पटना, 09 अगस्त 2026: बिहार पृथ्वी दिवस 2026 और विश्व आदिवासी दिवस के पावन अवसर पर राजधानी पटना स्थित लोक सेवक आवास परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजातीय संस्कृतिएवं पृथ्वी दिवस के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कल्पतरु और रुद्राक्ष का पौधा लगाकर राज्य में पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन बनाने की हुंकार भरी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि सावन-भादो के इस पवित्र महीने में अधिक से अधिक पौधे लगाएं और आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित एवं पूरी तरह सुरक्षित बिहार का निर्माण करें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा — “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” यानी यह संपूर्ण पृथ्वी हमारी माता है और हम सभी इसके पुत्र हैं। धरती मां की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सभी आदिवासी भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को संजोकर रखने वाले आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय है। उनके इस अनमोल योगदान को राज्य सरकार सादर नमन करती है।

पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु 11 सूत्री महासंकल्प
बिहार पृथ्वी दिवस के इस विशेष अवसर पर राज्य सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग के प्रति आमजनों को जागरूक करने के लिए 11 सूत्री संकल्प पत्र जारी किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी से इन्हें दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया:
- पौधारोपण एवं सुरक्षा: प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कम से कम 1 पौधा लगाएगा तथा उसकी उचित सुरक्षा एवं देखरेख कर उसे वृक्ष बनाएगा।
- जल स्रोतों की स्वच्छता: अपने आसपास के तालाब, नदी, पोखर एवं अन्य जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
- जल का सीमित उपयोग: आवश्यकता से अधिक जल का उपयोग नहीं करेंगे तथा काम समाप्त होते ही नल बंद रखेंगे।
- वर्षा जल संचयन: घर, विद्यालय और आस-पड़ोस में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था के लिए प्रेरित करेंगे।
- ऊर्जा संरक्षण: बिजली का उपयोग केवल आवश्यकतानुसार करेंगे और कमरे से बाहर निकलते समय बल्ब एवं पंखे बंद करेंगे।
- स्वच्छता का संकल्प: घर, विद्यालय एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखेंगे तथा सारा कचरा केवल कूड़ेदान में ही डालेंगे।
- प्लास्टिक मुक्ति: प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग पूरी तरह बंद कर कपड़े या कागज के थैलों का ही इस्तेमाल करेंगे।
- जीव-जंतु संरक्षण: पशु-पक्षियों के प्रति दया एवं प्रेम का भाव रखेंगे तथा उनके लिए अन्न-जल की व्यवस्था करेंगे।
- पर्यावरण अनुकूल परिवहन: नजदीकी कार्यों के लिए वाहनों के बजाय पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने की आदत डालेंगे।
- कागज की बचत: पेड़ों की कटाई रोकने के लिए कागज का अनावश्यक इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करेंगे।
- पूर्ण स्वच्छता: खुले में शौच करने से बचेंगे और हमेशा शौचालय का ही उपयोग सुनिश्चित करेंगे।

इस गरिमामय कार्यक्रम के अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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