ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

रिपोर्ट : एस. एस. कुमार पंकज

आजकल हर गली-नुक्कड़ पर ‘इंटरनेशनल’ और ‘पब्लिक स्कूल’ के बोर्ड लटके मिल जाएंगे। ऊंची इमारतें, रंग-बिरंगे झूले और एयर-कंडीशन्ड क्लासरूम का लालच देकर अभिभावकों को फंसाया जाता है। सबसे बड़ा हथियार होता है— सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) या सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”) होने का दावा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य संवारने का दावा करने वाले इन स्कूलों में से अधिकांश का नाता सीबीएसई बोर्ड से दूर-दूर तक नहीं है? यह शिक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा के नाम पर खुली अराजकता और ठगी का कारोबार है।


शब्द का खेल: सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) बनाम सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”)

अभिभावकों को ठगने के लिए निजी स्कूल एक बहुत ही शातिर शब्दावली का प्रयोग करते हैं। वे विज्ञापन में लिखते हैं— “CBSE पैटर्न पर आधारित”

  • हकीकत: ‘पैटर्न’ का मतलब सिर्फ इतना है कि वे एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें पढ़ा रहे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त है।
  • धोखा: मान्यता न होने के बावजूद ये स्कूल सीबीएसई के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूलते हैं, जबकि कानूनी तौर पर उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

कैसे चलता है इन स्कूलों का गोरखधंधा‘?

आपके मन में सवाल होगा कि अगर स्कूल की मान्यता नहीं है, तो बच्चे 10वीं और 12वीं की परीक्षा कैसे देते हैं? यहीं से शुरू होता है सेटिंगऔर बच्चा जमा करने का खेल।

  • बच्चा कलेक्शन सेंटर: ये छोटे अनरजिस्टर्ड स्कूल केवल 8वीं या 9वीं कक्षा तक बच्चों को ‘जमा’ करते हैं।
  • फॉर्म की खरीद-फरोख्त: जब बच्चा बोर्ड परीक्षा के नजदीक पहुंचता है, तो ये स्कूल किसी अन्य शहर या दूरदराज के ‘मान्यता प्राप्त’ (Affiliated) स्कूल से सांठगांठ करते हैं।
  • फर्जी उपस्थिति: आपके बच्चे का नामांकन उस मान्यता प्राप्त स्कूल में ‘डमी’ छात्र के रूप में दिखा दिया जाता है। बच्चा परीक्षा किसी और स्कूल के नाम पर देता है, जिसे उसने कभी देखा तक नहीं होता। इस ‘सेटिंग’ के बदले मोटा कमीशन एक स्कूल से दूसरे स्कूल को जाता है।

यूडायस (UDISE) कोड: स्कूल की कुंडली खंगालने का अचूक हथियार

शिक्षा व्यवस्था की इस अराजकता से बचने के लिए भारत सरकार ने UDISE (Unified District Information System for Education) पोर्टल बनाया है। यह हर असली स्कूल का ‘आधार कार्ड’ है।

कैसे करें जांच?

  1. UDISE Code की मांग करें: स्कूल प्रशासन से उनका 11 अंकों का यूडायस कोड मांगें।
  2. ऑनलाइन वेरिफिकेशन: UDISE+ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Know Your School’ सेक्शन में यह कोड डालें।
  3. क्या दिखेगा सच? * स्कूल किस कक्षा तक मान्यता प्राप्त है?
    • शिक्षक कितने हैं और वे प्रशिक्षित (Trained) हैं या नहीं?
    • स्कूल के पास अपनी जमीन है या किराए की बिल्डिंग?
    • शौचालय, बिजली और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं कागजों पर हैं या असलियत में?

चेतावनी: यदि कोई स्कूल यूडायस कोड देने से कतराए या पोर्टल पर उसकी जानकारी संदिग्ध लगे, तो समझ लीजिए कि वहां आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं है।


सीबीएसई (CBSE) के कड़े नियम बनाम निजी स्कूलों की बदहाली

सीबीएसई बोर्ड किसी स्कूल को मान्यता देने से पहले कड़े मानकों की सूची जारी करता है, लेकिन ठगी करने वाले स्कूल इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं:

मानक (Norms)सीबीएसई का प्रावधान‘फर्जी’ स्कूलों की हकीकत
शिक्षककेवल B.Ed/CTET पास प्रशिक्षित शिक्षक।कम वेतन पर रखे गए अनट्रेन्ड युवा, जिन्हें खुद विषय का ज्ञान नहीं।
खेल मैदानस्कूल परिसर में एक निश्चित क्षेत्रफल का खेल मैदान अनिवार्य।छत पर या छोटी गली में खेलकूद का दिखावा।
वेतनशिक्षकों को सरकारी स्केल के अनुसार बैंक ट्रांसफर द्वारा वेतन।नकद (Cash) में बहुत कम वेतन, रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर।
लाइब्रेरी/लैबआधुनिक लैब और हजारों किताबों वाली लाइब्रेरी।सिर्फ नाम की अलमारी, जिसमें पुरानी धूल फांकती किताबें।

अनट्रेन्ड टीचर: शिक्षा की नींव पर चोट

इन प्राइवेट स्कूलों में सस्ते श्रम का बोलबाला है। अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों को मोटी सैलरी न देनी पड़े, इसलिए ये स्कूल स्नातक (Graduate) पास युवाओं को 3-7 हजार रुपये में रख लेते हैं।

  • इन शिक्षकों के पास पढ़ाने का कोई औपचारिक प्रशिक्षण (B.Ed/D.El.Ed) नहीं होता।
  • नतीजतन, बच्चों की नींव कमजोर रह जाती है और वे केवल रट्टा मारने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ते हैं।

आरटीई (RTE) पर बगले झांकतेस्कूल संचालक

शिक्षा का अधिकार कानून (Right to Education – RTE) के तहत हर निजी स्कूल को 25% सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं।

  • अराजकता: जब भी कोई अभिभावक आरटीई के तहत नामांकन की बात करता है, तो ये स्कूल टालमटोल करने लगते हैं।
  • कारण: क्योंकि ये स्कूल खुद को कागजों पर ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ बता देते हैं या अपनी मान्यता को छिपा लेते हैं ताकि उन्हें मुफ्त शिक्षा न देनी पड़े।

अभिभावक क्या करें? (सुरक्षा चेकलिस्ट)

नामांकन से पहले केवल स्कूल की पेंटिंग और यूनिफॉर्म न देखें, बल्कि ये सवाल पूछें:

  1. Affiliation Letter: स्कूल से सीबीएसई का एफिलिएशन लेटर मांगें और उस पर लिखे Affiliation Number को CBSE SARAS पोर्टल पर चेक करें।
  2. Transfer Certificate (TC): पूछें कि क्या स्कूल डिजिटल टीसी जारी करने के लिए अधिकृत है?
  3. शिक्षक प्रोफाइल: स्कूल से शिक्षकों की योग्यता का ब्योरा मांगें।

ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल

शिक्षा माफियाओं का सबसे बड़ा और शातिर हथियार है— ट्रस्ट (Trust) या सोसायटीका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट। जब कोई जागरूक अभिभावक स्कूल की मान्यता (Affiliation) के बारे में पूछता है, तो स्कूल संचालक तुरंत दीवार पर टंगा एक फ्रेम किया हुआ सरकारी कागज दिखा देते हैं, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा होता है: पंजीकृत (Registered) – भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा।” अभिभावक इसे ही स्कूल की असल मान्यता समझकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यहीं सबसे बड़ा ट्रस्ट गेम शुरू होता है।

क्या है ट्रस्ट और मान्यता का अंतर?

सच्चाई यह है कि किसी भी चैरिटेबल ट्रस्ट या एनजीओ (NGO) का पंजीकरण कराना बेहद आसान प्रक्रिया है। यह पंजीकरण केवल यह बताता है कि ‘अमुक संस्था’ एक कानूनी इकाई है जो सामाजिक कार्य कर सकती है। लेकिन, ट्रस्ट का निबंधन होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उस संस्था को स्कूल चलाने या सीबीएसई (CBSE) बोर्ड से जुड़ने की अनुमति मिल गई है।

सीबीएसई बोर्ड की मान्यता प्राप्त करने के लिए स्कूल को ‘ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन’ के अलावा कई कठिन चरणों से गुजरना पड़ता है, जैसे:

  1. NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र): संबंधित राज्य सरकार से शिक्षा विभाग की अनुमति।
  2. भूमि और भवन मानक: स्कूल के नाम पर कम से कम 1.5 से 2 एकड़ जमीन का मालिकाना हक या लंबी लीज।
  3. एफिलिएशन कोड: सीबीएसई द्वारा जारी एक विशिष्ट 7 अंकों का नंबर।

कैसे होता है कागजी घालमेल?

ये फर्जी स्कूल संचालक ट्रस्ट के नाम पर बैंक खाता खोलते हैं और रसीद पर ‘सीबीएसई पैटर्न’ छाप देते हैं। वे अक्सर तर्क देते हैं कि हमारी संस्था (Trust) दिल्ली से रजिस्टर्ड है, इसलिए हमें सीबीएसई की जरूरत नहीं है।” यह सरासर झूठ है। सीबीएसई एक परीक्षा बोर्ड है, न कि कोई ट्रस्ट।

अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये स्कूल अपनी वैन(गाड़ी), रसीद बुक और विज्ञापनों पर ‘ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर’ ऐसे लिखते हैं जैसे वह सीबीएसई का मान्यता नंबर हो। कई बार तो ये स्कूल एक ही ट्रस्ट के नाम पर शहर में 4-5 शाखाएं खोल लेते हैं, जबकि मान्यता केवल एक मुख्य शाखा के पास होती है। बाकी शाखाएं केवल ‘फीडर सेंटर’ या ‘बच्चा जमा केंद्र’ के रूप में अवैध रूप से चलती रहती हैं।

अभिभावक कैसे पहचानें यह जाल?

जब आप स्कूल जाएं, तो सोसायटी रजिस्ट्रेशन (Society Registration) के बजाय स्कूल एफिलिएशन लेटर (Affiliation Letter) की मांग करें। ध्यान रहे:

  • यदि स्कूल कहता है कि “अभी प्रोसेस में है” या “ट्रस्ट के नाम पर चल रहा है,” तो सावधान हो जाएं।
  • ट्रस्ट का निबंधन केवल संस्था की वैधता है, शिक्षा की गुणवत्ता या बोर्ड की गारंटी नहीं।
  • असली सीबीएसई स्कूल के पास एक Affiliation Number और एक School Code दोनों होते हैं।

इन स्कूलों का यह ‘गोरखधंधा’ तब तक फलता-फूलता रहेगा जब तक अभिभावक ‘ट्रस्ट के निबंधन’ और ‘बोर्ड की मान्यता’ के बीच के इस बारीक लेकिन घातक अंतर को नहीं समझेंगे। शिक्षा के इन सौदागरों के लिए बच्चा केवल एक ‘रोल नंबर’ है जिससे वे साल भर मोटी फीस वसूलते हैं, जबकि अंत में छात्र के हाथ में केवल एक ‘अमान्य’ या ‘सेटिंग’ वाला सर्टिफिकेट थमा दिया जाता है।


भ्रष्ट स्कूलों पर सर्जिकल स्ट्राइक‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

अगर आपको पता चलता है कि आपके बच्चे का स्कूल फर्जी सीबीएसई (CBSE) दावों, यूडायस (UDISE) विसंगतियों या ट्रस्ट के नाम पर ठगी कर रहा है, तो चुप न बैठें। आपकी एक शिकायत न केवल आपके बच्चे का भविष्य बचाएगी, बल्कि हजारों अन्य परिवारों को लुटने से रोकेगी।

सीबीएसई (CBSE) के पास ऑनलाइन शिकायत (Saras Portal)

सीबीएसई ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है।

  • प्रक्रिया: सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Public Grievance’ सेक्शन में जाएं या सीधे CBSE SARAS पोर्टल पर लॉगिन करें।
  • क्या लिखें: स्कूल का नाम, पता और उनके द्वारा किए जा रहे फर्जी दावों (जैसे: बिना मान्यता के सीबीएसई लोगो का इस्तेमाल) का प्रमाण संलग्न करें।

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत

किसी भी निजी स्कूल पर नकेल कसने की पहली शक्ति जिला प्रशासन के पास होती है।

  • अपने जिले के DEO (District Education Officer) जिला शिक्षा अधिकारी या BSEO (Block Education Officer) प्रखंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में एक हस्ताक्षरित आवेदन दें।
  • इसमें स्कूल के UDISE कोड की अनुपलब्धता या RTE (शिक्षा का अधिकार) के नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट जिक्र करें।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई पोर्टल

आजकल लगभग हर राज्य में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सक्रिय है, जहाँ शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है।

  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन – 1076 या ‘IGRS’ पोर्टल।
  • बिहार: मुख्यमंत्री जनता दरबार या ‘लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ के तहत आवेदन।
  • मध्य प्रदेश/राजस्थान: ‘CM Helpline’ 181 पर कॉल करें।

महत्वपूर्ण टोल-फ्री नंबर और संपर्क सूत्र (Helpdesk)

अभिभावक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित नंबरों का उपयोग कर सकते हैं:

विभाग/संस्थाहेल्पलाइन नंबर / ईमेलउद्देश्य
CBSE हेड ऑफिस1800-11-8002मान्यता और बोर्ड परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी
NCPCR (बाल अधिकार आयोग)011-23478200स्कूल द्वारा प्रताड़ित करने या RTE उल्लंघन पर
MHRD (शिक्षा मंत्रालय)011-23383451राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा संबंधी बड़ी शिकायतें
Cyber Crime Portal1930यदि स्कूल ने फीस के नाम पर ऑनलाइन ठगी की है

सावधान रहें: शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • साक्ष्य जुटाएं: स्कूल के विज्ञापनों के पंपलेट, फीस की रसीद और उनके लेटरहेड की फोटो जरूर रखें जहाँ उन्होंने ‘CBSE’ या ‘Registered’ होने का फर्जी दावा किया है।
  • गोपनीयता: यदि आप डरते हैं कि स्कूल आपके बच्चे को परेशान करेगा, तो आप अपनी पहचान गुप्त रखते हुए ‘गुमनाम शिकायत’ (Anonymous Complaint) भी पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।
  • यूडायस की स्क्रीनशॉट: UDISE+ पोर्टल पर अगर स्कूल का डेटा ‘In-active’ या ‘Not Found’ दिखा रहा है, तो उसका स्क्रीनशॉट शिकायत के साथ जरूर लगाएं।

स्‍कूलों की मान्‍यता खुद कैसे करे चेक, जानें स्‍टेप बाय स्‍टेप

UDISE+ पोर्टल पर स्कूल की जांच करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले अपने ब्राउज़र (Google Chrome या कोई अन्य) में udiseplus.gov.in टाइप करें और एंटर दबाएं।

चरण 2: ‘Know Your School’ (अपने स्कूल को जानें) विकल्प चुनें

  • पोर्टल के होमपेज पर आपको ऊपर की तरफ या नीचे स्क्रॉल करने पर “Know Your School” का एक विकल्प/बटन दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  • सीधे लिंक के लिए आप src.udiseplus.gov.in पर भी जा सकते हैं।

चरण 3: सर्च करने का तरीका चुनें वहां आपको स्कूल खोजने के तीन मुख्य विकल्प मिलेंगे:

  1. By UDISE Code: यदि आपके पास स्कूल का 11 अंकों का यूडायस कोड है (जो स्कूल के बाहर बोर्ड पर लिखा होना चाहिए), तो इसे डालकर सीधे सर्च करें।
  2. By Name: यदि कोड नहीं है, तो आप स्कूल के नाम से भी खोज सकते हैं।
  3. By Location: आप राज्य (Bihar), जिला (Muzaffarpur) और ब्लॉक (Sakra) चुनकर भी स्कूलों की सूची देख सकते हैं।

चरण 4: विवरण (Details) भरें

  • अपना राज्य ‘Bihar’ चुनें।
  • कैप्चा कोड (जो स्क्रीन पर टेढ़े-मेढ़े अक्षर दिख रहे हैं) भरें।
  • ‘Search’ बटन पर क्लिक करें।

चरण 5: स्कूल की रिपोर्ट कार्ड देखें सर्च रिजल्ट में स्कूल का नाम आने पर उस पर क्लिक करें। यहाँ आपको स्कूल की पूरी कुंडली मिल जाएगी, जैसे:

  • Category: स्कूल कक्षा 1 से 5 तक है, 1 से 8 तक, या 10वीं-12वीं तक। (यहीं से फर्जीवाड़े का पता चलता है—अगर स्कूल 10वीं तक चल रहा है लेकिन यहाँ केवल 5वीं तक दर्ज है, तो वह अवैध है)।
  • Management: स्कूल प्राइवेट है या सरकारी।
  • Affiliation Board: यहाँ लिखा होगा कि स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त है या State Board (बिहार बोर्ड) से।
  • Status: स्कूल एक्टिव (Active) है या नहीं।

अभिभावकों के लिए कुछ जरूरी टिप्स:

  1. कोड की मांग करें: यदि स्कूल अपना UDISE कोड बताने में आनाकानी करता है, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। हर निबंधित स्कूल के लिए इसे सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
  2. Affiliation No. की जांच: यदि पोर्टल पर स्कूल CBSE दिखाता है, तो वहां एक Affiliation Number भी होगा। आप इस नंबर को CBSE की अपनी वेबसाइट (SARAS पोर्टल) पर जाकर दोबारा क्रॉस-चेक कर सकते हैं कि वह नंबर वैध है या नहीं।
  3. शिक्षक और सुविधाएं: इसी पोर्टल पर आप यह भी देख सकते हैं कि स्कूल में कितने कमरे हैं, कितने शिक्षक ‘ट्रेन्ड’ हैं और वहां शौचालय/पेयजल की क्या स्थिति है।

सावधान रहें: कई स्कूल केवल बिहार सरकार से ‘निबंधन’ (Registration) कराते हैं और बोर्ड पर ‘CBSE पैटर्न’ लिख देते हैं। UDISE पोर्टल आपको स्पष्ट बता देगा कि वह स्कूल वास्तव में CBSE बोर्ड से जुड़ा है या नहीं।

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की मान्यता की जांच करना यूडायस (UDISE) पोर्टल से थोड़ा अलग और अधिक सटीक है। सीबीएसई ने इसके लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है जिसे SARAS (School Affiliation Re-engineered Automation System) कहा जाता है।

सकरा के अभिभावक नीचे दिए गए चरणों का पालन करके किसी भी स्कूल की “असली मान्यता” का पता लगा सकते हैं:

CBSE मान्यता (Affiliation) जांचने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक एफ़िलिएशन वेबसाइट saras.cbse.gov.in पर जाएं।

चरण 2: ‘Check Affiliation’ विकल्प चुनें होमपेज पर आपको “Affiliated Schools” या “List of Affiliated Schools” का विकल्प दिखेगा। यहाँ आप कई तरीकों से खोज सकते हैं:

  • Affiliation Number द्वारा: यदि स्कूल के पास नंबर है (जैसे 330XXX), तो इसे भरें।
  • State-wise (राज्य के अनुसार): बिहार (Bihar) चुनें, फिर जिला (Muzaffarpur) चुनें।
  • School Name: स्कूल का नाम टाइप करें।

चरण 3: ‘Search’ बटन पर क्लिक करें विवरण भरने के बाद सर्च करें। यदि स्कूल वास्तव में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है, तो उसकी पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।

चरण 4: ‘Status’ और ‘Period’ चेक करें (सबसे महत्वपूर्ण) जब स्कूल का नाम स्क्रीन पर आए, तो इन दो चीजों को ध्यान से देखें:

  1. Affiliation Status: यहाँ ‘Grant’ या ‘Active’ लिखा होना चाहिए।
  2. Valid Up To: यह जांचें कि मान्यता किस वर्ष तक वैध है। कई स्कूलों की मान्यता खत्म हो चुकी होती है और वे अवैध रूप से स्कूल चलाते रहते हैं।
  3. Level: यह देखें कि मान्यता Secondary (10वीं तक) है या Senior Secondary (12वीं तक)। कई स्कूल केवल 8वीं या 10वीं तक मान्यता रखते हैं लेकिन 12वीं तक की कक्षाएं चलाते हैं।

याद रखें: सीबीएसई स्पष्ट रूप से कहता है कि बिना एफ़िलिएशन नंबर के कोई भी स्कूल अपने नाम के साथ “CBSE” शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनी अपराध है।

जागिए, वरना देर हो जाएगी : समय निकल जाने पर पछताना होगा

शिक्षा अब सेवा नहीं, एक बेलगाम मुनाफाखोरी का जरिया बन चुकी है। ‘बोर्ड’ के नाम पर चल रहा यह ‘चकमा’ न केवल आपके पैसे की लूट है, बल्कि आपके बच्चे के उन बहुमूल्य वर्षों की बर्बादी भी है जो कभी लौटकर नहीं आएंगे।

याद रखिए, एक चमकती हुई बिल्डिंग कभी अच्छा भविष्य नहीं दे सकती, एक ‘मान्यता प्राप्त’ और ‘नैतिक’ संस्थान ही आपके बच्चे को सही दिशा दे सकता है। अगली बार स्कूल की फीस भरने से पहले, उनका यूडायस कोड और सीबीएसई एफिलिएशन जरूर जांचें। शिक्षा का मंदिर व्यापार का अड्डा नहीं होना चाहिए। आपका सजग रहना ही इन फर्जी स्कूलों की दुकानों पर ताला लगवा सकता है।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here