शहरी टैक्स, ग्रामीण सुविधा: आखिर कब तक चलेगी ये दोहरी नीति?
मुजफ्फरपुर: बिहार के नवगठित नगर निकायों में व्याप्त प्रशासनिक उदासीनता और जनता के साथ हो रहे घोर भेदभाव के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद हो चुका है। मुरौल नगर पंचायत के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह ने 30 अप्रैल 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के समक्ष ‘आमरण अनशन’ पर बैठने का अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है। यह अनशन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए जनता के आक्रोश का ज्वलंत प्रतीक है।

यह लड़ाई सिर्फ मुरौल की नहीं, पूरे बिहार के नवगठित निकायों की है
पार्षद आनंद कंद साह का यह संघर्ष अब केवल मुरौल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर निकायों के लिए एक महासंग्राम बन चुका है, जहाँ शासन का तंत्र ‘दोहरी नीति’ का खेल,खेल रहा है। इस दायरे में मुरौल के साथ-साथ सकरा, कांटी, बरूराज, मोतीपुर, साहेबगंज, ताजपुर और सरायरंजन जैसे क्षेत्र भी प्रमुखता से शामिल हैं। इन इलाकों को नगर पंचायत या नगर परिषद का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन गैस आपूर्ति के मामले में इन्हें आज भी ग्रामीण क्षेत्र के ’45-दिवसीय चक्र’ की बेड़ियों में जकड़ रखा है। जबकि, नियमानुसार शहरी निकायों में उपभोक्ताओं को 25 दिन में गैस रिफिलिंग की सुविधा मिलनी चाहिए।
जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को प्रेषित पत्र में क्या कहा है पार्षद आनन्द कंद ने जाने क्या है पूरा मामला?
‘सॉफ्टवेयर डेटाबेस’ के नाम पर जनता के अधिकारों का खुला हनन हो रहा है। प्रशासन का तर्क और प्रणाली इन क्षेत्रों को शहरी मानने को तैयार नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि इन इलाकों के निवासियों से होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन की रजिस्ट्री (MVR) जैसे सभी सरकारी शुल्क ‘शहरी दरों’ पर वसूले जा रहे हैं। जनता टैक्स तो शहरी भर रही है, लेकिन सुविधा उन्हें ग्रामीण स्तर की भी ठीक से नहीं मिल रही। पार्षद आनंद कंद साह ने इसे ‘डेटाबेस घोटाला’ और ‘जनता के साथ विश्वासघात’ करार दिया है।
बड़े संवैधानिक संस्थानों के निर्देशों की सरेआम धज्जियाँ
यह प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि ‘संवैधानिक अवहेलना’ है। बिहार सरकार की गजट अधिसूचना (संख्या 1037, दिनांक 03.03.2021) के तहत इन क्षेत्रों को नगर निकाय का दर्जा मिले 5 साल बीत चुके हैं। राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और मुख्य सचिव तक के निर्देश मिलने के बावजूद धरातल पर सुधार न होना, यह सिद्ध करता है कि विभाग उच्च संवैधानिक संस्थाओं को भी गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कौन हैं आनंद कंद साह?
नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की प्रखर आवाज बनकर उभरे हैं। वे पिछले कई महीनों से लगातार स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जन-अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर संघर्षरत हैं। उनका यह अनशन महज एक विरोध नहीं है, बल्कि अपनी कर्तव्यनिष्ठा और नगर पंचायत मुरौल की जनता के प्रति अपनी गहरी जवाबदेही का प्रतीक है।
प्रशासन को सीधी चेतावनी: तीन दिन का अल्टीमेटम
पार्षद आनंद कंद साह ने शासन और प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है, “अब निर्णय आपके हाथों में है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि आगामी तीन कार्यदिवसों के भीतर तेल कंपनियों के डेटाबेस में सुधार कर 25-दिवसीय शहरी रिफिल चक्र लागू नहीं किया गया, तो 30 अप्रैल की सुबह 11:30 बजे से वे आमरण अनशन शुरू कर देंगे। अनशन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित तेल कंपनियों की होगी।
किन अधिकारियों को दी गई सूचना?
पार्षद आनंद कंद साह ने इस आंदोलन की विधिवत सूचना और कार्रवाई हेतु मांग पत्र निम्नलिखित उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया है:
- सचिव, राष्ट्रपति सचिवालय, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
- प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली।
- अध्यक्ष, राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग।
- सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
- मुख्य सचिव, बिहार सरकार, पटना।
- वरीय आरक्षी अधीक्षक, मुजफ्फरपुर।
- असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर।
- क्षेत्रीय प्रबंधक, संबंधित तेल कंपनी।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन का कुंभकरण जागता है या फिर इन नवगठित निकायों की लाखों जनता को अपने मूलभूत अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।





