दरभंगा: बिहार की राजनीति में एक बड़े तूफान के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। आगामी 16-18 मई, 2026 को दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले भाकपा (माले) के 12वें राज्य सम्मेलन को लेकर पार्टी ने अपनी कमर कस ली है। शुक्रवार को हुई मिथिला जोन स्तरीय बैठक में पार्टी ने सिर्फ सम्मेलन की तैयारी ही नहीं की, बल्कि सरकार के खिलाफ “जन-आंदोलन” का शंखनाद भी कर दिया है।

“भाजपा का असली चेहरा अब सामने है”
बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राज्य सचिव का० कुणाल ने तीखे शब्दों में कहा कि, “विगत चुनाव के बाद से भाजपा अपने असली तेवर में आ गई है। बिहार की सत्ता अब सीधे उनके नियंत्रण में है और आते ही उन्होंने राज्य को ‘बुलडोजर राज की प्रयोगशाला’ में बदलने की साजिश शुरू कर दी है।”
पार्टी ने स्पष्ट किया कि अब बिहार में महिला उत्पीड़न, मॉब लिंचिंग, दलितों और गरीबों के घर उजाड़ने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। यह सम्मेलन इन्हीं चुनौतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है।
देश की विदेश नीति पर तीखा प्रहार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सचिव ने मोदी सरकार की विदेश नीति को “दलाली” करार देते हुए कहा कि देश को संकट की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा देश कभी न्याय की आवाज बुलंद करता था, लेकिन आज मोदी सरकार अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने टेक चुकी है। रूस से तेल खरीदने और न खरीदने के अमेरिकी आदेशों का पालन करना हमारी संप्रभुता पर चोट है। भाजपा के पूर्वज जो पहले अंग्रेजों की दलाली करते थे, आज वही दल सत्ता में आकर अमेरिकी गुलामी में लगा हुआ है।”

“उल्टा पलायन” और मजदूरों का दर्द
भाकपा (माले) ने देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई पर भी सरकार को घेरा। का० कुणाल ने चेतावनी दी कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण जो वैश्विक गैस और तेल संकट पैदा हुआ है, उसका सीधा असर बिहार के मजदूरों पर पड़ रहा है। लाखों मजदूर देश के विभिन्न कोनों से वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं—जिसे पार्टी ने ‘उल्टा पलायन’ कहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और स्थिर मजदूरी ने मजदूरों का जीवन दूभर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा से लेकर लुधियाना तक मजदूरों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू हो गए हैं।
मिथिलांचल में फिर से गूंजेगी वामपंथ की आवाज
इस सम्मेलन का एक बड़ा राजनीतिक संदेश उत्तर बिहार (दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर) के लिए है। मिथिलांचल प्रभारी का० धीरेंद्र झा और पोलिट ब्यूरो सदस्य का० अमर की मौजूदगी में पार्टी ने साफ किया कि मिथिलांचल और कोसी इलाका हमेशा से वाम आंदोलन का गढ़ रहा है। इस सम्मेलन के जरिए पार्टी अपनी पुरानी साख को फिर से हासिल करने और गरीबों के हक की लड़ाई को सड़क से सदन तक मजबूती से ले जाने की तैयारी में है।

पार्टी का केंद्रीय नारा है—“बिहार को भाजपाई बुलडोजर राज की प्रयोगशाला बनाने के खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध खड़ा करें।” आगामी 16 से 18 मई तक दरभंगा का पोलो मैदान इसी संकल्प के साथ एक बड़े जनांदोलन का केंद्र बनेगा।





