मुजफ्फरपुर | 18 फरवरी, 2026 बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की मुहिम में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर जिला शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान), सुजीत कुमार दास ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि छात्रों की उपस्थिति अब अनिवार्य रूप से ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर दर्ज की जाए।

समीक्षा में खुली पोल: आदेश के बाद भी नहीं बदला ढर्रा

विभागीय पत्र (पत्रांक-404) के अनुसार, इससे पूर्व 5 फरवरी 2026 को ज्ञापांक-292 के माध्यम से जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि वे विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए टैब (Tab) का उपयोग कर ई-शिक्षाकोष पर छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करें। हालांकि, हाल ही में जब विभाग ने इसकी समीक्षा की, तो पाया गया कि अधिकांश विद्यालयों में इस डिजिटल प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और पोर्टल पर उपस्थिति शून्य या नगण्य है।

72 घंटे के भीतर सुधारने होंगे हालात

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सभी छात्रों की हाजिरी टैब के माध्यम से सुनिश्चित कराई जाए। विभाग ने साफ कर दिया है कि टैब उपलब्ध होने के बावजूद डिजिटल पोर्टल का उपयोग न करना विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है।

इन अधिकारियों और कर्मियों को दी गई जिम्मेदारी

व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए इस आदेश की प्रतिलिपि निम्नलिखित स्तरों पर भेजी गई है:

  • प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC): सभी लेखा सहायक और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को निगरानी के लिए सूचित किया गया है।
  • विद्यालय स्तर: जिले के सभी प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (HM) और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
  • वरिष्ठ अधिकारी: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भी इस कार्यवाही की सूचना साझा की गई है।

शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति की निगरानी पूरी तरह डिजिटल होगी। यदि अगले तीन दिनों में पोर्टल पर सुधार नहीं दिखता है, तो संबंधित विद्यालयों के प्रधानों पर विभागीय गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

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