“रील पर सनातनी, रीयल में पश्चिमी दासता? आज ‘Happy New Year’ नहीं, ‘नव संवत्सर’ के उद्घोष का दिन है!”
केक काटने वाली ‘मॉर्डन‘ संस्कृति बनाम कलश स्थापना की सनातन परंपरा के आत्म-चिंतन का समय रिर्पोट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’ 31 दिसंबर की आधी रात को कड़ाके की ठंड में, जब प्रकृति सुप्त अवस्था में हो और भारतीय जनमानस रजाई में दुबका हो, तब केक काटकर शोर-शराबे और आतिशबाजी के बीच ‘नया साल‘ मनाना वास्तव … Continue reading “रील पर सनातनी, रीयल में पश्चिमी दासता? आज ‘Happy New Year’ नहीं, ‘नव संवत्सर’ के उद्घोष का दिन है!”
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed