सकरा (मुजफ्फरपुर)। मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत केशोपुर स्थित मिथिला आनंद जागरण धाम के पावन प्रांगण में अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की जयंती समारोह का अत्यंत गरिमामय और भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर सामाजिक चेतना, समानता और शोषित-वंचित समाज के अधिकारों के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्षों को याद किया गया। समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध जनों और भारी संख्या में आए ग्रामीणों ने उन्हें ‘बिहार के लेनिन’ की उपाधि से विभूषित करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प दोहराया।

वैचारिक क्रांति के जनक को भावभीनी श्रद्धांजलि
समारोह का विधिवत शुभारंभ बाबू जगदेव प्रसाद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान पूरा परिसर “बाबू जगदेव प्रसाद अमर रहें” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जगदेव बाबू महज एक नेता नहीं, बल्कि एक युगपुरुष और वैचारिक क्रांति के जनक थे। उन्होंने उस दौर में दबे-कुचले वर्गों को सत्ता और सम्मान में हिस्सेदारी दिलाने की बात की, जब पिछड़ों और वंचितों की आवाज को दबाया जाता था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
‘सौ में नब्बे शोषित हैं’ के नारे की गूँज
विद्वान वक्ताओं ने वैचारिक विमर्श के दौरान जोर दिया कि जगदेव बाबू किसी जाति विशेष के नेता नहीं थे। वे हर उस व्यक्ति की आवाज थे जो व्यवस्था द्वारा शोषित था। उनके द्वारा दिया गया ऐतिहासिक नारा— “सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है” —आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई का सबसे बड़ा घोषणापत्र बना हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि उनके द्वारा जगाई गई सामाजिक न्याय की अलख आज भी करोड़ों लोगों का मार्ग प्रशस्त कर रही है और वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

सत्ता और संसाधनों में भागीदारी पर प्रमुख संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्राम केशोपुर के मुखिया सह मुखिया संघ के अध्यक्ष दिनेश पुष्पम ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद का बलिदान हमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकार पहुँचाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने पंचायत स्तर पर भी उनके सिद्धांतों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सकरा जदयू प्रखंड अध्यक्ष साधु शरण कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि बाबू जगदेव जी ने सत्ता और संसाधनों में पिछड़ों और दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में संसाधनों का समान वितरण नहीं होगा, तब तक जगदेव बाबू का सपना अधूरा रहेगा। वहीं, ऑल इंडिया कांग्रेस सोशल ऑर्गनाइजेशन के जिला प्रभारी अनिल मल्लिक ने युवा पीढ़ी से संवाद करते हुए कहा कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया के दौर में जगदेव बाबू के साहित्य और उनके संघर्षों को गहराई से पढ़ना चाहिए ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें।

महिलाओं की भागीदारी और गणमान्य अतिथियों की गरिमा
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य अनिल कुशवाहा और शशि गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए। ऑल इंडिया कांग्रेस सोशल ऑर्गनाइजेशन की महिला जिला अध्यक्ष ममता जायसवाल ने महिलाओं के दृष्टिकोण से जगदेव बाबू के विचारों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि शोषित समाज का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित न हो। कार्यक्रम का सफल संचालन संतोष कुशवाहा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से दर्शकों में उत्साह भरे रखा।
समरसता और संकल्प के साथ समापन

आयोजन के अंत में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें समाज से जातिगत भेदभाव मिटाने और एक समतामूलक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान और शहीद जगदेव बाबू के सम्मान में नारों के साथ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय प्रबुद्ध जनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया। यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह था, बल्कि सामाजिक न्याय की विरासत को आगे बढ़ाने का एक जीवंत संकल्प पत्र भी साबित हुआ।







