समस्तीपुर में SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन,  मुख्य चुनाव आयुक्त का फूंका पुतला, बिहार-बंगाल चुनाव रद्द करने की उठी मांग!

समस्तीपुर, 23 अक्टूबर 2026 : संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को समस्तीपुर की सड़कों पर जोरदार और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ अखिल भारतीय किसान महासभा (अभाकिम) के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर भारी हुंकार भरी और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

समस्तीपुर में SIR के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर हाथों में बैनर-झंडे थामे विरोध प्रदर्शन करते अभाकिम व भाकपा माले के कार्यकर्ता।

मालगोदाम चौक से निकला आक्रोश जुलूस, नारों से गूंजा शहर

अभाकिम कार्यकर्ताओं द्वारा मालगोदाम चौक से एक विशाल विरोध जुलूस निकाला गया। हाथों में लाल झंडे और SIR के खिलाफ नारों की पट्टियां थामे प्रदर्शनकारी शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए स्टेशन चौक पहुंचे। पूरे रास्ते “हमारा वोट, हमारे अधिकार, हमारा लोकतंत्र” के गगनभेदी नारे गूंजते रहे। स्टेशन चौक पहुंचते ही यह जुलूस एक उग्र जनसभा में तब्दील हो गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने और चुनाव रद्द करने की उठी मांग

स्टेशन चौक पर आयोजित सभा की अध्यक्षता अभाकिम के जिला सचिव ललन कुमार ने की। जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव प्रोफेसर उमेश कुमार, माले जिला कमिटी सदस्य बंदना सिंह, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अनील चौधरी, सोनेलाल पासवान और उमेश राय सहित कई प्रमुख नेताओं ने निर्वाचन आयोग पर तीखे हमले बोले।

नेताओं ने कहा कि SIR की यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सीधा खतरा है और इसके माध्यम से आम नागरिकों के मताधिकार को छीना जा रहा है। वक्ताओं ने पुरजोर मांग उठाई कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत बर्खास्त किया जाए, SIR की प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाए और SIR के बाद बिहार तथा पश्चिम बंगाल में संपन्न कराए गए चुनावों को अविलंब रद्द किया जाए।

पुतला दहन के साथ खत्म हुआ प्रदर्शन, दी आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने यह भी साफ किया कि मतदाता सूची से किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी। विरोध प्रदर्शन के चरम पर कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और उनके खिलाफ उग्र नारेबाजी की। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर मताधिकार की रक्षा नहीं हुई तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

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