बिहार के युवा बनेंगे ‘आपदा रक्षक‘: पटना में मुजफ्फरपुर के 105 स्वयंसेवकों का सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू
पटना | मुख्य संवाददाता बिहार में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने और आपदा के समय जान-माल की रक्षा के लिए ‘युवा शक्ति’ को तैयार किया जा रहा है। राजधानी पटना के ईगल व्यू प्रशिक्षण केंद्र में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) और ‘माय भारत‘ के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय आवासीय ‘युवा आपदा मित्र‘ प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष शिविर में मुजफ्फरपुर जिले के 105 चयनित युवा स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं।
‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करतें SDRF के प्रशिक्षक रूपेश कुमार
SDRF की टीम दे रही है ‘कमांडो‘ स्तर की ट्रेनिंग : राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा इन युवाओं को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर व्यवहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाली इस प्रशिक्षण शृंखला में स्वयंसेवकों को विशेष रूप से बिहार की भौगोलिक चुनौतियों, जैसे—बाढ़, भूकंप, वज्रपात (ठनका), लू और शीतलहर जैसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।
SDRF के प्रशिक्षक हवलदार के.एन. सिंह, सचिंद्र दुबे, रूपेश कुमार और पूजा कुमारी ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आपदा के समय ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में सक्षम बनाना है, ताकि प्रशासन के पहुंचने से पहले स्थानीय स्तर पर राहत कार्य शुरू किया जा सके।
‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्साह से लवरेज प्रतिभागी
CPR और मॉकड्रिल: जीवन बचाने का व्यावहारिक अभ्यास प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन)का विशेष अभ्यास कराया गया। इसमें सिखाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति की सांसें रुक जाएं या दिल की धड़कन बंद हो जाए, तो त्वरित चिकित्सा सहायता कैसे प्रदान की जाए। इसके अलावा, स्वयंसेवकों ने सफलतापूर्वकभूकंप और अग्नि सुरक्षा (Fire Fighting) पर आधारित मॉकड्रिल में भाग लिया, जहाँ उन्होंने आग बुझाने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीकों का प्रदर्शन किया।
नेतृत्व और समन्वय: इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में मुजफ्फरपुर के मास्टर ट्रेनर सुधांशु कुमार अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, कार्यक्रम समन्वयक अंकित कुमार द्वारा स्वयंसेवकों की आवश्यकताओं और प्रशिक्षण के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा रहा है।
105 सदस्यों की इस टीम का नेतृत्व चंदन कुमार कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मुख्य स्वयंसेवकों में कृष्णा कुमार, प्रिंस कुमार, सरजीत कुमार, राहुल कुमार, आशीष रंजन के साथ-साथ सांविका, शुभम रानी, अंशु और अनुप्रिया शामिल हैं।
युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी
प्रशासन की बढ़ेगी ताकत : जानकारों का मानना है कि इन ‘युवा आपदा मित्रों‘ के तैयार होने से जिला प्रशासन को जमीनी स्तर पर बड़ी सहायता मिलेगी। ये स्वयंसेवक न केवल आपदा के समय बचाव कार्य करेंगे, बल्कि आम जनता के बीच आपदा-पूर्व तैयारियों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी करेंगे।
मुजफ्फरपुर (मुरौल): प्रखंड के पिलखी गजपति में आज कांग्रेस पार्टी द्वारा ‘मनरेगा चौपाल‘ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि पार्टी की एकजुटता भी प्रदर्शित की गई।
‘मनरेगा चौपाल’ कार्यक्रम को सम्बोधित करते प्रखंड अध्यक्ष अलख निरंजन शर्मा
मनरेगा अधिकारों पर दी गई विस्तृत जानकारी
चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को मनरेगा योजना के तहत उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया:
रोजगार की गारंटी: काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार पाने का अधिकार।
मजदूरी भुगतान: मजदूरी के समय पर भुगतान और उसमें देरी होने पर मुआवजे की जानकारी।
दस्तावेज: जॉब कार्ड बनवाने और उसे अपडेट रखने की प्रक्रिया।
प्रियंका गांधी का जन्मदिन: सेवा और संकल्प का दिन
इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी का जन्मदिन कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मिलकर बेहद उत्साह के साथ मनाया। प्रियंका गांधी की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए केक काटा गया। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया।
पिलखी गजपति में केक काटकर प्रियंका गांधी का जन्मदिन मनाते कांग्रेसी कार्यकर्ता
मजदूर हितों के लिए संघर्ष का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एकजुट होकर यह प्रण लिया कि वे गरीब और मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेंगे। सभी ने एक स्वर में मनरेगा को धरातल पर और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही।
प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशल संचालन स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
अलख निरंजन शर्मा (प्रखंड अध्यक्ष, मुरौल)
रीमा भारती (सरपंच), अंजनी मिश्रा, हरि यादव
डॉक्टर मनीष यादव, डीके सर, इंद्र मोहन झा, राजीव कुमार
सुमत कुमार झा, मनीष कुमार मिश्रा, रागिनी कुमारी, गीता देवी, विना देवी, सलीमा खाटून, मोहम्मद फखरुद्दीन, मो. साबिर एवं अन्य गणमान्य सदस्य।
कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा का समापन हुआ।
ताजपुर/समस्तीपुर (12 जनवरी 2026): ताजपुर प्रखंड के वार्ड संख्या 11 में सोमवार को भाकपा माले का ‘शाहपुर बघौनी पंचायत शाखा सम्मेलन’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रखंड कमिटी सदस्य मो० एजाज की अध्यक्षता और जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा के पर्यवेक्षण में आयोजित इस सम्मेलन में संगठन की मजबूती और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
भाकपा माले का ‘शाहपुर बघौनी पंचायत के शाखा सम्मेलन में शामिल कार्य कर्त्तागण
नई कमिटी का गठन
सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति से सांगठनिक चुनाव प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें नौशाद तौहीदी को नया शाखा सचिव चुना गया। इस अवसर पर शाद तौहीदी, वलाम तौहीदी, मुखलिश तौहीदी, मिन्हाजुलहक, मो० राशि हुसैन, मो० आले, अकदस तौहीदी, फैयाज तौहीदी और शहवाज तौहीदी सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आंदोलन की पार्टी है भाकपा माले: सुरेंद्र प्रसाद सिंह
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भाकपा माले हमेशा से पीड़ितों को न्याय दिलाने और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत रही है। उन्होंने जोर दिया कि ताजपुर में लूट, भ्रष्टाचार और जुल्म के खिलाफ पार्टी ने हजारों लोगों को न्याय दिलाया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि संगठन को और मजबूत बनाकर न्याय की इस लड़ाई को तेज किया जाए।
24 जनवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष होगा प्रदर्शन
सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:
प्रशासनिक भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के खिलाफ मोर्चा: थर्ड डिग्री टॉर्चर के दोषी पुलिस अधिकारियों और घूसखोर अंचल राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति पर कार्रवाई की मांग को लेकर रणनीति बनाई गई। निर्णय लिया गया कि 24 जनवरी को मुख्यमंत्री के कर्पूरीग्राम आगमन पर आंदोलन के माध्यम से इन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उनके समक्ष उठाया जाएगा।
अपराध पर रोक की मांग: जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा ने मधेपुरा में हुए हिना प्रवीन बलात्कार-हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और राज्य में बढ़ते अपराध एवं बलात्कार की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
मुजफ्फरपुर। शहर के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के शिक्षाशास्त्र विभाग (B.Ed.) में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वामी जी के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
स्वामी विवेकानंद की जयंती कार्यक्रम में शामिल शिक्षक एवं छात्रा
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
समारोह की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अलका जयसवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। छात्राओं ने सुमधुर ‘दीप मंत्र गान’ प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विभागाध्यक्ष सहित सभी शिक्षकों और छात्राओं ने स्वामी जी को पुष्पांजलि अर्पित की। छात्रा सुरुचि कुमारी ने स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया, जबकि सोनाक्षी कुमारी और मानसी रितु ने अपने कुशल मंच संचालन से कार्यक्रम में समां बांध दिया।
सकारात्मक सोच से ही होगा युवाओं का उत्थान: प्राचार्या
छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ. अलका जयसवाल ने कहा, “युवाओं को हमेशा सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए और नकारात्मकता का पूर्णतः त्याग करना चाहिए। यही स्वामी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. हरि शंकर कुमार ने विवेकानंद के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को खुद को ईमानदार और समर्थ बनाना चाहिए। उन्होंने समाज सेवा के माध्यम से जीवन को धन्य करने की प्रेरणा दी।
शिक्षकों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। डॉ. संजीव कुमार, डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. रवि शेखर ठाकुर और डॉ. स्मिता गौतम सहित अन्य प्राध्यापकों ने स्वामी जी के राष्ट्र के प्रति योगदान की चर्चा की। वक्ताओं ने स्वामी जी की प्रसिद्ध उक्ति— “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”— को दोहराते हुए छात्राओं में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति का संचार किया।
छात्राओं की जीवंत प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न भाषणों, गीतों और स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों (दृष्टांतों) के माध्यम से छात्राओं ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता का विकास करना था।
समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण तरीके से हुआ।
उपस्थित गणमान्य: डॉ. रवि कुमार, डॉ. सुमन्त कुमार, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. राजमणि कुमार, डॉ. मणिकान्त कुमार, डॉ. श्रीनिवास सुधांषु, प्रो. ममता कुमारी एवं प्रो. साधना कुमारी सहित समस्त कर्मचारी व छात्राएं।
मुजफ्फरपुर, बिहार। आगामी 26 जनवरी को जब पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस के गौरव में डूबा होगा, जब राजपथ पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा और आसमान तिरंगे के रंगों से सराबोर होगा, ठीक उसी समय मुजफ्फरपुर के सकरा में ‘राष्ट्रीय शर्म’ की एक और कड़वी तस्वीर बेपर्दा होने की पूरी आशंका है। यह दास्तां है अगस्त क्रांति के उस जांबाज शहीद अमीर सिंह की, जिन्होंने 1942 में अपनी छाती पर ब्रिटिश हुकूमत की गोली सिर्फ इसलिए खाई थी ताकि आने वाली पीढ़ियां एक आजाद और सम्मानजनक गणतंत्र में सांस ले सकें। लेकिन अफसोस, आज उसी गणतंत्र के नुमाइंदे— स्थानीय प्रखंड अधिकारी, थानेदार, चिकित्सा पदाधिकारी, बैंक मैनेजर, और न जाने कितने सफेदपोश नेता—अपनी कृतघ्नता से इस शहादत को हर दिन कुचल रहे हैं।
शहीद अमीर सिेह का स्टैच्यू
तमाशा गणतंत्र का: 50 मीटर की दूरी, फिर भी श्रद्धा सुमन को ‘वक्त‘ नहीं
विडंबना की पराकाष्ठा देखिए, 26 जनवरी को सकरा प्रखंड मुख्यालय और सकरा थाने में धूमधाम से झंडोत्तोलन होगा। सरकारी अधिकारी ‘अमर शहीदों के सपनों’ को पूरा करने की कसमें खाएंगे, देशभक्ति के तराने गूंजेंगे और मिठाइयां बांटी जाएंगी। लेकिन इस उत्सव के भव्य पांडाल से महज 100 से 200 मीटर के दायरे में शहीद अमीर सिंह की प्रतिमा एक मूक दर्शक की तरह सिस्टम की बेरुखी और कृतघ्नता को देख रही होगी।
हैरानी की बात यह है कि पिछले कई सालों का रिकॉर्ड गवाह है कि यहाँ के ‘साहबों’ (बीडीओ, सीओ, थानेदार) के सरकारी शेड्यूल में शहीद की प्रतिमा पर दो पुष्प अर्पित करना शामिल ही नहीं होता।
सकरा निबंधन कार्यालय: दूरी मात्र 50 मीटर।
सकरा थाना: दूरी मात्र 100 मीटर।
सकरा प्रखंड कार्यालय: दूरी मात्र 200 मीटर।
क्या इन साहबों का ‘प्रोटोकॉल‘ इतना बड़ा हो गया है कि जिस मिट्टी के शहीद ने इन्हें ये कुर्सियां और रसूख दिया, वहां जाने में इन्हें परहेज है? जिन दफ्तरों में बैठकर ये अधिकारी आज लोकतांत्रिक व्यवस्था का आनंद ले रहे हैं, उसकी नींव में अमीर सिंह जैसे वीरों का ही खून है। क्या सरकारी साहबों को लगता है कि शहीद की प्रतिमा पर जाना उनकी शान के खिलाफ है? या फिर ‘गणतंत्र’ अब सिर्फ फाइलों, भाषणों और सरकारी दफ्तरों की चारदीवारी तक सिमट कर रह गया है?
गंदगी से पटा हुआ सकरा रजिस्ट्री ऑफिस स्थित शहीद अमीर सिंह स्मारक स्थल
शहीद स्थल या कचरा स्थल? नगर पंचायत सकरा की संवेदनहीनता पर सवाल
सकरा निबंधन कार्यालय परिसर स्थित शहीद अमीर सिंह का शहादत स्थल आज बदहाली के आंसू रो रहा है। सकरा नगर पंचायत के अधिकारी और इसके नुमांइदे को यह ज्ञान नहीं है कि शहीद अमीर सिंह , सकरा के लिए प्रेरणा पुंज है, गौरव हैं । शहादत स्थल पर जहाँ श्रद्धा की सुगंध और पवित्रता होनी चाहिए, वहां साल भर गंदगी का अंबार लगा रहता है। शहीद की प्रतिमा धूल फांक रही है और आलम यह है कि यह स्थान शहीद स्मारक न होकर ‘कचरा स्थल’ में तब्दील हो चुका है।
सकरा रजिस्ट्री ऑफिस स्थित शहीद अमीर सिंह स्मारक स्थल पर गंदगी का अंबार
सवाल सकरा नगर पंचायत के अधिकारियों से है: आपका आलीशान कार्यालय यहाँ से महज 200 मीटर दूर है, फिर भी आपके सफाईकर्मियों को यहाँ झांकने तक की फुर्सत नहीं मिलती? जब एक राष्ट्रीय नायक के स्मारक का यह हाल है, तो सकरा नगर पंचायत के अन्य इलाकों में सफाई की स्थिति कितनी नारकीय होगी, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है। क्या नगर पंचायत के अधिकारी केवल कागजों पर ‘स्वच्छ भारत’ का ढिंढोरा पीटते हैं?
विरासत की अनभिज्ञता: कांग्रेस का ‘सूना‘ आश्रम और भाजपा की ‘सियासत‘
शहादत स्थल से महज 200 मीटर की दूरी पर वह ऐतिहासिक कांग्रेस आश्रम स्थित है, जिसने आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों के भीतर ज्वाला फूंकी थी। दुखद पहलू यह है कि आज की पीढ़ी के स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को शायद अपनी ही विरासत और इतिहास का ज्ञान नहीं है। जिस तिरंगे के सम्मान के लिए अमीर सिंह ने सीने पर गोली खाई, उसी पार्टी के कार्यकर्ता आज अपने शहीद की सुध लेना भूल गए हैं।
राजनीति के इसी शून्य का लाभ विपक्षी दल उठाते हैं। जहाँ कांग्रेस अपनी विरासत सहेजने में विफल रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता इन अवसरों को भुनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं। लेकिन सवाल राजनीति से ऊपर नैतिकता का है—क्या शहीद अमीर सिंह किसी एक दल के थे? क्या वे पूरे राष्ट्र की सामूहिक थाती नहीं हैं? आखिर क्यों राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले दल शहीद की प्रतिमा की सफाई और गरिमा के लिए आगे नहीं आते?
‘नुनफरा‘ का स्कूल और गुमनाम होती शहादत
शहीद अमीर सिंह के पैतृक गांव नुनफरा की स्थिति और भी पीड़ादायक है। ग्रामीणों ने शहीद के सम्मान में स्थानीय प्राथमिक विद्यालय का नाम ‘अमीर सिंह’ के नाम पर रख दिया था। विद्यालय की मुख्य दीवार पर नाम अंकित भी किया गया, लेकिन गांव की ओछी राजनीति और सरकारी तंत्र की ढिलाई ने उस नाम को सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं होने दिया। आज दीवार पर लिखा वह नाम भी मिट चुका है। एक तरफ सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करती है, वहीं दूसरी तरफ एक शहीद को उसके अपने ही गांव में उसकी पहचान से वंचित रखा जा रहा है।
विधायक कोमल सिंह की पहल ने जगाई उम्मीद
बंदरा प्रखंड के नुनफरा गाँव का ‘शहीद द्वार’ वर्षों तक खंडहर बना रहा। 1994 में तत्कालीन राजस्व मंत्री रमई राम ने इसका निर्माण कराया था, लेकिन बाद के जनप्रतिनिधियों ने इसे मरने के लिए छोड़ दिया। इस उपेक्षा के दौर में गायघाट की वर्त्तमान विधायक कोमल सिंह धन्यवाद की पात्र हैं, जिन्होंने शहीद की सुध ली और इस द्वार का जीर्णोद्धार कराया। यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो बजट का रोना नहीं रोया जाता। लेकिन क्या केवल एक द्वार का बन जाना काफी है? शहीद के जन्मस्थल पर आज भी एक प्रतिमा लगाने की मांग वर्षों से लंबित है।
वर्षों तक खंडहर बना रहा ‘शहीद द्वार’ (बायें) एवं गायघाट की विधायक कोमलसिंह के द्वारा जीर्णोद्धार के बाद चमकता ‘शहीद द्वार'(दायें से)
जयमाला देवी का ‘मूक बलिदान‘ और गुलाम मानसिकता का प्रतीक ‘डैनवी आवास‘
अमीर सिंह की शहादत अधूरी है यदि उनकी पत्नी जयमाला देवी का जिक्र न हो। शादी के मात्र सात माह बाद विधवा हुई उस वीरांगना ने अन्न-जल त्याग दिया और शहादत की घटना के दो माह के भीतर प्राणों की आहुति दे दी। क्या आजाद भारत के किसी सरकारी दस्तावेज में इस बलिदान को जगह मिली?
एक तरफ वह अंग्रेज अफसर ई.सी. डैनवी है, जिसके आदेश पर गोलियां चलीं, उसका आवास (तिरहुत कृषि महाविद्यालय ढोली का गेस्ट हाउस) आज भी राजकीय अतिथि की तरह चमक रहा है। दूसरी तरफ हमारे देश के रक्षक का जन्मस्थान मिट्टी में मिल रहा है। यह गणतंत्र का जश्न है या हमारी आज भी कायम गुलाम मानसिकता का प्रदर्शन?
26 जनवरी को सकरा, मुरौल और बंदरा के अधिकारियों से सीधे सवाल:
आगामी गणतंत्र दिवस पर जनता की अदालत में ये प्रश्न खड़े होंगे:
क्या इस बार बीडीओ साहब, थानेदार और नगर पंचायत अधिकारी अपनी वातानुकूलित गाड़ियों से उतरकर शहीद की प्रतिमा पर फूल चढ़ाने की हिम्मत करेंगे?
क्या ढोली रेलवे स्टेशन का नाम ‘शहीद अमीर सिंह रेलवे स्टेशन‘ करने की रुकी हुई फाइल पर चढ़ी धूल साफ होगी?
क्या नुनफरा के स्कूल को सरकारी तौर पर शहीद का नाम मिलेगा, या इस बार भी केवल ‘आश्वासन‘ की मिठाई बांटी जाएगी?
सकरा, मुरौल और बंदरा प्रखंडों के सरकारी शिलापट्टों पर शहीद अमीर सिंह का नाम कब दर्ज होगा?
शहीद अमीर सिंह का लहू इस मिट्टी की गहराई में मिला है। अगर इस 26 जनवरी को भी उन्हें गंदगी और उपेक्षा के बीच छोड़ दिया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि हम एक राष्ट्र के रूप में केवल पाखंड कर रहे हैं। कृतघ्न समाज और संवेदनहीन प्रशासन कभी महान लोकतंत्र का निर्माण नहीं कर सकते।
क्या इस 26 जनवरी टूटेगी उपेक्षा की यह परंपरा?
शहीद अमीर सिंह की उपेक्षा का एक बड़ा कारण सिस्टम की वह जड़ता है, जिसमें ‘शहादत’ को सरकारी ड्यूटी चार्ट का हिस्सा ही नहीं माना गया। सकरा में पोस्टिंग पर आने वाले अधिकांश अधिकारी बाहरी क्षेत्रों के होते हैं, जिन्हें स्थानीय इतिहास और यहाँ की माटी के नायकों के बलिदान की जानकारी तक नहीं दी जाती। यह प्रशासन की विफलता है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अनभिज्ञता की आड़ में शहीद अमीर सिंह को उनके ही शहादत स्थल पर बेगाना बना दिया जा रहा है।
क्या इस बार स्थानीय प्रशासन के द्वारा गणतंत्र दिवस के समारोह पर सरकारी शेड्यूल में शहीद अमीर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण को आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा? यदि इस बार भी अधिकारी महज 100 मीटर की दूरी तय नहीं कर पाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि तंत्र के लिए ‘शहादत’ की कोई कीमत नहीं है और हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक कृतघ्न समाज सौंप रहे हैं।
11 जनवरी 2026 को शहादत स्थल पर गंदगी को दिखाती जिओ टेगिंग तस्वीर
“अगर आज हम चुप रहे, तो कल कोई अमीर सिंह देश के लिए गोली खाने से पहले हजार बार सोचेगा। सकरा के इस महान शहीद की प्रतिमा आज गंदगी और उपेक्षा के बीच आंसू बहा रही है। इस पोस्ट को इतना शेयर करें कि सोए हुए अधिकारियों की नींद टूट जाए!”
अगस्त क्रांति के विस्मृत नायक शहीद अमीर सिंह: सीने पर गोली खाई ताकि हम आजाद रहें, पर आजाद भारत में उनके शहादत को उचित सम्मान नहीं–
बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड में पुलिस की संवेदनहीनता, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और संदिग्ध शराब कांड को लेकर जन-आंदोलन की नई चिंगारी सुलग गई है। शनिवार को भाकपा माले के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने शहर की सड़कों पर उतरकर नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ को आईना दिखाया। ‘न्याय मार्च’ के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने न केवल पुलिसिया दमन का विरोध किया, बल्कि भ्रष्टाचार में डूबे राजस्व विभाग और शराब माफियाओं के साथ प्रशासन की मिलीभगत पर भी कड़े प्रहार किए।
भाकपा माले के बैनर तले ‘न्याय मार्च’ में पुलिसिया जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते कार्यकर्ता
अस्पताल चौक से गूंजी इंकलाब की आवाज
शनिवार की सुबह ताजपुर का अस्पताल चौक लाल झंडों और सरकार विरोधी नारों से पट गया। भाकपा माले के कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर पुलिसिया जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लिखे थे। अस्पताल चौक से निकला यह ‘न्याय मार्च’ शहर के मुख्य मार्गों—बाजार क्षेत्र, थाना रोड और गांधी चौक होते हुए पुनः अस्पताल चौक पर पहुंचा, जहां यह एक विशाल आक्रोश सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने आरोप लगाया कि ताजपुर पुलिस अब रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बन चुकी है।
मनीष पोद्दार कांड: मानवता को शर्मसार करने वाली ‘थर्ड डिग्री‘
सभा के मुख्य वक्ता और खेग्रामस के जिला सचिव जीबछ पासवान ने मनीष पोद्दार के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता का जो ब्यौरा दिया, उसने सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए। उन्होंने कहा, “भाजपा-जदयू की नीतीश सरकार में पुलिस बेलगाम हो गई है। महज संदेह के आधार पर एक छोटे दुकानदार, उसकी पत्नी और वृद्ध पिता को उठाकर हाजत में बंद कर देना कानून का माखौल उड़ाना है। हद तो तब हो गई जब मनीष पोद्दार को अमानवीय यातनाएं दी गईं। आरोप है कि पुलिस ने उसके मलद्वार में सिरिंज के माध्यम से पेट्रोल डाला और डंडा घुसेड़ा। यह किसी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।”
पासवान ने आगे कहा कि पुलिस ने कानून को ताक पर रखकर पीड़ित को 5 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गया, तब जाकर कागजी खानापूर्ति और इलाज की नौटंकी की गई। माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक दोषी थानाध्यक्ष को बर्खास्त नहीं किया जाता, उनका आंदोलन आगे जारी रहेगा।
राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और ‘रॉबिन ज्योति’ का वायरल विडियो बनने लगा मुद्दा
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए भाकपा माले के जिला कमिटी सदस्य उपेंद्र राय ने ताजपुर अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार अब बंद कमरों से निकलकर खुलेआम वीडियो के रूप में जनता के सामने है। रॉबिन ज्योति द्वारा रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी यह साबित करती है कि ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। उपेंद्र राय ने चेतावनी दी, “भ्रष्ट कर्मचारी को बचाने की साजिश रची जा रही है। अगर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से आरोपी को बर्खास्त नहीं किया, तो भाकपा माले कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी।”
जहरीली शराब कांड: बहादुरनगर में पसरा मातम और प्रशासनिक लीपापोती
बंगरा थाना क्षेत्र के बहादुरनगर में हुई पिता-पुत्र की संदिग्ध मौत पर ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह और प्रभात रंजन गुप्ता ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह मौतें जहरीली शराब पीने से हुई हैं, लेकिन प्रशासन इसे बीमारी या अन्य कारणों का रूप देकर शराब माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शराबबंदी का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ गांव-गांव में शराब की नदियां बह रही हैं। भाकपा माले ने इस कांड की उच्च स्तरीय जांच और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।
मुख्यमंत्री के आगमन पर विरोध की तैयारी: सुरेंद्र प्रसाद सिंह
सभा की अध्यक्षता कर रहे प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में आंदोलन की भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट कर दी। उन्होंने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 24 जनवरी से पहले इन तमाम मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर्पूरीग्राम आगमन पर उनका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती पर आ रहे हैं, लेकिन उनके राज में गरीबों और पिछड़ों पर जुल्म हो रहा है। हम मुख्यमंत्री के सामने काली तख्तियां दिखाकर उनसे जवाब मांगेंगे कि आखिर ताजपुर की पुलिस और प्रशासन इतना निरंकुश क्यों है?”
क्षेत्रीय नेताओं की एकजुटता
इस आक्रोश सभा को माले नेता आसिफ होदा, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, संजीव राय, मो० एजाज, चांद बाबू, मो० नौशाद, मो० शाद, सुनील कुमार शर्मा, मनोज साह, दिनेश प्रसाद सिंह, महावीर सिंह, मो० शकील और रॉकी खान ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ताजपुर की धरती अब दमन बर्दाश्त नहीं करेगी और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा है विपक्ष:
थानाध्यक्ष की बर्खास्तगी: मनीष पोद्दार को थर्ड डिग्री टॉर्चर करने वाले थानाध्यक्ष पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो।
भ्रष्टाचार पर वार: राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति को तत्काल सेवामुक्त किया जाए।
न्यायिक जांच: बहादुरनगर जहरीली शराब कांड की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
मुआवजा: पुलिसिया प्रताड़ना के शिकार मनीष पोद्दार को उचित मुआवजा और सरकारी मदद दी जाए।
शाम ढलते-ढलते सभा समाप्त हुई, लेकिन ताजपुर के राजनीतिक गलियारों में इस ‘न्याय मार्च’ ने खलबली मचा दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन माले की इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के सभागार में बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बुस्टा) की महाविद्यालय इकाई द्वारा ‘नव-वर्ष मिलन समारोह सह आम बैठक 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक मिलन समारोह नहीं, बल्कि शिक्षक एकता और अधिकारों के प्रति संकल्पबद्धता का एक मंच बन गया। कार्यक्रम की मुख्य गूँज ‘संगठन में ही शक्ति है‘ के नारे के साथ पूरे परिसर में सुनाई दी।
निर्भय नेतृत्व की आवश्यकता पर बल
बैठक की अध्यक्षता करते हुए बुस्टा की महाविद्यालय अध्यक्ष डॉ. विनीता झा ने शिक्षक आंदोलन के ऐतिहासिक पन्नों को पलटते हुए वर्तमान चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों को केवल शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए मुखर होना होगा। डॉ. झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “नेतृत्व का पहला और अनिवार्य गुण निर्भयता है। जो व्यक्ति निर्भय नहीं है, वह नेतृत्व के योग्य नहीं हो सकता। एक शिक्षक समाज का पथ प्रदर्शक होता है, इसलिए हमें अपनी समस्याओं पर निर्भीकता से बात करनी होगी।”
बैठक को संबोधित करती बुस्टा की महाविद्यालय अध्यक्ष डॉ. विनीता झा
‘जिंदा हो तो जिंदा नजर आना होगा‘
कार्यक्रम का संचालन और आह्वाहन बुस्टा की महाविद्यालय सचिव डॉ. कुमारी सरोज द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में जोश भरते हुए आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब नई पीढ़ी के शिक्षकों को नेतृत्व की कमान संभालनी होगी। उन्होंने कहा, “सफलता और अधिकार थाली में सजाकर नहीं मिलते। अगर हम जीवित समाज का हिस्सा हैं, तो हमें अपनी जीवंतता का प्रमाण देना होगा। अपने वाजिब हक को प्राप्त करने के लिए सत्ता की हठधर्मिता से टकराना अनिवार्य है।” उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित शिक्षक समुदाय के बीच ऊर्जा का संचार किया।
संघर्ष ही सफलता की कुंजी: डॉ. किरण झा
विश्वविद्यालय इकाई सचिव डॉ. किरण झा ने इस मौके पर शिक्षक संघ की प्रासंगिकता और उसकी ऐतिहासिक देन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज हम जिन सुविधाओं और सम्मान के साथ कार्य कर रहे हैं, वह पूर्ववर्ती शिक्षक नेताओं के कड़े संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना सामूहिक संघर्ष के कुछ भी प्राप्त करना असंभव है। “संगठन ही हमारी वह शक्ति है जो प्रशासन और सरकार को हमारी मांगों पर विचार करने के लिए विवश करती है।”
वरिष्ठ शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक के दौरान कॉलेज के विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने अपनी समस्याओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर संवाद किया। इस अवसर पर संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान और नियमित बैठकों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारियों और वरिष्ठ शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
डॉ. निशिकांति (कोषाध्यक्ष)
डॉ. शकीला अज़ीम एवं डॉ. स्वस्ति वर्मा (वरिष्ठ शिक्षिकाएं)
डॉ. प्रियम फ्रांसिस एवं डॉ. आभा कुमारी (सह सचिव)
बैठक को संबोधित करती बुस्टा की विश्वविद्यालय इकाई सचिव डॉ. किरण झा
एकजुटता का संकल्प और शुभकामनाएँ
समारोह के दूसरे चरण में नव-वर्ष 2026 का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया। शिक्षकों ने एक-दूसरे को नवीन वर्ष की शुभकामनाएं दीं और सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे संगठन के झंडे तले एकजुट रहेंगे। वक्ताओं ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि एम.डी.डी.एम. कॉलेज इकाई हमेशा से शिक्षक हितों के लिए अग्रणी रही है।
बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा का समापन हुआ। इस मिलन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में बुस्टा अपनी मांगों को लेकर और अधिक आक्रामक और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
सकरा, मुजफ्फरपुर: उत्तर भारत में बढ़ती ठंड और शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए सामाजिक सरोकारों की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। सकरा बाजिद पंचायत के तुलसीमोहनपुर गांव स्थित मांझी टोला में असहाय और मजबूर परिवारों की मदद के लिए राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कड़ाके की ठंड से जूझ रहे दर्जनों परिवारों के बीच घर घर जाकर कंबल, स्वेटर और अन्य गर्म कपड़ों का वितरण किया गया।
वरिष्ठ समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ
सामग्री वितरण कार्यक्रम का नेतृत्व क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी एवं पूर्व मुखिया प्रत्याशी राजेश कुमार ने किया। इस पुनीत कार्य में समस्तीपुर से आए अतिथि समाजसेवी रामचंद्र राम और उनकी धर्मपत्नी शकुंतला देवी ने भी विशेष रूप से शिरकत की। इन अतिथियों ने अपने हाथों से बुजुर्गों और बच्चों को गर्म कपड़े पहनाए, जिससे कड़ाके की ठंड में उनके चेहरों पर मुस्कान लौट आई।
महिला को चादर ओढ़ाने के लिए हाथ में चादर लिए शकुंतला देवी
मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म: राजेश कुमार
इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए समाजसेवी राजेश कुमार ने अत्यंत भावुक और प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मानव सेवा ही संसार का सबसे बड़ा धर्म है। दुनिया में असहाय, लाचार और बेबस लोगों की सेवा करने से जो आत्मिक शांति और सच्चा आशीर्वाद मिलता है, वह किसी अन्य कार्य से संभव नहीं है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि इंसानियत और मानवता से बड़ा कोई कर्म नहीं है। समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर अपने आसपास के जरूरतमंदों की सुध लेनी चाहिए, ताकि कोई भी गरीब ठंड या अभाव के कारण कष्ट न भोगे।
भावी पीढ़ी को सेवा का पाठ: बेटी लक्ष्मी कुमारी ने भी निभाई भूमिका
इस कार्यक्रम की एक खास विशेषता यह रही कि राजेश कुमार ने अपनी पुत्री लक्ष्मी कुमारी को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया। लक्ष्मी ने स्वयं अपने हाथों से जरूरतमंदों की मदद की।
अपनी बेटी को साथ लाने के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए राजेश कुमार ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटी बचपन से ही समाज की जमीनी हकीकत और गरीबी को करीब से देखे। उसे यह अहसास हो कि समाज के प्रति हमारी क्या जिम्मेदारी है। मैं उसे इन संस्कारों से रूबरू करा रहा हूँ ताकि भविष्य में जब मैं न रहूँ, तब भी वह मानवता की इस मशाल को जलाए रखे और इसी तरह समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाती रहे।”
चादर ओढ़ने के बाद आत्मीय मुद्रा में दिव्यांग व्यक्ति , एवं चादर वितरित करते राजेश राम (दायें से)
ग्रामीणों में खुशी की लहर
भीषण ठंड के इस मौसम में अचानक मिली इस मदद से मांझी टोला के निवासी काफी गदगद नजर आए। ग्रामीणों ने कहा कि जब सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर मदद पहुंचने में देरी होती है, तब राजेश कुमार जैसे समाजसेवियों की पहल उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं होती।
कार्यक्रम के अंत में रामचंद्र राम और शकुंतला देवी ने भी समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि सेवा का यह सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा। इस मौके पर टोले के गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
भारत की सांस्कृतिक चेतना में कथाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वे समय के पदचिह्न हैं। झारखंड के देवघर जिले में स्थित बैद्यनाथ धाम (रावणेश्वर धाम) की महिमा तो जगत व्याप्त है, लेकिन मुख्य मंदिर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसी जगह है, जहां अध्यात्म और आधुनिक विज्ञान के तर्क आपस में टकराते हैं। यह स्थान है ‘हरला जोरी’, जहां मौजूद है— रावण कुंड।
1. पौराणिक पृष्ठभूमि: कैलाश से लंका का वो अधूरा सफर
पौराणिक आख्यानों के अनुसार, लंकाधिपति रावण अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर उन्हें लिंग स्वरूप में लंका ले जा रहा था। महादेव ने शर्त रखी थी कि “रावण, यदि तुमने मुझे रास्ते में कहीं भी पृथ्वी पर रखा, तो मैं वहीं अचल हो जाऊंगा।”
देवता नहीं चाहते थे कि शिव जैसी महाशक्ति का वास लंका में हो। जब रावण देवघर के समीप पहुँचा, तो वरुण देव ने उसके उदर में प्रवेश किया, जिससे उसे तीव्र लघुशंका (Urination) की अनुभूति हुई। रावण दुविधा में था। तभी वहां एक ग्वाले के रूप में भगवान विष्णु प्रकट हुए। रावण ने उन्हें शिवलिंग थमाया और निवृत्त होने चला गया। वह लघुशंका इतनी दीर्घ और तीव्र थी कि वहां जल का एक बड़ा स्रोत बन गया, जिसे आज रावण कुंड या रावण जोर कहा जाता है।
हरतकीनाथ धाम परिसर हरलाजोरी देवघर
2. भौगोलिक साक्ष्य: हरला जोरी का त्रिकोण
स्थानीय विद्वान पूर्णानंद ओझा की कृति ‘हरिला जोरी तीर्थ महात्म्य’ इस स्थान के तीन प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित करती है:
हरला जोरी शिव मंदिर: जहां आज भी भक्त श्रद्धा से सिर झुकाते हैं।
विष्णुपद मंदिर :हरला जोरी – गया (बिहार) के बाद भारत का यह दूसरा दुर्लभ मंदिर है जहां भगवान विष्णु के पदचिह्न पूजे जाते हैं। माना जाता है कि इसी स्थान पर विष्णु ने शिवलिंग हाथ में लिया था।
रावण कुंड: वह जलधारा जो रावण की लघुशंका से उत्पन्न मानी जाती है।
3. मेडिकल जांच का तर्क: क्या यह जल ‘यूरीन’ के गुणों से युक्त है?
आज का विज्ञान हर तथ्य को प्रमाण की कसौटी पर कसता है। सवाल यह है कि क्या हज़ारों साल बाद भी उस जल में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो उसे मानव मूत्र या किसी विशिष्ट जैविक द्रव्य (Biological Fluid) के करीब ले जाते हैं?
हरतकीनाथ धाम परिसर हरलाजोरी देवघर के समीप रावण के द्रारा लघुशंका का प्रतीकरत्मक द्श्य
चमत्कारी उपचार: स्थानीय लोगों का दावा है कि इस कुंड के जल से स्नान करने पर असाध्य चर्म रोग, फोड़े और फुंसियां ठीक हो जाती हैं। आयुर्वेद में ‘स्व-मूत्र चिकित्सा’ (Shivambu Therapy) का वर्णन है। क्या इस कुंड के जल में यूरिया या अमोनिया के कोई सूक्ष्म अंश आज भी विद्यमान हैं?
पैथोलॉजिस्ट का नजरिया: एक जनरल फिजिशियन और पैथोलॉजिस्ट के अनुसार, सामान्यतः मूत्र में यूरिया, क्रिएटिनिन और यूरिक एसिड होता है। यदि हज़ारों साल पहले की किसी घटना के अवशेष जांचने हों, तो उसके लिए ‘सडिमेंटेशन’ और ‘आर्कियोलॉजिकल साइंस’ का सहारा लेना होगा।
4. वैज्ञानिक चुनौतियां और ‘राइट टाइमिंग’
यदि हम आज इस कुंड के जल का सैंपल लें, तो रिपोर्ट ‘नॉर्मल वाटर’ ही आएगी। इसके दो प्रमुख कारण हैं:
प्रदूषण और मिक्सिंग: वर्तमान में रावण कुंड के पास पक्का नाला बना दिया गया है। बारिश के मौसम में आसपास का पहाड़ी पानी इसमें मिल जाता है, जिससे इसकी मौलिकता की जांच करना असंभव हो जाता है।
मई-जून का इंतज़ार: वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इस रहस्य की तह तक जाना है, तो मई या जून की भीषण गर्मी सबसे उपयुक्त समय है। तब बरसाती नाले सूख जाते हैं और केवल वही जल शेष रहता है जो जमीन के भीतर से ‘सोते’ के रूप में निकलता है। तभी लिए गए सैंपल से वास्तविक रसायनिक संरचना का पता चल सकता है।
हरतकीनाथ धाम परिसर हरलाजोरी देवघर के समीप रावण के द्रारा किये गये लघुशंका स्थल का द्श्य
5. एक प्राकृतिक रहस्य: जमीन से स्वतः फूटता जल
दिलचस्प बात यह है कि हरला जोरी के पास श्यामा मंदिर परिसर में एक ऐसा हैंडपंप है, जिससे बिना चलाए ही पानी निकलता रहता है। यह इस क्षेत्र के एक विशेष ‘एक्विफर’ (भू-जल स्रोत) की ओर इशारा करता है। क्या रावण की कथा वास्तव में एक विशाल भू-वैज्ञानिक बदलाव (Geological Change) का आध्यात्मिक चित्रण है?
निष्कर्ष: आस्था और तर्क का संगम
रावण कुंड आज भी देवघर की उस लुप्त कड़ी के समान है, जिसे मुख्यधारा के पर्यटकों ने अभी पूरी तरह नहीं पहचाना है। यह स्थान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि शोध का केंद्र बनने की योग्यता रखता है। जब तक विज्ञान इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाता, तब तक यह आस्था का वह ‘अजस्र स्रोत’ बना रहेगा जो सदियों से बह रहा है और कभी सूखता नहीं।
आगामी अन्वेषण: मई की तपती गर्मी में ‘रावण कुंड‘ की लाइव इन्वेस्टिगेशन
न्यूज भारत टीवी केवल सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करता। हम तथ्यों की गहराई तक जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए, हमने निर्णय लिया है कि हम इस रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए मई की भीषण गर्मी में एक विशेष ‘लाइव इन्वेस्टिगेशन‘ करेंगे।
हम मई का महीना ही क्यों चुन रहे हैं?
वर्तमान में, वर्षा ऋतु और सामान्य मौसम के कारण ‘रावण कुंड’ का मूल जल आसपास की पहाड़ियों से आने वाले सतही जल (Surface Water) के साथ मिल चुका है। किसी भी वैज्ञानिक जांच के लिए ‘शुद्ध और मूल नमूना’ (Pure Sample) अनिवार्य है।
प्राकृतिक शुद्धता: मई की चिलचिलाती धूप में जब आसपास के तमाम जल स्रोत और बरसाती नाले सूख जाते हैं, तब रावण कुंड का असली स्वरूप उभरता है।
सोते का रहस्य: उस समय जो जलधारा शेष रहेगी, वह सीधे जमीन के भीतर से आने वाला वह ‘सोता’ होगा जिसका वर्णन कथाओं में है।
गंध और संरचना: स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि भीषण गर्मी में इस कुंड के पानी के रंग और गंध में विशिष्ट बदलाव आते हैं, जो सामान्य जल से भिन्न होते हैं।
हमारी जांच के मुख्य बिंदु (Investigation Roadmap):
साइंटिफिक सैंपलिंग (Scientific Sampling): हम विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट की एक टीम के साथ ‘हरला जोरी’ पहुंचेंगे। रावण कुंड के उस मूल स्थान से जल का नमूना लिया जाएगा जहां से धारा फूटती है। हम इसकी जांच लैब में कराएंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें अमोनिया, यूरिया, या सल्फर जैसे तत्वों की मात्रा सामान्य से अधिक है।
हाइड्रोलॉजिकल मैपिंग (Hydrological Mapping): हम भू-गर्भ वैज्ञानिकों (Geologists) से यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या यह केवल एक ‘आर्टिसियन वेल’ (पाताल तोड़ कुआं) की प्रक्रिया है या इस विशिष्ट स्थान की मिट्टी और पत्थरों में कुछ ऐसा है जो इस जल को औषधीय बनाता है।
चमत्कार का साक्ष्य: कहा जाता है कि इस कुंड के पानी से चर्म रोग ठीक होते हैं। हम ऐसे लोगों से बात करेंगे जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से इस जल का लाभ उठाया है और इसकी तुलना मेडिकल साइंस के ‘एंटी-बैक्टीरियल’ सिद्धांतों से करेंगे।
ऐतिहासिक साक्ष्यों का मिलान: ‘हरिला जोरी तीर्थ महात्म्य’ के पन्नों को पलटते हुए हम मौके पर उन स्मृति चिन्हों को खोजेंगे जो रावण और भगवान विष्णु के उस संवाद की पुष्टि करते हैं, जिसका उल्लेख विद्वान पूर्णानंद ओझा ने किया है।
एक चुनौती, एक खोज
यह इन्वेस्टिगेशन केवल एक खबर नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और विज्ञान के बीच के सेतु को खोजने का एक प्रयास है। क्या रावण का वह ‘वेग’ आज भी एक जलधारा के रूप में जीवित है? क्या प्राचीन कथाओं में छिपे भौतिक साक्ष्य आज के लैब टेस्ट में खरे उतरेंगे?
मई 2026 (संभावित) में न्यूज भारत टीवी की टीम देवघर की उस तपती धरती पर मौजूद रहेगी, जहां इतिहास और विज्ञान का आमना-सामना होगा।
“सत्य वही है जो प्रमाण की कसौटी पर कसा जाए। बने रहिये हमारे साथ, क्योंकि हम लाएंगे उस रिपोर्ट का परिणाम, जिसका इंतज़ार सदियों से है।”
इस महा-अभियान से जुड़ने के लिए:
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मुजफ्फरपुर। शहर के कैप्टन निषाद सभागार में ‘जागृति संस्थान’ के तत्वावधान में प्रख्यात कवि, नाटककार, कहानीकार और समीक्षक डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह का 71वाँ जन्मदिवस समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में “प्रेरणा पर्व” के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने डॉ. सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत चर्चा की।
डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह में शामिल साहित्यकार
साहित्यिक गुरु और साधक के रूप में पहचान
समारोह की अध्यक्षता करते हुए बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामप्रवेश सिंह ने कहा कि डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह केवल एक सिद्ध साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक साहित्यिक गुरु भी हैं। उन्होंने अपनी रचनाशीलता के प्रकाश से अनेक नए साहित्यकारों को गढ़ा है।
ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र साह ने उन्हें एक ‘साहित्य साधक’ बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं से अनेक विमर्शों की सरणि (धारा) निकलती है। वहीं, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निभा शर्मा ने उन्हें शब्द के सच्चे अर्थों में एक ‘साहित्यिक संत’ की संज्ञा दी।
डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह पर भेंट प्रदान करते अघ्यापक डा. मनोज कुमार सिंह व अन्य (बायें से)
दो सत्रों में वैचारिक और रचनात्मक विमर्श
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण और स्वस्ति पाठ के साथ हुआ। पूरे आयोजन को दो महत्वपूर्ण सत्रों में विभाजित किया गया था:
प्रथम सत्र: आलेख पाठ (रचनाधर्मिता पर चर्चा) इस सत्र में विद्वानों ने डॉ. सिंह की विभिन्न कृतियों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए:
डॉ. राकेश रंजन: “अक्षयवट: एक अप्रतिम नाट्य प्रयोग” पर प्रकाश डाला।
डॉ. पिंकी कुमारी: “मैं भूखा हूँ” काव्य में भूख की शाश्वतता पर चर्चा की।
डॉ. चंद्रदेव सिंह: स्त्री विमर्श के संदर्भ में “माता, पत्नी, कन्या और अन्य कविताएँ” की महत्ता बताई।
डॉ. उमेशचंद्र त्रिपाठी: डॉ. सिंह की कहानी “पहचान” का विश्लेषण करते हुए इसे वर्तमान दौर के संकट की छाया बताया।
अन्य वक्ता: डॉ. रामसंयोग राय, अमरेंद्र कुमार झा और डॉ. राजेंद्र साह ने भी उनके रचना संसार और कृषक वेदना पर प्रभावी आलेख पढ़े।
डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह में शामिल साहित्यकार एवं परिजन
द्वितीय सत्र: कवि सम्मेलन “फूलों की पंखुड़ियां बोले…” दूसरे सत्र में काव्य रस की वर्षा हुई। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामेश्वर द्विवेदी की अध्यक्षता और डॉ. पंकज कर्ण के संचालन में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
डॉ. पुष्पा गुप्ता ने “फूलों की पंखुड़ियां बोले, है आज जन्मदिन तेरा” पढ़कर डॉ. सिंह को बधाई दी।
डॉ. पंकज कर्ण ने ग़ज़ल “उदासी के सफ़र में धूप को ओढ़ा बिछाया है” से समां बांधा।
गीतकार डॉ. चंद्रदेव सिंह, श्रवण कुमार और विनोद कुमार ने भी अपनी गीतों व कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते एम डी डी एम कॉलेज के हिन्दी के प्राध्यापक डा. राकेश रंजन
विशिष्ट जनों के उद्गार
डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर: डॉ. सिंह ने अपनी ईमानदारी और कठोर परिश्रम से असंभव को संभव बनाया है।
डॉ. पुष्पा गुप्ता: उनकी कृतियां बोलती हैं, उन पर और अधिक शोध कार्य की आवश्यकता है।
डॉ. रामेश्वर राय: उनके संपर्क में आने वाला पाठक स्वयं लेखक बन जाता है।
डॉ. मनोज कुमार सिंह: उनकी साहित्य-साधना ‘हिमगिरि की स्रोतस्विनी’ (नदी) की तरह है जो निरंतर हरियाली फैला रही है।
“प्रेरणा पर्व” के इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह का साहित्य समाज के हर वर्ग और विमर्श को गहराई से छूता है। कार्यक्रम में भारी संख्या में साहित्य प्रेमी और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।