पटना | विशेष संवाददाता बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन एनडीए (NDA) के लिए बड़ी जीत और महागठबंधन के लिए आत्ममंथन का संदेश लेकर आया। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव में एनडीए ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी एकजुटता का परिचय दिया है। विधानसभा चुनाव के महज चार महीने बाद हुए इस शक्ति परीक्षण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन ने विपक्ष की घेराबंदी को ध्वस्त करते हुए अपना परचम लहरा दिया।

विजयी उम्मीदवारों की सूची
राज्यसभा पहुंचने वाले नवनिर्वाचित सदस्यों में सत्ता पक्ष के दिग्गज चेहरे शामिल हैं:
- नीतीश कुमार (जदयू)
- रामनाथ ठाकुर (जदयू)
- नितिन नवीन (भाजपा)
- शिवेश कुमार (भाजपा)
- उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो)
पांचवीं सीट का दिलचस्प गणित और एनडीए की सेंधमारी
चुनाव की शुरुआत में एनडीए की चार सीटों पर जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन रोमांच तब बढ़ा जब महागठबंधन की ओर से राजद (RJD) ने अमरेंद्र धारी सिंह को पांचवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया। यहीं से मुकाबला ‘एनडीए बनाम महागठबंधन’ में बदल गया।
एनडीए के पास कुल 202 विधायकों का ठोस समर्थन था, वहीं महागठबंधन को पांचवीं सीट जीतने के लिए 41 मतों की आवश्यकता थी। विपक्षी खेमे को भरोसा था कि वे निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के सहयोग से खेल बिगाड़ देंगे, लेकिन परिणाम इसके विपरीत रहे।

तेजस्वी की ‘इफ्तार‘ और ‘होटल पॉलिटिक्स‘ रह गई अधूरी
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उन्होंने रणनीतिक तौर पर एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में शिरकत कर समीकरण साधने की कोशिश की। बसपा के एकमात्र विधायक सतीश यादव ने भी महागठबंधन को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था।
15 मार्च को एकजुटता दिखाने के लिए तेजस्वी ने सभी विधायकों को पटना के एक बड़े होटल में रुकने का निर्देश दिया था। लेकिन सोमवार सुबह मतदान के समय रणनीति बिखर गई।
अपनों ने ही दिया झटका: चार विधायकों ने किया ‘खेला‘
महाबंधन की हार का सबसे बड़ा कारण उनके अपने ही विधायकों की अनुपस्थिति रही।
- अनुपस्थित विधायक: मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक विधानसभा नहीं पहुंचे।
- वोटिंग का असर: इन चार विधायकों के न आने से महागठबंधन का गणित पूरी तरह बिगड़ गया और एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार ने आसानी से जीत हासिल कर ली।
दूसरी ओर, एनडीए के सभी 202 विधायकों ने अनुशासन दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। शाम को मतगणना के बाद जैसे ही चुनाव अधिकारी ने पांचों उम्मीदवारों की जीत की घोषणा की, एनडीए खेमे में जश्न का माहौल बन गया।
विश्लेषण: क्या रहे इस चुनाव के मायने?
यह चुनाव केवल राज्यसभा सीटों का नहीं था, बल्कि विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में सत्ता और विपक्ष की मजबूती का लिटमस टेस्ट था। एनडीए ने दिखा दिया कि सरकार स्थिर है और उनके विधायक एकजुट हैं। वहीं, महागठबंधन के लिए अपने विधायकों को एकजुट रख पाना एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है।
बड़ी बात: चार विधायकों की अनुपस्थिति ने भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और ‘क्रॉस वोटिंग’ की आशंकाओं को भी जन्म दे दिया है।



