पटना। मुख्य संवाददाता

बिहार सरकार के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। विभाग ने 27 फरवरी 2026 को जारी अपने उस आदेश (पत्रांक-2182) को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया है, जिसमें वेतन और पेंशन के बिलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे।

विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा हस्ताक्षरित इस नए पत्र के अनुसार, अब राज्य के सभी कोषागारों (Treasuries) में निकासी के लिए 6 फरवरी 2026 को जारी मूल दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेंगे।

क्यों वापस लेना पड़ा फैसला?

सरकारी पत्र के अनुसार, होली के त्योहार को देखते हुए फरवरी माह का वेतन 24 फरवरी से ही बांटने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान बिलों की भारी संख्या को देखते हुए विभाग ने 27 फरवरी को एक नया आदेश जारी किया था ताकि वेतन और पेंशन बिलों का भुगतान सुगम हो सके।

हालांकि, इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों और कोषागारों में अन्य प्रकार के बिलों के भुगतान को लेकर भ्रम और संशय की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी तकनीकी उलझन और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए सरकार ने 24 घंटे के भीतर ही इस आदेश को रद्द करने का फैसला लिया।

अब क्या होगा असर?

  • पुराना नियम लागू: अब वित्तीय अनुशासन और फंड निकासी के लिए पत्रांक-1354 (दिनांक 06.02.2026) का ही कड़ाई से पालन किया जाएगा।
  • बिलों की जाँच: वित्तीय वर्ष (Financial Year) के अंतिम माह में आकस्मिक बिलों और अन्य स्कीमों के बिलों की भीड़ बढ़ जाती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी निकासी नियमों के दायरे में रहकर ही की जाएंगी।
  • अधिकारियों को निर्देश: राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुराने दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही निकासी एवं व्यय नियंत्रण सुनिश्चित करें। वित्त विभाग ने साफ किया है कि यह कदम केवल भ्रम की स्थिति को दूर करने और वित्तीय अनुशासन को अधिक मजबूती से लागू करने के लिए उठाया गया है।

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