ताजपुर में पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ फूटा जन-आक्रोश: भाकपा माले का ‘न्याय मार्च’, थानाध्यक्ष को बर्खास्त करने की उठी मांग

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विशेष संवाददाता, ताजपुर/समस्तीपुर | 10 जनवरी 2026

बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड में पुलिस की संवेदनहीनता, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और संदिग्ध शराब कांड को लेकर जन-आंदोलन की नई चिंगारी सुलग गई है। शनिवार को भाकपा माले के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने शहर की सड़कों पर उतरकर नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ को आईना दिखाया। ‘न्याय मार्च’ के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने न केवल पुलिसिया दमन का विरोध किया, बल्कि भ्रष्टाचार में डूबे राजस्व विभाग और शराब माफियाओं के साथ प्रशासन की मिलीभगत पर भी कड़े प्रहार किए।

भाकपा माले के बैनर तले ‘न्याय मार्च’  में पुलिसिया जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते कार्यकर्ता

अस्पताल चौक से गूंजी इंकलाब की आवाज             

शनिवार की सुबह ताजपुर का अस्पताल चौक लाल झंडों और सरकार विरोधी नारों से पट गया। भाकपा माले के कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर पुलिसिया जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लिखे थे। अस्पताल चौक से निकला यह ‘न्याय मार्च’ शहर के मुख्य मार्गों—बाजार क्षेत्र, थाना रोड और गांधी चौक होते हुए पुनः अस्पताल चौक पर पहुंचा, जहां यह एक विशाल आक्रोश सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने आरोप लगाया कि ताजपुर पुलिस अब रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बन चुकी है।

मनीष पोद्दार कांड: मानवता को शर्मसार करने वाली थर्ड डिग्री

सभा के मुख्य वक्ता और खेग्रामस के जिला सचिव जीबछ पासवान ने मनीष पोद्दार के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता का जो ब्यौरा दिया, उसने सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए। उन्होंने कहा, भाजपा-जदयू की नीतीश सरकार में पुलिस बेलगाम हो गई है। महज संदेह के आधार पर एक छोटे दुकानदार, उसकी पत्नी और वृद्ध पिता को उठाकर हाजत में बंद कर देना कानून का माखौल उड़ाना है। हद तो तब हो गई जब मनीष पोद्दार को अमानवीय यातनाएं दी गईं। आरोप है कि पुलिस ने उसके मलद्वार में सिरिंज के माध्यम से पेट्रोल डाला और डंडा घुसेड़ा। यह किसी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।”

पासवान ने आगे कहा कि पुलिस ने कानून को ताक पर रखकर पीड़ित को 5 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गया, तब जाकर कागजी खानापूर्ति और इलाज की नौटंकी की गई। माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक दोषी थानाध्यक्ष को बर्खास्त नहीं किया जाता, उनका आंदोलन आगे जारी रहेगा।

राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और ‘रॉबिन ज्योति’ का वायरल विडियो बनने लगा मुद्दा

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए भाकपा माले के जिला कमिटी सदस्य उपेंद्र राय ने ताजपुर अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार अब बंद कमरों से निकलकर खुलेआम वीडियो के रूप में जनता के सामने है। रॉबिन ज्योति द्वारा रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी यह साबित करती है कि ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। उपेंद्र राय ने चेतावनी दी, भ्रष्ट कर्मचारी को बचाने की साजिश रची जा रही है। अगर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से आरोपी को बर्खास्त नहीं किया, तो भाकपा माले कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी।”

जहरीली शराब कांड: बहादुरनगर में पसरा मातम और प्रशासनिक लीपापोती

बंगरा थाना क्षेत्र के बहादुरनगर में हुई पिता-पुत्र की संदिग्ध मौत पर ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह और प्रभात रंजन गुप्ता ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह मौतें जहरीली शराब पीने से हुई हैं, लेकिन प्रशासन इसे बीमारी या अन्य कारणों का रूप देकर शराब माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शराबबंदी का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ गांव-गांव में शराब की नदियां बह रही हैं। भाकपा माले ने इस कांड की उच्च स्तरीय जांच और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।

मुख्यमंत्री के आगमन पर विरोध की तैयारी: सुरेंद्र प्रसाद सिंह

सभा की अध्यक्षता कर रहे प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में आंदोलन की भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट कर दी। उन्होंने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 24 जनवरी से पहले इन तमाम मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर्पूरीग्राम आगमन पर उनका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती पर आ रहे हैं, लेकिन उनके राज में गरीबों और पिछड़ों पर जुल्म हो रहा है। हम मुख्यमंत्री के सामने काली तख्तियां दिखाकर उनसे जवाब मांगेंगे कि आखिर ताजपुर की पुलिस और प्रशासन इतना निरंकुश क्यों है?”

क्षेत्रीय नेताओं की एकजुटता

इस आक्रोश सभा को माले नेता आसिफ होदा, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, संजीव राय, मो० एजाज, चांद बाबू, मो० नौशाद, मो० शाद, सुनील कुमार शर्मा, मनोज साह, दिनेश प्रसाद सिंह, महावीर सिंह, मो० शकील और रॉकी खान ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ताजपुर की धरती अब दमन बर्दाश्त नहीं करेगी और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा है विपक्ष:

  1. थानाध्यक्ष की बर्खास्तगी: मनीष पोद्दार को थर्ड डिग्री टॉर्चर करने वाले थानाध्यक्ष पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो।
  2. भ्रष्टाचार पर वार: राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति को तत्काल सेवामुक्त किया जाए।
  3. न्यायिक जांच: बहादुरनगर जहरीली शराब कांड की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
  4. मुआवजा: पुलिसिया प्रताड़ना के शिकार मनीष पोद्दार को उचित मुआवजा और सरकारी मदद दी जाए।

शाम ढलते-ढलते सभा समाप्त हुई, लेकिन ताजपुर के राजनीतिक गलियारों में इस ‘न्याय मार्च’ ने खलबली मचा दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन माले की इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है।

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