सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की मनमानी और अमानवीयता की इंतहा; धूप में बेहोश हुईं महिलाएं, कर्मचारी संजीत कुमार की गुंडागर्दी से आक्रोश
रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’
सकरा (मुजफ्फरपुर): मुजफ्फरपुर के सकरा क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा है। सुजावलपुर चौक स्थित सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की घोर लापरवाही ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। मंगलवार को इस एजेंसी के कारण सैकड़ों घरों में चूल्हा नहीं जल सका। छोटे बच्चे और बुजुर्ग चूरा-दालबूट खाकर दिन काटने को मजबूर हैं। एजेंसी पर होम डिलीवरी सेवा पूरी तरह ध्वस्त है और उपभोक्ता 20-20 दिनों से बुकिंग कराकर दर-दर भटक रहे हैं।

भीषण गर्मी में अमानवीयता: दो महिलाएं हुईं बेहोश
मंगलवार का नजारा हृदय विदारक था। गैस की किल्लत ऐसी कि 80 वर्ष की बुजुर्ग महिलाएं सुबह 5 बजे से ही कतार में खड़ी थीं। दोपहर 3 बजे तक चिलचिलाती धूप में डटे रहने के बाद भी जब गैस नहीं मिली, तो उपभोक्ताओं का सब्र जवाब दे गया। प्यास और गर्मी के कारण दो महिलाएं कतार में ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, लेकिन पत्थरदिल एजेंसी संचालक ने शटर तक नहीं उठाया।

रिकॉर्ड में हेराफेरी का बड़ा खेल: 47 दिनों से गैस मिलने का इंतज़ार
सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की घोर लापरवाही और डेटा में जानबूझकर की जा रही गड़बड़ी का सबसे बड़ा प्रमाण उपभोक्ता संख्या- 7594776641 के मामले में सामने आया है। इस उपभोक्ता ने पिछली बार 5 फरवरी को गैस रिफिल ली थी, जिसकी स्पष्ट प्रविष्टि (Entry) उनके पासबुक पर दर्ज है। नियमानुसार पर्याप्त समय बीत जाने के बाद नई बुकिंग होनी चाहिए, लेकिन एजेंसी के सिस्टम में जानबूझकर 11 फरवरी ( कभी 14 फरवरी) को गैस का उठाव दिखाया जा रहा है। इस जानबूझकर की गई हेराफेरी के कारण पिछले 47 दिनों से उपभोक्ता का नया सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता का आरोप है कि एजेंसी पैनिक क्रिएट करने और अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड के साथ यह खिलवाड़ कर रही है, जिससे उनके घर में भोजन पकाने का संकट खड़ा हो गया है।
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पीड़ित उपभोक्ताओं की जुबानी: ‘गैस नहीं, जिल्लत मिल रही है‘, पीड़ित उपभोक्ताओं की जुबानी (मौके से सीधा बयान)
एजेंसी पर उमड़ी भीड़ और व्यवस्था की पोल खोलते हुए उपभोक्ताओं ने पत्रकार के सामने अपना दर्द बयां किया। दिलीप कुमार चंदू (महद्दीपुर) ने बताया, “भोर के 3 बजे से लाइन में लगे हैं, कोई सही समय बताने वाला नहीं है कि गैस मिलेगी या नहीं।” वहीं मझौलिया से आए मोहम्मद इम्तियाज आलम ने कहा, “6-7 घंटे लाइन में लगने के बाद भी गैस नसीब नहीं हो रही, 45 दिन बीतने पर भी खाली हाथ हैं।” सादुल्लापुर चंदनपट्टी के मोहम्मद नौशाद ने व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा, “सुबह 5 बजे से खड़े हैं, तीन महीने से गैस नहीं मिल रही, बस आज-कल दौड़ाया जा रहा है।” चम्पापुर अगरैल की सुधा देवी ने तंज कसते हुए कहा, “महिलाओं को सुविधा देने के नाम पर अब इतनी दिक्कत दी जा रही है कि गाड़ी भाड़ा लगा कर आने पर भी काम नहीं हो रहा।” सबसे मार्मिक स्थिति नरसिंहपुर की 80 वर्षीय बुजुर्ग पचास कुमारी देवी की दिखी, जिन्होंने रुआंसे मन से कहा, “रिजर्व गाड़ी करके गैस लेने आए हैं, 10 बजे से खड़े हैं पर गेट खोलते ही फिर बंद कर दिया जाता है; कार्तिक महीने के बाद से अब तक गैस नहीं मिली है।”

कर्मचारी संजीत कुमार की ‘गुंडागर्दी‘ और कथित धौंस
एजेंसी की कार्यसंस्कृति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने बताया कि मुख्य शटर बंद कर बगल की खिड़की से तानाशाही चलाई जा रही है। खिड़की पर खड़ा संजीत कुमार नामक कर्मचारी उपभोक्ताओं से ‘रैयत’ (गुलाम) जैसा व्यवहार कर रहा है। वह खुद को इंडेन का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों पर धौंस जमाता है। जांच में पता चला कि वह मूल रूप से डिहुली स्थित मंशा गैस एजेंसी का कर्मी है, जो यहाँ आकर उपभोक्ताओं को प्रताड़ित कर रहा है। वह सरेआम लोगों को तंज कसते हुए एक स्थानीय सोशल मिडिया का नाम लेकर (न्यूज भारत टीवी नहीं) चुनौती दे रहा था कि “किसी मीडिया को बुला लो, काम नहीं होगा।”

NH-28 पर मंडरा रहा है विधि-व्यवस्था का संकट
एजेंसी एनएच-28 के बिल्कुल सटीक स्थित है। कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार से गुस्साए लोग सड़क जाम करने और उग्र प्रदर्शन की तैयारी में थे। गनीमत रही कि उसी समय सकरा थाना की गश्ती गाड़ी पहुँच गई, जिससे लोग थोड़े शांत हुए। यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यहाँ कभी भी बड़ा जनाक्रोश भड़क सकता है और हाईवे जाम होने से विधि-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
एक ही क्षेत्र, दो अलग तस्वीरें
हैरानी की बात यह है कि इसी एजेंसी से मात्र पौन किलोमीटर दूर माँ लक्ष्मी एचपी गैस (सरमस्तपुर) में स्थिति बिल्कुल सामान्य है। वहां उपभोक्ताओं को कुर्सी पर बैठाकर सम्मान के साथ गैस दी जा रही है। वहां के कर्मी कुणाल कुमार ने बताया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और बुकिंग के आधार पर 45 दिनों के भीतर रिफिल आसानी से दी जा रही है।

जब पड़ोस की एजेंसी बेहतर सेवा दे रही है, तो सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी में ‘सर्वर डाउन’ और ‘स्टॉक खत्म’ का ड्रामा क्यों? क्या विभाग के अधिकारी इस मिलीभगत और रिकॉर्ड की हेराफेरी की जांच करेंगे, या गरीब जनता यूँ ही जिल्लत सहती रहेगी?







