सकरा, मुजफ्फरपुर। बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का दिन भारतीय संस्कृति में ज्ञान के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इसी पावन उपलक्ष्य पर मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान संंत जोसेफ्स प्रेप./पब्लिक स्कूल, सबहा ने अपनी गौरवशाली यात्रा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। विद्यालय प्रबंधन ने क्षेत्र के शैक्षिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से अपनी नई विस्तारित शाखा संंत जोसेफ्स प्रेप./पब्लिक स्कूल, सरमस्तपुर के आगाज की विधिवत घोषणा की है। इस अवसर पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में विद्यालय के भविष्य की रूपरेखा साझा की गई और नए परिसर की सुविधाओं से लैस ‘हैंड बिल’ का विमोचन किया गया।

हैंड बिल का विमोचन: परंपरा और आधुनिकता का संगम
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में संस्था के चेयरमैन प्रवीण कुमार, सचिव डा.अरविंद कुमार, कोषाध्यक्ष सह निदेशक लालबाबू प्रसाद एवं प्राचार्य दीपक मिश्र ने संयुक्त रूप से नई शाखा का हैंड बिल जारी किया। इस दौरान चेयरमैन प्रवीण कुमार ने सूचना संप्रेषण के पारंपरिक माध्यमों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “आज हम सूचना के जिस युग में जी रहे हैं, वहां विज्ञापनों की भरमार है। लेकिन हैंड बिल का महत्व आज भी उतना ही अक्षुण्ण है जितना पहले था। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की आजादी के समय, विशेषकर गरम दल के क्रांतिकारियों ने अपनी गुप्त क्रांतियों और संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए हैंड बिल का ही सहारा लिया था।” उन्होंने पोस्टर संस्कृति की आलोचना करते हुए कहा कि दीवारों को गंदा करना विकास नहीं है। हैंड बिल न केवल पर्यावरण और स्वच्छता के अनुकूल है, बल्कि यह किसी भी विषय वस्तु की सम्यक (संपूर्ण) जानकारी पहुँचाने का सबसे शालीन माध्यम है।

समारोह को संबोधित करते हुए संस्था के कोषाध्यक्ष सह निदेशक लालबाबू प्रसाद ने एक बड़ी और लोक-कल्याणकारी घोषणा की। उन्होंने कहा कि संंत जोसेफ्स प्रेप./पब्लिक स्कूल (सबहा एवं सरमस्तपुर शाखा) केवल व्यावसायिक शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है।
उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा:
- निःशुल्क शिक्षा: दोनों शाखाओं में निर्धन और मेधावी बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया गया है।
- पिछड़े परिवारों को सहयोग: आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को विद्यालय की ओर से विशेष सहायता दी जाएगी ताकि गरीबी उनके सपनों के आड़े न आए।
- कोचिंग की सुविधा: श्री प्रसाद ने घोषणा की कि इन बच्चों को नियमित स्कूली शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं (जैसे नवोदय, सैनिक स्कूल आदि) की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।

सरमस्तपुर शाखा: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और CBSE मानक
प्राचार्य दीपक मिश्र ने नई विस्तारित शाखा की भौगोलिक और तकनीकी विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संंत जोसेफ्स प्रेप./पब्लिक स्कूल, सरमस्तपुर, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-28) से सटे सरमस्तपुर यज्ञशाला के अत्यंत निकट स्थित है।
विद्यालय की संरचनात्मक विशेषताएं:
- विशाल परिसर: विद्यालय वर्तमान में दो एकड़ के विस्तृत भूखंड पर निर्माणाधीन है, जिसमें बच्चों के खेलने के लिए बड़े मैदान और प्राकृतिक वातावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।
- CBSE मानक: विद्यालय का निर्माण पूरी तरह से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नवीनतम मानकों के अनुसार किया जा रहा है। कक्षा-कक्षों की बनावट से लेकर सुरक्षा उपकरणों तक, हर पहलू पर बारीकी से काम हो रहा है।
- पंजीकरण प्रारंभ: नए सत्र के लिए नामांकन हेतु रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

सचिव का विजन: डिग्री नहीं, व्यक्तित्व निर्माण है उद्देश्य
संस्था के सचिव डा. अरविंद कुमार ने अपने संबोधन में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में केवल किताबी ज्ञान, ऊंचे अंक और डिग्रियों की होड़ ने बच्चों के बचपन को सीमित कर दिया है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “सकरा की इस पावन धरती पर हमने जो संकल्प लिया था, वह आज एक वटवृक्ष का रूप ले चुका है। हम केवल साक्षर नहीं, बल्कि सुशिक्षित नागरिक बनाना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ बच्चों की तर्कशक्ति बढ़े और उनके दिल में नैतिक मूल्यों व संस्कारों का बीजारोपण हो।” —
सामाजिक सरोकार: निर्धन एवं मेधावी बच्चों को मिलेगी निःशुल्क शिक्षा

संंत जोसेफ्स की विशिष्ट शिक्षण पद्धति: क्यों है यह अलग?
कार्यकंम को संबोधित करते हुए अरविंद कुमार ने विद्यालय की उन प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित किया, और कहा कि हमारे विद्यालय के शिक्षकों का मानना है कि विज्ञान रटने का नहीं, अनुभव करने का विषय है। यहाँ की साइंस लैब आधुनिक शोध केंद्रों की तर्ज पर बनाई गई है, जहाँ छात्र भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के सिद्धांतों को खुद प्रयोग करके सिद्ध करते हैं।
- डिजिटल क्रांति और कंप्यूटर लैब: हर छात्र को अपना व्यक्तिगत सिस्टम प्रदान किया जाता है ताकि वे कोडिंग और सूचना तकनीक में माहिर बन सकें।
- लर्निंग बाय डूइंग: ‘प्ले-वे’ पद्धति के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जाता है, जिससे शिक्षा का बोझ उन पर हावी न हो।
- चार भाषा फॉर्मूला: वैश्विक नागरिक तैयार करने के लिए यहाँ हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत और उर्दू का भी गहरा ज्ञान दिया जाता है।
- लिखावट और अनुशासन: डिजिटल युग में भी सुंदर हस्तलेखन (Handwriting) को व्यक्ति के चरित्र का दर्पण मानते हुए विशेष सुधार कक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
- प्रतियोगी परीक्षाओं का केंद्र: विद्यालय में केवल स्कूली शिक्षा ही नहीं, बल्कि सैनिक स्कूल, सिमुलतला, नवोदय विद्यालय, ओलंपियाड और NTSE जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए विशेषज्ञ कोचिंग और मार्गदर्शन की सुविधा दी गई है।
खेल और पारदर्शी मूल्यांकन
संस्था ने स्पष्ट किया कि यहाँ मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। शिक्षकों द्वारा उत्तर-पुस्तिकाओं का समय पर मूल्यांकन किया जाता है और बच्चों को उनकी कमियों के बारे में रचनात्मक फीडबैक दिया जाता है। इसके अलावा, पेशेवर कोच बच्चों की खेल प्रतिभा को निखारने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, क्योंकि खेल जीवन में हारकर फिर से खड़ा होना सिखाते हैं।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस भव्य शुभारंभ के अवसर पर ट्रस्टी रूपम कुमारी, भारती देवी और राममणी कुमारी के अलावा रंजीत कुमार, नवीन कुमार, श्याम कुमार सिंह, महेश्वर महतो, पंकज कुमार सिंह, इंजीनियर अजय कुमार, रत्ना ठाकुर, संगीता कुमारी और गीता कुमारी जैसे शिक्षाविद् उपस्थित थे। संगीत शिक्षक मुकेश कुमार के नेतृत्व में सांस्कृतिक छटा ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
स्थानीय अभिभावकों और विद्वत जनों ने संंत जोसेफ्स की इस नई पहल का स्वागत किया है और इसे सकरा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।



