‘साहब! क्या हमारे बच्चों को हक नहीं कि वे अपने आँगन में पढ़ सकें?’

मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता): बिहार के शैक्षिक मानचित्र पर विकास की लंबी-चौड़ी लकीरें खींची जा रही हैं, ‘पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार’ के नारे गूँज रहे हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर जिले का बन्दरा प्रखंड आज भी एक बुनियादी हक के लिए छटपटा रहा है। यह हक है—उच्च शिक्षा का। आजादी के अमृत काल में भी यहाँ के मेधावी छात्रों के सपने मिलों दूर तक फैली धूल भरी सड़कों और असुरक्षित सफर की भेंट चढ़ रहे हैं। आलम यह है कि सरकार की ‘हर प्रखंड, एक डिग्री कॉलेज’ की घोषणा के बाद भी बन्दरा का नाम सरकारी फाइलों से गायब है, जिसने यहाँ के हजारों परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

तीन शक्ति केंद्रों से एक ही गुहार

अपनी इस मार्मिक पीड़ा को लेकर बन्दरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने एक साथ तीन महत्वपूर्ण शक्ति केंद्रों का दरवाजा खटखटाया है। श्याम किशोर सिंह के नेतृत्व में प्रखंड के छात्र-छात्राओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने माननीय शिक्षा मंत्री (बिहार सरकार), माननीय विधान पार्षद (तिरहुत स्नातक क्षेत्र) और माननीया विधायक (गायघाट विधानसभा) के नाम एक विनम्र किंतु बेहद भावुक आवेदन प्रेषित किया है।

इस त्रिकोणीय मांग पत्र में क्षेत्र की जनता ने अपनी वर्षों की उपेक्षा का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जहाँ एक ओर सरकार हर प्रखंड में कॉलेज खोलने का श्रेय ले रही है, वहीं बन्दरा जैसे पिछड़े क्षेत्र को इस सूची से बाहर रखना यहाँ के भविष्य के साथ अन्याय है।

दूरी और मजबूरी: शिक्षा के पथ पर कांटे

बन्दरा प्रखंड आज भी जिले के अन्य प्रखंडों की तुलना में विकास के पायदान पर सबसे पीछे खड़ा है। यहाँ के विद्यार्थियों के लिए इंटरमीडिएट के बाद की पढ़ाई एक ‘जंग’ लड़ने के समान है। गाँव की कच्ची पगडंडियों से निकलकर मुजफ्फरपुर शहर या अन्य दूरस्थ कॉलेजों तक पहुँचने में छात्रों का आधा दिन सफर की थकान में ही गुजर जाता है।

अभिभावकों का कहना है कि सबसे बुरा हाल छात्राओं का है। उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित परिवहन की कमी और स्थानीय स्तर पर कॉलेज न होने के कारण कई मेधावी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वाने के लिए माता-पिता मजबूर हैं। यह केवल एक कॉलेज की मांग नहीं है, बल्कि उन हजारों आँखों के काजल की रक्षा की गुहार है जो पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

सरकारी घोषणा और बन्दरा की शून्यउपलब्धि

बिहार सरकार की वह घोषणा अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी थी जिसमें प्रत्येक प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज की स्थापना का संकल्प लिया गया था। इस घोषणा से बन्दरा के लोगों में एक उम्मीद जागी थी कि अब उनके बच्चों को मुजफ्फरपुर या दरभंगा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन जब हाल ही में जारी हुई सूची में बन्दरा प्रखंड का नाम नदारद पाया गया, तो यहाँ के विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा और गहरी चिंता व्याप्त हो गई।

बंदरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों का कहना है कि बन्दरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ से मुख्य शहरों की दूरी काफी अधिक है। ऐसे में यहाँ डिग्री कॉलेज का न होना इस क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

ज्ञापन के 4 मुख्य बिंदु: क्यों जरूरी है यहाँ कॉलेज?

  1. शैक्षणिक पिछड़ापन: बन्दरा की साक्षरता और उच्च शिक्षा के अनुपात को सुधारने का एकमात्र रास्ता स्थानीय डिग्री कॉलेज है।
  2. सुरक्षा और बेटियाँ: घर के पास कॉलेज होने से छात्राओं का ‘ड्रॉप-आउट’ रेट शून्य होगा और वे बिना किसी डर के स्नातक की डिग्री ले सकेंगी।
  3. आर्थिक मार: दूर जाकर पढ़ने में लगने वाला भारी बस किराया और हॉस्टल का खर्च यहाँ के गरीब किसानों और मजदूरों की कमर तोड़ रहा है।
  4. क्षेत्रीय असंतुलन: जब अन्य प्रखंडों को कॉलेज मिल रहा है, तो विकास की दृष्टि से पिछड़े बन्दरा को वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।

एक विनम्र आर्त पुकार

प्रेषक श्याम किशोर सिंह और बन्दरा के नागरिकों ने अपने पत्र में किसी विरोध या आक्रोश के बजाय एक ‘विनम्र निवेदन’ किया है। उन्होंने माननीय शिक्षा मंत्री की दूरदर्शिता, तिरहुत स्नातक MLC के शैक्षणिक प्रेम और क्षेत्रीय विधायक की कर्तव्यनिष्ठा पर भरोसा जताते हुए आग्रह किया है कि बन्दरा की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए।

क्या सुनेगी सरकार? :क्या बन्दरा के मेधावी छात्रों को अपनी ही मिट्टी पर स्नातक की टोपी पहनने का मौका मिलेगा? क्या सरकारी फाइलों में दबा यह प्रखंड कभी विकास की मुख्यधारा से जुड़ पाएगा? ये सवाल आज बन्दरा की सड़कों पर तैर रहे हैं। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस ‘शैक्षणिक रेगिस्तान’ में उम्मीद की कितनी जल्दी बारिश करते हैं। बन्दरा की जनता को पूर्ण विश्वास है कि उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

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