“सूर्य हुए ‘निस्तेज’, थमे मांगलिक काज: आज से खरमास का ‘सन्नाटा’:आखिर क्यों ‘खरमास’ में वर्जित हैं शहनाइयां?

मुजफ्फरपुर | विशेष डेस्कदिनांक: 15 मार्च, 2026| : क्या आप अगले कुछ दिनों में शहनाई बजाने या नए घर में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं? यदि हाँ, तो रुक जाइए! आज, 15 मार्च 2026 की सुबह से ब्रह्मांड की ऊर्जा बदल चुकी है और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘स्वर्ग के द्वार’ कुछ समय के लिए संकुचित हो गए हैं। सूर्य देव ने जैसे ही मीन राशि की चौखट पर कदम रखा, वैसे ही पूरे देश में ‘खरमास’ का साया गहरा गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह वह कालखंड है जब समस्त मांगलिक कार्यों को शक्ति देने वाले भगवान भास्कर अपने गुरु की सेवा में लीन होकर ‘निस्तेज’ हो जाते हैं। विद्वानों का दावा है कि अगले 30 दिनों तक ग्रहों की स्थिति ऐसी है कि किसी भी शुभ कार्य को देवताओं का आशीर्वाद मिलना असंभव होगा। आखिर क्यों इस महीने को ‘अशुभ’ की श्रेणी में रखा गया है? क्या वाकई गधों की सवारी ने सूर्य की रफ्तार कम कर दी है? 14 अप्रैल तक लगने वाले इस ‘महा-ब्रेक’ के पीछे का रहस्य और आपकी राशि पर इसके खतरे को समझने के लिए पढ़िए हमारी यह विशेष रिपोर्ट…

हिंदू पंचांग और भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज 15 मार्च 2026 से ब्रह्मांड के अधिपति सूर्य देव ने अपनी चाल बदल ली है। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही देश भर में ‘खरमास’ (जिसे लोकभाषा में मलमास भी कहा जाता है) का आगाज़ हो गया है। आज से लेकर अगले एक महीने तक, यानी 14 अप्रैल तक, वैवाहिक कार्यक्रमों की शहनाइयां खामोश रहेंगी और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।

सूर्य का मीन राशि में प्रवेश: क्या कहता है गणित?

ज्योतिषाचार्य पंडित रामकुमार शास्त्री के अनुसार, शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि (14 मार्च की रात 1:04 बजे) सूर्य देव ने कुंभ राशि को त्यागकर मीन राशि में गोचर किया है। ज्योतिष की गणना के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों—धनु  या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस विशिष्ट कालखंड को ‘खरमास’ कहा जाता है।

वर्तमान में यह ‘मीन खरमास’ है, जो 14 अप्रैल 2026 की सुबह 9:33 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे (मेष संक्रांति), तब जाकर मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त पुनः खुलेंगे।


ज्योतिषीय दृष्टिकोण: क्यों निर्बलहो जाते हैं सूर्य?

हिंदू ज्योतिष में सूर्य को ‘आत्मा’, ‘तेज’, ‘सफलता’ और ‘राजसत्ता’ का कारक माना गया है। किसी भी शुभ कार्य—जैसे विवाह, मुंडन या नींव पूजन—के लिए सूर्य का बली (पावर फुल) होना अनिवार्य है।

पंडितों का तर्क है:

  1. गुरु की सेवा: बृहस्पति (गुरु) देवताओं के गुरु हैं। जब सूर्य उनके घर (धनु या मीन राशि) में जाते हैं, तो वे शिष्य भाव में आ जाते हैं और अपने गुरु की सेवा में लीन हो जाते हैं। इस दौरान सूर्य का अपना ‘स्व-तेज’ या ‘अधिकार’ कम हो जाता है।
  2. ऊर्जा का अभाव: चूंकि सूर्य ही समस्त संसार को ऊर्जा प्रदान करते हैं, उनके ‘शिथिल’ पड़ने से मांगलिक कार्यों को वह दैवीय शक्ति नहीं मिल पाती जो उनके सफल संपादन के लिए आवश्यक है। यही कारण है कि इस समय किए गए कार्यों के ‘पूर्ण फल’ न मिलने की आशंका बनी रहती है।

पौराणिक कथा: सात घोड़ों की थकान और गधों की सवारी

‘खरमास’ नाम के पीछे एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर निरंतर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। उन्हें रुकने की अनुमति नहीं है।

कथा के अनुसार, निरंतर दौड़ते रहने के कारण एक बार सूर्य के घोड़े अत्यधिक प्यास और थकान से व्याकुल हो गए। उन्हें तड़पता देख सूर्य देव का हृदय पसीज गया और वे उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए। लेकिन समस्या यह थी कि यदि रथ रुक जाता, तो सृष्टि का चक्र थम जाता। तभी सूर्य देव की दृष्टि वहां खड़े दो ‘खर’ (गधों) पर पड़ी। उन्होंने घोड़ों को विश्राम देने के लिए गधों को रथ में जोत दिया। गधों की धीमी गति और कमजोर सामर्थ्य के कारण सूर्य का तेज कम हो गया और रथ की रफ्तार घट गई। तभी से इस ‘मंद गति’ वाले महीने को ‘खरमास’ कहा जाने लगा।


वर्जित और शुभ कार्य: एक तुलनात्मक विश्लेषण

अक्सर लोग खरमास को ‘अशुभ’ मान लेते हैं, जबकि विद्वानों का कहना है कि यह ‘अशुभ’ नहीं बल्कि ‘आध्यात्मिक’ समय है। नीचे दी गई तालिका से समझें कि इस दौरान क्या करना उचित है और क्या नहीं:

श्रेणीवर्जित कार्य (क्या न करें)कारण
विवाहशादी-ब्याह और सगाई।वैवाहिक सामंजस्य और सुख में कमी की आशंका।
भवनगृह प्रवेश या नए घर की नींव रखना।वास्तु के अनुसार ऊर्जा का अभाव रहता है।
संस्कारमुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ) और नामकरण।संस्कारों के लिए आवश्यक शुद्ध ऊर्जा नहीं मिलती।
व्यापारनए शोरूम का उद्घाटन या बड़ा निवेश।आर्थिक स्थिरता में बाधा आने का डर रहता है।
श्रेणीशुभ कार्य (क्या करें)लाभ
आध्यात्ममंत्र जाप, तप और ध्यान।अंतर्मन की शांति और ईश्वर से जुड़ाव।
दानअन्न, वस्त्र और धन का दान।इस अवधि में किए गए दान का फल अनंत होता है।
स्नानपवित्र नदियों (गंगा, यमुना) में स्नान।पापों का शमन और शरीर की शुद्धि।
उपासनासूर्य देव को नियमित अर्घ्य देना।स्वास्थ्य लाभ और आत्मविश्वास में वृद्धि।

साल 2026 में दो बार लगेगा ब्रेक

वर्ष 2026 में खरमास का प्रभाव दो बार देखने को मिलेगा:

  1. प्रथम (मीन खरमास): 15 मार्च 2026 से 14 अप्रैल 2026 तक। (वर्तमान में प्रभावी)
  2. द्वितीय (धनु खरमास): 16 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक। यह अवधि मकर संक्रांति के दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ समाप्त होगी।

विशेषज्ञों की सलाह: कैसे करें प्लानिंग?

यदि आप आने वाले महीनों में किसी बड़े आयोजन की तैयारी कर रहे हैं, तो विशेषज्ञों के ये सुझाव आपके काम आ सकते हैं:

  • वैवाहिक योजना: विवाह या सगाई के लिए 14 अप्रैल के बाद के मुहूर्त ही चुनें। अप्रैल के उत्तरार्ध और मई में विवाह के कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।
  • रियल एस्टेट: यदि आप नए घर में शिफ्ट होना चाहते हैं, तो 15 अप्रैल के बाद की तिथि तय करें। तब तक आप घर की साज-सज्जा या पेंटिंग जैसे ‘रखरखाव’ के कार्य कर सकते हैं।
  • निवेश: शेयर बाजार या बड़े व्यापारिक समझौतों के लिए यह समय ‘प्रतीक्षा और अध्ययन’ का है। 14 अप्रैल के बाद नई शुरुआत करना ज्योतिषीय रूप से अधिक लाभदायक होगा।

भीतर झांकने का समय: खरमास का संदेश स्पष्ट है—संसार की भागदौड़ और बाहरी दिखावे से हटकर कुछ समय अपने भीतर की शांति के लिए निकालें। यह समय ‘सेलिब्रेशन’ का नहीं, बल्कि ‘मेडिटेशन’ का है। जैसे ही सूर्य अपनी उच्चता की ओर बढ़ेंगे (मेष राशि में), जीवन में खुशियों का संचार पुनः शुरू हो जाएगा। तब तक धैर्य और भक्ति ही श्रेष्ठ मार्ग हैं।

विवरणतारीख और समय
खरमास (मीन) प्रारंभ15 मार्च 2026 (आज से शुरू)
मीन संक्रांति समय14 मार्च की मध्यरात्रि (1:04 AM)
खरमास (मीन) समाप्त14 अप्रैल 2026 (सुबह 9:33 AM)
शुभ मुहूर्त पुनः प्रारंभ14 अप्रैल 2026 (दोपहर के बाद)
अगला खरमास (धनु)16 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027

क्या रहेगा पूरी तरह वर्जित?

  • 💍 विवाह एवं सगाई: शहनाइयां और रोका रस्म।
  • 🏠 गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नींव पूजन (भूमि पूजन)।
  • 🏢 नया व्यापार: दुकान या शोरूम का उद्घाटन।
  • ️☀ संस्कार कार्य: मुंडन, जनेऊ और नामकरण संस्कार।

क्या करना रहेगा शुभ?

  • 💧 पवित्र स्नान: गंगा या अन्य नदियों में स्नान।
  • 🙏 दान-पुण्य: अन्न, वस्त्र और गुड़ का दान।
  • सूर्य उपासना: प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना।
  • 🧘 मंत्र जाप: गायत्री मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ।

विशेष : 14 अप्रैल को ‘मेष संक्रांति’ के साथ ही सूर्य अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे सभी प्रकार के दोष समाप्त हो जाएंगे और मांगलिक कार्यों की शुभता लौट आएगी।

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