समस्तीपुर | 24 जनवरी, 2026 मुख्य संवाददाता

समस्तीपुर। बिहार में बाल विवाह के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों और सख्त कानूनों के दावों की जमीनी हकीकत भयावह है। समस्तीपुर समेत पूरे बिहार में 13 से 17 वर्ष की मासूम बेटियां आज भी बाल विवाह के दंश का शिकार हो रही हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि जिस उम्र में इन किशोरियों को स्कूल में शिक्षा लेनी चाहिए, उस उम्र में वे मातृत्व का बोझ उठाने को मजबूर हैं।

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आंकड़ों ने खोली पोल: अस्पताल पहुंच रही हैं गर्भवती किशोरियां

सरकारी तंत्र की विफलता का सबसे बड़ा सबूत स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े दे रहे हैं। एसकेएमसीएच (SKMCH) के साल 2025 के पंजीकरण आंकड़ों पर नजर डालें तो रूह कांप जाती है। जिले में हर माह औसतन 100 से ज्यादा किशोरियां गर्भवती हो रही हैं।

महीने दर महीने बढ़ता आंकड़ा:

  • जुलाई 2025: सबसे अधिक 357 नाबालिग गर्भवती दर्ज की गईं।
  • अगस्त 2025: 309 किशोरियों का पंजीकरण हुआ।
  • मई से दिसंबर तक: कुल आंकड़ों के अनुसार, हजारों जिंदगियां पढ़ाई छोड़ अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं।

अधिकांश मामले उन लड़कियों के हैं जो 8वीं से 12वीं कक्षा की छात्राएं हैं। यह स्थिति न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता है, बल्कि बाल विकास परियोजना और पंचायत स्तर की निगरानी समितियों की कार्यशैली पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।

निगरानी समितियां फेल, जनप्रतिनिधि मौन

दावा किया जाता है कि बाल विवाह रोकने के लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर निगरानी टीमें गठित हैं, लेकिन हकीकत में ये टीमें कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। अधिकांश बाल विवाह स्थानीय जनप्रतिनिधियों की देख-रेख में हो रहे हैं। कहीं चोरी-छिपे शादी की जा रही है, तो कहीं आधार कार्ड में उम्र बढ़ाकर कानून की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। गरीबी, दहेज और पिछड़ी सोच के कारण अभिभावक अपनी बेटियों के भविष्य की बलि दे रहे हैं।

दो पीढ़ियों की जान को खतरा

जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेंद्र कुमार ने बताया कि “हाई रिस्क प्रेग्नेंसी” के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन आती है। किशोरियों का शारीरिक विकास अधूरा होने के कारण वे एनीमिया और कुपोषण का शिकार हो जाती हैं, जिससे प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इन नंबरों पर करें शिकायत, बचाएं बचपन

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत सक्रिय संस्था ‘जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र’ और ‘क्राई’ जैसी संस्थाएं लगातार संघर्ष कर रही हैं। प्रशासन ने अपील की है कि बाल विवाह की सूचना तुरंत इन नंबरों पर दें:

  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
  • पुलिस सहायता: 112
  • बचपन बचाओ आन्दोलन: 18001027222

सरकारी योजनाओं का लाभ तब तक नहीं दिखेगा जब तक जमीनी स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन को केवल जागरूकता के नाम पर खानापूर्ति करने के बजाय उन पर नकेल कसनी होगी जो बच्चियों के बचपन की बलि चढ़ा रहे हैं।

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