Tuesday, November 3, 2026

सावधान अभिभावक! फर्जी स्कूलों में फंसे तो बर्बाद हो जाएगा बच्चों का भविष्य; बिना ‘आधार’ चल रही हैं शिक्षा की दुकानें, ऐसे करें असली-नकली की पहचान!

बड़ी चेतावनी: बिहार में बिना यू-डाइस कोड वाले स्कूलों पर गिरने वाली है गाज, ₹1 लाख जुर्माना और ₹10,000 रोज का फटका; आपके बच्चे की टीसी और सर्टिफिकेट भी हो जाएंगे रद्दी!

पटना, [25 मई 2026 ]: बिहार में अगर आप अपने बच्चे का एडमिशन किसी आलीशान बिल्डिंग या चमक-दमक वाले प्राइवेट स्कूल में कराने जा रहे हैं, तो रुक जाइए! आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके बच्चे के पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। बिहार सरकार का शिक्षा विभाग बिना मान्यता और बिना निबंधन (रजिष्‍ट्रेशन ) के चल रहे फर्जी और बेनामी प्राइवेट स्कूलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के मूड में है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना मान्यता वाले स्कूलों को सील किया जाएगा और उन पर ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना तथा ₹10,000 रोजाना का फटका लगेगा। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन मासूम बच्चों का होगा जो इन अवैध स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर एवं दायें में  सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।

बिना यू-डाइस (UDISE+) कोड वाले स्कूल हैं पूरी तरह अवैध: यह है ‘स्कूल का आधार कार्ड‘

शिक्षा विभाग के मुताबिक, बिहार में बिना UDISE+ कोड के चल रहे सभी निजी स्कूल पूरी तरह से गैर-मान्यता प्राप्त (Unrecognized) और गैर-कानूनी हैं।

क्या होता है यू-डाइस कोड? > UDISE का पूरा नाम Unified District Information System for Education है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला 11 अंकों का एक परमानेंट कोड होता है। जैसे हर नागरिक के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही हर वैध स्कूल के लिए यू-डाइस कोड उसका ‘आधार’ है। इसी कोड से सरकार के पास स्कूल के छात्र, शिक्षक और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जन्मकुंडली ऑनलाइन दर्ज रहती है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

अवैध स्कूलों में बच्चे को पढ़ाने के 5 सबसे घातक नुकसान:   

यदि आप किसी ऐसे स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ा रहे हैं जिसके पास वैध कोड या मान्यता नहीं है, तो आपको ये भारी नुकसान उठाने पड़ेंगे:

  • ❌  टीसी (Transfer Certificate) हो जाएगी रद्दी: जब बच्चा उस स्कूल से पढ़कर किसी दूसरे अच्छे या सरकारी स्कूल में जाना चाहेगा, तो उसकी टीसी को अमान्य कर दिया जाएगा क्योंकि छात्र का डेटा सरकारी पोर्टल पर होगा ही नहीं।
  • ❌  सरकारी योजनाओं और स्कॉलरशिप से वंचना: बिहार सरकार या केंद्र सरकार की साइकिल योजना, पोशाक राशि, या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे छात्र के बैंक खाते में जाता है। बिना कोड वाले स्कूल के बच्चों को ₹1 का भी सरकारी लाभ नहीं मिलेगा।
  • ❌  बोर्ड परीक्षा (10वीं/12वीं) पर संकट: BSEB या CBSE जैसे बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के लिए स्कूल के पास वैध यू-डाइस कोड होना अनिवार्य है। इसके बिना बच्चे बोर्ड परीक्षा का फॉर्म ही नहीं भर पाएंगे।
  • ❌  गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन (RTE) नहीं: निबंधित न होने के कारण ऐसे स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत 25% आरक्षित सीटों पर मुफ्त एडमिशन संभव नहीं है।
  • ❌  बीच सत्र में स्कूल बंद होने का खतरा: सरकार की सख्ती के कारण ये स्कूल कभी भी सील हो सकते हैं, जिससे आपके बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो सकता है।

असली मान्यता प्राप्त स्कूल की क्या है पहचान? जारी होते हैं ये दस्तावेज:

जब कोई स्कूल शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन करता है और जांच में सही पाया जाता है, तो उसे सरकार द्वारा ये प्रामाणिक दस्तावेज जारी किए जाते हैं:

  1. प्रस्वीकृति पत्र (Recognition Certificate – Form II): जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा जारी विहित प्रपत्र-2, जिसमें साफ लिखा होता है कि स्कूल को किस कक्षा तक चलाने की मान्यता मिली है।
  2. 11 अंकों का यू-डायस कोड: शिक्षा मंत्रालय द्वारा अलॉटेड यूनिक नंबर।
  3. ई-संबंध पोर्टल रजिस्ट्रेशन नंबर: इसके मिलते ही स्कूल का नाम सरकारी वेबसाइट की “मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची” में लाइव दिखने लगता है।
  4. ज्ञानदीप पोर्टल मैपिंग: आरटीई के तहत गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले के लिए मिलने वाली सरकारी आईडी।

घर बैठे 5 स्टेप्स में खुद चेक करें स्कूल असली है या फर्जी (स्‍टेप बाय स्‍टेप गाइड लाइन ):

अब स्कूल संचालक आपको बेवकूफ नहीं बना पाएंगे। आप अपने मोबाइल से ही मिनटों में स्कूल की सत्यता जांच सकते हैं। इसके लिए किसी पासवर्ड की जरूरत नहीं है:

  • स्टेप 1: अपने मोबाइल ब्राउज़र में शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://kys.udiseplus.gov.in खोलें।
  • स्टेप 2: होमपेज पर दिख रहे विकल्पों में से “UDISE Code” वाले टैब पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: स्कूल प्रशासन से मांगकर उनका 11 अंकों का यूडायस कोड और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड डालकर “Search” बटन दबाएं।
  • स्टेप 4: कोड सही होने पर नीचे स्कूल का नाम आएगा, उस स्कूल के नाम पर क्लिक करें।
  • स्टेप 5: स्कूल की पूरी प्रोफाइल खुल जाएगी। यहाँ ध्यान से देखें कि School Status “Active” हो और Management के आगे “Private Unaided (Recognized)” लिखा हो।

सावधनी : अगर पोर्टल पर कोड डालने के बाद “No Record Found” या स्टेटस “Unrecognized” दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। वह स्कूल अवैध है! दाखिला दिलाने से पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड पर DEO द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्वीकृति पत्र (Form-II) जरूर देखें। अपने बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं!

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बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर गिरेगी गाज! बिहार सरकार का अल्टीमेटम, ₹1 लाख जुर्माना और ₹10,000 रोजाना लगेगा फटका

बड़ी खबर: बिहार में बिना मान्यता दुकान खोलकर बैठे प्राइवेट स्कूलों की अब खैर नहीं, सरकार ने तय की आखिरी तारीख; सीधे सील होंगे स्कूल!

पटना, [25 मई 2026]: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सम्राट  सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में बिना सरकारी मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हजारों प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अब सीधे ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी है। शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर (IAS) ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को एक बेहद सख्त फरमान जारी किया है।

इस सरकारी आदेश के बाद राज्य के उन निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है जो बिना मान्यता के धड़ल्ले से ‘शिक्षा की दुकान’ चला रहे हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर एवं दायें में  सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।

पकड़े गए तो लगेगा भारी जुर्माना: ₹1 लाख एकमुश्त और ₹10,000 रोज!

सरकारी पत्र के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की धारा 18 के तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल बिना सक्षम प्राधिकार से मान्यता प्रमाण-पत्र लिए न तो स्थापित किया जा सकता है और न ही संचालित किया जा सकता है।

यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो अधिनियम की धारा 18(5) एवं 19(5) के तहत:

  • दोषी व्यक्ति या संस्था पर सीधे ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना ठोंका जाएगा।
  • इसके बावजूद अगर स्कूल बंद नहीं किया गया, तो ₹10,000 प्रति दिन के हिसाब से अलग से जुर्माना वसूल किया जाएगा।
 सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

बिहार में चल रहा है बड़ा ‘खेल‘: 19 हजार मान्यता प्राप्त, बाकी सब अवैध!

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। पत्र के अनुसार, वर्तमान में राज्य में केवल 19,186 निजी स्कूल ही मान्यता प्राप्त हैं, जबकि 1,012 स्कूल मान्यता लेने की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा राज्य में जितने भी प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं, वे सब के सब पूरी तरह से गैर-कानूनी (अवैध) हैं और RTE एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

10 जून 2026: सरकार ने दिया ‘आखरी मौका‘

सरकार ने ऐसे सभी अवैध निजी स्कूलों को सुधरने का एक अंतिम अवसर दिया है। जिन स्कूलों ने अब तक मान्यता नहीं ली है या ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, उन्हें 10 जून 2026 तक हर हाल में शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर सभी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

सिर्फ कमरों का डब्बा होने से नहीं मिलेगी मान्यता, इन कड़े मानकों को पूरा करने पर ही शिक्षा विभाग देगा ‘ग्रीन सिग्नल‘

बिहार सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी स्कूल को मान्यता या प्रस्वीकृति पत्र तभी जारी किया जाता है जब वह बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के कड़े मानकों पर खरा उतरता है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, स्कूल के पास छात्रों की संख्या के अनुपात में पक्का और सुरक्षित भवन  होना अनिवार्य है, जिसमें हवादार क्लासरूम के साथ-साथ बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त खेल का मैदान  होना सबसे पहली शर्त है। इसके अलावा, स्कूल परिसर में छात्र और छात्राओं के लिए पूरी तरह अलग-अलग और साफ-सुथरे शौचालय , शुद्ध पेयजल  की मुकम्मल व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक चिकित्सा  जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का होना अनिवार्य है। केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता भी सबसे महत्वपूर्ण है; स्कूल में केवल वही शिक्षक पढ़ा सकते हैं जो आरटीई (RTE) नियमों के तहत प्रशिक्षित (जैसे- D.El.Ed, B.Ed या TET उत्तीर्ण) हों। जब शिक्षा विभाग की टीम स्कूल का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करके इन सभी पैमानों को सही पाती है, तभी स्कूल को वैध संचालन का अधिकार मिलता है, अन्यथा उसे अवैध घोषित कर दिया जाता है।

निदेशक का सख्त आदेश: “10 जून की तय समय-सीमा बीतने के बाद यदि किसी भी स्कूल ने आवेदन नहीं किया और वह बिना मान्यता के चलता पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना कोई रियायत बरते सीधे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

 शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता वाले अवैध प्राइवेट स्कूलों को सुधरने का यह आखिरी मौका दिया है, जिसके तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को कड़ा आदेश जारी किया गया है कि वे स्थानीय अखबारों, सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों से इस चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि समय-सीमा बीतने के बाद कोई भी स्कूल संचालक बहानेबाजी न कर सके। इसके साथ ही, विभाग ने अभिभावकों को भी विशेष रूप से सचेत रहने की अपील की है कि वे दाखिले से पहले स्कूलों की मान्यता की जांच कर लें और महज चकाचौंध के चक्कर में आकर अपने मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं; क्योंकि 10 जून 2026 के बाद इन अवैध स्कूलों पर सीधे ताला लटकेगा और गाज गिरनी तय है।

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डिजिटल कॉकरोच’ के डंक से हिली सत्ता की कुर्सी! सोशल मीडिया पर मचा है कॉकरोच जनता पार्टी का तहलका!

“अकाउंट्स हैक, वेबसाइट क्रैश… फिर भी महा-कमबैक! ‘कॉकरोच इज बैक’ से सोशल मीडिया पर हड़कंप!”

“सोनम वांगचुक बने ‘मानद कॉकरोच’! प्रशांत किशोर के मिलें सुर, प्रशांत भूषण और ध्रुव क्‍या थामेंगे CJP का विद्रोही हाथ!”

पटना/ मुजफ्फरपुर: डिजिटल दुनिया में इस समय एक ऐसा ‘भूकंप’ आया है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया के महारथियों तक सबको हिलाकर रख दिया है। जिसे कभी एक मामूली कीड़ा समझकर कुचलने की कोशिश की गई थी, आज उसी ‘डिजिटल कॉकरोच’ के एक डंक ने सत्ता की कुर्सी को डगमगा दिया है। सोशल मीडिया पर ‘2 करोड़’ की एक ऐसी डिजिटल सेना खड़ी हो चुकी है, जिसके तेवरों ने बड़े-बड़े सूरमाओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

डिजिटल स्ट्राइक, हैकिंग और फिर एक ‘महा-कमबैक‘!

बीते कुछ दिनों से इस विद्रोही डिजिटल ग्रुप को दबाने की हर मुमकिन कोशिश की गई। इनके मुख्य सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बनाया गया, वेबसाइट्स पर ताबड़तोड़ साइबर हमले हुए और उन्हें क्रैश कर दिया गया। ऐसा लगा कि सत्ता और सिस्टम के दबाव में यह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी।

लेकिन, जैसा कि कॉकरोच के बारे में कहा जाता है—’यह परमाणु हमले में भी बच सकता है।’ ठीक वैसा ही हुआ! तमाम पाबंदियों और हैकिंग के हमलों को धत्ता बताते हुए इस ग्रुप ने एक धमाकेदार वापसी की है। इंटरनेट पर इस समय ‘Cockroach Is Back’(कॉकरोच इज बैक’) का नारा ट्रेंड कर रहा है। रातों-रात खोई हुई डिजिटल जमीन को वापस पाकर इस ग्रुप ने साबित कर दिया है कि इन्हें डिजिटल स्पेस से मिटाना नामुमकिन है। इस महा-कमबैक से सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ है।

सोनम वांगचुक बने ‘मानद कॉकरोच‘, दिग्गजों के मिल रहे सुर

इस डिजिटल विद्रोह की गूंज अब सिर्फ मीम्स और वीडियोज तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों और एक्टिविस्ट्स ने भी इसमें अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है।

  • सोनम वांगचुक को मिला बड़ा सम्मान: लद्दाख की वादियों से पर्यावरण और अधिकारों की आवाज उठाने वाले मशहूर इनोवेटर सोनम वांगचुक को इस ग्रुप ने अपना ‘मानद कॉकरोच’ घोषित किया है। व्यवस्था के खिलाफ अडिग रहने की उनकी फितरत को देखते हुए यह खिताब उन्हें दिया गया है।
  • प्रशांत किशोर के बदले रुख: राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर, जो हर राजनीतिक नब्ज को बखूबी पहचानते हैं, उनके सुर भी अब इस डिजिटल मूवमेंट से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि जनता की इस डिजिटल आवाज को दबाना भारी भूल साबित हो सकता है।

आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने इस टिप्पणी के विरोध में 16 मई 2026 को मज़ाक-मज़ाक में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की घोषणा कर दी। उन्होंने नारा दिया— “उन्होंने हमें कुचलने की कोशिश की, हम वापस आ गए।”

आप खातों को हैक कर सकते हैं और रोक सकते हैं लेकिन आप इस आंदोलन को हैक नहीं कर सकते। हम रुकने वाले नहीं हैं और हम इस तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। हर हमला कॉकरोच को और मज़बूत बनाता है। हम इस आंदोलन को टिकाऊ रूप से जारी रखने और इसे अगले स्तर तक ले जाने के लिए एक योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही और अधिक साझा करेंगे!

“सरकार कॉकरोचों से इतना क्यों डर रही है?”— संस्थापक अभिजीत दिपके का सत्ता पर सीधा प्रहार

इस डिजिटल बवंडर के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक और आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक और भावुक पोस्ट साझा कर सीधे सरकार को चुनौती दी है। दिपके ने पार्टी की ताकत का दावा करते हुए लिखा, “हमारी आधिकारिक वेबसाइट पर 10 लाख से ज्यादा युवा ‘कॉकरोच सदस्य’ के रूप में साइन अप कर चुके थे, और इनमें से 6 लाख से अधिक कॉकरोचों ने पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर भी किए थे।” सरकार की पाबंदियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आगे सवाल दागा, “आखिर सरकार इन कॉकरोचों से इतना क्यों डर रही है? लेकिन याद रहे, यह तानाशाही व्यवहार अब भारत के युवाओं की आंखें खोल रहा है। हमारा एकमात्र अपराध सिर्फ इतना था कि हम अपने लिए एक बेहतर भविष्य की मांग कर रहे थे। लेकिन सत्ता में बैठे लोग हमसे इतनी आसानी से छुटकारा नहीं पा सकते। भले ही हमारी वेबसाइट और हैंडल ब्लॉक कर दिए गए हों, हम अभी एक नया घर बना रहे हैं… क्योंकि कॉकरोच कभी मरते नहीं!”

क्या थामेगें प्रशांत भूषण और ध्रुव CJP का हाथ?

अब राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और बेहद लोकप्रिय यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर ध्रुव भी इस विद्रोही अभियान (CJP – Cockroach Justice Party / Citizens for Justice and Peace) का हाथ थामने जा रहे हैं?

सूत्रों की मानें तो: प्रशांत भूषण इस डिजिटल सेना को कानूनी ढाल देने पर विचार कर रहे हैं, जबकि ध्रुव अपने वीडियोज के जरिए इस ‘डिजिटल कॉकरोच’ क्रांति की हकीकत को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह ‘विद्रोही हाथ’ सत्ता के सामने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल चुनौती बनकर उभरेगा।

2 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाली यह डिजिटल फोर्स अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक टर्निंग पॉइंट बन चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि ‘डिजिटल कॉकरोच’ का यह डंक आने वाले दिनों में सत्ता की राजनीति को और कितना मजबूर करता है!

लद्दाख के ‘नायक’ बने ‘मानद कॉकरोच’, तो सोशल मीडिया पर उड़ी राहुल और आपियों की धज्जियाँ!

लद्दाख की बर्फीली वादियों से पर्यावरण और नागरिक अधिकारों की बुलंद आवाज उठाने वाले मशहूर इनोवेटर सोनम वांगचुक को आंदोलनकारियों ने एक बड़ा और अनोखा सम्मान दिया है। ‘Cockroach Is Back’ (@Cockroachisback)कॉकरोच इज बैक ग्रुप ने व्यवस्था के खिलाफ अडिग रहने और हर परिस्थिति में डटे रहने की उनकी फितरत को देखते हुए उन्हें अपना ‘मानद कॉकरोच’ घोषित किया है। एक तरफ जहाँ वांगचुक को यह खिताब मिलने से युवाओं का जोश सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इस नई नवेली डिजिटल पार्टी को लेकर जबरदस्त खिंचाई भी शुरू हो गई है। एक ट्विटर (X) यूजर ने कांग्रेस और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ दोनों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा तंज कसा है। यूजर ने राहुल गांधी के पुराने चर्चित बयान पर चुटकी लेते हुए लिखा— “राहुल गांधी ने एक महान डायलॉग दिया था कि इधर से आलू डालूँगा, उधर से सोना निकलेगा; बस इसी डायलॉग से प्रभावित होकर आपियों (आम आदमी पार्टी के लोगों) ने यह नई नवेली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बना डाली है। इनका गणित सीधा है— इधर से आम आदमी पार्टी का कचरा डालूँगा, उधर से कॉकरोच जनता पार्टी निकालूँगा!” —

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बकरीद के दिन परीक्षा! NTA की बड़ी लापरवाही से मुस्लिम छात्रों में हाहाकार, क्या टलेगी 28 मई की CUET UG परीक्षा?

अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप; मानवाधिकार संस्थान और मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत ने सीधे केंद्र सरकार और NTA से की परीक्षा टालने की मांग।

पटना/मुजफ्फरपुर : देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक, ‘कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट’ (CUET UG 2026) विवादों के घेरे में आ गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर एक बार फिर गंभीर लापरवाही और धार्मिक संवेदनशीलता की अनदेखी करने का आरोप लगा है। दरअसल, सरकारी गैजेट कैलेंडर के अनुसार 28 मई 2026 (गुरुवार) को मुस्लिम समुदाय का पवित्र त्योहार बकरीद (ईद-उल-अज़हा) है, लेकिन इसी दिन NTA ने CUET UG के चार महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षा निर्धारित कर दी है। इस फैसले के बाद से मुस्लिम अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और बेचैनी का माहौल है।

लापरवाही या अनभिज्ञता? त्योहार के दिन सुबह 7 बजे रिपोर्टिंग टाइम!

मानवाधिकार संस्थान बिहार के महासचिव और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (बिहार) के स्टेट जनरल सेक्रेटरी, मोहम्मद इश्तेयाक ने इस मामले को लेकर भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव, शिक्षा विभाग के मंत्रालय सचिव और NTA के अध्यक्ष/निदेशक को एक आधिकारिक पत्र (ईमेल) भेजकर तीखा विरोध दर्ज कराया है।

मोहम्मद इश्तेयाक ने अपने पत्र में कहा है कि पूरे भारत में 11 मई से 31 मई तक CUET UG 2026 की परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन 28 मई को English, Accountancy, Book Keeping और General Aptitude Test जैसे बड़े विषयों की परीक्षा होनी है। इसके लिए छात्रों का रिपोर्टिंग टाइम सुबह 7:00 बजे रखा गया है और परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अंतिम समय सीमा सुबह 8:30 बजे है।

NTA द्वारा जारी एडमिट कार्ड और शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया शिकायती पत्र, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि 28 मई 2026 को बकरीद (ईद-उल-अज़हा) के त्योहार के दिन ही CUET UG की परीक्षा (English & Accountancy) निर्धारित कर दी गई है, जिसका देश भर में विरोध शुरू हो गया है। अभ्यर्थी अदीबा इश्तेयाक (मुजफ्फरपुर, बिहार) का यह एडमिट कार्ड इस बड़ी लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

नमाज और कुर्बानी छोड़ परीक्षा देने कैसे जाएंगे छात्र?

देशभर के मुस्लिम संगठनों का कहना है कि बकरीद के दिन सुबह 6:30 बजे से लेकर 10:00 बजे तक मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष सामूहिक नमाज अदा की जाती है। इस नमाज में बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं सभी अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। नमाज के तुरंत बाद कुर्बानी की पवित्र परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जिसके कारण मुस्लिम परिवारों में पूरे दिन अत्यधिक व्यस्तता रहती है।

ऐसे में सुबह 7 बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचना मुस्लिम छात्रों के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। यदि छात्र परीक्षा देने जाते हैं, तो वे अपने इस बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य से वंचित रह जाएंगे।

संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन का बड़ा आरोप

शिक्षा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि त्योहार के दिन परीक्षा आयोजित करना भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर एक बड़ा आघात है। यह धार्मिक अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला हनन है। मुस्लिम समुदाय ने मांग की है कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को अक्षुण्ण रखने के लिए 28 मई की परीक्षा तिथि को तत्काल बदला जाए, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपने त्योहार और परीक्षा दोनों में शामिल हो सकें।

अब देखना यह है कि देश भर से उठ रही इस जायज मांग पर शिक्षा मंत्रालय और NTA क्या कदम उठाता है। क्या लाखों मुस्लिम छात्रों के भविष्य और उनकी धार्मिक आस्था को देखते हुए परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाई जाएगी या विवाद और गहराएगा?

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IPL में गूंजेगा बिहार का डंका! वेदांता के अनिल अग्रवाल की बड़ी हुंकार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘मिशन मोड’ में, खेल मंत्री ने भी मिलाया हाथ!

उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने कहा— “बिहार मेरे लिए सिर्फ राज्य नहीं, एक ‘इमोशन‘ है, टीम को दूंगा बिना शर्त  समर्थन”; सरकार बोली— हमारे पास स्पष्ट ‘विजन‘ और नीति, अब मिलकर बदलेगा इतिहास!

पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों और युवाओं के सपनों को आज उस वक्त नए पंख लग गए, जब देश के दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की ‘बिहार आईपीएल टीम’ बनाने की मुहिम को बिहार सरकार का खुला और ऐतिहासिक समर्थन मिल गया। इस बड़े राजनीतिक और कॉर्पोरेट तालमेल के बाद खेल गलियारों में भारी हलचल है। अब वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मंच आईपीएल (IPL) में बिहार की अपनी स्वतंत्र टीम चौके-छक्के बरसाती नजर आएगी।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

अनिल अग्रवाल की हुंकार: क्यों पहचान से महरूम है बिहार का टैलेंट?

इस खेल क्रांति की शुरुआत तब हुई जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक और जोश से भरा एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “अगर आप सपने देखोगे नहीं, तो सपने पूरे कैसे होंगे? क्या आपको नहीं लगता कि चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।” अग्रवाल ने सूबे के चमकते सितारों का जिक्र करते हुए कहा कि, पटना में जन्मे ईशान किशन ने वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक लगाया, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने, और गोपालगंज के साधारण परिवार से आने वाले साकिब हुसैन की गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नजरें हैं। उन्होंने आगे कसम खाते हुए ऐलान किया, “एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं। मैं बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी तरफ से unconditional support (बिना शर्त समर्थन) दूंगा।”

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का तुरंत रिप्लाई: ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन मोड‘ में सरकार

उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस बड़े प्रस्ताव पर बिहार सरकार ने भी पलक झपकते ही अपनी मुहर लगा दी। सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत अग्रवाल के पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए साफ कर दिया कि सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर है। मुख्यमंत्री ने लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन‘ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन‘ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस भरोसे ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार अब बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर आकर खेलने के मूड में है।

उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट और भावुक अपील पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिना वक्त गंवाए अपनी मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में किए गए ट्वीट को न केवल री-ट्वीट किया, बल्कि राज्य के युवाओं और खेल प्रेमियों को भरोसा दिलाते हुए बेहद मजबूत और सधे हुए शब्दों में लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन’ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन’ के साथ ‘मिशन’ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस त्वरित और सकारात्मक जवाब से साफ हो गया है कि बिहार सरकार राज्य के क्रिकेट टैलेंट को विश्वस्तरीय मंच देने के लिए पूरी तरह गंभीर है और प्रशासनिक स्तर पर इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ने को तैयार है।

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का बड़ा बयान: बुनियादी ढांचे के लिए कसी कमर

इस बड़ी मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी पटना में बड़ी घोषणा की। राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अनिल अग्रवाल की मांग का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी ने भी इस सोच का दिल से स्वागत किया है। मैं खेल मंत्री होने के नाते भी इस विजन के साथ खड़ी हूं। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि बिहार के खिलाड़ियों को एक बेहतरीन और विश्वस्तरीय मंच मिले। बिहार सरकार कभी भी अपने खिलाड़ियों की मदद करने से पीछे नहीं हटेगी। हमारे खेल विभाग में भी अब काम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

कॉर्पोरेट और सरकार के गठबंधन से मचेगा तहलका

खेल विश्लेषकों का मानना है कि जहाँ एक तरफ वेदांता जैसा विशाल कॉर्पोरेट ग्रुप टीम को वित्तीय और वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का बैकअप देने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ सरकार प्रशासनिक और नीतिगत बाधाओं को दूर करने के लिए ‘मिशन मोड’ में आ चुकी है। इस त्रिकोणीय जुगलबंदी (उद्योगजगत, मुख्यमंत्री और खेल मंत्रालय) के बाद अब बीसीसीआई (BCCI) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल पर भी बिहार को उसका हक देने का दबाव बढ़ेगा। वह दिन दूर नहीं जब आईपीएल के मैदान पर गूंजेगा— ‘जियो हो बिहार के लाला!‘

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अगले 5 साल में 1 लाख शिक्षकों की बंपर बहाली! ट्रांसफर नीति में महिलाओं को गृह पंचायत और पुरुषों को पड़ोसी ब्लॉक का बंपर तोहफा!!

लोक सेवक आवास के ‘संकल्प सभागार‘ में शिक्षा विभाग की हाई-लेवल समीक्षा बैठक में मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला; हर साल जुलाई में निकलेगा विज्ञापन, ‘जीविका दीदियां‘ सिलेंगी स्कूली बच्चों की पोशाक।

22 मई 2026। विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, पटना: बिहार के शिक्षा जगत और रोजगार की तलाश कर रहे लाखों युवाओं के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक और खुशियों की सौगात लेकर आया है। राज्य सरकार ने युवाओं को रोजगार और शिक्षकों को तबादले की बड़ी राहत देते हुए कई चौकाने वाले  फैसले लिए हैं। लोक सेवक आवास (1 अणे मार्ग) स्थित ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित शिक्षा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार द्वारा कई बड़े और अभूतपूर्व निर्णयों पर मुहर लगा दी गई है।

बैठक की कमान संभालते हुए माननीयमुख्‍यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है और इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

“पटना के 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प सभागार’ में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते माननीय मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उपस्थित शिक्षा विभाग के आला अधिकारी एवं वरिष्ठ पदाधिकारीगण, जहां राज्य के शिक्षकों के ट्रांसफर और 1 लाख नई कड़क नियुक्तियों को लेकर ऐतिहासिक नीति पर मुहर लगाई गई।”

बैठक के 3 सबसे बड़े और मुख्य फैसले:

  1. 5 वर्षों में 1 लाख नई नियुक्तियां (हर साल 20 हजार पद): युवाओं के लिए नौकरी का पिटारा खोलते हुए सरकार ने घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 1 लाख शिक्षकों की बंपर बहाली की जाएगी। इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन अनिवार्य रूप से जारी कर दिया जाएगा।
  2. तबादला नीति में बड़ा फेरबदल, शिक्षकों को मिली बड़ी राहत: शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) को लेकर सालों से चल रही कशमकश को खत्म करते हुए सरकार ने नई सुगम नीति बनाने का निर्देश दिया है। अब महिला शिक्षकों का स्थानांतरण यथासंभव उनके गृह जिले के अपने प्रखंड के गृह पंचायत के बगल वाली पंचायत में ही किया जाएगा। वहीं, पुरुष शिक्षकों को राहत देते हुए उनके गृह जिले में ही उनके अपने गृह प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में ट्रांसफर करने की सुगम नीति बनाई जा रही है।
  3. ‘जीविका दीदियों‘ के हाथ में होगी स्कूली पोशाक की कमान: राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली मुफ्त पोशाक (यूनिफॉर्म) की आपूर्ति अब पूरी तरह से ‘जीविका‘ के माध्यम से की जाएगी। इस मास्टरस्ट्रोक फैसले से जहां एक ओर स्कूली बच्चों को ससमय और उच्च गुणवत्ता वाली पोशाक मिल सकेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण को जबरदस्त बल मिलेगा।

इस उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और प्रधान सचिव भी मौजूद रहे। अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी गई है कि इन सभी गाइडलाइंस को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए ताकि जनता और शिक्षकों को इसका लाभ तुरंत मिल सके।

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सासाराम में घूसखोरों पर गिरा निगरानी का वज्रपात: 3 लाख की रिश्वत लेते CO और 20 हजार लेते अस्पताल का क्लर्क अरेस्ट!

एक ही दिन, एक ही शहर और महज 1 किलोमीटर का दायरा… निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बैक-टू-बैक दो बड़े ऑपरेशनों में अंचलाधिकारी (CO) समेत 3 को रंगे हाथों दबोचा; प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप।

सासाराम (रोहतास)। बिहार के रोहतास जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। सासाराम शहर में शुक्रवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की पटना मुख्यालय टीम ने एक ही दिन में, महज एक किलोमीटर की दूरी पर दो अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस महा-कार्रवाई में सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार, उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार और सासाराम सदर अस्पताल के लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार को कुल 3 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

तस्वीर 1 (बाएं): दाखिल-खारिज के नाम पर 3 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार सासाराम अंचल के भ्रष्ट CO आकाश कुमार रौनियार (काली शर्ट में) और उनका दलाल/निजी सहायक सोनू कुमार (ग्रे टी-शर्ट में) निगरानी पुलिस की गिरफ्त में।
तस्वीर 2 (दाएं): ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत लेते सड़क किनारे से दबोचा गया सासाराम सिविल सर्जन कार्यालय का घूसखोर क्लर्क सतीश कुमार (सफेद शर्ट में) पुलिस अभिरक्षा में।
 

निगरानी विभाग की इस दोहरी सर्जिकल स्ट्राइक से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है।

 पहला वज्रपात: दाखिल-खारिज के नाम पर 3 लाख डकार रहे CO और उनका गुर्गा ढेर

निगरानी ब्यूरो की पहली बड़ी सफलता सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) कार्यालय से जुड़ी है। पुलिस उपाध्यक्ष पवन कुमार-I के नेतृत्व में गठित एक विशेष धावा दल ने सासाराम के बेदा, मोरसराय स्थित CO आकाश कुमार रौनियार के निजी आवास पर धावा बोला।

क्या है पूरा मामला? राजस्व कर्मचारी (सासाराम अंचल) के पद पर तैनात परिवादी राकेश कुमार (पिता- स्वर्गीय कमला प्रसाद सिंह, निवासी- दिनारा, रोहतास) ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार द्वारा प्रत्येक दाखिल-खारिज (Mutation) के बदले 50,000 रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। इसके अलावा एक विशिष्ट दाखिल-खारिज वाद संख्या (0-4499/2025-26) में परिवादी अशोक प्रसाद से काम करने के एवज में कुल 8,00,000 (आठ लाख) रुपये रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

निगरानी ब्यूरो ने जब गोपनीय तरीके से इस शिकायत का सत्यापन कराया, तो आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। सत्यापन के दौरान अंचलाधिकारी द्वारा पहली किस्त के रूप में 3,00,000 रुपये (तीन लाख रुपये) रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण मिला। इसके बाद डीएसपी पवन कुमार-I के नेतृत्व में जाल बिछाया गया। जैसे ही परिवादी ने तीन लाख रुपये की रकम बढ़ाई, विजिलेंस टीम ने CO आकाश कुमार रौनियार और उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार को रंगे हाथों दबोच लिया।

दूसरा वज्रपात: ट्रांसफर रोकने के नाम पर सदर अस्पताल का क्लर्क भी सड़क किनारे से नापा गया

CO के आवास पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद, महज 1 किलोमीटर की दूरी पर निगरानी की दूसरी टीम ने एक और भ्रष्ट सरकारी ‘शिकारी’ को दबोच लिया। पुलिस उपाध्यक्ष विकास कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में काम कर रही टीम ने सासाराम सदर अस्पताल परिसर के पास जाल बिछाया।

क्या है पूरा मामला? इस मामले की परिवादिनी  सुनीता कुमारी (पति- शैलेश कुमार चौधरी, निवासी- मौलाबाग, आरा, भोजपुर) हैं, जो संझौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में प्रखंड लेखा प्रबंधक (Block Accountant) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी कि सदर अस्पताल, सासाराम के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार द्वारा उनका ट्रांसफर (स्थानांतरण) रुकवाने के एवज में सिविल सर्जन के नाम पर रिश्वत की मांग की जा रही थी।

शिकायत के सत्यापन के बाद जैसे ही परिवादिनी ने 20,000 रुपये (बीस हजार रुपये) की घूस लिपिक सतीश कुमार को थमाई, वैसे ही सदर अस्पताल के सामने स्थित शिव मंदिर के पास सड़क किनारे से निगरानी की टीम ने क्लर्क सतीश कुमार को दबोच लिया।

पूरी विजिलेंस टीम को मिलेगा विशेष पुरस्कार

एक ही दिन, एक ही शहर और बेहद गोपनीयता व कार्यकुशलता के साथ दो अलग-अलग बड़े ऑपरेशनों को सफल बनाने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक (DG) ने पूरी धावा दल (निगरानी टीम) को नकद पुरस्कार और सम्मान देने की घोषणा की है। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों अभियुक्तों (CO आकाश कुमार रौनियार, निजी सहायक सोनू कुमार और क्लर्क सतीश कुमार) से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद उन्हें पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा।

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धरती को बचाने की जंग! एम.डी.डी.एम. कॉलेज की छात्राओं ने भरी हुंकार: “लोकल एक्शन से ही बदलेगा ग्लोबल इम्पैक्ट!”

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्राणिशास्त्र और वनस्पति विज्ञान विभाग का महा-आयोजन; पौधारोपण से लेकर ओजस्वी भाषण और वैज्ञानिक पोस्टरों से दिया पर्यावरण विनाश के खिलाफ कड़ा संदेश।

मुजफ्फरपुर, 22 मई 2026: महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (M.D.D.M. College) में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संकट और प्रकृति के संरक्षण को लेकर एक अभूतपूर्व अलख जगाई गई। कॉलेज के स्नातकोत्तर प्राणिशास्त्र (Zoology) एवं वनस्पति विज्ञान (Botany) विभागों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने धरती के अस्तित्व और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। वर्ष 2026 की विशेष थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव के लिए” को चरितार्थ करते हुए छात्राओं ने अपनी अनूठी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच से पूरे परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया।

एम.डी.डी.एम. कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के बाहर अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल, विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता यादव एवं अन्य शिक्षिकाओं के साथ हाथों में नए पौधे थामे जागरूक छात्राएं, जो धरती को हरा-भरा बनाने और ‘लोकल एक्शन’ का संदेश दे रही हैं।

 वनस्पति विभाग में गूंजी पर्यावरण की गूंज, हुआ महा-पौधारोपण

कार्यक्रम का धमाकेदार आगाज वनस्पति विज्ञान विभाग में प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ। प्राचार्या ने स्वयं अपने हाथों से पौधारोपण कर छात्राओं को यह कड़ा संदेश दिया कि हर एक पौधा मानव जीवन के अस्तित्व की रक्षा की गारंटी है। इसके बाद छात्राओं के बीच चित्रांकन और ओजस्वी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। शफ़, तनु, मरियम, ज्योति, अनुष्का, नंदिनी, अंजलि और तराना जैसी होनहार छात्राओं ने अपनी कला और वाणी के दम पर जैव विविधता संकट की भयावहता और उसके तात्कालिक समाधानों को बेबाकी से सामने रखा। वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ. श्वेता यादव ने स्वागत भाषण के जरिए पर्यावरण चेतना पर जोर दिया।

कॉलेज के गलियारे में सजी ‘जैव विविधता और उसका संरक्षण’ विषय पर आधारित पोस्टर्स प्रदर्शनी। छात्राओं द्वारा बनाए गए रंग-बिरंगे पोस्टरों और पक्षियों की विविधता के चार्ट्स का बारीकी से अवलोकन करतीं प्राचार्या एवं वरिष्ठ प्राध्यापिकाएं।

 प्राणिशास्त्र विभाग में सजे पोस्टर, वैज्ञानिक चेतना ने खींचा ध्यान

दूसरी ओर, स्नातकोत्तर प्राणिशास्त्र विभाग में सजे वैज्ञानिक पोस्टरों ने आधुनिक दुनिया को प्रकृति के करीब आने की चेतावनी दी। विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक डॉ. अर्चना गुप्ता के कुशल निर्देशन में स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं ने रंग-बिरंगे और ज्ञानवर्धक पोस्टरों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के नुकसान से होने वाले खतरों और पारिस्थितिक स्थिरता को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

प्राणिशास्त्र विभाग (Department of Zoology) के सेमिनार कक्ष में मुख्य बैनर के सामने उपस्थित प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. पल्लवी और अन्य शिक्षिकाएं, जो छात्राओं को पर्यावरण संकट के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

“किताबों से बाहर आकर करना होगा काम” — प्राचार्या

छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने इस पहल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण अब केवल किताबों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब तक हमारी युवा पीढ़ी स्थानीय स्तर पर सक्रिय योगदान नहीं देगी, तब तक हम वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं देख पाएंगे।”

इस पूरे महा-आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति की सदस्य डॉ. पल्लवी, डॉ. रचना, और डॉक्टर विभा रानी आदि शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समापन एक बेहद सार्थक शैक्षणिक संवाद के साथ हुआ। इस मौके पर भारी संख्या में कॉलेज की छात्राएं, विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं और शिक्षकेतर कर्मचारी मुस्तैद रहे।

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बुलडोजर की ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ भड़का दीपंकर का गुस्सा! समस्तीपुर में गरजे माले महासचिव– “अब सड़कों पर होगा युवाओं का महाविस्फोट!”

जब सीजेआई ने युवाओं को कहा ‘कॉकरोच’, तो देश की नई पीढ़ी ने बना डाली ‘भाजपा के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’!

नीट धांधली और पेपर लीक पर घेरा: 22 लाख छात्रों के भविष्य को संघ के हवाले करने का बड़ा आरोप

विशेष कवरेज समस्तीपुर ब्यूरो 22 मई 2026

बिहार की राजनीतिक चेतना और वामपंथी संघर्ष की भूमि समस्तीपुर आज एक बार फिर ऐतिहासिक और युगांतरकारी राजनीतिक गर्जना का गवाह बनी। मौका था देश के जाने-माने लोकप्रिय कम्युनिस्ट नेता, शोषितों-वंचितों के मसीहा और पूर्व विधायक दिवंगत कॉ. रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस का। इस पावन स्मृति के अवसर पर भाकपा (माले) द्वारा समस्तीपुर के ऐतिहासिक कर्पूरी सभागार में “बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज” विषय पर एक राज्यस्तरीय विशाल सेमिनार का आयोजन किया गया।

समस्तीपुर में आयोजित सेमिनार के दौरान माइक संभालकर केंद्र व राज्य सरकार की ‘बुलडोजर नीति’ और ‘नीट परीक्षा धांधली’ पर बेहद आक्रामक और धारदार अंदाज में कड़ा प्रहार करते माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य।

सभागार की स्थिति यह थी कि कार्यक्रम शुरू होने के घंटों पहले ही पूरा परिसर खचाखच भर चुका था। कड़कड़ाती धूप और उमस के बावजूद हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, नौजवान, छात्र, प्रखर तेवरों वाली महिलाएं और समाज के प्रबुद्ध लोकतंत्रपसंद नागरिक आयोजन स्थल पर डटे रहे। लाल झंडों, नारों और क्रांतिकारी गीतों के बीच पूरा माहौल सत्ता विरोधी लहर में डूबा नजर आया। मंच पर जैसे ही मुख्य वक्ता के रूप में भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कमान संभाली, पूरा सभागार तालियों और गगनभेदी नारों से गूंज उठा। दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने चिरपरिचित धारदार, तार्किक और कड़कदार अंदाज में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की गठबंधन की भाजपा सरकार की चूलें हिला दीं।

बुलडोजर अब मशीन नहीं, भाजपा के फासीवादी दमन की राजनीतिक पहचान: दीपंकर

सेमिनार के मुख्य विषय पर बोलते हुए कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज देश के भीतर संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना दिया गया है और न्याय की जगह ‘बुलडोजर तंत्र’ ने ले ली है। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा:

दिवंगत वामपंथी नेता कॉ. रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस पर आयोजित सेमिनार में उमड़ी पार्टी कार्यकर्ताओं, महिलाओं, छात्रों और आम नागरिकों की गवाह बनती भारी और अनुशासित भीड़।

“आज देश में बुलडोजर केवल मलबे हटाने या सड़क बनाने वाली एक लोहे की मशीन नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा शासन की क्रूर राजनीतिक पहचान और निरंकुश दमन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। अपराधियों और माफियाओं पर कार्रवाई के नाम पर शुरू हुआ यह खेल अब लोकतंत्र को कुचलने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।”

माले महासचिव ने इतिहास और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि एक दौर था जब जनविरोधी सरकारों को हम – ‘लाठी-गोली और दमन की सरकार’ – कहते थे, लेकिन भाजपा ने भारतीय राजनीति को एक नया और घिनौना शब्द दिया है— “बुलडोजर राज”। उत्तर प्रदेश से शुरू हुए इस सिलसिले के तहत वहां के मुख्यमंत्री को – ‘बुलडोजर बाबा’ – का तमगा दिया गया और आज स्थिति यह है कि देश के जिस भी सूबे में भाजपा की सरकारें हैं, वहां बुलडोजर को न्याय व्यवस्था से ऊपर स्थापित कर दिया गया है।

समस्तीपुर के कर्पूरी सभागार में आयोजित ‘बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज’ सेमिनार के मुख्य मंच पर आसीन भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव, पूर्व विधायक कॉ. मंजू प्रकाश, जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार एवं अन्य वरिष्ठ वामपंथी नेतागण।

बंगाल चुनाव परिणामों के बाद ‘झालमुड़ी‘ और गरीबों की रोजी-रोटी पर क्रूर प्रहार

बिहार के राजनीतिक परिदृश्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति का विश्लेषण करते हुए दीपंकर भट्टाचार्य ने हाल के बंगाल चुनाव परिणामों और उसके बाद की परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिहार के बाद बंगाल के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग अब वहां भी खतरनाक ‘बुलडोजर संस्कृति’ को जबरन लागू करने पर आमादा हैं।

उन्होंने बंगाल के मौजूदा हालातों को रेखांकित करते हुए कहा:

“चुनाव से पहले बंगाल की राजनीतिक फिजाओं में ‘झालमुड़ी’ खाने और खिलाने की बड़ी दोस्ताना चर्चाएं हो रही थीं। नेता जमीन पर उतरकर आम जनता से जुड़ने का नाटक कर रहे थे। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों के पास दशकों से दुकान चलाकर अपना और अपने बच्चों का पेट पालने वाले छोटे-छोटे झालमुड़ी और चाय दुकानदारों को बेरहमी से उजाड़ने की खबरें सुर्खियां बन रही हैं।”

माले महासचिव ने इसके पीछे के गहरे कॉरपोरेट गठजोड़ का पर्दाफाश करते हुए कहा कि यह बुलडोजर किसी अवैध निर्माण पर नहीं चल रहा, बल्कि यह छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीब मेहनतकशों की स्वावलंबन और रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। सरकार इन गरीबों को हटाकर बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों, मॉल और टाउनशिप परियोजनाओं के लिए रास्ता साफ कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में बकरीद के मौके पर बीफ़ के छोटे और गरीब व्यापारियों पर पाबंदी लगाना, लाइसेंस और नियंत्रण के नाम पर उन्हें प्रताड़ित करना इसी क्रूर नीति का हिस्सा है। मकसद साफ है— गरीब और छोटे दुकानदारों को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाए ताकि पूरी अर्थव्यवस्था पर देश के चुनिंदा पूंजीपतियों का कब्जा हो सके। यह नीति पूरी तरह से अंबानी-अडानी केंद्रित और जनविरोधी है।

अदालतों का काम सत्ता ने छीना, बिना न्यायिक प्रक्रिया के विरोधियों को बनाया जा रहा निशाना

न्याय व्यवस्था की बदहाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कॉ. दीपंकर ने कहा कि हमारे देश का संविधान यह तय करता है कि कोई व्यक्ति दोषी है या निर्दोष, इसका फैसला केवल और केवल देश की अदालतें और हमारी स्थापित न्याय व्यवस्था ही कर सकती है। लेकिन आज भाजपा सरकार ने खुद को ही जज, जूरी और जल्लाद घोषित कर दिया है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

“शुरुआत में ढिंढोरा पीटा गया कि बुलडोजर माफियाओं पर चलेगा। लेकिन आज सच क्या है? आज बिना किसी अदालती सुनवाई के, बिना किसी जांच के, सत्ता अपने राजनीतिक विरोधियों और अपनी हक की आवाज उठाने वाले नागरिकों को निशाना बनाने के लिए बुलडोजर और एनकाउंटर की गैर-संवैधानिक राजनीति चला रही है।”

उन्होंने कहा कि आज इस देश में किसी को भी ‘बांग्लादेशी’, किसी को ‘अतिक्रमणकारी’ तो किसी को ‘देशविरोधी’ का ठप्पा लगाकर समाज के सबसे कमजोर तबकों—जैसे गरीबों, आदिवासियों, मुसलमानों, किसानों और लोकतंत्र के पक्ष में खड़े होने वाले एक्टिविस्टों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिहार सरकार पर भी दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि बिहार में चुनाव के पहले मंचों से घोषणाएं होती हैं कि गरीबों को दस-दस हजार रुपये दिए जाएंगे, उन्हें बसाया जाएगा, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं और सरकारें बन जाती हैं, उन्हीं गरीबों के आशियानों पर बिना किसी पुनर्वास के बुलडोजर चला दिया जाता है।

नीट परीक्षा में ऐतिहासिक धांधली: 22 लाख छात्रों का भविष्य ‘संघ‘ के हवाले

देश के सबसे बड़े संकट यानी शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आते ही कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य के तेवर बेहद तल्ख हो गए। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुई नीट (NEET) परीक्षा में सामने आई देशव्यापी धांधली और पेपर लीक मामले का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी बड़ी संस्थाओं के जरिए देश के 22 लाख से अधिक प्रतिभावान छात्रों के भविष्य के साथ भयंकर खिलवाड़ किया गया है।

उन्होंने इस शिक्षा घोटाले के पीछे की गहरी साजिश को उजागर करते हुए कहा:

“पिछले दस वर्षों के भाजपा शासन को उठाकर देख लीजिए, ऐसा कोई साल या ऐसी कोई बड़ी परीक्षा नहीं गुजरी जिसका पेपर लीक न हुआ हो। एनटीए जैसी अति-महत्वपूर्ण संस्थाओं पर आज किसी भी प्रकार का कोई लोकतांत्रिक नियंत्रण या संसदीय जवाबदेही नहीं रह गई है। पूरी परीक्षा प्रणाली और देश के बड़े शिक्षण संस्थानों को सोची-समझी रणनीति के तहत संघ परिवार (आरएसएस) के वैचारिक और सांगठनिक प्रभाव में चलाया जा रहा है। योग्यता को दरकिनार कर केवल अपनी विचारधारा के लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।”

बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और युवाओं पर हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए उन्होंने बिहार में TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति) अभ्यर्थियों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि पटना की सड़कों पर न्याय मांग रही युवा लड़कियों और छात्राओं तक को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इस पर शर्मिंदगी जताने के बजाय बिहार के शिक्षा मंत्री अत्यंत असंवेदनशील बयान दे रहे हैं कि ‘छात्राओं को सड़क पर आने की जरूरत ही क्या थी?’ कॉ. दीपंकर ने कहा कि यह बयान सत्ता के अहंकार की पराकाष्ठा है। आज देश और राज्य का नौजवान जब रोजगार मांगता है, तो उसे लाठियां मिलती हैं, उसकी आवाज को हर संभव तरीके से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

‘कॉकरोच‘ शब्द बना युवाओं के प्रतिरोध का नया बारूद; सोशल मीडिया की डिजिटल आग अब सड़कों पर उतरेगी

अपने संबोधन के सबसे चौंकाने वाले  हिस्से में कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने देश के भीतर उभर रहे एक नए सामाजिक और डिजिटल आंदोलन का खुलासा किया। उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया एक्टिविस्टों और सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब देश के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति ने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसी अपमानजनक संज्ञा दी, तो उन्हें लगा था कि युवा डर जाएंगे। लेकिन देश की नई और जागरूक पीढ़ी ने उसी अपमानजनक शब्द को सत्ता के खिलाफ अपने महा-प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना दिया।

उन्होंने गर्व से कहा:

“आज देश के युवाओं ने सोशल मीडिया पर ‘भाजपा के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी‘ नाम से एक अभूतपूर्व और विशाल डिजिटल मोर्चा खोल दिया है। यह इस बात का सीधा संकेत है कि देश का नौजवान अब भाजपा की भय और दमन की राजनीति से डरने वाला नहीं है, बल्कि वह खुलकर सत्ता के सामने सीना तानकर खड़ा हो रहा है। जो नौजवान कभी गुमराह होकर ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते थे, आज वही नौजवान भयानक बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई और अपनी भविष्य की असुरक्षा के खिलाफ सरकार के सामने सबसे बड़ी और मजबूत दीवार बनकर खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को कॉलेज-यूनिवर्सिटी से डिग्रियां तो बांटी जा रही हैं, लेकिन उनके हाथों से स्थायी रोजगार को हमेशा के लिए छीन लिया गया है। देश में बेरोजगारी और महंगाई अपने जीवन के सबसे चरम स्तर पर पहुंच चुकी है। इसके बावजूद, मुख्यधारा की गोदी मीडिया और सरकार की चर्चाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों के संकट और गरीबों के बुनियादी सवाल पूरी तरह से गायब हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि साल 2014 से पहले जो भाजपा नेता 40 रुपये लीटर पेट्रोल देने के बड़े-बड़े वादे करते थे, आज उनके राज में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार औंधे मुंह गिर रहा है और रसोई गैस का सिलेंडर आम और गरीब जनता की पहुंच से बिल्कुल बाहर हो चुका है। जब कोई मजदूर अपनी सही मजदूरी मांगता है, या कोई नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करता है, तो उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है।

माले महासचिव ने अपने कार्यकर्ताओं और देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा:

“यह जो ‘कॉकरोच आंदोलन’ आप देख रहे हैं, यह दरअसल देश के करोड़ों शोषित और बेरोजगार नौजवानों के भीतर सुलग रहे भारी आक्रोश का डिजिटल विस्फोट है। अभी यह प्रतिरोध आपको सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर दिख रहा है, लेकिन मैं चेतावनी देता हूँ कि आने वाले समय में सरकार की गलत नीतियों के कारण यह गुस्सा देश की हर एक सड़क पर एक बड़े जन-आंदोलन और महाविस्फोट के रूप में दिखाई देगा। हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे सोशल मीडिया की इस डिजिटल आवाज को जमीन के वास्तविक जन-आंदोलनों से जोड़ें, गांवों और कस्बों तक ले जाएं और सीधे शिक्षा मंत्री व केंद्र सरकार की छाती पर मूंग दलते हुए उनसे अपने हक का जवाब मांगें।”

कारपोरेट परस्ती, बलात्कारियों को संरक्षण और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

भाजपा सरकार की अन्य नीतियों पर बोलते हुए कॉ. दीपंकर ने तीखा आरोप लगाया कि यह सरकार एक तरफ अपराधियों पर बुलडोजर चलाने का ढोंग करती है, तो दूसरी तरफ रसूखदार बलात्कारियों को खुला राजनीतिक संरक्षण देती है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि नीट की पीड़ित छात्रा को आज तक सही मायने में न्याय नहीं मिल सका है।

उन्होंने नए लेबर कोड (श्रम कानूनों में बदलाव) की आलोचना करते हुए कहा कि इसके जरिए मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की तैयारी है। पूरे देश में अंबानी-अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए टाउनशिप और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के नाम पर बिना किसी उचित मुआवजे के गरीबों और किसानों की कीमती जमीनों के जबरन अधिग्रहण की कोशिशें तेज हो गई हैं। कॉ. दीपंकर ने मांग की कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने की साजिशें बंद हों और देश के उच्च शिक्षण संस्थानों व कैंपसों में दलित, पिछड़े और आदिवासी छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए स्वर्गीय रोहित वेमुला की तर्ज पर ‘रोहित एक्ट’ कानून तत्काल प्रभाव से बनाया जाए।

कम्युनिस्ट योद्धा का. रामदेव वर्मा की विरासत पर बोले वामपंथी दिग्गज

सेमिनार में कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार के वरिष्ठतम वामपंथी नेता दिवंगत कॉ. रामदेव वर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कॉ. रामदेव वर्मा की पूरी राजनीतिक और सामाजिक जिंदगी देश के मेहनतकश अवाम के लिए एक खुली किताब की तरह है। वे बीच के केवल पांच वर्षों के कालखंड को छोड़ दें, तो साल 1980 से लेकर 2010 तक लगातार समस्तीपुर की जनता के प्यार और विश्वास की बदौलत बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।

उन्होंने कहा कि देश और राज्य की राजनीति में चाहे कितने भी बड़े-बड़े आयाराम-गयाराम वाले बदलाव हुए हों, लेकिन रामदेव वर्मा ने कभी भी गरीबों, दलितों, वंचितों और मेहनतकश जनता का साथ नहीं छोड़ा। वे हमेशा सदन से लेकर सड़क तक दबे-कुचले लोगों की बुलंद आवाज बने रहे। आज जब देश फासीवाद के सबसे काले दौर से गुजर रहा है, तब कॉ. रामदेव वर्मा के संघर्षों की वही महान विरासत हमें इस क्रूर बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की रक्षा की इस लड़ाई में सही दिशा और ऊर्जा दे रही है।

मंच पर मौजूद अन्य प्रमुख वक्ताओं के तीखे संबोधन:

एमएलसी शशि यादव: बिहार में ‘यूपी मॉडल‘ कभी सफल नहीं होने देगी जागरूक जनता

बिहार विधान परिषद की सदस्य कॉ. शशि यादव ने अपने संबोधन में कॉ. रामदेव वर्मा को नमन करते हुए कहा:

“कॉ. रामदेव वर्मा आजीवन एक सच्चे और समर्पित कम्युनिस्ट सिपाही बने रहे। आज हम सब उनके स्मृति दिवस पर यह सामूहिक संकल्प लेते हैं कि उनके बताए क्रांतिकारी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए जनता के संघर्षों की इस विरासत को और ज्यादा मजबूत करेंगे। भाजपा और संघ परिवार मिलकर बिहार की धरती पर भी उत्तर प्रदेश जैसा क्रूर और असंवैधानिक ‘बुलडोजर राज’ थोपना चाहती है, लेकिन बिहार की यह जागरूक और क्रांतिकारी जनता उनके इन मंसूबों को कभी भी सफल नहीं होने देगी।”

उन्होंने केंद्र सरकार से महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को बिना किसी परिसीमन या जनगणना के पेंच के अविलंब और इसी वक्त लागू करने की पुरजोर मांग की। साथ ही, उन्होंने परिसीमन के नाम पर सीटों के साथ छेड़छाड़ और देश भर में महिलाओं व छात्राओं पर बढ़ रही हिंसक घटनाओं की भी तीखी आलोचना की।

पूर्व विधायक मंजू प्रकाश: ‘सुन्दराइया नगर‘ को फिर से बसाने के लिए होगी आर-पार की लड़ाई

बिहार की वरिष्ठ वामपंथी नेत्री, पूर्व विधायक और माले की केंद्रीय कमिटी सदस्य कॉ. मंजू प्रकाश ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी और नौजवानों को यदि राजनीति सीखनी है, तो उन्हें कॉ. रामदेव वर्मा के जमीनी संघर्षों, उनकी ईमानदारी और उनकी सादगी से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

“समस्तीपुर जिले का ‘सुन्दराइया नगर’, जिसे हमारी पार्टी और वामपंथी आंदोलन ने सालों तक संघर्ष करके समाज के सबसे गरीब, बेघर और भूमिहीन लोगों को बसाने के लिए तैयार किया था, उसे इस क्रूर सरकार ने अपने बुलडोजर से पूरी तरह उजाड़ कर रख दिया। गरीब महिलाएं और बच्चे आज खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मैं आज इस मंच से यह साफ घोषणा करती हूँ कि भाकपा (माले) इस दमन के आगे झुकेगी नहीं और सुन्दराइया नगर की उस गरीब बस्ती को दोबारा उसी स्थान पर सम्मान के साथ बसाने के लिए सरकार के खिलाफ आर-पार की सामूहिक लड़ाई लड़ेगी।”

मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा: सांप्रदायिकता और मॉब लिंचिंग के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता और मिथिलांचल प्रभारी कॉ. धीरेंद्र झा ने अपने कड़कदार भाषण में कहा कि मिथिलांचल की यह धरती हमेशा से सामंतवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ प्रतिरोध की धरती रही है। उन्होंने कहा:

“जयमंगला गढ़ के ऐतिहासिक संघर्षों से लेकर उजियारपुर और मुसरीघरारी तक, हमारी पार्टी के जांबाज कार्यकर्ताओं ने समाज में फैले अन्याय, हत्या, लूट और दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा प्रायोजित मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) के खिलाफ लगातार अपने खून की आहुति देकर जनता की रक्षा की है। कॉ. रामदेव वर्मा की असली विरासत केवल बातों में नहीं, बल्कि जनता के इसी जुझारू प्रतिरोध और सांप्रदायिकता विरोधी अडिग संघर्ष की विरासत है।”

उन्होंने देश के सभी समाजवादियों, वामपंथियों और लोकतंत्रपसंद ताकतों से अपील की कि वे आज के इस फासीवादी दौर में आपसी मतभेदों को भुलाकर एक व्यापक और मजबूत ऐतिहासिक एकता का निर्माण करें ताकि इस जनविरोधी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका जा सके।

शिलान्यास, माल्यार्पण और श्रद्धांजलि की प्रमुख कड़ियां

इस राज्यस्तरीय सेमिनार की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले, सुबह समस्तीपुर जिले के पतेलिया गांव में स्थित कॉ. रामदेव वर्मा की भव्य आदमकद प्रतिमा पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यहाँ माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, कॉ. मंजू प्रकाश, कॉ. धीरेंद्र झा, विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव, कॉ. संतोष सहर, कुमार परवेज सहित राज्य और जिले के दर्जनों वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ने सामूहिक रूप से माल्यार्पण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसी ऐतिहासिक अवसर पर विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव के आधिकारिक ‘विधान परिषद सदस्य विकास मद’ (MLC Fund) से स्वीकृत राशि से बनने वाले भव्य “का. रामदेव वर्मा स्मृति द्वार” का पूरे वैदिक और क्रांतिकारी रीति-रिवाजों के साथ शिलान्यास भी किया गया। नेताओं ने कहा कि यह द्वार आने वाली पीढ़ियों को कॉ. रामदेव वर्मा के संघर्षों की याद दिलाता रहेगा। इसके उपरांत, समस्तीपुर शहर आगमन पर नेताओं के काफिले ने देश की आजादी के महानायक शहीद-ए-आजम भगत सिंह, भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व जननायक कर्पूरी ठाकुर की स्थापित प्रतिमाओं पर भी पूरी श्रद्धा के साथ माल्यार्पण किया और उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया।

सेमिनार के मंच पर माले MLC शशि यादव को अंगवस्त्र से सम्मानित करती माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह

सभागार में मौजूद रहे कई प्रमुख चेहरे

इस भव्य और विशाल कार्यक्रम का बेहद कुशल और अनुशासित संचालन भाकपा (माले) के समस्तीपुर जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने किया। इस दौरान मंच और दीर्घा में बिहार वामपंथी आंदोलन के कई प्रबुद्ध और जाने-माने चेहरे उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से: प्रो. सुरेंद्र सुमन, वंदना सिंह, डॉ. प्रभात कुमार, रंजीत राम, फूल बाबू सिंह, ललन कुमार, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह,अजय कुमार,अमित कुमार, दिनेश कुमार, महावीर पोद्दार, जयंत कुमार, सुनील कुमार, रौशन कुमार, लोकेश राज, दीपक यदुवंशी सहित समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों से आए हजारों की संख्या में पार्टी पदाधिकारी, किसान, मजदूर और युवा साथी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में क्रांतिकारी गीतों और गगनभेदी नारों के साथ इस सफल महा-सेमीनार का समापन हुआ।

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दिल्ली में बजा बिहार का डंका! रोहतास की इस लेडी सिंघम मुखिया ने देश में गाड़ा झंडा, सम्राट के मंत्री भी रह गए दंग!

विशेष संवाददाता, पटना। बिहार की पंचायती राज व्यवस्था में एक नया इतिहास रचते हुए रोहतास जिले की एक महिला मुखिया ने पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर दिया है। रोहतास प्रखंड के तेलकप ग्राम पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो को केंद्र सरकार की ओर से प्रतिष्ठित ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार-2025’ (राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार) की श्रेणी में पूरे भारत में दूसरा (द्वितीय) स्थान प्राप्त हुआ है। इस धमाकेदार और ऐतिहासिक कामयाबी के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक तेलकप पंचायत की चर्चा हो रही है।

इस गौरवमयी उपलब्धि पर पंचायती राज विभाग, बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया को विशेष रूप से आमंत्रित कर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। पटना में आयोजित एक उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान पंचायती राज विभाग के निदेशक ने भी विजेता मुखिया को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और उनके द्वारा धरातल पर किए गए कार्यों की जमकर सराहना की।

बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग कार्यालय में माननीय मंत्रीगणों के नाम की पट्टिका के सामने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मुखिया अनीता टोप्पो, विभाग के अधिकारी और पंचायत से जुड़े कर्मी समूह चर्चा के बाद एकजुटता प्रदर्शित करते हुए।इस मौके पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (दाएं) एवं बीच में दायें से दूसरे क्रम पर अनीता टोप्पो

मंत्री दीपक प्रकाश ने थपथपाई पीठ, चुनौतियों पर भी हुई आर-पार की बात

मुलाकात के दौरान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया अनीता टोप्पो से पंचायत में संचालित विकास कार्यों और वहां की स्थानीय चुनौतियों के बारे में वन-टू-वन फीडबैक लिया। बातचीत में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और साफ-सफाई जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्री ने माना कि तेलकप ग्राम पंचायत के कुछ वार्डों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने मुखिया को भरोसा दिलाते हुए ऐलान किया कि इस चुनौती को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायती राज विभाग हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा। मंत्री ने जिला पंचायत संसाधन केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी तारीफ की, जिसने मुखिया के क्षमता संवर्धन और योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन में संजीवनी का काम किया। इसके साथ ही निदेशक ने पंचायत सचिव के कार्यों की भी सराहना की और कहा कि जमीन पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस राष्ट्रीय पुरस्कार का असली आधार है।

लाइब्रेरी से लेकर ओपन जिम तक… जानिए कैसे पलटी तेलकप पंचायत की किस्मत?

राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद मुखिया अनीता टोप्पो ने अपनी इस सफलता की पूरी कहानी और पंचायत की तस्वीर बदलने वाले ऐतिहासिक कामों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह एक योजनाबद्ध तरीके से उन्होंने अपनी पंचायत को मॉडल पंचायत में तब्दील कर दिया:

  1. शिक्षा क्रांति और लाइब्रेरी: बच्चों के पढ़ने के लिए पंचायत में दो अलग-अलग जगहों पर अत्याधुनिक लाइब्रेरी (पुस्तकालय) की स्थापना की गई, ताकि गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर न भागना पड़े।
  2. कीचड़ से मुक्ति और पेवर ब्लॉक: स्कूलों में आने-जाने वाले रास्तों और स्कूल कंपाउंड में जलजमाव एवं कीचड़ की भारी समस्या थी। बच्चों की इस परेशानी को दूर करने के लिए पूरे परिसर में शानदार पेवर ब्लॉक लगवाए गए और चकाचक सड़कें बनवाई गईं।
  3. स्वास्थ्य और हाईटेक सुविधाएं: उप स्वास्थ्य केंद्र की कायापलट करते हुए मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों और बुनियादी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था की गई।
  4. भीषण गर्मी में राहत: आम जनता को चुभती गर्मी से बचाने के लिए जगह-जगह वाटर कूलर लगवाए गए हैं ताकि लोगों को ठंडा और स्वच्छ पेयजल मिल सके। इसके अलावा मुसाफिरों के बैठने के लिए बस स्टैंड के पास सीमेंटेड चेयर (कुर्सियां) लगवाई गईं।
  5. हेल्थ और फिटनेस: पंचायत के युवाओं और ग्रामीणों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ओपन जिम की शुरुआत की गई।
  6. भ्रष्टाचार पर चोट, पंचायत भवन में ही सारा काम: अब ग्रामीणों को जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र या वृद्धावस्था पेंशन के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते। पंचायत सरकार भवन में ही आरटीपीएस (RTPS) काउंटर के माध्यम से पंचायत सचिव के साथ बैठकर मुखिया खुद सारे दस्तावेज तुरंत तैयार करवाती हैं।
  7. महिला सभा और मनरेगा से बंपर रोजगार: अनीता टोप्पो खुद हर गांव में जाकर महिलाओं के साथ विशेष ‘महिला सभा’ करती हैं और उनकी समस्याओं को सीधे सुनकर फैसला लेती हैं। इसके साथ ही मनरेगा के तहत सैकड़ों बेरोजगारों को लगातार काम देकर पलायन रोका गया है।

विजेता मुखिया ने अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय बिहार के मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और पूरे पंचायती राज विभाग को दिया है, जिनके सहयोग से तेलकप आज एक विकसित और आदर्श पंचायत बनकर देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है।

पटना में राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार में देश में दूसरा स्थान हासिल करने वाली रोहतास के तेलकप पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित करते पंचायती राज विभाग के निदेशक। इस मौके पर पंचायती राज मंत्री विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बनारस की गृहस्थी से देश की संसद तक: संघर्ष और आत्मनिर्भरता की अद्भुत मिसाल

कभी बनारस में अपने बच्चों के भविष्य को संवारने और एक साधारण गृहस्थी संभालने वाली अनीता टोप्पो का देश की संसद (पार्लियामेंट) तक का सफर बेहद प्रेरणादायी और संघर्षपूर्ण रहा है। अपने मायके में माता-पिता की इकलौती संतान के रूप में पली-बढ़ीं अनीता टोप्पो के जीवन में नया मोड़ तब आया, जब तेलकप पंचायत में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए मुखिया पद की सीट आरक्षित हुई। उनकी शिक्षा और काबिलियत को देखते हुए पूरे पंचायत के प्रबुद्ध गार्जियनों और ग्रामीणों ने उन्हें बनारस से वापस बुलाकर पंचायत की कमान सौंपने का फैसला किया। चुनाव के दौरान किसी बड़े लाव-लश्कर के बजाय उन्होंने अकेले ही घर-घर जाकर, हाथ जोड़कर जनता से वोट मांगा, जहां पंचायत की महिलाओं ने उनका सबसे बड़ा संबल बनते हुए एक महिला को जिताने का संकल्प लिया।

शुरुआती दौर में जब कभी सरकारी कार्यों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल जाना होता था, तो ड्राइवर्स के नखरों और समय पर न आने की आदत से तंग आकर उन्होंने हार नहीं मानी; बल्कि अपने पति द्वारा शौक से दिलाई गई फोर-व्हीलर की स्टीयरिंग खुद थाम ली। जल्द ही उन्होंने न सिर्फ गाड़ी चलाना सीखा, बल्कि बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप या ‘स्टेपनी’ (सहारे) के पूरे पंचायत प्रशासन को अकेले अपने दम पर ड्राइव करना शुरू कर दिया।

उनकी इसी आत्मनिर्भरता और जमीनी स्तर पर शिक्षा व महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत बिहार सरकार ने उन्हें राज्य की उन शीर्ष पांच अनुसूचित जनजाति महिला मुखियाओं में चयनित किया, जिन्हें देश की संसद (पार्लियामेंट) भेजा गया। पंचायत सरकार भवन से शुरू हुआ यह सफर तब अपनी बुलंदी पर पहुंचा जब उन्होंने नए संसद भवन का दौरा किया, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व महिला आयोग की मंत्रियों से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ आमने-सामने बैठकर डिनर किया। राष्ट्रपति से मिली ‘सांसद बनने’ की प्रेरणा और एक मिनट से अधिक की आत्मीय बातचीत को वह अपने जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला क्षण मानती हैं। आज वह घर की कामकाजी और मामूली पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए एक ‘पथ-प्रदर्शक’ बन चुकी हैं, जिनका साफ संदेश है कि महिलाओं को किसी और पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के कंधे और दम पर आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

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