बुलडोजर एक्शन से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय पर किया प्रदर्शन, सरकारी बस स्टैंड में अनिश्चितकालीन पड़ाव

समस्तीपुर | 12 मार्च, 2026 हसनपुर प्रखंड के मंगलगढ़ (सुंदरैयानगर) से उजाड़े गए 907 दलित परिवारों के पुनर्वास और जिले के सभी भूमिहीनों को वास-भूमि व आवास उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भाकपा माले ने गुरुवार को जिला मुख्यालय में आर-पार की जंग छेड़ दी है। शहर के मालगोदाम चौक से निकला कार्यकर्ताओं का विशाल जुलूस गगनभेदी नारों के साथ समाहरणालय पहुँचा, जहाँ जिलाधिकारी के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया गया।

घंटों चले प्रदर्शन के बाद, उपस्थित मजिस्ट्रेट के आग्रह पर कार्यकर्ता पीछे हटे, लेकिन आंदोलन समाप्त करने के बजाय वे पास के सरकारी बस स्टैंड में अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन पर बैठ गए हैं।

साजिश के तहत उजाड़ा गया सुंदरैयानगर: प्रो. उमेश

आंदोलन के दौरान आयोजित सभा की अध्यक्षता करते हुए भाकपा माले जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मंगलगढ़ (सुंदरैयानगर) में 1992 से करीब एक हजार परिवार ‘केशरेहिंद’ सरकारी जमीन पर बसे हुए थे। उनके पास वोटर लिस्ट में नाम, राशन कार्ड, बिजली और पानी जैसी तमाम सरकारी सुविधाएँ थीं। इसके बावजूद पुलिस और सामंती गुंडा गठजोड़ ने साजिश के तहत उन्हें उजाड़ दिया। यह गरीबों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”

प्रमुख मांगें और चेतावनी

खेग्रामस के जिला सचिव जीबछ पासवान ने कहा कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में सरकारी जमीन पर दशकों से बसे दलितों और गरीबों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। सरकार के पास भूमिहीनों को आवास देने का स्पष्ट प्रावधान है, फिर भी उन्हें जमीन नहीं दी जा रही, जिससे आवास योजना की राशि वापस लौट रही है। माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासन सुंदरैयानगर के परिवारों को पर्चा देने और जिले के सभी भूमिहीनों को कब्जा दिलाने का लिखित आश्वासन नहीं देता, आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन में शामिल प्रमुख चेहरे : इस  प्रदर्शन और सभा में जिले भर के माले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सभा का संचालन खेग्रामस के जिला अध्यक्ष उपेंद्र राय ने किया। मौके पर संबोधित करने वालों में मुख्य रूप से शामिल थे:

  • जिला स्थाई समिति सदस्य: ललन कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अमित कुमार, दिनेश कुमार, महावीर पोद्दार, फूलबाबू सिंह।
  • जिला कमिटी सदस्य: महेश कुमार, जयंत कुमार, अनिल चौधरी, रौशन कुमार।
  • संगठन के अन्य प्रमुख नेता: तनंजय प्रकाश, रामलाल राम, कैलाश पासवान, विनय पासवान, राहुल कुमार, अर्जुन दास, अमेरिका यादव, अर्जुन कुमार, रमेश महतो, रामबाबू सदा।
  • महिला व अन्य कार्यकर्ता: कमली देवी, शांति देवी, आशा देवी, सुदामा देवी, मो. आले, मुन्ना दास, युगेश्वर सहनी, नेपल सहनी, मनर दास, बैजनाथ सदा, दिलबहार सहनी और पाचू राम।

मुख्य हाइलाइट्स:

  • स्थापना: 1992 से बसे परिवारों को बेदखल करने पर फूटा गुस्सा।
  • आरोप: पुलिस-सामंती गठजोड़ द्वारा जबरन उजाड़ने का आरोप।
  • स्थिति: समाहरणालय के सामने बस स्टैंड में कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन पड़ाव।

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