समस्तीपुर | 12 अप्रैल, 2026 दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ एक तरफ प्रगति के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ महाविनाशकारी महायुद्ध की जलती हुई आग। सामरिक शक्ति के प्रदर्शन और वर्चस्व की इस अंधी दौड़ में मानवता कराह रही है। इसी वैश्विक संकट के बीच समस्तीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल (बिहार) के प्रतिनिधि सुरेन्द्र कुमार ने एक अपील जारी कर दुनिया के वर्तमान हालातों और सत्ताधीशों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

बाजारवाद और निरंकुश सत्ता का घातक गठजोड़
सुरेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में वैश्विक राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया की लोकतांत्रिक सरकारें ‘बाजारवादी मानसिकता वाले स्वार्थी नीति-निर्धारकों‘ की कठपुतली बन चुकी हैं। उन्होंने इसके कारण पर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता जब जनसेवा के बजाय व्यापारिक मुनाफे और साम्राज्यवादी विस्तार की सोच से ग्रस्त हो जाती है, तो वह ‘निरंकुश’ हो जाती है। आज की सरकारें हथियारों की नुमाइश को ही राष्ट्रवाद समझ बैठी हैं, जबकि हकीकत में यह महाविनाश का आमंत्रण है।
महामारी पर जीत तो तानाशाहों पर क्यों नहीं?
सुरेन्द्र कुमार ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विज्ञान और मानव संकल्प ने पोलियो, चेचक, हैजा और हाल ही में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो फिर हम इन ‘बेकाबू तानाशाहों’ और युद्धोन्मादी शासकों से मुक्ति पाने में अक्षम क्यों हैं? सुरेन्द्र कुमार के अनुसार, तानाशाही किसी वायरस से कम खतरनाक नहीं है, जो पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रही है।
युवा ऊर्जा: सृजन या विध्वंस?
खबर का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू युवाओं और बच्चों की अनदेखी है। सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी युवाओं की है, लेकिन उनकी आकांक्षाएं किसी भी सरकार के एजेंडे में नहीं हैं।
- रोजगार बनाम हथियार: सरकारों ने कभी यह नहीं पूछा कि नौजवानों को किस तरह के रोजगार की जरूरत है। उनकी असीम ऊर्जा को नवीनतम तकनीक और सृजन में लगाने के बजाय युद्ध की भट्टी में झोंका जा रहा है।
- शोषित बचपन: जब तक दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ नहीं होगी, तब तक हम बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को समाप्त नहीं कर पाएंगे।
वैकल्पिक मार्ग: शांति, सद्भाव और गांधीवाद
सुरेन्द्र कुमार ने विश्व के तमाम समतावादी, समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोगों से अपील की है कि वे युद्ध के उन्माद के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने जोर दिया कि असली ‘सामरिक प्रदर्शन’ हथियारों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साधन जुटाना होना चाहिए। युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की संभावनाएं तलाशना ही वह प्रार्थना है जो विश्व को महाविनाश से बचा सकती है।



