मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाले, शोषितों के मसीहा और ‘बिहार के लेनिन’ के नाम से विख्यात अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद की जयंती मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड में पूरे उत्साह और संकल्प के साथ मनाई गई। सुजावलपुर चौक पर आयोजित इस ‘जयंती समारोह’ ने न केवल जगदेव बाबू के संघर्षों को याद किया, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर एक गंभीर विमर्श भी छेड़ दिया।

समारोह के दौरान एक ही गूँज सुनाई दे रही थी— “सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उस हक की आवाज थी जिसे जगदेव बाबू ने अपने खून से सींचा था।
गरिमामय आयोजन और पुष्पांजलि अर्पण
इस अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों और समाजसेवियों ने भाग लेकर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम की गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि इसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और सामाजिक संगठनों से जुड़े दिग्गजों ने शिरकत की। समारोह की अध्यक्षता संतोष कुशवाहा ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन सुनील कुमार राम के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि अरुण कुशवाहा (अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय पटना) और विशिष्ट अतिथि जस्टिस दामोदर प्रसाद (पूर्व जिला न्यायाधीश, पटना) ने किया। इसके पश्चात, उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों ने शहीद जगदेव बाबू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

वक्ताओं का ओजस्वी संबोधन: विचारों की मशाल
“जगदेव बाबू एक व्यक्ति नहीं, एक मुकम्मल विचार थे” – अरुण कुशवाहा
मुख्य अतिथि अरुण कुशवाहा ने अपने संबोधन में जगदेव बाबू के क्रांतिकारी जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जगदेव बाबू ने उस दौर में शोषितों को जगाने का काम किया था जब बोलना भी गुनाह माना जाता था। उन्होंने नारा दिया था कि दस का शासन नब्बे पर नहीं चलेगा। आज ‘जगदेव विचार मंच‘ उसी मशाल को आगे लेकर बढ़ रहा है। हमें एकजुट होकर उनके उस अधूरे सपने को पूरा करना होगा जहाँ समाज के अंतिम व्यक्ति को उसका वाजिब हक मिले।”
“न्याय की अवधारणा जगदेव बाबू के बिना अधूरी” – जस्टिस दामोदर प्रसाद
पूर्व जिला न्यायाधीश जस्टिस दामोदर प्रसाद ने कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से जगदेव बाबू के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब भी पिछड़ों, दलितों और वंचितों के हक की बात होती है, तो जगदेव बाबू का नाम स्वतः ही शीर्ष पर आता है। उन्होंने सत्ता और संसाधनों में पिछड़ों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी शहादत दी थी। उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
“इतिहास के पन्नों में मिले उचित स्थान” – शशि गुप्ता व संतोष कुशवाहा
समारोह में प्रमुख मांग उठाते हुए शशि गुप्ता ने कहा कि जगदेव विचार मंच अब केवल आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने सरकार से दो टूक शब्दों में मांग की:
- अमर शहीद जगदेव प्रसाद को ‘भारत रत्न‘ से सम्मानित किया जाए।
- विद्यालयों और महाविद्यालयों की पाठ्य पुस्तकों में उनकी जीवनी शामिल की जाए।
अध्यक्षता कर रहे संतोष कुशवाहा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नारों तक सीमित न रहें, बल्कि जगदेव बाबू के साहित्य और उनके द्वारा लिखे गए क्रांतिकारी लेखों का अध्ययन करें।
गाँव-गाँव तक पहुँचेगी विचारधारा: सुनील कुमार राम
मंच संचालन करते हुए सुनील कुमार राम ने कहा कि जगदेव बाबू ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को आवाज दी थी। उन्होंने संकल्प लिया कि जगदेव विचार मंच की टीम गाँव-गाँव जाकर युवाओं को संगठित करेगी और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित चेहरों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- दिनेश पुष्पम (मुखिया, केशोपुर)
- रमेश कुमार (मुखिया, सरमस्तपुर)
- हरीराम कुशवाहा (पूर्व जिला अध्यक्ष, जेडीयू)
- अनिल कुमार (जिला परिषद सदस्य – 53)
- इसके साथ ही अनिल कुमार अकेला, डॉ. राम बाबू, मिन्ती बौद्ध, महेश्वरी बौद्ध, सुनीता देवी, राजेश कुमार बौद्ध, दीपन कुमार, कुन्दन पासवान, मुकेश कुशवाहा, श्यामनन्दन महतो और शशि गुप्ता जैसे समाजसेवियों ने भी अपने विचार रखे।
भविष्य की रणनीति: ‘सड़क से सदन तक‘ की लड़ाई
समारोह केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘जगदेव विचार मंच’ ने अपनी आगामी रणनीतियों का खाका भी पेश किया। मंच ने घोषणा की कि वे तीन स्तरों पर कार्य करेंगे:
- डिजिटल क्रांति: आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग कर जगदेव बाबू के भाषणों और विचारों को देश-दुनिया तक पहुँचाना।
- राज्यव्यापी संवाद: बिहार के प्रत्येक जिले और प्रखंड में संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करना ताकि शोषित समाज को संगठित किया जा सके।
- युवा शक्ति का जुड़ाव: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘छात्र युवा सम्मेलन’ का आयोजन कर युवाओं को सामाजिक न्याय की लड़ाई से जोड़ना।
एक नए युग की आहट – सकरा के सुजावलपुर चौक पर आयोजित इस जयंती समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जगदेव बाबू के विचार आज भी बिहार की मिट्टी में रचे-बसे हैं। उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि जब तक जगदेव बाबू को ‘भारत रत्न’ नहीं मिल जाता और उनकी जीवनी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बन जाती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
‘जगदेव बाबू अमर रहें’ के गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन वहाँ से निकलने वाला हर व्यक्ति अपने साथ एक नया संकल्प लेकर गया—एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प, जहाँ ‘नब्बे भाग’ शोषितों का हो।




