ताजपुर (समस्तीपुर) | 4 फरवरी 2026

तिरहुत-गंडक नहर परियोजना के पुनर्जीवित होने के साथ ही समस्तीपुर जिले के ताजपुर और आसपास के क्षेत्रों में मुआवजे को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। दशकों से लंबित इस परियोजना में अपनी जमीन गंवाने वाले किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बुधवार को अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले की एक संयुक्त जांच टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को सुना और सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान किया।

ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर जमीन के मुआवजा के लिए पहॅुची महिला

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट

गंडक नहर परियोजना, जो तिरहुत मुख्य नहर से निकलकर पूसा, ताजपुर और सरायरंजन की ओर जाती है, इसकी शुरुआत वर्ष 1962-65 के आसपास हुई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कई कारणों से यह परियोजना ‘मृतप्राय’ हो गई थी। ऑडियो क्लिप के अनुसार, उस दौर में कुछ किसानों को तो मुआवजा मिला, लेकिन एक बड़ी संख्या ऐसे किसानों की थी जिनका मुआवजा सरकारी जटिलताओं के कारण ट्रेजरी (खजाना) में ही फंसा रह गया।

अब दशकों बाद जब सरकार ने इस परियोजना पर दोबारा काम शुरू किया है, तो मुआवजे का पुराना जिन्न फिर बाहर आ गया है। जहाँ मुआवजा मिल चुका था, वहाँ काम लगभग पूरा है, लेकिन जहाँ भुगतान लंबित था, वहाँ किसान काम रोककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

जांच टीम का दौरा और किसानों की व्यथा

बुधवार को किसान महासभा के ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय और भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंहप्रभात रंजन गुप्ता ने मोतीपुर, चकहैदर, फतेहपुर और योगियामठ जैसे निर्माण स्थलों का दौरा किया।

बातचीत के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित अधिकारी वर्तमान समय में भी किसानों को उनके पूर्वजों के नाम पर ट्रेजरी में जमा पुरानी राशि ही देना चाहते हैं। किसानों का कहना है कि आज के समय में उस मामूली राशि का कोई मूल्य नहीं है। प्रशासन और किसानों के बीच इसी बात को लेकर गहरा गतिरोध बना हुआ है।

प्रमुख मांगें और आंदोलन की रणनीति

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि किसान किसी भी कीमत पर पुराना मुआवजा स्वीकार नहीं करेंगे। किसान संघर्ष मोर्चा और माले की संयुक्त टीम ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • चार गुना मुआवजा: अधिग्रहित जमीन और मकान का वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए।
  • भूमि बंदोबस्ती: जो किसान इस परियोजना के कारण पूरी तरह भूमिहीन हो रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा अन्यत्र भूमि बंदोबस्ती कर जमीन दी जाए।
  • काम पर रोक: जब तक उचित मुआवजे का ठोस आश्वासन और भुगतान नहीं होता, तब तक नहर निर्माण का कार्य बाधित रहेगा।

9 फरवरी को महा-घेराव का आह्वान

किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने घोषणा की कि इन मांगों को लेकर 9 फरवरी 2026 को ताजपुर प्रखंड मुख्यालय का ऐतिहासिक घेराव और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के समस्त किसानों, गृहस्वामियों और भूस्वामियों से अपील की है कि वे अपनी हक की लड़ाई के लिए बड़ी संख्या में जुटकर इस आंदोलन को सफल बनाएं।

इस विवाद ने प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार विकास और किसानों के हितों के बीच का रास्ता कैसे निकालती है।

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