मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता)। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत बंदरा और कटरा प्रखंड की लाइफलाइन माने जाने वाले रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) और सिसवाड़ा सियारी नदी (कटरा प्रखंड) पर पुल निर्माण की मांग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विकास के मुद्दों पर चर्चा के बीच, बंदरा और गायघाट क्षेत्र की जनता की दशकों पुरानी पीड़ा को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से रखा गया।

जनप्रतिनिधियों का साझा मोर्चा: सदन में घेरी सरकार

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और गायघाट की लोकप्रिय विधायक कोमल सिंह ने एक सशक्त और साझा रणनीति के तहत सदन में अपनी आवाज बुलंद की। विधान परिषद में श्री ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न संख्या-1/212/746 के माध्यम से सरकार से स्पष्ट पूछा कि क्या रतवारा-ढोली घाट पर आरसीसी पुल निर्माण हेतु ग्रामीणों के लंबे आंदोलन और जिलाधिकारी की अनुशंसा (पत्रांक-2486, दिनांक-02.08.2025) के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है?

वहीं, बिहार विधानसभा में विधायक कोमल सिंह ने नेवा डायरी संख्या-18/2/1933 के जरिए सरकार का ध्यान इस ओर खींचा कि पुल के अभाव में बंदरा के रतवारा और कटरा के सोनपुर पंचायत के सिसवाड़ा सियारी नदी के पास रहने वाले हजारों ग्रामीणों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है या मीलों का चक्कर लगाना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि ग्रामीणों के ‘आवागमन के अधिकार’ की रक्षा हो सके।

विधान सभा में कोमल सिंह  एवं (दायें )विधान परिषद में बंशीधर ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न के माध्‍यम से उठाया आम लोगों के लिए आवाज

मंत्री का जवाब: “प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर है पुल”

सदन में सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने लिखित और मौखिक उत्तर के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ने स्वीकार किया कि इन स्थलों पर पुल निर्माण की आवश्यकता को लेकर विभागीय सर्वे और स्थल निरीक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

उन्होंने सदन को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि उक्त पुल का निर्माण जिला संचालन समिति द्वारा चयनित सूची के क्रमांक 03 पर अंकित है।” मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि निधि की उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर इसे जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति देकर निर्माण कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) को नाव के सहारे  पार करते ग्रामीण

क्षेत्र में खुशी की लहर और आंदोलनकारियों की जीत

सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद बंदरा, मुरौल और कटरा प्रखंड के गांवों में उत्सव जैसा माहौल है। ‘रतवारा–ढोली घाट पुल बनाओ आंदोलन’ के संयोजक श्याम किशोर और अन्य आंदोलनकारियों ने इसे जनता के संघर्ष और जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति की जीत बताया है।

आंदोलन से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यह पुल केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का द्वार खोलेगा।

  • कनेक्टिविटी: इसके बनने से मुजफ्फरपुर का यह हिस्सा सीधे राजधानी पटना से सुगम सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा।
  • आर्थिक लाभ: किसानों की उपज मंडियों तक जल्दी पहुंचेगी।
  • रेलवे-हाईवे संपर्क: यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग और निकटतम रेलवे स्टेशनों से सीधा संपर्क स्थापित करेगा।

विकास की नई इबारत

विधायक कोमल सिंह के कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि वे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और जब तक पुल का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता, वे निरंतर सरकार के संपर्क में रहेंगी। ग्रामीणों को अब पूरी उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इस दिशा में कंक्रीट का काम शुरू हो जाएगा।

क्षेत्रवासियों ने अपनी विधायक और एमएलसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों ने उनके भरोसे का मान रखा है। इस पुल के बन जाने से बंदरा प्रखंड की भौगोलिक दूरी और मानसिक पीड़ा, दोनों कम होगी।

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