नई दिल्ली। हरियाणा राज्यसभा चुनाव का परिणाम केवल एक सीट की जीत-हार नहीं, बल्कि उच्च-स्तरीय राजनीतिक ड्रामे का पटाक्षेप साबित हुआ है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सांसद दीपेंद्र हुड्डा और राजेंद्र पाल गौतम ने रणनीतिक विवरणों के साथ भाजपा के ‘ऑपरेशन लोटस’ की पोल खोल दी। दीपेंद्र हुड्डा ने इसे ‘धनतंत्र’ पर ‘गणतंत्र’ की सीधी चोट करार दिया है।

गुजरात से हरियाणा तक भाजपा की ‘स्पेशल फील्डिंग’

प्रेस वार्ता में दीपेंद्र हुड्डा ने खुलासा किया कि भाजपा इस सीट को लेकर कितनी बेचैन थी। उन्होंने बताया:

  • हाईकमान की दखल: भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री को विशेष तौर पर ऑब्जर्वर बनाकर हरियाणा भेजा था।
  • टारगेट क्रॉस वोटिंग: दीपेंद्र हुड्डा के अनुसार, भाजपा की योजना कांग्रेस के 8-9 विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने की थी।
  • प्लान-बी: यदि कांग्रेस के विधायक नहीं टूटते, तो कम से कम 7 विधायकों को तोड़कर इनेलो की दो वोटों के सहारे जीत हासिल करने का ‘अथक प्रयास’ किया गया।

‘रात के अंधेरे में लोकतंत्र की हत्या की कोशिश’

दीपेंद्र हुड्डा ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा, “रात के अंधेरे में भाजपा ने सरेआम लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की। भाजपा का लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है, उन्हें सिर्फ और सिर्फ सत्ता चाहिए”। उन्होंने हरियाणा के कांग्रेस विधायकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा के ‘साम-दाम-दंड-भेद’ के खेल को फेल कर दिया और खरीद-फरोख्त के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

अंबेडकरवादी बनाम पूंजीवादी सोच

कांग्रेस एससी विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम ने भाजपा के नजरिए पर चोट करते हुए कहा कि भाजपा करमवीर बौद्ध को एक ‘कमजोर’ उम्मीदवार मान रही थी। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा की नजर में वही उम्मीदवार ‘मजबूत’ है जिसके पास अकूत पैसा हो। लेकिन कांग्रेस ने एक सच्चे अंबेडकरवादी और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता को मैदान में उतारकर यह साबित किया कि पार्टी का आधार वैचारिक है, न कि आर्थिक।

हुड्डा की ‘वोट चोरी’ वाली थ्योरी हुई सच

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जीत को ‘प्रदेश की जनता के विश्वास की जीत’ बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के वक्त से ही वे ‘वोट चोरी’ की बात कह रहे थे, जो इस चुनाव में भाजपा की हताशा को देखकर साबित हो गई है। हुड्डा ने स्पष्ट किया कि बहुमत के आधार पर एक सीट कांग्रेस की ही थी, लेकिन भाजपा ने तीसरा कैंडिडेट उतारकर अनैतिक तरीके से वोट चुराने की कोशिश की, जिसे कांग्रेस की एकजुटता ने नाकाम कर दिया।

मुख्य झलकियां:

  • रणनीति: भाजपा ने गुजरात के शीर्ष नेतृत्व को मैदान में झोंका था।
  • प्रतिरोध: कांग्रेस के 8-9 विधायकों को तोड़ने की कोशिश नाकाम रही।
  • चेहरा: एक आम अंबेडकरवादी कार्यकर्ता ने भाजपा के धनबल को मात दी।
  • उम्मीदवार: करमवीर बौद्ध (कांग्रेस) विजयी।
  • आरोप: भाजपा ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री को ऑब्जर्वर बनाकर क्रॉस वोटिंग की कोशिश की।
  • नारा: ‘धनतंत्र’ पर ‘गणतंत्र’ की जीत।
  • संदेश: कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और अंबेडकरवादी विचारधारा को दी प्राथमिकता।

राज्यसभा से विधानसभा तक का संदेश:इस जीत ने न केवल करमवीर बौद्ध को राज्यसभा पहुंचाया है, बल्कि हरियाणा कांग्रेस में एक नई ऊर्जा भर दी है। दीपेंद्र हुड्डा ने इस जीत का श्रेय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व— मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल को देते हुए इसे आगामी चुनावों के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया है।

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