मुजफ्फरपुर | 28 फरवरी, 2026 महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के परिसर में शनिवार को होली मिलन समारोहका शानदार आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने रंगों के इस पावन त्योहार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के प्रतीक के रूप में मनाया।

भाईचारे का रंग है होली: प्राचार्य

समारोह का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक-दूसरे को गले लगाने का पर्व है। उन्होंने कहा, “होली के रंग भाईचारे के रंग हैं, जिसकी मस्ती और सकारात्मकता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. प्रियम फ्रांसिस ने किया। समारोह में संगीत और साहित्य की त्रिवेणी देखने को मिली:

  • गायन: डॉ. सुधांशु और डॉ. सुनीता ने अपनी मधुर गीतमय प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं संगीत विभाग की छात्राएं अंकिता, शिवांशी और तनीषा के गीतों ने उत्सव के जोश को दोगुना कर दिया।
  • नृत्य: अंग्रेजी विभाग की छात्राएं अनन्या और कशिश के साथ संगीत विभाग की छात्रा चंचल ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

कविताओं में झलका सामाजिक संदेश

साहित्यिक सत्र में डॉ. सुरबाला वर्मा ने अपनी कविता नदियां चुप रहने लगी हैं आजकल” के माध्यम से गंभीर संवेदनाओं को उकेरा। वहीं, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मुबशरा सदफ ने क्या कहती है होली?” शीर्षक वाली अपनी रचना से सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया:

सब रंगों को एक बनाकर, ऊंच नीच का भेद मिटाकर , लाल हरा भगवा या नीला, सब मिल जाते हैं होली में”

खास आकर्षण: गंगा-जमुनी तहजीब की झलक समारोह का मुख्य आकर्षण उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. एम. सदफ की पंक्तियाँ रहीं, जिन्होंने लाल, हरे, भगवा और नीले रंगों के एक हो जाने की बात कहकर समाज में एकता का संदेश दिया। वहीं डॉ. सुरबाला की पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कविता ने सभी को सोचने पर मजबूर किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. कुमारी सरोज, डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. प्रांजलि, डॉ. देवश्रुति घोष, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. अर्चना गुप्ता सहित कॉलेज के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। पूरे परिसर में गुलाल और खुशियों की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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