UGC गाइडलाइंस पर रोक के खिलाफ समस्तीपुर में छात्र-युवाओं का महासंग्राम; ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की उठी मांग

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समस्तीपुर। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव को मिटाने के उद्देश्य से प्रस्तावित UGC गाइडलाइंस 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद पूरे देश में विरोध की लहर दौड़ पड़ी है। इसी कड़ी में आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शनिवार को समस्तीपुर की सड़कों पर छात्र-युवाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका के इस रुख को सामाजिक न्याय पर हमला करार दिया。

पटेल मैदान से शुरू हुआ आक्रोश मार्च

दोपहर करीब 12:30 बजे समस्तीपुर के ऐतिहासिक पटेल मैदान गोलंबर पर छात्र और युवा कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा。 हाथों में लाल झंडे और विरोध की तख्तियां लिए यह ‘अखिल भारतीय प्रतिवाद मार्च’ शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ अनुमंडल कार्यालय तक पहुँचा। कार्यकर्ताओं ने जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के समक्ष अपनी मांगों को बुलंद किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की。

संस्थानों में बढ़ता भेदभाव और सरकार की मंशा

प्रदर्शन के दौरान मुख्य बैनर पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर और शहीद छात्र रोहित वेमुला के चित्र अंकित थे。 बैनर पर लिखे संदेश— “अत्याचार अधिकार नहीं है! समानता की मांग करना प्रतिशोध नहीं है!”—ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र अब परिसरों में बढ़ते जातीय और मानसिक उत्पीड़न को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं。 उनकी मांग है कि रोहित एक्ट की तर्ज पर ही यूजीसी की गाइडलाइंस को सख्ती से लागू किया जाए ताकि किसी और छात्र को भेदभाव के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े。

“चोर दरवाजे से अधिकार छीन रही है भाजपा” : गौतम

सभा को संबोधित करते हुए आइसा जिला कमेटी के नेता गौतम ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “यूजीसी एक्ट 1956 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने (Promotion of Equity) के लिए जो बिल लाया गया था, वह वंचित वर्गों के छात्रों के लिए सुरक्षा कवच था。 इसमें एक ‘असमानता समिति’ (Inequality Committee) के गठन का प्रावधान था, जो जाति, धर्म या लिंग के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव की निष्पक्ष जांच करती और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करती”。

गौतम ने आगे कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा नीत एनडीए सरकार ने इस महत्वपूर्ण कानून पर संसद में खुली बहस करने के बजाय, चोर दरवाजे से याचिकाएं दायर करवाकर इस पर रोक लगवा दी है। सरकार का ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा केवल एक चुनावी ढकोसला है। असल में यह सरकार धार्मिक उन्माद फैलाकर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है और युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है”

आर-पार की लड़ाई का एलान

प्रतिवाद मार्च के समापन पर वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यह केवल एक शुरुआत है। यदि यूजीसी की उन गाइडलाइंस को बहाल नहीं किया गया जो दलित, पिछड़ो और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करती हैं, तो यह आंदोलन केवल समस्तीपुर तक सीमित नहीं रहेगा。 आइसा, आरवाईए, भाकपा माले और तमाम बहुजन संगठन एकजुट होकर दिल्ली की सत्ता को चुनौती देंगे。

प्रदर्शन में छात्र नेताओं ने साफ़ कहा कि परिसरों का “भगवाकरण” और शिक्षा का “निजीकरण” करके सरकार गरीबों के बच्चों को उच्च शिक्षा से बाहर करना चाहती है। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र प्रतिनिधि, स्थानीय युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने एक सुर में सामाजिक समानता के कानून को लागू करने की मांग की。

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