समस्तीपुर | 19 फरवरी, 2026

शहर की लाइफलाइन को पुनर्जीवित करने की जगी आस, जिला विकास मंच ने जारी किया पोस्टर

समस्तीपुर की ऐतिहासिक पहचान और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार रही समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। जिला विकास मंच, समस्तीपुर ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कमर कस ली है। मंच द्वारा जारी ताजा पोस्टर के अनुसार, आगामी 22 फरवरी, 2026 को शहर में एक विशाल नागरिक मार्च निकाला जाएगा।

22 फरवरी को सरकारी बस स्टैंड पर जुटेगा जनसैलाब

जिला विकास मंच ने आह्वान किया है कि चीनी मिल की बहाली के लिए सभी नागरिक रविवार (22 फरवरी) को दोपहर 3:00 बजे स्थानीय सरकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हों। यहाँ से शुरू होने वाला यह मार्च प्रशासन और सरकार तक क्षेत्र की जनता की दबी हुई आवाज को पहुँचाने का काम करेगा।

कल माधुरी चौक पर गूंजा था इंकलाब

विदित हो कि मंगलवार (18 फरवरी) को रेल विकास-विस्तार मंच और जिला विकास मंच के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने माधुरी चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया था।

  • हुंकार: मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी की अध्यक्षता में आयोजित सभा में वक्ताओं ने मिल को चालू करने की मांग को लेकर हुंकार भरी।
  • दर्द: सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने कहा कि 1917 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित यह मिल 1995 में बंद होने के बाद से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है।
  • समर्थन: राजद नेता राकेश ठाकुर और माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने भी इस लड़ाई में किसानों, मजदूरों और नौजवानों को एकजुट होने की अपील की है।

क्यों जरूरी है मिल का चालू होना?

1917 में स्थापित यह मिल न केवल चीनी उत्पादन का केंद्र थी, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार देती थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त भूमि और रेल-सड़क मार्ग की बेहतर कनेक्टिविटी मौजूद है। 1995 से बंद पड़ी इस मिल को चालू करना अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि समस्तीपुर के मान-सम्मान की लड़ाई बन गई है।

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