एस.एस.कुमार पंकज’  

सकरा (मुजफ्फरपुर): राजनीति की बिसात पर जब चुनाव की गोटियां बिछाई जाती हैं, तो विकास के वादे शहद की तरह टपकते हैं। जनता को सुनहरे ख्वाब दिखाए जाते हैं और रातों-रात सड़कों का जाल बिछाने का दावा किया जाता है। लेकिन चुनाव खत्म होते ही जब इन वादों की परतें उधड़ती हैं, तो अंदर से भ्रष्टाचार का वो घिनौना चेहरा निकलता है जो जनता के खून-पसीने की कमाई को लील चुका होता है। सकरा विधानसभा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण सड़क आज इसी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

चुनावी हड़बड़ीमें गड़बड़ीका खेल: बेईमानों की नजर लगी

NH-28 को ढोली रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाली यह सड़क, जो सुजावलपुर से नीमतल्ला रोड तक जाती है, आज एक ‘धोखे’ का पर्याय बन चुकी है। विधानसभा चुनाव के समय इस सड़क को आनन-फानन में बनाया गया था। उस वक्त सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या छह के लोगों को लगा था कि अब उनके दिन बहुरेंगे। यह सड़क इस वार्ड के पूर्वी भाग की जीवनरेखा है, लेकिन आज यही रेखा उनके पैरों में छाले डाल रही है।

आलम यह है कि मात्र छह महीने के भीतर ही यह सड़क ‘छलनी’ हो गई है। जिस पी.सी.सी. सड़क को सालों-साल चलना चाहिए था, वह छह महीने में ही भ्रष्टाचार की गवाही देने लगी है। निर्माण के पहले दिन से ही स्थानीय लोगों ने इसके घटिया मैटेरियल पर सवाल उठाए थे। लोगों ने विरोध किया था कि सीमेंट, बालू और गिट्टी का जो मिश्रण इस्तेमाल हो रहा है, उसमें ईमानदारी कम और बेईमानी ज्यादा है। आज वही शंका सच साबित हो रही है।

मॉर्निंग वॉक” नहीं, ये “जख्मों का सफर” है

इस सड़क की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जगह-जगह से गिट्टियां उखड़कर बाहर आ गई हैं। पैदल चलना किसी सजा से कम नहीं है। इस सड़क की दुर्दशा का मंजर रूह कंपा देने वाला है। जगह-जगह से गिट्टियां उखड़कर ऐसे बाहर आ गई हैं जैसे किसी ने जान-बूझकर राहगीरों के लिए कांटे बिछा दिए हों। खाली पैर चलना तो दूर, चप्पल पहनकर चलने वालों का भी संतुलन बिगड़ रहा है।

स्थानीय बुजुर्ग और डायबिटीज के मरीज, जिन्हें डॉक्टरों ने खाली पैर टहलने की सलाह दी है, उनके लिए यह सड़क अब एक दुःस्वप्न बन गई है। सड़क पर बिखरी नुकीली गिट्टियां पैरों को लहूलुहान कर रही हैं। लोग बताते हैं कि अब उन्होंने इस सड़क पर मॉर्निंग वॉक करना ही छोड़ दिया है। क्या विकास की परिभाषा यही है कि जनता को अपने घर के सामने टहलने के लिए भी तरसना पड़े?


भ्रष्टाचार का काला गणित: विभाग और संवेदक की “जुगलबंदी”

यह सड़क मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना के अंतर्गत बनाई गई है (योजना संख्या: L061-T02 (VR38))। सरकारी दस्तावेजों में इसके संवेदक अजय कुमार (कन्हौली विशुनदत्त, मुजफ्फरपुर) हैं। निर्माण की जिम्मेदारी ग्रामीण कार्य विभाग, कार्यप्रमंडल मुजफ्फरपुर पूर्वी-1 के कार्यपालक अभियंता की थी।

आज सकरा की जनता इन ‘साहबों’ से तीखे सवाल पूछ रही है:

  1. साहब, क्या आप धृतराष्ट्रबन गए थे? जब संवेदक खुलेआम मिट्टी और रेत का खेल खेल रहा था, तब आपकी तकनीकी जांच की टीम कहाँ सो रही थी?
  2. लूट की छूट क्यों? पूरे जिले में शायद ही ऐसी कोई सड़क हो जो बनने के साथ ही उजड़ने लगे। क्या अभियंता महोदय को इस खुली लूट की भनक तक नहीं लगी?
  3. भुगतान का आधार क्या था? जब सड़क की गुणवत्ता शून्य थी, तो संवेदक की फाइलों पर हस्ताक्षर कैसे हुए? यह जनता के टैक्स के पैसे की डकैती है।

भ्रष्टाचार का गणित: कौन है जिम्मेदार?

कागजों पर इस सड़क का संवेदक अजय कुमार (कन्हौली विशुनदत्त, मुजफ्फरपुर) है और इसके अनुरक्षण (Maintenance) की तारीख जून 2026 तक है। इसकी कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्यप्रमंडल मुजफ्फरपुर पूर्वी-1 है।

यह साफ तौर पर अभियंता और संवेदक के बीच के अपवित्र गठबंधन का नतीजा है, जिसने जनता के पैसों को अपनी जेबों में भर लिया और सड़क के नाम पर सिर्फ धूल और पत्थर छोड़ दिए।

आर.सी. कॉलेज सकरा के मुख्‍य द्वार के सामने सड़क पर उखड़ चुकी गिट्टी का विहंगम दृश्‍य

महत्वपूर्ण संस्थानों का गला घोंटती बदहाली

यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि सकरा की अर्थव्यवस्था और शिक्षा की धड़कन है। इस मार्ग से हर दिन हजारों रेल यात्री ढोली स्टेशन जाते हैं। इसके अलावा आर.सी. कॉलेज, सुजावलपुर मार्केट, सब्जी मंडी, मछली मंडी और दर्जनों शिक्षण संस्थान इसी रास्ते पर निर्भर हैं। छात्रों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, किसानों को अपनी सब्जी मंडी ले जाने में हिचकोले खाने पड़ते हैं और बीमारों को अस्पताल ले जाना एक चुनौती बन गया है।

आर.सी. कॉलेज सकरा के मुख्‍य द्वार के सामने सड़क पर उखड़ चुकी गिट्टी का दृश्‍य

सत्ता के गलियारों में ‘सफेद चश्मा’ के साथ नेताओं की खामोशी और ठेकेदारों की मनमानी ने सकरा के विकास को ‘आईसीयू’ में पहुंचा दिया है।”

सबसे दुखद पहलू तो यह है कि सत्ताधारी दल के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इसी सड़क से प्रतिदिन गुजरते हैं। क्या उनकी आंखों पर सत्ता के अहंकार का ऐसा चश्मा चढ़ा है कि उन्हें उखड़ी हुई गिट्टियां और गड्ढे दिखाई नहीं देते? अगर ये नेता सजग होते और सरकार की योजनाओं को ईमानदारी से धरातल पर उतारने के लिए तत्पर होते, तो आज न सकरा की जनता को यह कष्ट भोगना पड़ता और न ही विधायक जी को ऐसे अवसर का सामना करना पड़ता।


विधायक जी, अब सिर्फ ब्लैकलिस्टसे काम नहीं चलेगा, अब नजीरपेश करने का वक्त है!

सकरा की जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है। विधायक जी, आपको आना होगा और अपनी आंखों से इस लूट के स्मारक को देखना होगा। इस भ्रष्ट संवेदक पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो दूसरों के लिए नजीर बने।

विधायक जी, अब वक्त है कि आप ‘माननीय’ होने का धर्म निभाएं। सिर्फ किसी फर्म को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर देने से कुछ नहीं होगा। ये भ्रष्ट संवेदक इतने शातिर हैं कि कल अपने परिवार के किसी सदस्य या नई फर्म के नाम पर दोबारा टेंडर ले लेंगे और फिर से सरकार की आंखों में धूल झोंकेंगे।

जनता की स्पष्ट मांगें:

  • FIR और गिरफ्तारी: संवेदक अजय कुमार और संबंधित लापरवाह अभियंताओं पर सरकारी धन के गबन का आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
  • संपत्ति की कुर्की: सड़क की मरम्मत का एक-एक पैसा इस भ्रष्ट संवेदक की निजी संपत्ति को बेचकर वसूला जाए।
  • गारंटी और अनुरक्षण: चूंकि अनुरक्षण की तारीख जून 2026 तक है, अतः इसे तुरंत बिना किसी अतिरिक्त सरकारी खर्च के नए सिरे से बनवाया जाए।

विधायक जी, सकरा के वार्ड नंबर छह की इस सड़क की चीखें शायद आपके दफ्तर तक न पहुंचती हों, लेकिन जनता के दिलों में पल रहा आक्रोश आप तक जरूर पहुंचेगा। जनता की याददाश्त बहुत तेज होती है। अगर आज आपने इस भ्रष्टाचार के गठजोड़ को नहीं तोड़ा, तो कल यही ‘छलनी सड़क’ आपके राजनीतिक भविष्य का रास्ता भी रोक सकती है।

आइये और देखिये इस सड़क के आंसू… और साबित कीजिये कि आप भ्रष्टाचारियों के साथ नहीं, सकरा की जनता के साथ खड़े हैं।

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