सकरा |मुजफ्फरपुर |  ‘महिला आरक्षण बिल 2023’ को लेकर सियासत गरमा गई है। मुजफ्फरपुर जिले के सकरा और मुरौल प्रखंड कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने सकरा प्रखंड कांग्रेस आश्रम कार्यालय से पैदल मार्च निकालते हुए सकरा प्रखंड मुख्यालय (आश्रम चौक) तक प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार का पुतला फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सकरा प्रखंड मुख्यालय (आश्रम चौक) पर महिला आरक्षण बिल 2023 को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार का पुतला फूंकते हुए सकरा और मुरौल प्रखंड के कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता।

बिल के समर्थन पर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस का पलटवार

प्रदर्शन के दौरान जब रिपोर्टर ने उमेश कुमार राम से संसद में बिल को लेकर कांग्रेस पर लगे ‘सपोर्ट न करने’ के आरोपों के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने तीखा जवाब दिया।

तस्‍वीर में दायें से न्‍यूज भारत टीवी के कैमरा पर अपनी बात रखते हुए  उमेश कुमार राम (ए०आई०सी०सी० मेम्बर), मनोज कुमार सिंह (अध्यक्ष, सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी)एवं सरोज कुमार (कांग्रेस कार्यकर्ता)

उमेश कुमार राम (सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं पूर्व प्रत्याशी, सकरा विधानसभा): रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए उमेश कुमार राम ने कहा, “हमारी स्पष्ट मांग है कि केंद्र सरकार केवल बिल लाकर इतिश्री न करे। हमारी पार्टी की मांग है कि 2023 में लाया गया महिला बिल तुरंत प्रभाव से धरातल पर लागू किया जाए। कांग्रेस पार्टी का स्टैंड साफ है—हम महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना चाहते हैं। केंद्र सरकार अपनी दुरंगी नीति छोड़कर इसे जल्द से जल्द क्रियान्वित करे।”

राजनीतिक स्टंट है मोदी सरकार की नीति”

प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस बिल को आगामी चुनावों से जोड़कर देखा।

मनोज कुमार सिंह (कार्यकारी अध्यक्ष, सकरा प्रखंड): मनोज कुमार सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “2023 के बिल को तोड़-मरोड़ कर पेश करना केवल आने वाले तीन राज्यों के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश है। नरेंद्र मोदी सरकार की यह दोहरी नीति है। पहले नोटबंदी, फिर अन्य मुद्दों के नाम पर जनता को ठगा गया और अब महिला आरक्षण के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। ‘जनता को तोड़ो और राजनीति करो’—यही भाजपा की कार्यशैली है, जिससे आज पूरा देश आहत है।”

आगे और तेज होगा आंदोलन”

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।

सरोज कुमार (कांग्रेस कार्यकर्ता): कांग्रेस कार्यकर्ता सरोज कुमार ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी की सरकार सिर्फ लोगों को लाइनों में खड़ा करने और परेशान करने का काम करती है—चाहे वो आधार का मुद्दा हो या नोटबंदी। महिला बिल के नाम पर भी वे जनता का ध्यान भटका रहे हैं। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं, कांग्रेस पार्टी का हाथ मजबूत करेंगे और सरकार को जनता की आवाज सुननी ही होगी।”

इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर केंद्र सरकार को बैकफुट पर धकेलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

महिला आरक्षण बिल (2023) क्या है?

महिला आरक्षण बिल, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा गया है, संसद (लोकसभा) और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का संवैधानिक प्रावधान करता है। इसका उद्देश्य निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। हालांकि, इसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों से जोड़े जाने के कारण विपक्ष इसे लागू करने की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

प्रदर्शन में इनकी रही मुख्य भागीदारी

इस प्रदर्शन में स्थानीय स्तर के कई प्रमुख कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

  • उमेश कुमार राम (ए०आई०सी०सी० मेम्बर)
  • मनोज कुमार सिंह (अध्यक्ष, सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी)
  • मो० गुलाम मैनुद्दीन (अध्यक्ष, मुरौल प्रखण्ड युवा कांग्रेस)
  • अनीता देवी (बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रतिनिधि)
  • अन्य प्रमुख कार्यकर्ता: शिवम कुमार, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, डा० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, राकेश कु० राय, रबीन्द्र पोद्दार, उपेन्द्र राम, मो० जसीम, संजय दास, मो० सुल्तान, नुनू राय सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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