नियमों की बेड़ियाँ या भविष्य से खिलवाड़? चंद मिनटों की देरी पर परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर, आइसा ने की दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

समस्तीपुर: बिहार में चल रही बोर्ड परीक्षाओं के दौरान समस्तीपुर सहित विभिन्न जिलों से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता की विचलित करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। ताजा घटनाक्रम में, मात्र 2 से 5 मिनट की देरी से परीक्षा केंद्र पहुँचने वाले छात्र-छात्राओं को प्रवेश से वंचित कर दिया गया, जिसके बाद परीक्षा केंद्रों के बाहर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल देखा गया।

समस्तीपुर में पैदल पथ ब्रिज पर जाम की तस्‍वीर

इस गंभीर मुद्दे पर छात्र संगठन आइसा (AISA) के जिला प्रभारी एवं भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ करार दिया है।


मानवता और व्यवहारिकता को ताक पर रख रहा प्रशासन

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि समस्तीपुर जिले में जाम की समस्या विकराल है। भोला टॉकीज, मुक्तापुर, अटेनरा चौक जैसे रेलवे गुमती और समस्तीपुर ओवरब्रिज पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके साथ ही अचानक खराब हुए मौसम ने परीक्षार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। सिंह ने तर्क दिया कि यदि 5 बजे समाप्त होने वाली वोटिंग को विशेष परिस्थितियों में रात 7-8 बजे तक कराया जा सकता है, तो परीक्षार्थियों के लिए नियमों में थोड़ी लचीलापन क्यों नहीं दिखाई जा सकती?

सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:

“नियम-कानून अपनी जगह हैं, लेकिन मानवता और व्यवहारिकता भी कोई चीज होती है। जब पुलिस और न्यायालय भी जरूरत पड़ने पर नियमों को शिथिल करते हैं, तो शिक्षा विभाग बच्चों के प्रति इतना कठोर कैसे हो सकता है?”


सड़कों पर सिसकियां: ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि छात्राएं परीक्षा केंद्र के गेट पर तैनात मजिस्ट्रेट और सुरक्षाकर्मियों के पैर पकड़कर गिड़गिड़ा रही हैं, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कई परीक्षार्थी रोते-बिलखते केंद्र से वापस लौटे। आइसा नेता ने कहा कि सरकार एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की इस तानाशाही से बच्चों के वर्षों के परिश्रम पर पल भर में पानी फेर दिया गया। यह स्थिति परीक्षार्थियों के लिए मानसिक रूप से घातक और मरणासन्न कर देने वाली है।

मजबूरी में गेट फांदकर प्रवेश करती छात्रा

आइसा की प्रमुख मांगें:

छात्र संगठन ने इस मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे हैं:

  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: उन मजिस्ट्रेटों और सेंटर सुपरिटेंडेंटों की जांच की जाए जिन्होंने अड़ियल रुख अपनाते हुए बच्चों को प्रवेश से रोका।
  • पुनर्परीक्षा का आयोजन: जिन छात्रों की परीक्षा मात्र चंद मिनटों की देरी के कारण छूट गई है, उनके भविष्य को देखते हुए विशेष पुनर्परीक्षा आयोजित की जाए।
  • नियमों में ढील: भविष्य में जाम या खराब मौसम जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र पर पहुँचने के समय को थोड़ा लचीला बनाया जाए।

साथ ही, सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अभिभावकों और छात्रों से भी अपील की है कि वे प्रशासन की संवेदनहीनता को देखते हुए समय से काफी पहले केंद्रों पर पहुँचने का प्रयास करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

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