Saturday, September 12, 2026

भ्रष्ट स्कूलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’:शिक्षा के नाम पर ‘सफेदपोश’ ठगी, क्या आपका बच्चा भी किसी ‘फर्जी’ सीबीएसई स्कूल का शिकार है?

ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

रिपोर्ट : एस. एस. कुमार पंकज

आजकल हर गली-नुक्कड़ पर ‘इंटरनेशनल’ और ‘पब्लिक स्कूल’ के बोर्ड लटके मिल जाएंगे। ऊंची इमारतें, रंग-बिरंगे झूले और एयर-कंडीशन्ड क्लासरूम का लालच देकर अभिभावकों को फंसाया जाता है। सबसे बड़ा हथियार होता है— सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) या सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”) होने का दावा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य संवारने का दावा करने वाले इन स्कूलों में से अधिकांश का नाता सीबीएसई बोर्ड से दूर-दूर तक नहीं है? यह शिक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा के नाम पर खुली अराजकता और ठगी का कारोबार है।


शब्द का खेल: सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) बनाम सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”)

अभिभावकों को ठगने के लिए निजी स्कूल एक बहुत ही शातिर शब्दावली का प्रयोग करते हैं। वे विज्ञापन में लिखते हैं— “CBSE पैटर्न पर आधारित”

  • हकीकत: ‘पैटर्न’ का मतलब सिर्फ इतना है कि वे एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें पढ़ा रहे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त है।
  • धोखा: मान्यता न होने के बावजूद ये स्कूल सीबीएसई के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूलते हैं, जबकि कानूनी तौर पर उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

कैसे चलता है इन स्कूलों का गोरखधंधा‘?

आपके मन में सवाल होगा कि अगर स्कूल की मान्यता नहीं है, तो बच्चे 10वीं और 12वीं की परीक्षा कैसे देते हैं? यहीं से शुरू होता है सेटिंगऔर बच्चा जमा करने का खेल।

  • बच्चा कलेक्शन सेंटर: ये छोटे अनरजिस्टर्ड स्कूल केवल 8वीं या 9वीं कक्षा तक बच्चों को ‘जमा’ करते हैं।
  • फॉर्म की खरीद-फरोख्त: जब बच्चा बोर्ड परीक्षा के नजदीक पहुंचता है, तो ये स्कूल किसी अन्य शहर या दूरदराज के ‘मान्यता प्राप्त’ (Affiliated) स्कूल से सांठगांठ करते हैं।
  • फर्जी उपस्थिति: आपके बच्चे का नामांकन उस मान्यता प्राप्त स्कूल में ‘डमी’ छात्र के रूप में दिखा दिया जाता है। बच्चा परीक्षा किसी और स्कूल के नाम पर देता है, जिसे उसने कभी देखा तक नहीं होता। इस ‘सेटिंग’ के बदले मोटा कमीशन एक स्कूल से दूसरे स्कूल को जाता है।

यूडायस (UDISE) कोड: स्कूल की कुंडली खंगालने का अचूक हथियार

शिक्षा व्यवस्था की इस अराजकता से बचने के लिए भारत सरकार ने UDISE (Unified District Information System for Education) पोर्टल बनाया है। यह हर असली स्कूल का ‘आधार कार्ड’ है।

कैसे करें जांच?

  1. UDISE Code की मांग करें: स्कूल प्रशासन से उनका 11 अंकों का यूडायस कोड मांगें।
  2. ऑनलाइन वेरिफिकेशन: UDISE+ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Know Your School’ सेक्शन में यह कोड डालें।
  3. क्या दिखेगा सच? * स्कूल किस कक्षा तक मान्यता प्राप्त है?
    • शिक्षक कितने हैं और वे प्रशिक्षित (Trained) हैं या नहीं?
    • स्कूल के पास अपनी जमीन है या किराए की बिल्डिंग?
    • शौचालय, बिजली और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं कागजों पर हैं या असलियत में?

चेतावनी: यदि कोई स्कूल यूडायस कोड देने से कतराए या पोर्टल पर उसकी जानकारी संदिग्ध लगे, तो समझ लीजिए कि वहां आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं है।


सीबीएसई (CBSE) के कड़े नियम बनाम निजी स्कूलों की बदहाली

सीबीएसई बोर्ड किसी स्कूल को मान्यता देने से पहले कड़े मानकों की सूची जारी करता है, लेकिन ठगी करने वाले स्कूल इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं:

मानक (Norms)सीबीएसई का प्रावधान‘फर्जी’ स्कूलों की हकीकत
शिक्षककेवल B.Ed/CTET पास प्रशिक्षित शिक्षक।कम वेतन पर रखे गए अनट्रेन्ड युवा, जिन्हें खुद विषय का ज्ञान नहीं।
खेल मैदानस्कूल परिसर में एक निश्चित क्षेत्रफल का खेल मैदान अनिवार्य।छत पर या छोटी गली में खेलकूद का दिखावा।
वेतनशिक्षकों को सरकारी स्केल के अनुसार बैंक ट्रांसफर द्वारा वेतन।नकद (Cash) में बहुत कम वेतन, रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर।
लाइब्रेरी/लैबआधुनिक लैब और हजारों किताबों वाली लाइब्रेरी।सिर्फ नाम की अलमारी, जिसमें पुरानी धूल फांकती किताबें।

अनट्रेन्ड टीचर: शिक्षा की नींव पर चोट

इन प्राइवेट स्कूलों में सस्ते श्रम का बोलबाला है। अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों को मोटी सैलरी न देनी पड़े, इसलिए ये स्कूल स्नातक (Graduate) पास युवाओं को 3-7 हजार रुपये में रख लेते हैं।

  • इन शिक्षकों के पास पढ़ाने का कोई औपचारिक प्रशिक्षण (B.Ed/D.El.Ed) नहीं होता।
  • नतीजतन, बच्चों की नींव कमजोर रह जाती है और वे केवल रट्टा मारने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ते हैं।

आरटीई (RTE) पर बगले झांकतेस्कूल संचालक

शिक्षा का अधिकार कानून (Right to Education – RTE) के तहत हर निजी स्कूल को 25% सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं।

  • अराजकता: जब भी कोई अभिभावक आरटीई के तहत नामांकन की बात करता है, तो ये स्कूल टालमटोल करने लगते हैं।
  • कारण: क्योंकि ये स्कूल खुद को कागजों पर ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ बता देते हैं या अपनी मान्यता को छिपा लेते हैं ताकि उन्हें मुफ्त शिक्षा न देनी पड़े।

अभिभावक क्या करें? (सुरक्षा चेकलिस्ट)

नामांकन से पहले केवल स्कूल की पेंटिंग और यूनिफॉर्म न देखें, बल्कि ये सवाल पूछें:

  1. Affiliation Letter: स्कूल से सीबीएसई का एफिलिएशन लेटर मांगें और उस पर लिखे Affiliation Number को CBSE SARAS पोर्टल पर चेक करें।
  2. Transfer Certificate (TC): पूछें कि क्या स्कूल डिजिटल टीसी जारी करने के लिए अधिकृत है?
  3. शिक्षक प्रोफाइल: स्कूल से शिक्षकों की योग्यता का ब्योरा मांगें।

ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल

शिक्षा माफियाओं का सबसे बड़ा और शातिर हथियार है— ट्रस्ट (Trust) या सोसायटीका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट। जब कोई जागरूक अभिभावक स्कूल की मान्यता (Affiliation) के बारे में पूछता है, तो स्कूल संचालक तुरंत दीवार पर टंगा एक फ्रेम किया हुआ सरकारी कागज दिखा देते हैं, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा होता है: पंजीकृत (Registered) – भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा।” अभिभावक इसे ही स्कूल की असल मान्यता समझकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यहीं सबसे बड़ा ट्रस्ट गेम शुरू होता है।

क्या है ट्रस्ट और मान्यता का अंतर?

सच्चाई यह है कि किसी भी चैरिटेबल ट्रस्ट या एनजीओ (NGO) का पंजीकरण कराना बेहद आसान प्रक्रिया है। यह पंजीकरण केवल यह बताता है कि ‘अमुक संस्था’ एक कानूनी इकाई है जो सामाजिक कार्य कर सकती है। लेकिन, ट्रस्ट का निबंधन होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उस संस्था को स्कूल चलाने या सीबीएसई (CBSE) बोर्ड से जुड़ने की अनुमति मिल गई है।

सीबीएसई बोर्ड की मान्यता प्राप्त करने के लिए स्कूल को ‘ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन’ के अलावा कई कठिन चरणों से गुजरना पड़ता है, जैसे:

  1. NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र): संबंधित राज्य सरकार से शिक्षा विभाग की अनुमति।
  2. भूमि और भवन मानक: स्कूल के नाम पर कम से कम 1.5 से 2 एकड़ जमीन का मालिकाना हक या लंबी लीज।
  3. एफिलिएशन कोड: सीबीएसई द्वारा जारी एक विशिष्ट 7 अंकों का नंबर।

कैसे होता है कागजी घालमेल?

ये फर्जी स्कूल संचालक ट्रस्ट के नाम पर बैंक खाता खोलते हैं और रसीद पर ‘सीबीएसई पैटर्न’ छाप देते हैं। वे अक्सर तर्क देते हैं कि हमारी संस्था (Trust) दिल्ली से रजिस्टर्ड है, इसलिए हमें सीबीएसई की जरूरत नहीं है।” यह सरासर झूठ है। सीबीएसई एक परीक्षा बोर्ड है, न कि कोई ट्रस्ट।

अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये स्कूल अपनी वैन(गाड़ी), रसीद बुक और विज्ञापनों पर ‘ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर’ ऐसे लिखते हैं जैसे वह सीबीएसई का मान्यता नंबर हो। कई बार तो ये स्कूल एक ही ट्रस्ट के नाम पर शहर में 4-5 शाखाएं खोल लेते हैं, जबकि मान्यता केवल एक मुख्य शाखा के पास होती है। बाकी शाखाएं केवल ‘फीडर सेंटर’ या ‘बच्चा जमा केंद्र’ के रूप में अवैध रूप से चलती रहती हैं।

अभिभावक कैसे पहचानें यह जाल?

जब आप स्कूल जाएं, तो सोसायटी रजिस्ट्रेशन (Society Registration) के बजाय स्कूल एफिलिएशन लेटर (Affiliation Letter) की मांग करें। ध्यान रहे:

  • यदि स्कूल कहता है कि “अभी प्रोसेस में है” या “ट्रस्ट के नाम पर चल रहा है,” तो सावधान हो जाएं।
  • ट्रस्ट का निबंधन केवल संस्था की वैधता है, शिक्षा की गुणवत्ता या बोर्ड की गारंटी नहीं।
  • असली सीबीएसई स्कूल के पास एक Affiliation Number और एक School Code दोनों होते हैं।

इन स्कूलों का यह ‘गोरखधंधा’ तब तक फलता-फूलता रहेगा जब तक अभिभावक ‘ट्रस्ट के निबंधन’ और ‘बोर्ड की मान्यता’ के बीच के इस बारीक लेकिन घातक अंतर को नहीं समझेंगे। शिक्षा के इन सौदागरों के लिए बच्चा केवल एक ‘रोल नंबर’ है जिससे वे साल भर मोटी फीस वसूलते हैं, जबकि अंत में छात्र के हाथ में केवल एक ‘अमान्य’ या ‘सेटिंग’ वाला सर्टिफिकेट थमा दिया जाता है।


भ्रष्ट स्कूलों पर सर्जिकल स्ट्राइक‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

अगर आपको पता चलता है कि आपके बच्चे का स्कूल फर्जी सीबीएसई (CBSE) दावों, यूडायस (UDISE) विसंगतियों या ट्रस्ट के नाम पर ठगी कर रहा है, तो चुप न बैठें। आपकी एक शिकायत न केवल आपके बच्चे का भविष्य बचाएगी, बल्कि हजारों अन्य परिवारों को लुटने से रोकेगी।

सीबीएसई (CBSE) के पास ऑनलाइन शिकायत (Saras Portal)

सीबीएसई ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है।

  • प्रक्रिया: सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Public Grievance’ सेक्शन में जाएं या सीधे CBSE SARAS पोर्टल पर लॉगिन करें।
  • क्या लिखें: स्कूल का नाम, पता और उनके द्वारा किए जा रहे फर्जी दावों (जैसे: बिना मान्यता के सीबीएसई लोगो का इस्तेमाल) का प्रमाण संलग्न करें।

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत

किसी भी निजी स्कूल पर नकेल कसने की पहली शक्ति जिला प्रशासन के पास होती है।

  • अपने जिले के DEO (District Education Officer) जिला शिक्षा अधिकारी या BSEO (Block Education Officer) प्रखंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में एक हस्ताक्षरित आवेदन दें।
  • इसमें स्कूल के UDISE कोड की अनुपलब्धता या RTE (शिक्षा का अधिकार) के नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट जिक्र करें।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई पोर्टल

आजकल लगभग हर राज्य में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सक्रिय है, जहाँ शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है।

  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन – 1076 या ‘IGRS’ पोर्टल।
  • बिहार: मुख्यमंत्री जनता दरबार या ‘लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ के तहत आवेदन।
  • मध्य प्रदेश/राजस्थान: ‘CM Helpline’ 181 पर कॉल करें।

महत्वपूर्ण टोल-फ्री नंबर और संपर्क सूत्र (Helpdesk)

अभिभावक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित नंबरों का उपयोग कर सकते हैं:

विभाग/संस्थाहेल्पलाइन नंबर / ईमेलउद्देश्य
CBSE हेड ऑफिस1800-11-8002मान्यता और बोर्ड परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी
NCPCR (बाल अधिकार आयोग)011-23478200स्कूल द्वारा प्रताड़ित करने या RTE उल्लंघन पर
MHRD (शिक्षा मंत्रालय)011-23383451राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा संबंधी बड़ी शिकायतें
Cyber Crime Portal1930यदि स्कूल ने फीस के नाम पर ऑनलाइन ठगी की है

सावधान रहें: शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • साक्ष्य जुटाएं: स्कूल के विज्ञापनों के पंपलेट, फीस की रसीद और उनके लेटरहेड की फोटो जरूर रखें जहाँ उन्होंने ‘CBSE’ या ‘Registered’ होने का फर्जी दावा किया है।
  • गोपनीयता: यदि आप डरते हैं कि स्कूल आपके बच्चे को परेशान करेगा, तो आप अपनी पहचान गुप्त रखते हुए ‘गुमनाम शिकायत’ (Anonymous Complaint) भी पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।
  • यूडायस की स्क्रीनशॉट: UDISE+ पोर्टल पर अगर स्कूल का डेटा ‘In-active’ या ‘Not Found’ दिखा रहा है, तो उसका स्क्रीनशॉट शिकायत के साथ जरूर लगाएं।

स्‍कूलों की मान्‍यता खुद कैसे करे चेक, जानें स्‍टेप बाय स्‍टेप

UDISE+ पोर्टल पर स्कूल की जांच करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले अपने ब्राउज़र (Google Chrome या कोई अन्य) में udiseplus.gov.in टाइप करें और एंटर दबाएं।

चरण 2: ‘Know Your School’ (अपने स्कूल को जानें) विकल्प चुनें

  • पोर्टल के होमपेज पर आपको ऊपर की तरफ या नीचे स्क्रॉल करने पर “Know Your School” का एक विकल्प/बटन दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  • सीधे लिंक के लिए आप src.udiseplus.gov.in पर भी जा सकते हैं।

चरण 3: सर्च करने का तरीका चुनें वहां आपको स्कूल खोजने के तीन मुख्य विकल्प मिलेंगे:

  1. By UDISE Code: यदि आपके पास स्कूल का 11 अंकों का यूडायस कोड है (जो स्कूल के बाहर बोर्ड पर लिखा होना चाहिए), तो इसे डालकर सीधे सर्च करें।
  2. By Name: यदि कोड नहीं है, तो आप स्कूल के नाम से भी खोज सकते हैं।
  3. By Location: आप राज्य (Bihar), जिला (Muzaffarpur) और ब्लॉक (Sakra) चुनकर भी स्कूलों की सूची देख सकते हैं।

चरण 4: विवरण (Details) भरें

  • अपना राज्य ‘Bihar’ चुनें।
  • कैप्चा कोड (जो स्क्रीन पर टेढ़े-मेढ़े अक्षर दिख रहे हैं) भरें।
  • ‘Search’ बटन पर क्लिक करें।

चरण 5: स्कूल की रिपोर्ट कार्ड देखें सर्च रिजल्ट में स्कूल का नाम आने पर उस पर क्लिक करें। यहाँ आपको स्कूल की पूरी कुंडली मिल जाएगी, जैसे:

  • Category: स्कूल कक्षा 1 से 5 तक है, 1 से 8 तक, या 10वीं-12वीं तक। (यहीं से फर्जीवाड़े का पता चलता है—अगर स्कूल 10वीं तक चल रहा है लेकिन यहाँ केवल 5वीं तक दर्ज है, तो वह अवैध है)।
  • Management: स्कूल प्राइवेट है या सरकारी।
  • Affiliation Board: यहाँ लिखा होगा कि स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त है या State Board (बिहार बोर्ड) से।
  • Status: स्कूल एक्टिव (Active) है या नहीं।

अभिभावकों के लिए कुछ जरूरी टिप्स:

  1. कोड की मांग करें: यदि स्कूल अपना UDISE कोड बताने में आनाकानी करता है, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। हर निबंधित स्कूल के लिए इसे सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
  2. Affiliation No. की जांच: यदि पोर्टल पर स्कूल CBSE दिखाता है, तो वहां एक Affiliation Number भी होगा। आप इस नंबर को CBSE की अपनी वेबसाइट (SARAS पोर्टल) पर जाकर दोबारा क्रॉस-चेक कर सकते हैं कि वह नंबर वैध है या नहीं।
  3. शिक्षक और सुविधाएं: इसी पोर्टल पर आप यह भी देख सकते हैं कि स्कूल में कितने कमरे हैं, कितने शिक्षक ‘ट्रेन्ड’ हैं और वहां शौचालय/पेयजल की क्या स्थिति है।

सावधान रहें: कई स्कूल केवल बिहार सरकार से ‘निबंधन’ (Registration) कराते हैं और बोर्ड पर ‘CBSE पैटर्न’ लिख देते हैं। UDISE पोर्टल आपको स्पष्ट बता देगा कि वह स्कूल वास्तव में CBSE बोर्ड से जुड़ा है या नहीं।

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की मान्यता की जांच करना यूडायस (UDISE) पोर्टल से थोड़ा अलग और अधिक सटीक है। सीबीएसई ने इसके लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है जिसे SARAS (School Affiliation Re-engineered Automation System) कहा जाता है।

सकरा के अभिभावक नीचे दिए गए चरणों का पालन करके किसी भी स्कूल की “असली मान्यता” का पता लगा सकते हैं:

CBSE मान्यता (Affiliation) जांचने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक एफ़िलिएशन वेबसाइट saras.cbse.gov.in पर जाएं।

चरण 2: ‘Check Affiliation’ विकल्प चुनें होमपेज पर आपको “Affiliated Schools” या “List of Affiliated Schools” का विकल्प दिखेगा। यहाँ आप कई तरीकों से खोज सकते हैं:

  • Affiliation Number द्वारा: यदि स्कूल के पास नंबर है (जैसे 330XXX), तो इसे भरें।
  • State-wise (राज्य के अनुसार): बिहार (Bihar) चुनें, फिर जिला (Muzaffarpur) चुनें।
  • School Name: स्कूल का नाम टाइप करें।

चरण 3: ‘Search’ बटन पर क्लिक करें विवरण भरने के बाद सर्च करें। यदि स्कूल वास्तव में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है, तो उसकी पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।

चरण 4: ‘Status’ और ‘Period’ चेक करें (सबसे महत्वपूर्ण) जब स्कूल का नाम स्क्रीन पर आए, तो इन दो चीजों को ध्यान से देखें:

  1. Affiliation Status: यहाँ ‘Grant’ या ‘Active’ लिखा होना चाहिए।
  2. Valid Up To: यह जांचें कि मान्यता किस वर्ष तक वैध है। कई स्कूलों की मान्यता खत्म हो चुकी होती है और वे अवैध रूप से स्कूल चलाते रहते हैं।
  3. Level: यह देखें कि मान्यता Secondary (10वीं तक) है या Senior Secondary (12वीं तक)। कई स्कूल केवल 8वीं या 10वीं तक मान्यता रखते हैं लेकिन 12वीं तक की कक्षाएं चलाते हैं।

याद रखें: सीबीएसई स्पष्ट रूप से कहता है कि बिना एफ़िलिएशन नंबर के कोई भी स्कूल अपने नाम के साथ “CBSE” शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनी अपराध है।

जागिए, वरना देर हो जाएगी : समय निकल जाने पर पछताना होगा

शिक्षा अब सेवा नहीं, एक बेलगाम मुनाफाखोरी का जरिया बन चुकी है। ‘बोर्ड’ के नाम पर चल रहा यह ‘चकमा’ न केवल आपके पैसे की लूट है, बल्कि आपके बच्चे के उन बहुमूल्य वर्षों की बर्बादी भी है जो कभी लौटकर नहीं आएंगे।

याद रखिए, एक चमकती हुई बिल्डिंग कभी अच्छा भविष्य नहीं दे सकती, एक ‘मान्यता प्राप्त’ और ‘नैतिक’ संस्थान ही आपके बच्चे को सही दिशा दे सकता है। अगली बार स्कूल की फीस भरने से पहले, उनका यूडायस कोड और सीबीएसई एफिलिएशन जरूर जांचें। शिक्षा का मंदिर व्यापार का अड्डा नहीं होना चाहिए। आपका सजग रहना ही इन फर्जी स्कूलों की दुकानों पर ताला लगवा सकता है।


ज़कात अल्लाह की अमानत, इसमें ग़रीबों का हक़ तय: रिज़वान रफ़ीक़ी

ज़कात से बदल रही है तक़दीर: विधवाओं को पेंशन और छात्रों को मिल रहा शिक्षा का सहारा”

मुजफ्फरपुर | 15 फरवरी, 2026  समाज से गरीबी के उन्मूलन, बेरोजगारी को समाप्त करने और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ज़कात सेंटर इंडिया द्वारा एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रविवार को शहर के चंदवारा स्थित एक विवाह भवन में भव्य सार्वजनिक संबोधन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को ज़कात की सामूहिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करना और इसके माध्यम से समाज में व्याप्त आर्थिक असंतुलन को दूर करना था।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ ‘तिलावत-ए-क़ुरआन’ से हुआ। उद्घाटन भाषण देते हुए ज़कात सेंटर इंडिया, मुज़फ्फरपुर के अध्यक्ष डॉ. महमूदुल हसन ने ज़कात की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि ज़कात को व्यक्तिगत रूप से देने के बजाय एक संगठित और सामूहिक व्यवस्था के तहत जमा और वितरित किया जाए, तो समाज से ग़रीबी और बेरोज़गारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज़कात सेंटर की स्थापना का मूल उद्देश्य ज़रूरतमंदों को केवल तात्कालिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक तरीके से आत्मनिर्भर बनाना है।

सफलता के आंकड़े : 180 लोग हुए स्वरोजगार से सशक्त

संस्था के सचिव सैयद अहमद ने पिछले तीन वर्षों की विस्तृत कार्य-रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि:

  • संस्था ने पिछले तीन वर्षों में 180 लोगों को विभिन्न रोज़गारों से जोड़कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में सफलता प्राप्त की है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में 29 ज़रूरतमंद और मेधावी छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
  • सामाजिक सुरक्षा के तहत लगभग 80 विधवाओं, असहाय एवं परित्यक्त महिलाओं को संबल प्रदान करने के लिए हर महीने एक हज़ार रुपये की पेंशन सीधे तौर पर दी जा रही है।

पूंजी का संचय ईश्वरीय आदेश के विरुद्ध

मुख्य अतिथि और प्रख्यात इस्लामिक विद्वान रिज़वान अहमद रफ़ीक़ी ने क़ुरआन की आयतों का संदर्भ देते हुए सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “अल्लाह तआला ने माल को जमा कर रोक कर रखने वालों के लिए कड़ी चेतावनी दी है। धन असल में अल्लाह की अमानत है, जिसमें समाज के ग़रीबों और वंचितों का हक़ पहले से तय है।” उन्होंने सूरह तौबा का हवाला देते हुए सचेत किया कि जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और उसे जन-कल्याण में खर्च नहीं करते, उनके लिए कठोर दंड का प्रावधान है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ज़कात अदा करने से संपत्ति घटती नहीं, बल्कि उसमें ईश्वरीय बरकत और बढ़ोतरी होती है।

सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी : मीडिया प्रभारी मोहम्मद इश्तेयाक ने समाज के सक्षम और संभ्रांत लोगों से अपील की कि वे अपनी ज़कात पाबंदी से अदा करें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सामूहिक ज़कात व्यवस्था इस्लाम के सामाजिक न्याय का आधार है और इसे सुदृढ़ बनाना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर शहर की कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें मुख्य रूप से सरफराज आलम, हमीद हुसैन, एजाज़ अहमद, हैदर अली, मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद आरिफ, तारिक जमाल और हस्साम तारिक शामिल थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया।

सदन से सड़क तक रतवारा–ढोली घाट पुल की गूंज: विधायक कोमल सिंह और एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी की बड़ी जीत

मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता)। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत बंदरा और कटरा प्रखंड की लाइफलाइन माने जाने वाले रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) और सिसवाड़ा सियारी नदी (कटरा प्रखंड) पर पुल निर्माण की मांग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विकास के मुद्दों पर चर्चा के बीच, बंदरा और गायघाट क्षेत्र की जनता की दशकों पुरानी पीड़ा को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से रखा गया।

जनप्रतिनिधियों का साझा मोर्चा: सदन में घेरी सरकार

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और गायघाट की लोकप्रिय विधायक कोमल सिंह ने एक सशक्त और साझा रणनीति के तहत सदन में अपनी आवाज बुलंद की। विधान परिषद में श्री ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न संख्या-1/212/746 के माध्यम से सरकार से स्पष्ट पूछा कि क्या रतवारा-ढोली घाट पर आरसीसी पुल निर्माण हेतु ग्रामीणों के लंबे आंदोलन और जिलाधिकारी की अनुशंसा (पत्रांक-2486, दिनांक-02.08.2025) के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है?

वहीं, बिहार विधानसभा में विधायक कोमल सिंह ने नेवा डायरी संख्या-18/2/1933 के जरिए सरकार का ध्यान इस ओर खींचा कि पुल के अभाव में बंदरा के रतवारा और कटरा के सोनपुर पंचायत के सिसवाड़ा सियारी नदी के पास रहने वाले हजारों ग्रामीणों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है या मीलों का चक्कर लगाना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि ग्रामीणों के ‘आवागमन के अधिकार’ की रक्षा हो सके।

विधान सभा में कोमल सिंह  एवं (दायें )विधान परिषद में बंशीधर ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न के माध्‍यम से उठाया आम लोगों के लिए आवाज

मंत्री का जवाब: “प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर है पुल”

सदन में सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने लिखित और मौखिक उत्तर के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ने स्वीकार किया कि इन स्थलों पर पुल निर्माण की आवश्यकता को लेकर विभागीय सर्वे और स्थल निरीक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

उन्होंने सदन को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि उक्त पुल का निर्माण जिला संचालन समिति द्वारा चयनित सूची के क्रमांक 03 पर अंकित है।” मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि निधि की उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर इसे जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति देकर निर्माण कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) को नाव के सहारे  पार करते ग्रामीण

क्षेत्र में खुशी की लहर और आंदोलनकारियों की जीत

सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद बंदरा, मुरौल और कटरा प्रखंड के गांवों में उत्सव जैसा माहौल है। ‘रतवारा–ढोली घाट पुल बनाओ आंदोलन’ के संयोजक श्याम किशोर और अन्य आंदोलनकारियों ने इसे जनता के संघर्ष और जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति की जीत बताया है।

आंदोलन से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यह पुल केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का द्वार खोलेगा।

  • कनेक्टिविटी: इसके बनने से मुजफ्फरपुर का यह हिस्सा सीधे राजधानी पटना से सुगम सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा।
  • आर्थिक लाभ: किसानों की उपज मंडियों तक जल्दी पहुंचेगी।
  • रेलवे-हाईवे संपर्क: यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग और निकटतम रेलवे स्टेशनों से सीधा संपर्क स्थापित करेगा।

विकास की नई इबारत

विधायक कोमल सिंह के कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि वे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और जब तक पुल का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता, वे निरंतर सरकार के संपर्क में रहेंगी। ग्रामीणों को अब पूरी उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इस दिशा में कंक्रीट का काम शुरू हो जाएगा।

क्षेत्रवासियों ने अपनी विधायक और एमएलसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों ने उनके भरोसे का मान रखा है। इस पुल के बन जाने से बंदरा प्रखंड की भौगोलिक दूरी और मानसिक पीड़ा, दोनों कम होगी।

मुजफ्फरपुर: विकास की दौड़ में पीछे छूटा तुलसी मोहनपुर का मांझी टोला, बदहाली के बीच बंटी उम्मीद की किरणें

कपकपाती ठंड और गरीबी का साया

हाल ही में समाजसेवी राजेश कुमार राम द्वारा इस टोले में वस्त्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह केवल कपड़ों का वितरण नहीं था, बल्कि उन अभावों को उजागर करने का एक जरिया भी था, जिसमें यह समुदाय जी रहा है। टोले के बच्चे और बुजुर्ग फटे-पुराने कपड़ों में ठंड से ठिठुरने को मजबूर थे। वितरण के दौरान जब बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आई, तो उनकी आँखों में छिपी गरीबी और लाचारी को साफ पढ़ा जा सकता था।

गंदगी और बीमारी का अंबार

मांझी टोला में प्रवेश करते ही सबसे पहली चीज जो ध्यान खींचती है, वह है चारों ओर पसरी गंदगी। नालियों का अभाव और स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी के कारण यह क्षेत्र बीमारियों का केंद्र बना हुआ है। राजेश कुमार राम ने वितरण के दौरान ग्रामीणों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे कचरा और जमा हुआ पानी एवं जानवरों का सीधा सम्‍पर्क उनके बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। “गरीबी अलग चीज है, लेकिन स्वच्छता हमारे हाथ में है,” यह संदेश उन्होंने घर-घर पहुँचाने की कोशिश की।

प्रशासनिक उपेक्षा: बिना पहियों की जिंदगी

इस टोले की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई जब एक विकलांग बच्चा दिखाई दिया। सरकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, इस मासूम को अब तक चलने के लिए ट्राइसाइकिल (व्हीलचेयर) तक नसीब नहीं हुई है। वह बच्चा आज भी अपनी शारीरिक अक्षमता के साथ जमीन पर घिसटने को मजबूर है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी सरकारी तंत्र की नजर इस टोले की जरूरतों पर नहीं पड़ी है।

विकास की मुख्यधारा से कटा समाज

मांझी टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं—शिक्षा, स्वास्थ्य और सुलभ रास्तों—से कोसों दूर है। यहाँ के लोग आज भी दिहाड़ी मजदूरी और अभावों में अपना जीवन काट रहे हैं। राजेश कुमार राम द्वारा किया गया यह छोटा सा प्रयास सराहनीय तो है, लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर कब तक यह टोला केवल समाजसेवियों के भरोसे रहेगा? सरकारी योजनाओं का लाभ इन तक क्यों नहीं पहुँच रहा?

तुलसी मोहनपुर के इस मांझी टोले को आज किसी सहानुभूति की नहीं, बल्कि ठोस सरकारी कार्रवाई और विकास की नीतियों की जरूरत है, ताकि यहाँ के बच्चे भी एक स्वच्छ और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।


नैनीताल में आयोजित अंतरराज्यीय युवा कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर का डंका, लोकनृत्य में मिला प्रथम पुरस्कार

नैनीताल/मुजफ्फरपुर: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) के तत्वावधान में नैनीताल में आयोजित पाँच दिवसीय अंतर-राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार के पाँच जिलों—मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, वैशाली और पटना—के 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

समापन समारोह में बिहार की सांस्कृतिक विरासत ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बिहार की लोक संस्कृति पर आधारित झिझिया, छठ और सामा चकेवा जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति देने के लिए मुजफ्फरपुर की टीम को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इन प्रतिभागियों ने बढ़ाया मान मुजफ्फरपुर टीम की इस बड़ी उपलब्धि में शुभम रानी, विनीत कुमार सिंह, प्रिंस कुमार, संजीत कुमार, गौतम कुमार झा, विकाश कुमार और विवेक कुमार शामिल थे। टीम का नेतृत्व एस्कॉर्ट चंदन कुमार ने किया।

विधायक ने किया सम्मानित कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में नैनीताल की विधायक श्रीमती सरिता आर्या और सांसद प्रतिनिधि गोपाल सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अतिथियों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।

कार्यक्रम की उप निदेशक (MY Bharat, नैनीताल) डॉल्वी तेवतिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और बिहार के युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन और सांस्कृतिक योगदान की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

UGC गाइडलाइन पर रोक के खिलाफ समस्तीपुर में छात्रों का आक्रोश, निकाला गया प्रतिवाद मार्च

समस्तीपुर, 13 फरवरी 2026, UGC की गाइडलाइन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के विरोध में शुक्रवार को समस्तीपुर में छात्र संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। RYA (रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन), AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और बहुजन छात्र संगठनों के संयुक्त बैनर तले एक विशाल प्रतिवाद मार्च निकाला गया।

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा मार्च छात्रों का यह मार्च शहर के स्टेडियम गोलंबर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए कर्पूरी स्मारक स्थल पहुँचा, जहाँ यह एक जनसभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में बैनर लिए हुए थे और केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से उठाईं:

  • UGC गाइडलाइन पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए।
  • शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर पूर्ण रोक लगे।
  • शैक्षणिक परिसरों में ‘रोहित एक्ट’ लागू किया जाए।

यह बहुजनों के साथ अन्याय” सभा को संबोधित करते हुए AISA के जिला अध्यक्ष लोकेश राज ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब EWS आरक्षण लाया गया, तो कोई PIL दाखिल नहीं हुई और तुरंत 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया। लेकिन जब UGC ने बहुजनों के हक में गाइडलाइन जारी की, तो केंद्र सरकार के इशारे पर PIL दाखिल कर आनन-फानन में रोक लगवा दी गई। यह बहुजन छात्रों के साथ सीधा अन्याय है। जब तक यह गाइडलाइन बहाल नहीं होगी, संघर्ष जारी रहेगा।”

AISA के जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ अब स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी से लेकर गांव-टोले तक छात्रों को गोलबंद कर बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।सभा की अध्यक्षता लोकेश राज और संचालन दीपक यदुवंशी ने किया। इस दौरान भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजद के जगदीश चौपाल, कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह हजारी समेत विभिन्न छात्र नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

सकरा में ग्रामीण चिकित्सकों की हुंकार: कम खर्च में बेहतर इलाज और समाज सेवा का लिया संकल्प

सकरा (मुजफ्फरपुर), 12 फरवरी 2026: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से आज सकरा प्रखंड में ग्रामीण चिकित्सकों का एक बड़ा समागम हुआ। सकरा वाजिद पंचायत के जहांगीरपुर मार्ग स्थित विजन वैली हॉल में ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस बैठक में चिकित्सा जगत की चुनौतियों और सेवा भाव पर विस्तृत चर्चा की गई।

सस्ता और सुलभ इलाज ही प्राथमिकता

बैठक का मुख्य एजेंडा ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम आदमी की जेब के अनुकूल बनाना रहा। उपस्थित चिकित्सकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना उनकी पहली प्राथमिकता है।

बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी ग्रामीण बेहतर चिकित्सा से वंचित न रहे। हम कम से कम खर्च में प्रभावी इलाज के मॉडल पर काम कर रहे हैं।”

अग्निकांड पीड़ितों की मदद कर पेश की मानवता की मिसाल

यह बैठक केवल चिकित्सा चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि संगठन की सामाजिक प्रतिबद्धता भी खुलकर सामने आई। हाल ही में क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड का जिक्र करते हुए एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि संगठन ने सक्रिय रूप से पीड़ितों की सहायता की है।

संकट की इस घड़ी में चिकित्सकों की टीम ने प्रभावित परिवारों के बीच पहुँचकर उन्हें मुफ्त दवाइयां, वस्त्र, कंबल और भोजन की आवश्यक सामग्री वितरित की। चिकित्सकों ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी किसी भी प्राकृतिक आपदा या संकट के समय पूरा संगठन एकजुट होकर राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगा।

इन चिकित्सकों ने साझा किए विचार

इस संवाद और संकल्प सभा में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित चिकित्सक शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. राजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. गणेश कुमार राय, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. चंद्रकिशोर, डॉ. रवि कुमार, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. मुनचुन कुमार, संगीता कुमारी और डॉ. रितिक कुमार उपस्थित रहे।

आगामी रणनीति: गाँव-गाँव लगेंगे मुफ्त जांच शिविर

बैठक के समापन पर एसोसिएशन ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में प्रखंड के विभिन्न दूरदराज के गांवों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान करना और लोगों को स्वच्छता व बचाव के प्रति जागरूक करना है। सभी चिकित्सकों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर समाज सेवा को अपने पेशे का मूल मंत्र बनाने की शपथ ली।

गंगा-कोसी संगम पर गूंजा ‘गांधी अमर रहे’, अस्थि विसर्जन की 78वीं वर्षगांठ पर उमड़ा जनसैलाब

कुर्सेला (कटिहार) | 12 फरवरी, 2026

बिहार के कटिहार जिले के कुर्सेला में आज श्रद्धा, संकल्प और गांधीवादी विचारधारा का एक अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला। अवसर था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थि भस्म विसर्जन के 78वें पुण्य स्मृति दिवस का। गंगा-कोसी के मिलन स्थल पर आयोजित इस समारोह ने न केवल बापू की शहादत को नमन किया, बल्कि उनके ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को वर्तमान संदर्भ में फिर से परिभाषित करने का प्रयास भी किया।

प्रभात फेरी: जन-जन तक पहुँचा गांधी का संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अत्यंत गरिमामयी ढंग से हुई। कुर्सेला स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम से एक भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में गांधीवादी कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण और युवा शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए और ‘गांधी अमर रहे’ के नारों के साथ यह पदयात्रा तीनघरिया गांव के मुख्य मार्गों से गुजरी। गांव की गलियां ‘रघुपति राघव राजा राम’ के मधुर भजनों से गूंज उठीं। प्रभात फेरी का समापन गंगा के तट पर हुआ, जहाँ से सभी नावों के माध्यम से पवित्र गंगा-कोसी संगम के बीचों-बीच पहुंचे। वहां प्रवाहित जलधारा के बीच बापू के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया और उन्हें कोटि-कोटि नमन किया गया।

श्रद्धांजलि सभा: “गांधी का ग्राम स्वराज ही बचाएगा संविधान”

संगम पर जल तर्पण के पश्चात गांधी आश्रम परिसर में एक विशाल श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शंकर सन्याल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक शाश्वत विचार हैं।

स्वागत संबोधन और वैचारिक विमर्श: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कुर्सेला की इस धरती के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार मंडल ने प्रस्तुत की। उन्होंने गांधीजी के सिद्धांत और दर्शन को आज की अराजकता के दौर में एकमात्र विकल्प बताया। मंच का कुशल संचालन संजय भाई द्वारा किया गया।

प्रमुख वक्ताओं के विचार: जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कार्यकारिणी सदस्य ललिता कुमारी और राष्ट्र सेवा दल के जिला कार्याध्यक्ष रविन्द्र पासवान ने संयुक्त रूप से वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि:

“आज जब दुनिया कट्टरता और हिंसा की ओर बढ़ रही है, तब गांधी का ग्राम स्वराज और कुटीर उद्योग ही भारतीय संविधान की मूल भावना की रक्षा करेगा। गैर-बराबरी, अशिक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक अराजकता को दूर कर न्याय व समता पर आधारित समाज का निर्माण गांधीवादी रास्ते से ही संभव है।”

समाज के हर वर्ग की भागीदारी (प्रमुख उपस्थित जन)

इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इसे एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों ने भाग लेकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की:

  • प्रमुख नेतृत्व: गांधी आश्रम के अध्यक्ष महेश राय, मुखिया ललन राम, पंच सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव, विकास पथ बिक्रम के सचिव सत्येंद्र शांडिल्य।
  • सक्रिय भागीदारी: अतुल भाई, सुजान भाई, विजय भाई (जिनका तिरंगा झंडा के साथ विशेष आउटलुक चर्चा का विषय रहा), आशुतोष कुमार और श्याम भाई (जिन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया)।
  • महिला शक्ति की अभूतपूर्व उपस्थिति: कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रही, जिनमें रुक्मिणी साहा, राजो देवी, इसरत खातून, रातो देवी, मिर्जा देवी, मंजू वर्मा, रुक्मिणी देवी, मंजू देवी, प्रियंका देवी, हीरा देवी, कंचन देवी, नीरा देवी, रेखा देवी, रीता देवी और गायत्री कुमारी प्रमुख थीं।

गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बापू को नमन

कार्यक्रम केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक कलाओं के माध्यम से भी बापू के प्रति प्रेम प्रदर्शित किया गया। सुनील कुमार ने जब जनगीत वक्त की आवाज है मिलके चलो, मिलकर बढ़ो” प्रस्तुत किया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं श्याम भाई ने अपने गांधीवादी पहनावे और अंदाज से बापू के स्वच्छता अभियान को जीवंत कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या: देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा बिखेरी। चांदनी कुमारी, चंदा कुमारी, संदीप कुमार, आशीष कुमार, मुस्कान कुमारी, संगीता कुमारी, बबीता कुमारी, नीतू कुमारी, जिन्नत परवीन, गायत्री कुमारी, रितु कुमारी और नेहा कुमारी ने लोकगीत, संगीत और नृत्य की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि श्रोता उसमें गोते लगाते नजर आए। इन गीतों में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश छिपा था। कुर्सेला की मिट्टी में आज भी बापू के विचार रचे-बसे हैं और नई पीढ़ी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

शांति और सद्भाव की प्रासंगिकता :कार्यक्रम के समापन पर रविन्द्र पासवान ने पुनः दोहराया कि गांधीजी का दर्शन—सत्य, अहिंसा, सेवा, करुणा, दया, प्रेम, भाईचारा, शांति और सद्भाव—आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति का उदय नहीं होगा, तब तक गांधी का सपना अधूरा है।

ताजपुर में राष्ट्रीय आम हड़ताल का व्यापक असर, सड़कों पर उतरे किसान-मजदूर

ताजपुर/समस्तीपुर | 12 फरवरी 2026

संयुक्त श्रम-किसान-मजदूर संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का ताजपुर प्रखंड में व्यापक असर देखा गया। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में ताजपुर के  किसान, मजदूर और कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कार्यकर्ताओं ने ताजपुर गांधी चौक से एक जुलूस निकालकर पूरे बाजार क्षेत्र का भ्रमण किया और अंत में प्रखंड मुख्यालय चौक पर जोरदार प्रदर्शन व सभा की।

विशाल जुलूस और प्रदर्शन

गुरुवार की सुबह भाकपा माले, भाकपा और एसयूसीआई (C) से जुड़े कार्यकर्ताओं का जुटान स्थानीय गांधी चौक पर हुआ। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पार्टी के झंडे, बैनर और सरकार विरोधी नारों लिखी तख्तियां लिए हुए थे। जुलूस में ‘ट्रेड डील रद्द करो’, ‘चारों श्रम कोड वापस लो’ और ‘किसानों को एमएसपी (MSP) दो’ जैसे नारे गूंज रहे थे। बाजार भ्रमण करते हुए जुलूस प्रखंड मुख्यालय के राजधानी चौक पहुंचा, जहां केंद्र व राज्य सरकार के किसान-मजदूर विरोधी रवैये के खिलाफ जमकर आक्रोश प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ता सड़क किनारे धरने पर बैठ गए।

सभा की अध्यक्षता और संचालन

सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा अंचल सचिव रामप्रीत पासवान और एसयूसीआई के जिला संयोजक चंद्रशेखर राय ने संयुक्त रूप से की। वहीं, सभा का सफल संचालन भाकपा के रामबृक्ष राय, किसान महासभा के ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह एवं खेग्रामस के प्रभात रंजन गुप्ता ने किया।

नेताओं ने बुलंद की मांगें

अपने अध्यक्षीय संबोधन में माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आंदोलनकारी पुरानी पेंशन योजना बहाली, निजीकरण पर रोक, श्रमिकों की योजनाओं में धांधली बंद करने, दैनिक मजदूरी 700 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, तिरहुत नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन एवं मकान का वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा, आशा-रसोईया, सेविका-सहायिका और आपदा मित्रों को राज्य कर्मचारी घोषित करने एवं मानदेय 21,000 रुपये करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

भाकपा के रामप्रीत पासवान ने कहा कि काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने वाले और यूनियन बनाने का अधिकार खत्म करने वाले मजदूर विरोधी चार श्रम कोड स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

एसयूसीआई के चंद्रशेखर राय ने इस ऐतिहासिक हड़ताल को सफल बनाने के लिए ताजपुर वासियों का आभार व्यक्त किया।

इन्होंने किया संबोधित और दी उपस्थिति : सभा को संबोधित करने वालों में भाकपा के मो० अलाउद्दीन, मनोज राय, राजेश कुमार, गीता देवी, नगीना राम, एसयूसीआई के पलटन साह, लाल बाबू राय, उपेंद्र राय, फूलो राय, रौशन कुमार, परमेश्वर राय, लाल बहादुर राय, रामेश्वर राय, मो० फूलहसन शामिल थे।

भाकपा माले की ओर से आसिफ होदा, शंकर महतो, मो० एजाज, राजदेव प्रसाद सिंह, मुंशीलाल राय, मुकेश कुमार गुप्ता, मो० गुलाब, मोतीलाल सिंह, महावीर सिंह, मो० अबुबकर, अरविंद कुमार, संजय कुमार सिंह, शत्रुघन सिंह ने सभा को संबोधित किया।

इसके अतिरिक्त, बिहार राज्य आशा संघ की सविता सिंह, रंजू कुमारी, शोभा कुमारी, गीता देवी, मंजू देवी, अनीता कुमारी, सविता कुमारी, विंदू कुमारी और बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की शिव कुमारी देवी, गिरजा देवी ने भी अपनी मांगों के समर्थन में सभा को संबोधित किया।

विधि का विधान: “जब मुहूर्त भी न बदल सके राम का वनवास, तो आपका भाग्य कैसे बदलेंगे अनुष्ठान?”

धर्म के नाम पर फैले डर से मुक्ति ही सच्ची साधना है: सहजता में ही ईश्वर है”

आध्यात्मिक डेस्क (न्यूज़ भारत टीवी): आज का मनुष्य तकनीक के शिखर पर बैठकर भी आंतरिक रूप से उतना ही भयभीत और असुरक्षित है। इसी असुरक्षा की कोख से जन्म लेता है—’पाखंड’। आज धर्म के नाम पर बाहरी आडंबरों, ज्योतिषीय गणनाओं और तथाकथित चमत्कारों का एक ऐसा मायाजाल बुना जा चुका है, जिसमें फंसा सामान्य व्यक्ति अपने विवेक की शक्ति खो बैठा है। लेकिन सनातन दर्शन का एक शाश्वत सत्य हमें झकझोरता है—विधि का विधान। क्या हम वास्तव में अनुष्ठानों से उस नियति को बदल सकते हैं, जिसे स्वयं ईश्वर के अवतारों ने स्वीकार किया?

मुहूर्त की मर्यादा और अवतारों का मौन

भारतीय संस्कृति में काल गणना का अपना महत्त्व है, किंतु क्या कोई मुहूर्त ईश्वरीय इच्छा से ऊपर हो सकता है? मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन की दो सबसे बड़ी घटनाएं—विवाह और राज्याभिषेक—इसका जीवंत प्रमाण हैं। कुलगुरु वशिष्ठ जैसे त्रिकालदर्शी ऋषि ने राज्याभिषेक का ‘सर्वश्रेष्ठ’ मुहूर्त निकाला था, किंतु उस मुहूर्त ने राम को सिंहासन नहीं, बल्कि 14 वर्ष का वनवास दिया। माता सीता के साथ विवाह भी शुभ लग्न में हुआ, किंतु नियति ने उन्हें वियोग की अग्नि में झोंक दिया।

जब भरत अत्यंत शोकाकुल होकर गुरुदेव के पास पहुंचे, तब वशिष्ठ जी ने एक कालजयी सत्य कहा था:

सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहु मुनिनाथ। लाभ हानि जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ॥”

अर्थात, जो नियति ने निर्धारित कर दिया है, उसे टालना असंभव है। जब साक्षात ब्रह्म (राम) की नियति उनके द्वारा तय मुहूर्त के अनुसार नहीं चली, तो हम साधारण मनुष्य बाहरी कर्मकांडों के पीछे भागकर किसे चुनौती दे रहे हैं?

महाशक्तियों की विवशता या प्रकृति का अनुशासन?

इतिहास साक्षी है कि संसार की महानतम विभूतियों ने भी प्रकृति के नियमों में हस्तक्षेप नहीं किया। भगवान शिव, जो स्वयं ‘महामृत्युंजय’ हैं, माता सती की मृत्यु को नहीं टाल सके। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने सब कुछ जानते हुए भी गांधारी के श्राप को स्वीकार किया और अपने कुल का विनाश तथा स्वयं का अंत भी उसी सहजता से स्वीकार किया।

सिख गुरुओं—गुरु अर्जुन देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक—ने भीषण कष्ट झेले, बलिदान दिए, पर ‘हुकुम’ (ईश्वरीय आदेश) को सिर माथे रखा। आधुनिक युग में रामकृष्ण परमहंस ने कैंसर जैसी व्याधि को शरीर का प्रारब्ध मानकर सहा। विचारणीय है कि जब ये महाशक्तियां अपनी नियति के आगे मौन रहीं, तो आज का ‘बाजारू धर्म’ कुछ रुपयों के दान या पत्थरों को पहनने से भाग्य बदलने का दावा कैसे कर सकता है?

प्रारब्ध का गणित: क्या है पूर्व-निर्धारित?

सनातन धर्म के अनुसार, मनुष्य का वर्तमान जीवन उसके पूर्व जन्मों के संचित कर्मों का परिणाम है। इसे ‘प्रारब्ध’ कहा जाता है। मान्यता है कि जन्म के साथ ही पांच चीजें निश्चित हो जाती हैं: आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु। जब यह ढांचा पूर्व-निर्धारित है, तो मनुष्य का डर और उसके पीछे का आडंबर उसकी अज्ञानता को ही दर्शाता है। असली आध्यात्मिकता हमें निर्भय बनाती है, जबकि पाखंड हमें मानसिक रूप से अपाहिज बनाता है।

कर्म ही एकमात्र विकल्प: फल की चिंता क्यों?

श्रीमद्भगवद्गीता का मर्म ‘कर्म’ है। श्रीकृष्ण कहते हैं—कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”। इसका गहरा अर्थ यह है कि परिणाम तुम्हारे नियंत्रण में नहीं है, केवल ‘कर्म’ ही तुम्हारे अधिकार क्षेत्र में है। जो बीत गया वह प्रारब्ध था, जो हो रहा है वह नियति है, लेकिन आप जो ‘कर रहे हैं’, वही आपका भविष्य है।

कर्म ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है। एक व्यक्ति जो दीन-दुखियों की सेवा करता है, वह उस व्यक्ति से कहीं श्रेष्ठ है जो भय के कारण घंटों मंदिर में बैठकर कर्मकांडों में उलझा रहता है। मानवता का कल्याण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता में है।

सहजता ही सच्ची साधना है : जीवन का अर्थ कर्मकांडों की जटिलता में नहीं, बल्कि सहजता में है। जब न जन्म हमारे हाथ में था और न मृत्यु का समय हमारे वश में है, तो बीच के इस छोटे से जीवन को पाखंड के बोझ तले क्यों दबाना ? संदेश स्पष्ट है,  सरल बनें, सहज रहें। भय को त्यागकर ‘सत्कर्म’ को अपनाएं। आडंबरों के जाल से निकलकर विवेक की मशाल जलाएं। क्योंकि अंततः, नियति के पन्ने पर आपकी ईमानदारी और सेवाभाव ही स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। शेष सब कुछ तो समय के प्रवाह में विलीन हो जाना है।