नासा और इसरो को राह दिखाने वाले शंकराचार्य का 84वां प्राकट्य महोत्सव, पूसा रोड में गूंजा हनुमान चालीसा

पूसा रोड (समस्तीपुर): पुरी पीठाधीश्वर गोवर्धन मठ श्रीमदजगतगुरु शंकराचार्य नीशचलानन्द सरस्वती महाराज के 84वें प्राकट्य महोत्सव को ‘राष्ट्र उत्कर्ष दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाया गया। आसाढ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि, 12 जुलाई 2026 को गंगापुर ओइनी पूसा रोड स्थित गंगेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पूरा आयोजन शंकराचार्य नीशचलानन्द सरस्वती महाराज के शिष्य परिवार समूह के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

गंगेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर, गंगापुर ओइनी पूसा रोड में राष्ट्रोत्कर्ष दिवस के अवसर पर सामूहिक सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए शंकराचार्य के शिष्य परिवार समूह के सदस्य।

कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित भक्तों और बुद्धिजीवियों ने एक सुर में सामूहिक हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। इस सामूहिक पाठ में मुख्य रूप से चन्द्र भूषण झा, रमेश कुमार झा गुलाब, पंडित चंदन कुमार, विवेक, अधिवक्ता चंदन कुमार झा, शिवेश झा, शैलेश कुमार झा, अनिल कुमार राय, कौशिक राज काश्यप और रामकिशोर राय शामिल रहे।

नासा, इसरो और वर्ल्ड बैंक को भी मिला मार्गदर्शन: रमेश कुमार झा

पाठ की समाप्ति के बाद शंकराचार्य महाराज के असाधारण व्यक्तित्व और सनातन धर्म पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए रमेश कुमार झा गुलाब ने कहा कि शंकराचार्य महाराज का व्यक्तित्व सनातन धर्म के सार्वभौम गुरुपद पर सुशोभित है। उनका ज्ञान और मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिक जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ल्ड बैंक, नासा और इसरो जैसी वैश्विक संस्थाओं के वैज्ञानिक भी उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि महाराजश्री ने विलुप्त हो चुके वैदिक गणित को अपने रचित ग्रंथों के माध्यम से पुनः उद्भासित कर दुनिया के सामने रखा है, जो आधुनिक विज्ञान के लिए एक बड़ी देन है।

सनातन सत्ता को चुनौती देने वाले कालनेमियों को मिलेगा करारा जवाब: चंदन कुमार झा

कार्यक्रम में उपस्थित अधिवक्ता चंदन कुमार झा ने वर्तमान सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में सनातन सत्ता को कुछ कालनेमियों द्वारा लगातार चुनौती दी जा रही है, जिसका डटकर सामना करने की जरूरत है। इसके साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित शिवेश झा और कौशिक राज काश्यप ने भी अपने विचार प्रकट किए और सनातन संस्कृति की रक्षा व राष्ट्र के उत्कर्ष के लिए शंकराचार्य महाराज के बताए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया।

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