सकरा (मुजफ्फरपुर): सकरा प्रखंड के सकरा वाजिद पंचायत अंतर्गत जहांगीरपुर-सकरा हाई स्कूल मार्ग पर स्थित ‘विजन वैली हॉल’ में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाजसेवियों और शिक्षाविदों ने उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

शिक्षा की मशाल जलाने वाली महानायिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी राजेश राम ने सावित्रीबाई फुले के संघर्षमयी जीवन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई जब महिलाओं और दलितों के लिए शिक्षा के द्वार बंद थे। उनके द्वारा 1848 में पुणे में खोला गया पहला बालिका विद्यालय देश में सामाजिक क्रांति का आधार बना।”
नारी वादी आंदोलन और निस्वार्थ सेवा
वक्ता ममता कुमारी ने उनके नारीवादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि भारत के नारीवादी आंदोलन की जननी थीं। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और विधवा विवाह का समर्थन कर समाज को नई दिशा दी।”
वहीं संगीता कुमारी ने उनके सेवा भाव को याद करते हुए कहा, “जब पुणे में प्लेग महामारी फैली, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा की। दलितों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका पूरा जीवन समर्पित रहा, जो आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
क्विज प्रतियोगिता में दिखा बच्चों का उत्साह
जयंती के अवसर पर बच्चों के बीच एक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को सावित्रीबाई फुले के इतिहास और सामान्य ज्ञान से रूबरू कराया गया।

पुरस्कार वितरण: सफल प्रतिभागियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।
प्रोत्साहन: सभी बच्चों के बीच कॉपी, कलम, किताब और ‘गुड इंग्लिश’ की पुस्तकें वितरित की गईं।
प्रतिभागी छात्र: प्रतियोगिता में आदर्श कुमार, आयुष कुमार, अनामिका कुमारी, सोनी कुमारी, अल्पना कुमारी, प्रिंस कुमार, सत्यम कुमार, मानस कुमार, अजीत कुमार, दिव्य कुमारी, स्वाति कुमारी, संगम कुमारी, करण कुमार, मनीष कुमार, भोला कुमार, अमित कुमार, रुना कुमारी और रजनी कुमारी सहित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उपस्थिति: कार्यक्रम को सफल बनाने में ममता कुमारी, संगीता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी के अलावा राजू कुमार, विमलेश कुमार और दीपू कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई और अपने विचारों से जनसमूह को प्रेरित किया।







