मुजफ्फरपुर। शहर के कैप्टन निषाद सभागार में ‘जागृति संस्थान’ के तत्वावधान में प्रख्यात कवि, नाटककार, कहानीकार और समीक्षक डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह का 71वाँ जन्मदिवस समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में “प्रेरणा पर्व” के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने डॉ. सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत चर्चा की।

डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह में शामिल साहित्‍यकार

साहित्यिक गुरु और साधक के रूप में पहचान

समारोह की अध्यक्षता करते हुए बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामप्रवेश सिंह ने कहा कि डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह केवल एक सिद्ध साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक साहित्यिक गुरु भी हैं। उन्होंने अपनी रचनाशीलता के प्रकाश से अनेक नए साहित्यकारों को गढ़ा है।

ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र साह ने उन्हें एक ‘साहित्य साधक’ बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं से अनेक विमर्शों की सरणि (धारा) निकलती है। वहीं, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निभा शर्मा ने उन्हें शब्द के सच्चे अर्थों में एक ‘साहित्यिक संत’ की संज्ञा दी।

डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह पर भेंट प्रदान करते अघ्‍यापक डा. मनोज कुमार सिंह व अन्‍य (बायें से)

दो सत्रों में वैचारिक और रचनात्मक विमर्श

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण और स्वस्ति पाठ के साथ हुआ। पूरे आयोजन को दो महत्वपूर्ण सत्रों में विभाजित किया गया था:

प्रथम सत्र: आलेख पाठ (रचनाधर्मिता पर चर्चा) इस सत्र में विद्वानों ने डॉ. सिंह की विभिन्न कृतियों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए:

  • डॉ. राकेश रंजन: “अक्षयवट: एक अप्रतिम नाट्य प्रयोग” पर प्रकाश डाला।
  • डॉ. पिंकी कुमारी: “मैं भूखा हूँ” काव्य में भूख की शाश्वतता पर चर्चा की।
  • डॉ. चंद्रदेव सिंह: स्त्री विमर्श के संदर्भ में “माता, पत्नी, कन्या और अन्य कविताएँ” की महत्ता बताई।
  • डॉ. उमेशचंद्र त्रिपाठी: डॉ. सिंह की कहानी “पहचान” का विश्लेषण करते हुए इसे वर्तमान दौर के संकट की छाया बताया।
  • अन्य वक्ता: डॉ. रामसंयोग राय, अमरेंद्र कुमार झा और डॉ. राजेंद्र साह ने भी उनके रचना संसार और कृषक वेदना पर प्रभावी आलेख पढ़े।
डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वाँ जन्मदिवस समारोह में शामिल साहित्‍यकार एवं परिजन

द्वितीय सत्र: कवि सम्मेलन “फूलों की पंखुड़ियां बोले…” दूसरे सत्र में काव्य रस की वर्षा हुई। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामेश्वर द्विवेदी की अध्यक्षता और डॉ. पंकज कर्ण के संचालन में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

  • डॉ. पुष्पा गुप्ता ने “फूलों की पंखुड़ियां बोले, है आज जन्मदिन तेरा” पढ़कर डॉ. सिंह को बधाई दी।
  • डॉ. पंकज कर्ण ने ग़ज़ल “उदासी के सफ़र में धूप को ओढ़ा बिछाया है” से समां बांधा।
  • गीतकार डॉ. चंद्रदेव सिंह, श्रवण कुमार और विनोद कुमार ने भी अपनी गीतों व कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते एम डी डी एम कॉलेज के हिन्‍दी के प्राध्‍यापक डा. राकेश रंजन

विशिष्ट जनों के उद्गार

  • डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर: डॉ. सिंह ने अपनी ईमानदारी और कठोर परिश्रम से असंभव को संभव बनाया है।
  • डॉ. पुष्पा गुप्ता: उनकी कृतियां बोलती हैं, उन पर और अधिक शोध कार्य की आवश्यकता है।
  • डॉ. रामेश्वर राय: उनके संपर्क में आने वाला पाठक स्वयं लेखक बन जाता है।
  • डॉ. मनोज कुमार सिंह: उनकी साहित्य-साधना ‘हिमगिरि की स्रोतस्विनी’ (नदी) की तरह है जो निरंतर हरियाली फैला रही है।

“प्रेरणा पर्व” के इस आयोजन  ने यह सिद्ध कर दिया कि डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह का साहित्य समाज के हर वर्ग और विमर्श को गहराई से छूता है। कार्यक्रम में भारी संख्या में साहित्य प्रेमी और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

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