समस्तीपुर | 18 फरवरी, 2026

शहर की ऐतिहासिक समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार की शाम रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। माधुरी चौक से जोरदार नारों के साथ जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हुंकार: “रोजी-रोटी का आधार थी यह मिल”

जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करने के पश्चात पुनः माधुरी चौक पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की।

सभा को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक और मंच के वरीय सदस्य शंकर साह ने भावुक होते हुए कहा:

“अंग्रेजों के जमाने की यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों के भरण-पोषण का साधन थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन और आवागमन के बेहतर साधन उपलब्ध हैं। अगर सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इसे आसानी से शुरू कर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदला जा सकता है।”

राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन

आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साझा बयान में कहा कि अब समय आ गया है जब सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, छात्रों और किसानों को एक मंच पर आकर संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मिल चालू नहीं होती, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

1995 से बंद है समस्तीपुर की लाइफलाइन

विदित हो कि इस चीनी मिल की स्थापना 1917 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। दशकों तक यह मिल जिले की आर्थिक रीढ़ बनी रही, लेकिन 1995 में अचानक आई रुकावटों के कारण इसे बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक कई चुनाव हुए और कई वादे किए गए, लेकिन मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला।

सभा में ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम विनोद ,जीबछ पासवान, अरुण कुमार राय, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, संतोष कुमार निराला, डोमन राय, विश्वनाथ सिंह हजारी, रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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