समस्तीपुर | 9 अप्रैल, 2026

स्थानीय बलिराम भगत (बी.आर.बी.) महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन: जीवन, दर्शन और साहित्य’ विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

ज्ञानानुसंधान के प्रतीक थे महापंडित: प्राचार्य

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो० जगदीश प्रसाद वैश्यंत्री ने राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व को विलक्षण बताते हुए कहा कि वे ज्ञान और अनुसंधान के साक्षात् प्रतीक थे। प्राचार्य ने उनके जीवन-दर्शन पर जोर देते हुए कहा, “महापंडित राहुल सांकृत्यायन का संपूर्ण जीवन-दर्शन हमें निरंतर गतिशीलता और जिज्ञासा का संदेश देता है। उनका ‘घुमक्कड़ी शास्त्र’ मात्र पर्यटन नहीं था, बल्कि ज्ञान की खोज और मानवीय संस्कृति को समझने का एक अद्वितीय माध्यम था। उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है और युवा पीढ़ी को ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित करता है।”

बहुआयामी व्यक्तित्व पर चर्चा

संगोष्ठी के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी महापंडित राहुल सांकृत्यायन के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया। यह बताया गया कि उनके ‘घुमक्कड़ी शास्त्र’ और अनुवाद कार्यों के माध्यम से न केवल हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ, बल्कि पाठकों को विभिन्न देशों, समाजों और भौगोलिक परिस्थितियों को जानने-समझने का एक नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। उन्हें हिंदी साहित्य के विकास में एक मील का पत्थर माना गया।

प्रस्तुति और उपस्थिति

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और अतिथियों के स्वागत से हुई। संगोष्ठी में स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने राहुल सांकृत्यायन के साहित्य और दर्शन पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इन छात्रों में अभिषेक, विशाल, मृत्युञ्जय, रितु, नेहा, ज्योति, उन्नति, पूजा, प्रियंका, काजल, मुस्कान, सोनम, सरस्वती, सोनी, रूपा, सपना, सीता और संगीता शामिल थीं।

शिक्षकों और कर्मचारियों का योगदान

कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी में प्रो० विकास कुमार, प्रो० शकील अहमद, डॉ० स्वीटी, डॉ० सीरीन, डॉ० शबनम, डॉ० विंध्याचल साह, एच० एन० शुक्ला, डॉ० बागीरथ, उलाष्टी, ज्योति प्रसाद, डॉ० नरेश और डॉ० ममता सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे। उन्होंने महापंडित राहुल सांकृत्यायन के योगदान पर अपने विचार साझा किए।

धन्यवाद ज्ञापन

संगोष्ठी के अंत में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय प्रसाद ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी के सहयोग की सराहना की।

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