ताजपुर/समस्तीपुर : ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता के घरों का चूल्हा ठंडा कर दिया है। शहर के उपभोक्ता पिछले काफी समय से इस दोहरी मार को झेल रहे हैं—जहाँ उनसे टैक्स की वसूली तो ‘शहर’ के हिसाब से की जा रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं ‘गांव’ के स्तर की भी नहीं हैं। इसी प्रशासनिक उपेक्षा और गैस एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी को अल्टीमेटम दिया है।

“इंतजार की इंतेहा: ताजपुर में रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच एजेंसियां और उपभोक्ता आमने-सामने। जहां एक ओर गोदामों में गैस की उपलब्धता के दावे किए जाते हैं, वहीं आम जनता को 45 दिन की लंबी प्रतीक्षा सूची में धकेल दिया गया है।”

दोहरी मार: शहर का दर्जा, लेकिन गैस में गांववाली देरी

ताजपुर के निवासियों के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में इस विसंगति को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि ताजपुर वर्ष 2021 से ही ‘नगर परिषद’ के रूप में अस्तित्व में है। सरकारी नियमों के मुताबिक, यहाँ होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन रजिस्ट्री जैसे सभी महत्वपूर्ण शुल्क शहरी दरों पर वसूले जा रहे हैं।

लेकिन, जब बात रसोई गैस आपूर्ति की आती है, तो गैस एजेंसियां खुद को प्रशासनिक भूल या अस्पष्टता की आड़ में बचा लेती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 25 दिनों के भीतर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 45 दिन है। ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र होने के बावजूद, यहां की गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को 45 दिनों का इंतजार करवा रही हैं।

एजेंसियों का पल्ला झाड़ने वाला तर्क

जब इस देरी पर एजेंसी संचालकों से सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला होता है। उनका तर्क होता है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने ताजपुर को अभी तक अपनी आधिकारिक सूची में ‘शहरी क्षेत्र’ के रूप में अपडेट नहीं किया है। माले नेता ने इसे स्थानीय जनता के साथ सरासर अन्याय और प्रशासन की लापरवाही करार दिया है।

आम गृहणियों और परिवारों पर संकट

45 दिनों के लंबे इंतजार के कारण आम परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। एक सिलेंडर के भरोसे रहने वाले घरों में गैस खत्म होने पर उन्हें या तो महंगे दामों पर कालाबाजारी से गैस खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, या फिर वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले पर निर्भर होना पड़ता है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टकारी बनी हुई है।

माले का अल्टीमेटम: सुधार नहीं, तो आंदोलन

भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट कहा है:

ताजपुर नगर परिषद से शहरी टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा देने के वक्त उसे गांव बता दिया जाता है। यह प्रशासनिक विफलता है। प्रशासन तत्काल गैस एजेंसियों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि बुकिंग के अधिकतम 25 दिनों के भीतर हर उपभोक्ता को सिलेंडर मिल जाए। यदि जल्द ही इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हम आम उपभोक्ताओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र जनांदोलन शुरू करेंगे।”

मुख्य मांगें:

  • 25-दिवसीय चक्र: गैस बुकिंग के 25 दिन के भीतर सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित हो।
  • स्थिति स्पष्ट करें: प्रशासन पेट्रोलियम मंत्रालय से समन्वय कर ताजपुर को शहरी क्षेत्र की सूची में शामिल कराए।
  • एजेंसियों की जांच: गैस एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी हो।

अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस विरोध के बाद प्रशासन गैस एजेंसियों पर नकेल कसता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

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