समस्तीपुर, 29 अप्रैल 2026 | देश की राजधानी दिल्ली में बिहारी पहचान को निशाना बनाकर की गई एक जघन्य हत्या ने बिहार के समस्तीपुर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। दिल्ली के द्वारका इलाके में एक डिलीवरी बॉय की दिल्ली पुलिस के जवान द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के विरोध में आज समस्तीपुर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। आइसा (AISA) और नागरिक समाज के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला और दिल्ली पुलिस की ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ अपना गुस्सा जताते हुए गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका।

सड़कों पर गूंजे न्याय के नारे
शहर के सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह प्रतिरोध मार्च मुख्य मार्गों से होता हुआ गायत्री कॉम्प्लेक्स तक पहुंचा। हाथों में ‘क्या बिहारी होना गुनाह है?’ और दोषियों को फांसी देने की मांग वाली तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह मार्च देखते ही देखते एक सभा में तब्दील हो गया, जिसकी अध्यक्षता आइसा जिला अध्यक्ष लोकेश राज ने की और मंच का संचालन जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने किया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात दिल्ली के द्वारका इलाके में खगड़िया जिले का निवासी और डिलीवरी बॉय का काम करने वाला पांडव कुमार अपने एक दोस्त के साथ पार्टी से घर लौट रहा था। आरोप है कि दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल नीरज बलहारा ने उन्हें रोककर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब पांडव ने इस ‘गुंडागर्दी’ का विरोध किया, तो पुलिसकर्मी ने उसे सीने में गोली मार दी। गोली पांडव के सीने को भेदते हुए पीछे बैठे उसके दोस्त को भी जा लगी। अस्पताल ले जाने के दौरान पांडव की मौत हो गई, जबकि उसका साथी अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

नेताओं ने की तीखी आलोचना, रखीं मांगें
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने घटना को ‘बिहारियों का अपमान’ करार दिया। उन्होंने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए कहा:
- घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिसकर्मी पर बिहार में एफआईआर दर्ज कर ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए फांसी दी जाए।
- मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
- देश के अन्य राज्यों में काम कर रहे बिहारियों की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करे।
- बिहार में ही कल-कारखाने लगाकर रोजगार के साधन पैदा किए जाएं ताकि बिहारियों को जान जोखिम में डालकर पलायन न करना पड़े।
माले नेता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुटकी लेने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘मार दिया तो क्या हुआ’ का बयान देने वाले जीतन राम मांझी और ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ का नारा देने वाले चिराग पासवान की कड़े शब्दों में आलोचना की।
पुतला दहन के साथ खत्म हुआ प्रदर्शन
सभा के अंत में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में नागरिक समाज के दीनबंधु प्रसाद, रामबली सिंह, राजद नेता शाहीद हुसैन, मो० सगीर, मनोज कुमार सिंह, मनोज शर्मा, मो० सोनू, राजू झा और दीपक यदुवंशी समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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