पटना : बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, शिक्षकों के स्थानांतरण और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक साथ कई बड़े और ऐतिहासिक निर्णयों का ऐलान किया है। पटना स्थित मदन मोहन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इन महत्वपूर्ण घोषणाओं की विस्तृत जानकारी दी।
शनिवार को सुबह 9:30 से 1:00 बजे तक चलेंगे स्कूल, रहेगा ‘नो बैग डे‘
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में अब प्रत्येक शनिवार को हाफ-डे रहेगा। शनिवार को स्कूल सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक ही संचालित होंगे।
इसके साथ ही प्रत्येक शनिवार को “नो बैग डे” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन बच्चे बस्ते के बोझ से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। उन्हें नाटक, संगीत, कला, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से आनंददायक एवं अनुभवात्मक तरीके से सीखने का अवसर दिया जाएगा। यह कदम शिक्षा के साथ बच्चों के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षक नेताओं और शिक्षकों की ओर से लंबे समय से हाफ-डे की मांग की जा रही थी। हाल ही में मुख्यमंत्री ने मुंगेर दौरे के दौरान इसके संकेत भी दिए थे। इसके अलावा विधानसभा में आयोजित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कार्यशाला के दौरान भी मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। इसके तुरंत बाद आदेश की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए गए और शिक्षा विभाग द्वारा इसका औपचारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया।

स्थानांतरण के लिए 73,151 आवेदन, 17 सितंबर से दोबारा खुलेगा पोर्टल
राज्य में शिक्षकों के ऐच्छिक स्थानांतरण (ट्रांसफर) को लेकर चल रही प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 29 जुलाई से शुरू हुआ पहला चरण 5 अगस्त की रात 12:00 बजे बंद हो गया है।
राज्य में 1,06,287 (संभावित 1,06,687) ऐसे शिक्षक थे जो अपने विद्यालयों में स्वीकृत पदों से अलग यानी अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) के रूप में पदस्थापित थे। इस कारण बिहार में लंबे समय से यह समस्या आ रही थी कि कहीं शिक्षकों का प्रभाव (अधिकता) था तो कहीं अभाव था। इस असंतुलन को दूर करने और समानुपातीकरण लागू करने के लिए पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे।
बिना किसी दबाव के कुल 73,151 शिक्षकों ने स्वेच्छा से स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा किए हैं। जो शिक्षक इस चरण में आवेदन नहीं कर सके हैं, उनके लिए 17 सितंबर से दोबारा पोर्टल खोला जाएगा।

स्थायी जिला कैडर, पारदर्शी नीति और हर 5 साल पर स्थानांतरण
शिक्षा मंत्री ने स्थानांतरण नीति के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए कहा:
- पारदर्शी व्यवस्था: पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अधिकारियों द्वारा शिक्षकों के शोषण की गुंजाइश न रहे।
- सुविधाजनक पदस्थापना: नियमों के तहत महिला शिक्षकों को उनकी पंचायत के बगल में और पुरुष शिक्षकों को उनके प्रखंड (ब्लॉक) के बगल में पदस्थापित करने का प्रयास रहेगा, ताकि वे घर से दूर रहकर परेशान न हों।
- नियत कैडर: सभी शिक्षकों का अपना जिला कैडर तय हो जाएगा और वे उसी जिले से सेवानिवृत्त होंगे।
- 5 साल का नियम: यह ऐच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया अब हर 5 साल पर आयोजित की जाएगी।
ई-शिक्षाकोष पोर्टल की इस पूरी व्यवस्था और तकनीकी प्रक्रिया की देखरेख कर रहे रविशंकर द्वारा इसका पूरा ब्योरा और विभागीय ब्रीफिंग तैयार की जा रही है।

टीआरई-4 बहाली और 9-10 अगस्त को दो दिवसीय चिंतन शिविर
टीआरई-4 (शिक्षक नियुक्ति के चौथे चरण) की बहाली प्रक्रिया के साथ-साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। बिहार के इतिहास में पहली बार ऐसा आयोजन हो रहा है, जिसमें राज्य और जिला स्तर पर कार्यरत शिक्षा विभाग के लगभग 350 से 400 प्रमुख अधिकारी एक साथ जुटेंगे।
यह दो दिवसीय चिंतन शिविर विधानसभा के अधिवेशन भवन में 9 अगस्त को सुबह 9:30 बजे से शुरू होकर 10 अगस्त की शाम 7:00 बजे तक चलेगा। शिविर के मुख्य मुद्दे निम्नलिखित होंगे:
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का प्रभावी क्रियान्वयन।
- शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून का कड़ाई से पालन।
- सरकारी स्कूलों की स्थानीय व बुनियादी समस्याओं का समाधान।
- विभिन्न विभागों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- एक निश्चित समयावधि (टाइम-बाउंड प्रोग्राम) बनाकर योजनाओं को लागू करना।
31 अक्टूबर तक शिक्षकों की समस्याओं का समाधान, फिर छात्रों पर रहेगा फोकस
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बिहार के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (क्वालिटी एजुकेशन) प्रदान करना है।
उन्होंने घोषणा की कि 31 अक्टूबर तक सरकार और विभाग शिक्षकों की हर समस्या—चाहे वह घर से स्कूल की दूरी हो, स्थानांतरण हो या प्रशासनिक अड़चनें हों—का पूरा समाधान कर देगा। लेकिन 31 अक्टूबर की समयसीमा समाप्त होने के बाद, विभाग मीडिया और समाज के माध्यम से शिक्षकों से केवल यही आग्रह करेगा कि वे अपना पूरा ध्यान छात्रों की समस्याओं को हल करने और उन्हें बेहतर शिक्षा देने में लगाएं।
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