बिहार में खाकी का ‘तालिबानी‘ चेहरा: अवैध वसूली का वीडियो बनाने पर सरपंच का पैर तोड़ा, पत्नी को भी पीटा; SKMCH में जिंदगी की जंग लड़ रहे जनप्रतिनिधि
रिपोर्ट: मुजफ्फरपुर/पटना 10 फरवरी, 2026
बिहार में सुशासन के दावों और ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ के नारों के बीच मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने लोकतंत्र के स्तंभ और जन-प्रतिनिधित्व की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। बांद्रा प्रखंड के बड़गांव पंचायत के सरपंच लालबाबू सहनी पर पुलिस द्वारा किए गए जानलेवा हमले ने अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक आंदोलन का रूप ले लिया है। इस मामले में बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) वंशीधर ब्रजवासी ने सीधे राज्य के गृह मंत्री को पत्र लिखकर व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं।

MLC वंशीधर ब्रजवासी का कड़ा रुख: सीधे गृह मंत्री को पत्र लिखकर किया ‘सुलगते सवाल‘
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी ने इस घटना को मात्र एक ‘मारपीट’ नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर खाकी द्वारा लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होंने गृह मंत्री को भेजे गए अपने पत्र में सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया है।
एमएलसी ने पत्र में पुलिसिया बर्बरता को रेखांकित किया है — “क्या बिहार में पुलिस अब रक्षक से भक्षक बन चुकी है?” उन्होंने पत्र के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी है कि यदि एक निर्वाचित सरपंच के साथ सरेआम ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ब्रजवासी ने अपने पत्र में पीयर थानाध्यक्ष रजनीकांत को ‘सनकी और आदतन अपराधी‘ स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी और संपत्ति की जांच की मांग की है।
क्या है पूरी घटना? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बनी ‘सजा‘
घटना की शुरुआत 6 फरवरी 2026 को मुजफ्फरपुर के बांद्रा प्रखंड स्थित बड़गांव चौक पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार के अनुसार, उस दिन स्थानीय पुलिस बल सड़क पर वाहनों से ‘अवैध वसूली’ में व्यस्त था। बड़गांव पंचायत के सरपंच लालबाबू सहनी, जो क्षेत्र में अपनी ईमानदारी और जुझारूपन के लिए जाने जाते हैं, वहां से गुजर रहे थे।
जब उन्होंने पुलिस को खुलेआम वसूली करते देखा, तो उन्होंने एक जागरूक नागरिक और जनप्रतिनिधि होने का कर्तव्य निभाते हुए अपने मोबाइल फोन से इस ‘काली कमाई’ का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। यही वह पल था जब खाकी का अहंकार जाग गया। आरोप है कि पीयर थानाध्यक्ष रजनीकांत ने आव देखा न ताव, अपने चालक और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर सरपंच पर भेड़ियों की तरह हमला कर दिया।
अमानवीयता की पराकाष्ठा: सरपंच का पैर तोड़ा, पत्नी पर भी बरसी लाठियां
पुलिस की बर्बरता यहीं नहीं रुकी। सरपंच को सड़क पर घसीटकर पीटा गया। एमएलसी के पत्र के अनुसार, थानाध्यक्ष ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए लालबाबू सहनी का पैर तोड़ दिया। उनके पूरे शरीर पर गहरे जख्म के निशान पुलिसिया वहशियत की गवाही दे रहे हैं।
जब सरपंच की पत्नी अपने पति को मौत के मुंह से खींचने के लिए गुहार लगाती हुई बीच-बचाव करने पहुंची, तो वर्दीधारियों ने अपनी मर्यादा को ताक पर रख दिया। उन पर भी लाठियों और डंडों से हमला किया गया, जिससे वह भी गंभीर रूप से चोटिल हो गईं। एक महिला और जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार समाज के माथे पर कलंक की तरह है।
अस्पताल में मौत से जंग: SKMCH में पसरा सन्नाटा
वर्तमान में सरपंच लालबाबू सहनी मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SKMCH) में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अधिक खून बहने और गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण वह आईसीयू में जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से ही स्थानीय पुलिस प्रशासन मामले को दबाने और समझौते का दबाव बना रहा है।
थानाध्यक्ष रजनीकांत: ‘विवादों‘ से पुराना नाता
एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी ने अपने पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि थानाध्यक्ष रजनीकांत कोई नए विवाद में नहीं फंसे हैं। उनका इतिहास रहा है कि वे जहां भी तैनात रहे, वहां उन पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और आम नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं। ब्रजवासी ने सवाल उठाया कि ऐसे ‘दागी’ और ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ अधिकारी को थाने की कमान सौंपकर सरकार आखिर क्या हासिल करना चाहती है?

एमएलसी की 4 सूत्रीय ‘धारदार‘ मांगें:
वंशीधर ब्रजवासी ने अपने पत्र में सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं, जिन पर वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं:
- बर्खास्तगी और FIR: थानाध्यक्ष रजनीकांत और उनके सभी सहयोगी पुलिसकर्मियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए और उन पर ‘हत्या के प्रयास’ के तहत प्राथमिकी दर्ज हो।
- संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच: अवैध वसूली के आरोपों की पुष्टि के लिए इन पुलिसकर्मियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच राज्य की विजिलेंस टीम से कराई जाए।
- स्पीडी ट्रायल: इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।
- मुआवजा और सुरक्षा: पीड़ित सरपंच के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक गलियारे में उबाल: क्या गिरेगी गाज?
इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक हड़कंप मच गया है। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सरकार के ‘सुशासन’ के चेहरे पर एक गहरा दाग साबित होगा।
एमएलसी ब्रजवासी ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र के खिलाफ जंग है जो वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे।
साख की कसौटी पर बिहार पुलिस
मुजफ्फरपुर की यह घटना बिहार पुलिस की साख के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। क्या एक सरपंच को सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया जाएगा क्योंकि उसने भ्रष्टाचार का वीडियो बनाया? क्या वर्दी का मतलब किसी की भी हड्डियां तोड़ने का लाइसेंस है?
अब पूरी जनता की नजरें बिहार के गृह मंत्रालय पर टिकी हैं। क्या ‘दागी’ थानेदार पर गाज गिरेगी या खाकी अपने ही भ्रष्ट तंत्र को बचाने के लिए ढाल बनेगी? यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय करेगा।




