मुजफ्फरपुर/पटना: बिहार की माटी के सच्चे सपूत, किसानों के मसीहा और ‘लीची के जादूगर’ कहे जाने वाले पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे पटना के मेदांता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। 90 के दशक में राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ. त्रिवेदी पिछले कुछ दिनों से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही मुजफ्फरपुर के मतलूपुर गांव से लेकर देश के कृषि गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई है।
“विद्वता और सादगी का संगम: किसानों की किस्मत बदलने वाले पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी की एक यादगार तस्वीर।”
खेतों में ढूँढा समाधान, किसानों को दी नई जिंदगी डॉ. त्रिवेदी केवल फाइलों वाले वैज्ञानिक नहीं थे, वे जमीन पर उतरकर काम करने वाले ‘ऋषि’ थे। जब मुजफ्फरपुर की पहचान ‘शाही लीची’ के पुराने बाग दम तोड़ रहे थे, तब उन्होंने ‘कैनोपी मैनेजमेंट’ (पुनर्जीवन तकनीक) के जरिए बूढ़े पेड़ों को नई जवानी दी। उनकी इस तकनीक ने हज़ारों किसानों के उजड़ते बागों को फिर से फलों से लद दिया।
‘बाबा परियोजना‘ से जलजमाव को बनाया वरदान उन्होंने उत्तर बिहार के जलजमाव वाले इलाकों के लिए ‘बाबा परियोजना’ (बिहार एक्वाकल्चर बेस्ड एग्रीकल्चर) की शुरुआत की। जहाँ पानी जमा होने से खेती बर्बाद होती थी, वहां उन्होंने मछली पालन, मखाना और सिंघाड़े की खेती का ऐसा मॉडल पेश किया कि किसानों की आय कई गुना बढ़ गई।
सादगी की प्रतिमूर्ति: कुलपति से प्रगतिशील किसान तक का सफर डॉ. त्रिवेदी का जीवन संघर्षों की मिसाल रहा। पिता के निधन के बाद पढ़ाई बीच में छोड़कर खेती की कमान संभालने वाले इस शख्स ने बाद में कृषि विज्ञान में पीएचडी की और कुलपति के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद वे आराम करने के बजाय वापस अपने गांव मतलूपुर लौटे और 85 एकड़ में खेती का ऐसा आधुनिक मॉडल खड़ा किया जिसे देखने देशभर से लोग आते थे।
भावुक विदाई: उनके करीबी श्याम किशोर सिंह ने भरे गले से कहा, “आज समाज ने एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व खो दिया है। शासन-प्रशासन से लेकर राजनीति तक उनकी साख थी, लेकिन उनका दिल हमेशा गांव की पगडंडियों में ही बसता था। यह रिक्त स्थान कभी नहीं भरेगा।”
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
पटना। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आज एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सचिवालय से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘सहयोग‘ हेल्पलाइन (1100) और विशेष वेब पोर्टल का भव्य शुभारंभ किया।
ऐतिहासिक शुरुआत: पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘सहयोग’ हेल्पलाइन और पोर्टल का लोकार्पण करते हुए। साथ में वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव व अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
इस योजना की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली विशेषता इसकी ‘डेडलाइन‘ है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकायत का समाधान 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि 30 दिन की समय सीमा समाप्त होती है, तो 31वें दिन संबंधित लापरवाह अधिकारी के खिलाफ स्वतः कार्रवाई या सस्पेंशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
CMO की सीधी नजर, अब फाइलें नहीं अटकेंगी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अब हर नागरिक की आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी। इस पूरे सिस्टम की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जाएगी, जिससे बिचौलियों और लेटलतीफी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
‘सहयोग‘ की मुख्य बातें:
हेल्पलाइन नंबर: डायल करें 1100 और दर्ज कराएं अपनी समस्या।
गाँव-गाँव पहुंचेगी सरकार: 19 मई 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
कठोर कार्रवाई: 31वें दिन की ‘ऑटो-एक्शन’ पॉलिसी से अफसरों में हड़कंप।
सरकार आपके द्वार: पंचायत स्तर पर लगेगा दरबार प्रशासनिक सुधार की इस कड़ी में अब जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार खुद चलकर जनता के पास जाएगी। पंचायत स्तर पर लगने वाले शिविरों के जरिए मौके पर ही समस्याओं के निपटारे की कोशिश की जाएगी। इस पहल से बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगने और पारदर्शी शासन व्यवस्था कायम होने की उम्मीद है।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
ताजपुर/समस्तीपुर : बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने और जनमुद्दों को धार देने के लिए भाकपा-माले ने कमर कस ली है। आगामी 16 से 18 मई 2026 तक लहेरियासराय प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले 12वें बिहार राज्य सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए रविवार को कार्यकर्ताओं ने ताजपुर की सड़कों पर उतरकर पोस्टर जारी किया और सघन प्रचार अभियान चलाया।
हुंकार: लहेरियासराय में भाकपा-माले के 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की सफलता को लेकर पोस्टर जारी करते प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, आसिफ होदा व अन्य पार्टी कार्यकर्ता।
किसानों-मजदूरों की आवाज बनेगा यह महामंच
अभियान के दौरान पार्टी नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक जंग का आगाज है। सम्मेलन में:
किसानों और मजदूरों के हक की आवाज बुलंद की जाएगी।
नौजवानों के रोजगार और भविष्य पर व्यापक रणनीति बनेगी।
जनसंघर्षों को तेज कर संगठन को फौलादी मजबूती दी जाएगी।
चौक-चौराहों पर गूंजा इंकलाब
प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बाजार और विभिन्न चौक-चौराहों पर पोस्टर चस्पा कर आम जनता से इस सम्मेलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचेगा।
इस अभियान में मुख्य रूप से प्रखंड कमिटी सदस्य आसिफ होदा, मो० एजाज, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, चांद बाबू, शाद तौहीदी, बस्साम तौहीदी, संजीव राय और मो० रहमान सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता जोश के साथ शामिल हुए।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के रसायन शास्त्र विभाग में सोमवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक भव्य और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्राओं ने न केवल विज्ञान के क्षेत्र में भारत की शक्ति को याद किया, बल्कि दुनिया बदलने वाले वैज्ञानिकों को अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि भी दी।
पोखरण की जीत और वैज्ञानिकों का सम्मान 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति) की सफलता की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने विभिन्न प्रसिद्ध रसायनशास्त्रियों, वैज्ञानिकों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं के छायाचित्रों के साथ उनके क्रांतिकारी आविष्कारों की प्रस्तुति दी। छात्राओं के हाथों में थमी महान वैज्ञानिकों की तस्वीरें यह संदेश दे रही थीं कि आने वाली पीढ़ी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार है।
प्राचार्या ने जगाया छात्राओं में जोश कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर डॉक्टर अलका जायसवाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए इस दिवस की ऐतिहासिक महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि तकनीक ही वह जरिया है जिससे समाज और राष्ट्र का विकास संभव है।
प्रतिभा का प्रदर्शन: अनुपम, आकांक्षा और खुशबू ने मारी बाजी छात्राओं के बीच आयोजित प्रस्तुति प्रतियोगिता में कड़ी टक्कर देखने को मिली। अपने बेहतरीन ज्ञान और प्रस्तुतीकरण के आधार पर अनुपम कुमारी ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि आकांक्षा कुमारी को द्वितीय और खुशबू कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. वर्षा तिवारी और सहायक प्राध्यापिका डॉ. स्मिता ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। मौके पर डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. पल्लवी, डॉ. रचना, डॉ. श्वेता यादव, डॉ. राकेश रंजन और श्री सचिन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
ब्रांड चोरी कर लूट रहे थे अभिभावकों की जेब: जिला प्रशासन ने 16 स्कूलों की सूची जारी कर मांगा जवाब
रिर्पोट :- एस. एस. कुमार ‘पंकज’
मुजफ्फरपुर। जिले में शिक्षा के नाम पर ‘ब्रांड’ की चोरी और अभिभावकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है। दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) जैसे प्रतिष्ठित नाम का सहारा लेकर गली-कूचों में दुकानें सजाए बैठे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अब जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रशासन के इस कड़े रुख से जिले के फर्जी स्कूल संचालकों के पसीने छूट रहे हैं।
नाम ‘बड़े‘ और दर्शन ‘फर्जी‘: मुजफ्फरपुर में DPS के नाम पर चल रही दुकानों पर अब लगेगा ताला!
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, DPS के मिलते-जुलते नाम और लोगो लगाकर स्कूल खोलना एक मुनाफे का धंधा बन गया था। असली ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी’ (नई दिल्ली) के नाम का दुरुपयोग कर ये स्कूल न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर अब इन सभी संस्थानों की कुंडली खंगाली जा रही है।
शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी? :फलता फूलता सिंडीकेट
यह सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह हज़ारों बच्चों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी है। एक प्रतिष्ठित ब्रांड का नाम देखकर अभिभावक भारी-भरकम फीस भरते हैं, इस उम्मीद में कि उनके बच्चे को विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी। लेकिन धरातल पर इन स्कूलों के पास न तो उचित इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही योग्य शिक्षक। प्रशासन की यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर में उस ‘ब्रांड कल्चर’ पर गहरी चोट है, जिसके पीछे केवल लूट का काला कारोबार छिपा है।
अभिभावक सावधान! कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं पढ़ रहा ‘नकली‘ DPS में? देखिए पूरी लिस्ट
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO), बिहार शिक्षा परियोजना, मुजफ्फरपुर ने पत्र संख्या 1047 के माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में चल रहे निम्नलिखित 16 संदिग्ध स्कूलों की सूची जारी की है और उनकी जांच के आदेश दिए हैं:
क्र.सं.
स्कूल का नाम (अंग्रेजी में)
स्कूल का नाम (हिंदी में)
संबंधित प्रखंड
1
DELHI INTERNATIONAL SCHOOL
दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल
मुशहरी
2
DELHI PUBLIC SCHOOL (A-WING) AURAI
दिल्ली पब्लिक स्कूल (A-विंग), औराई
औराई
3
Delhi Public School (H-Wing)
दिल्ली पब्लिक स्कूल (H-विंग)
बरुराज (मोतीपुर)
4
DELHI PUBLIC SCHOOL INTERNATIONAL GARHAN
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, गरहां
बोचहाँ
5
Delhi public school international jafarpur
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, जाफरपुर
पारू
6
Delhi Public School International Kanti
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, कांटी
कांटी
7
DELHI PUBLIC SCHOOL JHAPHAN
दिल्ली पब्लिक स्कूल, झपहाँ
मुशहरी
8
DELHI PUBLIC SCHOOL LAKHANPUR, KATRA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, लखनपुर, कटरा
कटरा
9
DELHI PUBLIC SCHOOL MITHANPURA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, मिठनपुरा
मुशहरी
10
DELHI PUBLIC SCHOOL MUZAFFARPUR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर
कुढ़नी
11
DELHI PUBLIC SCHOOL SARAIYA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, सरैया
सरैया
12
DELHI PUBLIC SCHOOL, YAJUAR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, यजुआर
कटरा
13
DELHI PUBLIC SCHOOL, SHARFUDDINPUR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, शर्फुद्दीनपुर
बोचहाँ
14
D.P.S. KIDS, BHAGWANPUR
डी.पी.एस. किड्स, भगवानपुर
मुशहरी
15
SR. SEC. D.P.S. DHOLI (N.H.-28)
सीनियर सेकेंडरी डी.पी.एस. ढोली(एन.एच.-28)
सकरा
16
D.P.S. JUNIOR INTER SCHOOL, BERIYA
डी.पी.एस. जूनियर इंटर स्कूल, बेरिया
कांटी
जिलाधिकारी के तेवर देख संचालकों के छूटे पसीने!
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के पत्र संख्या 1622 (दिनांक 08.05.2026) के बाद शिक्षा विभाग ने युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
3 दिन का अल्टीमेटम: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविंद सिन्हा ने नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि यदि ये स्कूल 3 दिनों के भीतर अपनी सत्यता के साक्ष्य पेश नहीं करते हैं, तो उन पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तस्वीरों से होगा मिलान: DPO सुजीत कुमार दास ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूलों के मुख्य गेट की रंगीन फोटो और उनके मान्यता संबंधी कागजात 2 दिन के अंदर मुख्यालय को सौंपे जाएं।
DPS स्कूल का झोल, प्रशासन ने खोला पोल: अब मुजफ्फरपुर में नहीं चलेगी ब्रांड की चोरी!
प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि अब जिले में फर्जी नाम के सहारे बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकेगा। अगर ये स्कूल अपनी वैधता सिद्ध नहीं कर पाते हैं, तो बहुत जल्द इन 16 दुकानों पर स्थायी रूप से ताला लटकना तय है।
ग्राउंड जीरो से बड़ा खुलासा: अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है, खुलेगी और भी कई ‘ब्रांडेड दुकानों‘ की पोल!
मुजफ्फरपुर में शिक्षा के नाम पर जारी यह फर्जीवाड़ा सिर्फ इन 16 स्कूलों तक सीमित नहीं है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में यह सूची और भी लंबी होने वाली है। हमारे मीडियाकर्मियों की टीम लगातार इस ‘लूट तंत्र’ की जड़ों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है, जिसमें ग्रामीण इलाकों में संचालित कई ऐसे नामचीन स्कूलों के चेहरे बेनकाब होंगे, जिन्हें जानकर प्रशासन और अभिभावक दोनों ‘शॉक्ड’ रह जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों से ‘ग्राउंड जीरो‘ की ऐसी चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जो दिल दहला देने वाली हैं। एक साथ दर्जनों बच्चों को स्कूल बस में भेड़-बकरियों की तरह लादकर और कुछ को पैदल ‘अस्पताल’ से निकलते देख हर कोई दंग है। पहली नजर में ऐसा लगता है मानो कोई महामारी फैली हो और इतने सारे बच्चे एक साथ बीमार हो गए हों, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा कड़वी है। आखिर इन स्कूलों के पास अस्पताल जैसी व्यवस्था के नाम पर क्या छुपाया जा रहा है?
इतना ही नहीं, उस स्कूल के मासूम बच्चों ने ही प्रबंधन की ऐसी ‘पोल खोल दास्तां’ बयां की है, जिससे जिला प्रशासन अब तक पूरी तरह अनजान रहा है। बच्चों के बयानों ने स्कूल के बंद कमरों के पीछे चल रहे मैनेजमेंट के हेरा फेरी के खेल को जगजाहिर कर दिया है। यह खबर अभी खत्म नहीं हुई है, हम जल्द ही उन तस्वीरों और सबूतों के साथ लौटेंगे जिन्हें देख आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। बने रहें हमारे साथ, क्योंकि अगली रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी!
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक तंत्र को नई धार देने के लिए पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 16 वरिष्ठ अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। इस सूची में कई दिग्गज अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी (पूरी सूची):
डॉ. परेश सक्सेना (1994): महानिदेशक-सह-आयुक्त, असैनिक सुरक्षा, बिहार, पटना।
निर्मल कुमार आजाद (1994): पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना।
सुधांशु कुमार (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था), बिहार। इसके साथ ही वे अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
डॉ. अमित कुमार जैन (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (आर्थिक अपराध इकाई), बिहार, पटना।
नैय्यर हसनैन खान (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस), बिहार, पटना।
डॉ. कमल किशोर सिंह (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (रेलवे), बिहार, पटना।
अजिताभ कुमार (1997): अपर पुलिस महानिदेशक (राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण), बिहार।
संजय सिंह (1997): अपर पुलिस महानिदेशक (बजट/अपील एवं कल्याण), बिहार। साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) का अतिरिक्त प्रभार।
विकास वैभव (2003): पुलिस महानिरीक्षक (IG), मगध क्षेत्र, गया।
क्षत्रनील सिंह (2005): विशेष सचिव, गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना।
पी. कन्नन (2005): पुलिस महानिरीक्षक (प्रोविजनिंग), बिहार। साथ ही आईजी (आधुनिकीकरण) का अतिरिक्त प्रभार।
रंजीत कुमार मिश्रा (2007): पुलिस महानिरीक्षक (अपराध अनुसंधान विभाग), बिहार। साथ ही आईजी (साइबर अपराध) का अतिरिक्त प्रभार।
संजय कुमार (2008): पुलिस महानिरीक्षक (विशेष शाखा), बिहार, पटना।
क्यों अहम है यह बदलाव?
बिहार सरकार का यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने और पुलिसिंग में आधुनिकता लाने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। विशेष रूप से साइबर अपराध और आर्थिक अपराध इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से इन क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त खलबली मच गई, जब सामान्य प्रशासन विभाग ने एक साथ कई कद्दावर आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार की अधिसूचना जारी कर दी। रविवार को जारी इस लिस्ट में 1996 बैच से लेकर 2014 बैच तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। माना जा रहा है कि सुशासन को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने अपनी ‘कोर टीम’ को नए सिरे से तैनात किया है।
इन दिग्गजों के बदले विभाग: देखें पूरी लिस्ट
बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रशासनिक मशीनरी में निम्नलिखित बड़े बदलाव किए गए हैं:
1. आनंद किशोर (1996 बैच): अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को अब वित्त विभाग और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
2. एच. आर. निवास (1996 बैच): इन्हें समाज कल्याण विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। साथ ही, ये पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और जांच आयुक्त (सामान्य प्रशासन) के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
3. संतोष कुमार मल्ल (1997 बैच): जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव रहे मल्ल को अब आपदा प्रबंधन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वे स्थानीय आयुक्त (बिहार भवन, नई दिल्ली) के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे।
4. लोकेश कुमार सिंह (2003 बैच): स्वास्थ्य विभाग के सचिव रहे लोकेश कुमार सिंह को अब पर्यटन विभाग के सचिव पद पर भेजा गया है। वे विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
5. कुंदन कुमार (2004 बैच): उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार को स्थानीय आयुक्त (बिहार भवन, नई दिल्ली) और निवेश आयुक्त (मुंबई) के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
6. कुमार रवि (2005 बैच): मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव रहे कुमार रवि को अब स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे की कमान सौंपी गई है। वे संसदीय कार्य विभाग के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
7. अजय यादव (2005 बैच): मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव को अब ऊर्जा विभाग का सचिव बनाया गया है। उनके पास मद्य निषेध और बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।
8. संजय कुमार सिंह (2007 बैच): वाणिज्य-कर विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह को अब वित्त विभाग (सम्पूर्ण प्रभार) का सचिव नियुक्त किया गया है। वे मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।
9. प्रणव कुमार (2008 बैच): कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार को भवन निर्माण विभाग का नया सचिव बनाया गया है। वे बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम के प्रबंध निदेशक के प्रभार में भी रहेंगे।
10. मनोज कुमार सिंह (2009 बैच): ऊर्जा विभाग के सचिव रहे मनोज कुमार सिंह को अब स्थानीय आयुक्त, बिहार भवन, नई दिल्ली के पद पर तैनात किया गया है। उनके पास निवेश आयुक्त, मुंबई का भी अतिरिक्त प्रभार होगा।
11. चंद्रशेखर सिंह (2010 बैच): मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव चंद्रशेखर सिंह को अब जल संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वे सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के सचिव और बिहार विकास मिशन के मिशन निदेशक के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
12. रजनीश कुमार सिंह (2014 बैच): सहयोग समितियों के निबंधक रहे रजनीश कुमार सिंह को अब महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं के पद पर पदस्थापित किया गया है।
सरकार के इस व्यापक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, वित्त और आपदा प्रबंधन जैसे जन-जुड़ाव वाले विभागों में नई ऊर्जा फूंकना है। इस बदलाव से स्पष्ट है कि नई सरकार विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन के लिए अपनी पसंद के अधिकारियों पर भरोसा जता रही है।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,
बिहार की राजनीति में अपनी पैठ मजबूत कर रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। आगामी 16 से 18 मई तक दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले 12वें बिहार राज्य सम्मेलन को पार्टी एक ‘राजनैतिक महाकुंभ’ के रूप में देख रही है। इसी ऐतिहासिक आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए रविवार को ताजपुर प्रखंड में सघन जनसंपर्क और कोष संग्रह अभियान चलाकर समर्थन जुटाया गया।
हुंकार: ताजपुर के गांधी चौक पर 12वें राज्य सम्मेलन के पोस्टर और लाल झंडे के साथ कोष संग्रह करते भाकपा माले के कार्यकर्ता।
गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ संघर्ष का संकल्प
अभियान की शुरुआत भाकपा माले प्रखंड कमिटी, ताजपुर के बैनर तले गांधी चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थल से हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने बापू को नमन कर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया। हाथों में लाल झंडे और सम्मेलन की सफलता की अपील वाले बैनर लिए कार्यकर्ताओं का जत्था जब बाजार की सड़कों पर निकला, तो आम लोगों ने भी रुक-रुक कर उनकी बातों को सुना और अपना सहयोग दिया।
मजदूर-किसानों के मुद्दों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘
कोष संग्रह के दौरान उपस्थित नेताओं ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि दरभंगा में होने वाला यह सम्मेलन केवल एक सांगठनिक बैठक नहीं है, बल्कि यह मजदूर, किसान, छात्र और नौजवानों के उन बुनियादी सवालों का हल ढूँढने का मंच है, जिन्हें सरकार ने हाशिए पर डाल दिया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से जनसंघर्षों को और अधिक धार देने के लिए एक ठोस एवं निर्णायक रणनीति तैयार की जाएगी।
जनता से मिला भरपूर समर्थन
ताजपुर के व्यापारियों, राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने माले के इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने लोगों को सम्मेलन के उद्देश्यों के बारे में बताया और अपील की कि वे तन-मन-धन से इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दें। पार्टी के अनुसार, जनता से मिल रहा यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
प्रमुख साथियों की उपस्थिति
इस अभियान को सफल बनाने में पार्टी और विभिन्न जनसंगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर मुख्य रूप से:
ताजपुर/समस्तीपुर (10मई 2026): बिहार की राजधानी पटना में अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और महिला अभ्यर्थियों के साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ रविवार को ताजपुर की सड़कों पर आक्रोश उभर आया। भाकपा माले, आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के कार्यकर्ताओं ने गांधी चौक पर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
“आक्रोश की लपटें: पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला फूंकते भाकपा माले व आइसा कार्यकर्ता।”
“अपराधियों की तरह कमर में रस्सी बांधकर छात्रों को भेजा जेल”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा के पैटर्न में अचानक बदलाव और विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे छात्रों से बात करने के बजाय, पुलिस ने उन पर लाठियां और गोलियां बरसाईं। आरवाईए के जिला अध्यक्ष आसिफ होदा और अन्य वक्ताओं ने कहा कि दर्जनों छात्रों के सिर फट गए हैं और कइयों के हाथ-पैर टूट चुके हैं। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि छात्रों को अपराधियों की तरह कमर में रस्सियां बांधकर जेल भेज दिया गया और उन पर गंभीर एफआईआर दर्ज की गई हैं।
बेटों को मंत्री बना रहे, और छात्रों को लाठी दे रहे: भाकपा माले
भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “एक तरफ सत्ता में बैठे लोग बिना किसी सदन के सदस्य रहे अपने बेटों को मंत्री बनवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजगार मांगने वाले छात्रों को जेल और लाठी मिल रही है।” नेताओं ने मांग की है कि:
गिरफ्तार किए गए सभी अभ्यर्थियों को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए।
छात्रों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे (FIR) वापस लिए जाएं।
TRE-4 समेत बिहार की सभी रिक्तियों का विज्ञापन तुरंत जारी कर बहाली प्रक्रिया शुरू की जाए।
इनकी रही उपस्थिति
विरोध मार्च के दौरान मो० एजाज, ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, शंकर महतो, मो० रहमान, मोतीलाल सिंह, उपेंद्र शर्मा, चांद बाबू, मो० शाद, सरवर वसीम, बस्साम तौहीदी और राजद नेता दीपक लाल निरहुआ समेत बड़ी संख्या में छात्र और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने दमनकारी रवैया नहीं छोड़ा, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में और भी उग्र होगा।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
सकरा (मुजफ्फरपुर)। आगामी चुनावों की आहट से पहले ही सकरा प्रखण्ड में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में आयोजित ‘संगठन सृजन साथी‘ सदस्यता अभियान के माध्यम से पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी ताकत झोंक दी है। सकरा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम के नेतृत्व एवं प्रखण्ड अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में कांग्रेस ने अपनी भविष्य की रणनीति साफ कर दी है।
जमीनी तैयारी: सकरा में आयोजित ‘संगठन सृजन साथी’ अभियान के दौरान मंच पर एकजुटता दिखाते जिला अध्यक्ष अरविन्द कुमार मुकुल, पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम व अन्य नेतागण। (दाएं) कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिक एवं कार्यकर्ता।
बूथ स्तर पर मजबूती ही जीत की कुंजी: अरविन्द मुकुल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुजफ्फरपुर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अरविन्द कुमार मुकुल ने कार्यकर्ताओं को ‘मिशन मोड’ में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “पार्टी को पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक अभेद्य किले के रूप में तब्दील करना है। हमारा मूलमंत्र है— बूथ जीतो, चुनाव जीतो।” उन्होंने पर्यवेक्षक रवि रंजन कुमार के साथ मिलकर उपस्थित लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पार्टी की सदस्यता लेने की अपील की।
बच्चों के भविष्य के लिए कांग्रेस जरूरी: उमेश राम
सकरा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम ने केंद्र और राज्य की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश में दलितों, पिछड़ों, वंचितों और युवाओं के हितों की रक्षा केवल कांग्रेस ही कर सकती है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “यह सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि आपके बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। अपने हक और अधिकार के लिए कांग्रेस के हाथ को मजबूत करें।”
क्षेत्रीय नेताओं की रही भारी मौजूदगी
इस अवसर पर सदस्यता लेने के लिए लोगों में उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पर्यवेक्षक रवि रंजन कुमार, अनीता देवी, शिवम कुमार, मो० सागिर, रेहाना खातून, डॉ० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, मो० जसीम अहमद और नुनू राय सहित भारी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,