समस्तीपुर। स्थानीय बलिराम भगत महाविद्यालय के हिंदी स्नात्तकोत्तर विभाग के तत्वावधान में आज संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की जयंती की पूर्व संध्या पर एक भव्य श्रद्धांज़लि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने सामाजिक समरसता के अग्रदूत संत रविदास को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

पुष्पांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद वैश्यन्त्री ने की। समारोह का विधिवत शुभारंभ संत रविदास जी महाराज के तैल चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर किया गया। इस दौरान उपस्थित प्राध्यापकों और छात्रों ने बारी-बारी से श्रद्धासुमन अर्पित किए, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और वैचारिक ऊर्जा से भर उठा।
आज भी प्रासंगिक हैं रविदास के विचार: डॉ. वैश्यन्त्री
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद वैश्यन्त्री ने संत रविदास के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचार किसी एक कालखंड के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए हैं। उन्होंने प्रसिद्ध कहावत “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदर्भ देते हुए कहा कि संत रविदास ने कर्म की शुद्धता और मन की पवित्रता को ही सबसे बड़ा धर्म माना था। डॉ. वैश्यन्त्री ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में जब समाज विभिन्न विसंगतियों से जूझ रहा है, तब रविदास जी के समतावादी विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
विद्वान वक्ताओं ने साझा किए विचार
हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. स्नेह लता कुमारी एवं डॉ. संजय प्रसाद के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्वानों ने शिरकत की। मौके पर उपस्थित प्रो. राजेश कुमार रंजन, डॉ. हरिनारायण, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. स्वीटी, डॉ. विंध्याचल साह, प्रो. शकील अहमद, प्रो. विकास पटेल, डॉ. उल्लास टी, डॉ. रेखा, डॉ. सीरिन, डॉ. ज्योति और डॉ. आर. के. मौर्या ने संत रविदास के जीवन संघर्ष और उनकी साखियों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि रविदास जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक ‘बेगमपुरा’ (दुःख रहित समाज) की कल्पना की थी।
छात्रों ने प्रस्तुत किए समतामूलक समाज पर विचार
कार्यक्रम की खास विशेषता हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। ‘समता मूलक समाज के निर्माण में संत रविदास का योगदान’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में ज्योति, अनु, आयुष्मान, सौम्या, रितेश, अभिषेक, रोहित और काजल आदि विद्यार्थियों ने अपने ओजपूर्ण विचार व्यक्त किए। छात्रों ने आधुनिक समाज में जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए रविदास जी की शिक्षाओं को अपनाने पर बल दिया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर केवल शैक्षणिक जगत ही नहीं, बल्कि शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में आशुतोष, राजा, संजय, राहुल और संजीव देशबंधु सहित अन्य कर्मचारियों ने व्यवस्था संचालन में सहयोग किया और श्रद्धांज़लि अर्पित की।

अंत में, हिंदी विभाग द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों और छात्रों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और संत रविदास के जयघोष के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में सामाजिक एकता का नया संचार किया।



