आम आदमी की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे भ्रष्ट तंत्र के ये प्यादे; सतर्कता विभाग की कार्रवाई से जिले के अधिकारियों में मचा हड़कंप

पटना/मधुबनी: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को मधुबनी जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में तैनात लिपिक और उनके निजी दलाल को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में पनप रहे ‘दलाली तंत्र’ की कलाई खोल कर रख दी है।

रिश्वत का ‘खेल’ हुआ बेनकाब: मधुबनी के बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में 10,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार लिपिक साकेत कुमार सिंह और बिचौलिया परमानंद झा, जिन्हें निगरानी ब्यूरो की टीम ने दबोचा है।

क्या था पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भूमि विवाद और अतिक्रमण से जुड़ा है। परिवादी रविंद्र यादव, जो दहिला (अरेर, मधुबनी) के निवासी हैं, पिछले काफी समय से अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। सरकारी नियमानुसार, अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में बैठे लिपिक साकेत कुमार सिंह ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया था।

पीड़ित रविंद्र यादव का आरोप है कि लिपिक साकेत कुमार सिंह ने इस काम को अंजाम तक पहुँचाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। इसमें उनका साथ दे रहा था बिचौलिया परमानंद झा, जो सरकारी और आम जनता के बीच ‘सेटिंग’ करने का काम करता था।

जाल बिछाकर की गई कार्रवाई

परेशान होकर पीड़ित ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना का दरवाजा खटखटाया। ब्यूरो ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले इसका सत्यापन (Verification) कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद, निगरानी ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) समीर चंद्र झा के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावा दल’ (Raid Team) का गठन किया गया।

22 अप्रैल की सुबह, जैसे ही लिपिक साकेत कुमार सिंह और दलाल परमानंद झा ने 10,000 रुपये की घूस की राशि ली, निगरानी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। कार्यालय परिसर में उस वक्त मौजूद अन्य कर्मी और लोग यह सब देखकर दंग रह गए।

मुजफ्फरपुर विशेष अदालत में होगी पेशी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में कांड संख्या- 048/26 दर्ज किया है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दोनों आरोपियों को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय (Special Vigilance Court) में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद से मधुबनी जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

भ्रष्टाचार पर चोट, जनता में राहत

यह गिरफ्तारी एक बार फिर यह संदेश देती है कि सरकारी कार्यालयों में काम के बदले ‘सुविधा शुल्क’ देने की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निगरानी विभाग की इस मुस्तैदी से उन आम लोगों को उम्मीद बंधी है जो दलालों और भ्रष्ट बाबुओं के कारण सालों से सरकारी दफ्तरों में धक्के खा रहे हैं।


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