12वें अंतर्राष्ट्रीय एवं चौथे राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर भव्य राज्यस्तरीय समारोह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य समेत दिग्गजों की उपस्थिति में हुआ पत्रिका विमोचन व संकल्प ग्रहण
विशेष संवाददाता, पटना पटना (बिहार)। राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय अंगदान दिवस एवं चौथे राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर मानवता और सामाजिक चेतना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ‘दधीचि देहदान समिति’ के तत्वावधान में आयोजित इस राज्यस्तरीय ‘संकल्प एवं सम्मान समारोह’ का विधिवत उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद और दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष पद्मश्री विमल जैन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस महाआयोजन के दौरान उपस्थित अतिथियों और आम जनमानस ने एक स्वर में अंगदान व देहदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और मानव कल्याण के लिए संकल्प लिया।

राज्य सरकार का बड़ा ऐलान: जिला अस्पतालों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक चलेगा जनजागरण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अंगदान को मानव जीवन का सबसे बड़ा और पवित्र दान करार दिया। उन्होंने कहा, “जीते जी रक्तदान और मृत्यु के बाद नेत्रदान, अंगदान तथा देहदान से किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में आशा की नई किरण प्रज्वलित की जा सकती है। दधीचि देहदान समिति द्वारा इस दिशा में किया जा रहा कार्य अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है।”
उपमुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अंगदान और देहदान के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों और राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से आम लोगों को जागरूक करने की दिशा में बिहार सरकार पूर्ण सहयोग एवं संसाधन प्रदान करेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि आइए, हम सब मिलकर अंगदान का संकल्प लें और जीवन के बाद भी किसी के जीवन में आशा का प्रकाश बनें।

भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है देहदान: राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य
समारोह में पहुंचे असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने दधीचि देहदान समिति के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महर्षि दधीचि का त्याग हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिन्होंने जन-कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान कर दिया था। आज के आधुनिक युग में देहदान और अंगदान उसी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत रूप है। यह कार्य न केवल चिकित्सा विज्ञान और शोधार्थियों के लिए संजीवनी का काम करता है, बल्कि असमय काल के क्रूर चक्र में फंसे लोगों को नवजीवन भी देता है।
कार्यक्रम के दौरान सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद तथा पद्मश्री विमल जैन ने भी अपने विचार रखे और समाज के हर वर्ग से आगे आकर इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
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