‘मेरा युवा भारत’: नैनीताल में बिहार के युवाओं ने बिखेरी चमक, सीख रहे कुमाऊँनी ‘ऐपण’ कला

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नैनीताल/मुजफ्फरपुर। ‘मेरा युवा भारत’ कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के नैनीताल में 9 से 13 फरवरी तक आयोजित पांच दिवसीय अंतर्राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य भर से कुल 37 प्रतिभागियों का चयन किया गया है, जिसमें मुजफ्फरपुर जिले के 7 प्रतिभागी और 1 एस्कॉर्ट शामिल हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि नैनीताल नगर पालिका की चेयरमैन सरस्वती खेतवाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति दीवान सिंह रावत और जिला युवा अधिकारी डॉलवी तेवतिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने बिहार से आए युवाओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और बताया कि कैसे ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।

पारंपरिक ऐपणकला बनी आकर्षण का केंद्र

उद्घाटन के बाद आयोजित दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक कला ऐपण‘ (कुमाऊनी पेंटिंग) के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों ने युवाओं को ऐपण की उत्पत्ति, इसकी बारीकियों और सांस्कृतिक महत्व से रूबरू कराया। मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य जिलों से आए युवाओं ने न केवल इस कला को करीब से देखा, बल्कि कलाकारों से संवाद कर इसकी बारीकियां भी सीखीं।

सांस्कृतिक मेलजोल से बढ़ेगा अनुभव

प्रतिभागियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड की कला और संस्कृति को इतने करीब से समझना उनके लिए एक प्रेरणादायक अनुभव है।

  • उद्देश्य: बिहार और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
  • आगामी गतिविधियाँ: अगले तीन दिनों में प्रतिभागियों को उत्तराखंड के अन्य पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और लोक विधाओं से परिचित कराया जाएगा।

इस कार्यक्रम के माध्यम से युवा न केवल एक-दूसरे की परंपराओं को जान रहे हैं, बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी साकार कर रहे हैं।

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