मुजफ्फरपुर। 26 जनवरी 2026 देशभक्ति का जज्बा, तिरंगे की आन, और भविष्य की सुनहरी यादों का संगम—मुजफ्फरपुर स्थित संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अवसर था 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली उत्सव का, जिसे विद्यालय परिवार ने पूरी श्रद्धा, निष्ठा और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस राष्ट्रीय पर्व के साथ-साथ विद्यालय ने अपने बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए एक भावुक विदाई समारोह का भी आयोजन किया, जिसने इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया।

संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के गणतंत्र दिवस समारोह में कार्यक्रम प्रस्‍तुत करती छात्रा  

शान से लहराया तिरंगा

समारोह का विधिवत शुभारंभ प्रातः काल विद्यालय के सचिव डॉ. अरविन्द कुमार द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। जैसे ही तिरंगा आसमान की ऊंचाइयों को छूने लगा, पूरा परिसर ‘जन-गण-मन’ के स्वरों से गुंजायमान हो उठा। इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने विद्यालय के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, निदेशक लालबाबू प्रसाद, प्राचार्य दीपक मिश्र, समस्त शिक्षकगण और तिरंगे के सम्मान में कतारबद्ध खड़े विद्यार्थी एवं अभिभावकगण ।

संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के गणतंत्र दिवस समारोह में कार्यक्रम प्रस्‍तुत करती छात्रा  

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी प्रतिभा की झलक

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के दूसरे चरण में छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संगीत, नृत्य और ओजस्वी भाषणों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।

  • सुरों का संगम: संगीत प्रतियोगिता में कक्षा-8 की जोया ने अपनी मधुर आवाज से प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि नन्ही कनक (कक्षा-1) ने द्वितीय स्थान हासिल कर सबका दिल जीत लिया।
  • नृत्य की छटा: रिकॉर्डिंग डांस में वर्षा (कक्षा-8) ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से प्रथम स्थान पाया।
  • वाणी का ओज: अंग्रेजी भाषण में नमीत (10B) और हिंदी भाषण में नन्ही आरुषि (1B) ने अपनी वाकपटुता का लोहा मनवाया। वहीं उर्दू में जोया और संस्कृत में आदित्य ने प्रथम स्थान प्राप्त कर यह दिखाया कि संस्थान सभी भाषाओं और संस्कारों का सम्मान करता है।

भावुक विदाई: “जीवन उत्सव है, तो विछोह महोत्सव”

कार्यक्रम का सबसे मर्मस्पर्शी हिस्सा वह रहा जब सत्र 2025-26 के बोर्ड (अपीयरिंग) छात्र-छात्राओं को विदाई दी गई। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रवीण कुमार का संबोधन किसी दर्शन से कम नहीं था। उन्होंने छात्रों की आँखों में नमी देखते हुए बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहा— जीवन उत्सव है, तो विछोह महोत्सव है।”

उन्होंने समझाया कि जुदाई को दुख के रूप में नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दुख को हंसकर जीना ही मनुष्य की सबसे बड़ी जीत है। आज आप यहाँ से विदा नहीं हो रहे, बल्कि समाज के बड़े फलक पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रस्थान कर रहे हैं।”

17 वर्षों का गौरवशाली इतिहास और संकल्प

अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने संस्थान के 17 वर्षों (2008 से अब तक) के सफर को याद करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि “हमारा सिद्धांत अटल है—संस्थान की फीस सबसे कम होगी और व्यवस्थाएं सबसे बेहतर होंगी।” उन्होंने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि उनके सुझाव ही विद्यालय की योजनाओं की नींव बनते हैं।

छात्र-छात्राओं को विदाई कार्यक्रम में भेंट प्रदान करते  निदेशक लालबाबू प्रसाद एवं  सचिव डॉ. अरविन्द कुमार(बायें से )

सफलता की वैश्विक गाथा: मुजफ्फरपुर से बर्लिन तक

संस्थान की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि आज संत जोसेफ के पढ़ाए बच्चे न केवल भारत, बल्कि दुनिया के नक्शे पर चमक रहे हैं।

  • वैश्विक उपलब्धि: विद्यालय का एक छात्र तुलसी (मोहनपुर) आज जर्मनी के बर्लिन में कंप्यूटर इंजीनियर है, तो वहीं एक छात्र USA में अमेजन जैसी बड़ी कंपनी में कार्यरत है।
  • सरकारी सेवा: सुमन (सकरा हाई स्कूल) जैसे सैकड़ों छात्र आज सरकारी शिक्षक के रूप में समाज सेवा कर रहे हैं।
  • शून्य विफलता दर: संस्थान का यह रिकॉर्ड रहा है कि आज तक यहाँ का एक भी छात्र असफल नहीं हुआ है। सभी छात्रों ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की है। 10 CGPA और 95% अंक लाना यहाँ की परंपरा बन चुकी है।

चुनौतियों को बनाया अवसर

अध्यक्ष ने 2009 के उस दौर को याद किया जब लोगों ने चुनौती दी थी कि हिंदी माध्यम के बच्चे सीबीएसई बोर्ड कैसे पास करेंगे। उन्होंने गर्व से बताया कि टीम ‘संत जोसेफ’ के कठिन परिश्रम से उन बच्चों ने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि 60% से अधिक अंक लाए। उन्हीं में से एक छात्र इंजीनियर अजय कुमार आज इसी विद्यालय में विज्ञान और गणित के शिक्षक के रूप में नई पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।

चार स्तंभ: शिक्षा, संस्कार और विकास

प्रवीण कुमार ने विद्यालय के चार मुख्य संकल्पों को दोहराया:

  1. सर्व सुलभ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी संभव हो।
  2. सर्वांगीण विकास: पढ़ाई के साथ-साथ खेल और कला में निपुणता।
  3. शैक्षणिक उत्कृष्टता: गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं।
  4. नैतिक मूल्य: ‘विद्यार्थी’ वही है जो शिक्षा और संस्कार से लबरेज हो।
गणतंत्र दिवस समारोह में  शामिल संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के छात्रगण

समर्पण की जीवंत मिसाल

अपने व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा करते हुए 58 वर्षीय प्रवीण कुमार ने कहा कि जब वे अपने छात्रों की सफलता की कहानियां सुनते हैं, तो उनकी शुगर, प्रेशर और शरीर का दर्द गायब हो जाता है। उनकी बुलंद आवाज और अटूट संकल्प इस बात का प्रमाण था कि वे आने वाले कई दशकों तक बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए तैयार हैं।

समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ। विदाई के भावुक क्षणों के बीच छात्रों ने संकल्प लिया कि वे जहाँ भी जाएंगे, संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के संस्कारों की महक फैलाएंगे।

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