ढाई घंटे तक चली मैराथन जांच, जेल के एक-एक कोने और रसोईघर को खंगाला गया।
हालांकि जांच के दौरान कोई भी अवैध या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ।
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार में आज शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की अहले सुबह जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम ने मिलकर एक बहुत बड़ी औचक छापेमारी और सघन तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पूरी तरह से औचक थी, जिसने जेल प्रशासन और कैदियों दोनों के बीच हड़कंप मचा दिया।
सैन्य टुकड़ी की तरह अचानक पहुंचे अधिकारी
यह पूरी कार्रवाई मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी गौरव कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र के संयुक्त और कड़े नेतृत्व में की गई। छापेमारी की शुरुआत सुबह लगभग 3:45 बजे से 4:00 बजे के बीच हुई, जब पूरा शहर सो रहा था। इस दौरान जेल परिसर में लगभग 150 से अधिक पुलिस के जवान और कई प्रशासनिक अधिकारी एक साथ दाखिल हुए, जिससे पूरा माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और जेल के भीतर पुलिस के बूटों की आवाज गूंज उठी।

चप्पे-चप्पे पर चली मैराथन तलाशी
पुलिस और प्रशासन की अलग-अलग टीमों ने जेल के चप्पे-चप्पे को खंगाला। सुबह 6:30 बजे तक, यानी लगभग ढाई से तीन घंटे तक यह सघन छापेमारी अभियान लगातार चलता रहा। जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की प्रत्यक्ष निगरानी में टीम ने कैदियों के सभी संवेदनशील वार्डों, बैरकों, जेल अस्पताल, सेल, बंदियों के सामान, बिस्तरों और रसोईघर की अत्यंत बारीकी और सूक्ष्म तरीके से तलाशी ली। इस दौरान जेल परिसर का कोई भी हिस्सा, जिसमें शौचालय भी शामिल हैं, जांच से अछूता नहीं रहा। यह अभियान पूरी तरह व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा इम्तिहान
आमतौर पर ऐसी अचानक की जाने वाली छापेमारी में मोबाइल फोन, चार्जर, तंबाकू या अन्य प्रतिबंधित सामग्रियां बड़ी संख्या में मिल जाती हैं, जो जेल की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। लेकिन, इस लंबी और कड़ी जांच के बाद मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल से कोई भी आपत्तिजनक या अवैध सामान बरामद नहीं हुआ। सुरक्षा मानकों और अनुशासन के मामले में जेल की व्यवस्था पूरी तरह खरी उतरी, जिसकी अधिकारियों ने सराहना भी की।

प्रशासन की सख्त चेतावनी
अधिकारियों के अनुसार, यह सरकार के निर्देशानुसार जेलों के भीतर अवैध गतिविधियों को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए किया गया एक नियमित औचक निरीक्षण था। कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसमें सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, नियमित जांच सुनिश्चित करने एवं बंदियों के प्रबंधन में सुधार लाने पर विशेष बल दिया गया। काराधीक्षक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे जेल मैनुअल के नियमों का कड़ाई से पालन जारी रखें। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि सुरक्षा बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसी अचानक की जाने वाली कार्रवाइयां जारी रहेंगी।

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