ताजपुर/समस्तीपुर | सरकार द्वारा जल्दबाजी में शुरू की गई ‘फार्मर रजिस्ट्री’ योजना को लेकर किसानों में भारी आक्रोश और चिंता व्याप्त है। अखिल भारतीय किसान महासभा ने इसे किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का सौदा बताया है।

योजना का मुख्य संकट

कृषि विभाग के अनुसार, भविष्य में सरकार की सभी महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे:

  • किसान सम्मान निधि की राशि
  • डीजल और खाद-बीज पर अनुदान
  • फसल क्षति मुआवजा एवं यांत्रिकीकरण सब्सिडी

ये सभी लाभ केवल उसी जमीन (रकवा) के आधार पर मिलेंगे जो फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर दर्ज होगा।

तकनीकी खामियां और जमीनी हकीकत

अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने मौजूदा व्यवस्था की गंभीर त्रुटियों को उजागर करते हुए कहा कि:

त्रुटिपूर्ण ऑनलाइन रिकॉर्ड: अधिकांश किसानों की ऑनलाइन जमाबंदी पर ‘खाता-खेसरा’ शून्य अंकित है।

पुराने रिकॉर्ड: कई किसानों की जमाबंदी आज भी उनके पिता या दादा के नाम पर है, जिसे अपडेट नहीं किया गया है।

पोर्टल की सीमा: वर्तमान पोर्टल पर एक से अधिक जमाबंदी दर्ज करने की स्पष्ट व्यवस्था का अभाव है, जबकि बिहार के अधिकांश किसानों के पास एक से अधिक जमाबंदी है।

माले की चेतावनी

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यदि सरकार ने पहले राजस्व महाभियान के तहत आए आवेदनों का ऑनलाइन सुधार नहीं किया, तो यह योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित होगी। उन्होंने मांग की है कि पोर्टल में सुधार कर एक से अधिक जमाबंदी दर्ज करने की सुविधा दी जाए, अन्यथा किसानों को भारी सरकारी लाभ से वंचित होना पड़ेगा।


मुख्य मांग: सरकार सबसे पहले राजस्व अभिलेखों में सुधार करे और उसके बाद ही फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाए, ताकि वास्तविक किसानों को उनका हक मिल सके।

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