने के लिए डीएसपी साहब ने ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा किया कि देखने वालों की सांसे थम गईं!

क्या है पूरा मामला?
परिवादी रोहित मिश्रा ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि वे अपने टिपट ट्रक से निजी कार्य हेतु पीला बालू लेकर अपने घर आ रहे थे. इसी दौरान रोंटी चौक पर यातायात डीएसपी सुजीत कुमार द्वारा उनकी गाड़ी को रोक लिया गया और छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की गई.
दबाव में आकर परिवादी ने पचास हजार रुपये आरोपी डीएसपी को दे दिए, जिसके बदले आरोपी ने पांच सौ रुपये का चालान काट कर गाड़ी छोड़ी. लेकिन डीएसपी साहब की भूख यहीं नहीं रुकी; वे परिवादी पर कम से कम बीस हजार रुपये और रिश्वत देने का दबाव बना रहे थे तथा गाड़ी चलाने के एवज में हर महीने पंद्रह हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे थे.

निगरानी टीम का छापा और डीएसपी का हाई-वोल्टेज ड्रामा
शिकायत का सत्यापन कराने के बाद आरोप सही पाए जाने पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के वरीय पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में एक धावादल का गठन किया गया.
बीती 27 अक्टूबर 2026 की संध्या को जब ट्रैप की कार्रवाई की गई, तो अभियुक्त सुजीत कुमार अपने कार्यालय परिसर में अचानक जमीन पर गिरकर छटपटाने लगे. गिरने से पहले उन्होंने अपना छोटा सा बैग, जिसमें रिश्वत की राशि थी, अपने अंगरक्षक की तरफ फेंक दिया था. अंगरक्षक के पास से वह बैग बरामद कर लिया गया जिसमें से तीस हजार रुपये रिश्वत की राशि मिल गई.

तबीयत खराब होने का नाटक कर रहे डीएसपी को निगरानी टीम तुरंत सदर अस्पताल, मधुबनी ले गई. अस्पताल के चिकित्सकों ने जब उनकी जांच कर स्पष्ट किया कि उनकी स्थिति ठीक है और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, तब विहित प्रक्रिया के तहत उनका हाथ धुलवाया गया और रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया.

अस्पताल से सीधे विशेष न्यायालय रवाना
28 अक्टूबर 2026 की संध्या को सदर अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा निगरानी टीम को बताया गया कि अब सुजीत कुमार की स्थिति सामान्य है. इसके बाद निगरानी टीम ने उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर अग्रतर विधिक कार्रवाई के लिए मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय निगरानी में पेशी के लिए रवाना कर दिया. ब्यूरो द्वारा इस मामले में आगे की अनुसंधान की कार्रवाई तेजी से की जा रही है.
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